
एक ऐसा स्थान जो विश्व भर के लोगो के लिये किंवदंतियों कथाओं कथानकों के साथ ही यथार्थ चेतना का पुंज बना हुआ है। प्रजापति ब्रह़मा के तपोबल से उत्पन्न पयस्वनी व मां अनुसुइया के दस हजार सालों के तप का परिणाम मां मंदाकिनी के साथ ही प्रभु श्री राम के ग्यारह वर्ष छह माह और अठारह दिनों के लिये चित्रकूट प्रवास के दौरान उनकी सेवा के लिये अयोध्या से आई मां सरयू की त्रिवेणी आज भी यहां पर लोगों को आनंद देने के साथ ही पापों के भक्षण करने का काम कर रही है।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
चित्रकूट का दीपावली मेला
अनुष्ठान, भक्ति या आमोद-प्रमोद समुद्र मंथन के विशेष चरण में जब देवी महालक्ष्मी का प्राकट्य हुआ तो वह दीपावली की रात्रि थी। म...
-
श्रीराम ने चित्रकूट में की थी मां जानकी की पूजा अपने हाथों से पुष्पों के आभूषण बनाकर किया था श्रंगार व पूजन रां ब्रहमनाद का वह स्वर जो...
-
चित्रकूट: जब मंदाकिनी के तट पर विचारों की धारा बहती है, तब चित्रकूट केवल एक तीर्थ नहीं रहता—वह विश्व के बौद्धिक मंथन का केंद्र बन जाता है। त...
-
धनवंतरी महायज्ञ _डीएम ने परिवार सहित डाली आहुतियां _अमेरिका,कोलकाता के साथ बुंदेलखंड और स्थानीय चिकित्सकों ने डाली आहुतियां _ स्थानीय के सा...
No comments:
Post a Comment