अनेक ऋषि-मुनियों की तपोस्थली और बारह वर्षों तक भगवान श्री राम की कर्म स्थली रही इस विश्व विख्यात नगरी से सम्बंधित इस ब्लॉग में आप सभी पाठको का स्वागत है .भारतीय उपमहाद्वीप के ह्रदय-क्षेत्र में स्थित इस पावन धरा के पौराणिक,ऐतिहासिक,सांस्कृतिक और वर्तमान "सामाजिक-राजनीतिक" महत्व को वैश्विक मंच प्रदान करने की मेरी इस कोशिश में आप सभी का भी सहयोग अपेक्षित है. यदि आपके पास चित्रकूट से सम्बंधित कोई उपयोगी या शोधात्मक प्रकाश्य सामग्री है तो आप हमें जरूर भेजें. साथ ही इस ब्लॉग को और अधिक परिमार्जित स्वरुप प्रदान करने हेतु अपनी राय हमें अवश्य दें .
आपका,
संदीप रिछारिया
email: sandeep.richhariya@gmail.com
एक ऐसा स्थान जो विश्व भर के लोगो के लिये किंवदंतियों कथाओं कथानकों के साथ ही यथार्थ चेतना का पुंज बना हुआ है। प्रजापति ब्रह़मा के तपोबल से उत्पन्न पयस्वनी व मां अनुसुइया के दस हजार सालों के तप का परिणाम मां मंदाकिनी के साथ ही प्रभु श्री राम के ग्यारह वर्ष छह माह और अठारह दिनों के लिये चित्रकूट प्रवास के दौरान उनकी सेवा के लिये अयोध्या से आई मां सरयू की त्रिवेणी आज भी यहां पर लोगों को आनंद देने के साथ ही पापों के भक्षण करने का काम कर रही है।
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