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Friday, July 31, 2026

🌅🌺 चित्रकूट धाम से श्री कामतानाथ जी की दिव्य प्रातःकालीन मंगला आरती 🌺🌅


🎶 रिमिक्स और शोरगुल वाले भक्ति गीतों को छोड़िए...

🙏 सुनिए श्री कामतानाथ जी की नित्य आरती के साथ गाई जाने वाली प्राचीन एवं दिव्य स्तुति और कीजिए प्रभु की मंगलमयी प्रातःकालीन आरती के पावन दर्शन।

📿 यह केवल एक वीडियो नहीं, बल्कि चित्रकूट की सनातन परंपरा, श्रद्धा और भक्ति का सजीव अनुभव है।

🎥 वीडियो देखें और अधिक से अधिक सनातन प्रेमियों तक पहुँचाएँ।

🔗 "https://youtu.be/h_G-dpWRG6M?si=zYq7WU0-LCJJ4r7H" (https://youtu.be/h_G-dpWRG6M?si=zYq7WU0-LCJJ4r7H)

🚩 जय श्री कामतानाथ जी महाराज
🚩 जय श्री सीताराम
🌿 श्री चित्रकूटं शरणं प्रपद्ये

#चित्रकूट #श्रीकामतानाथ #मंगलाआरती #सनातनसंस्कृति #जयश्रीराम #भक्ति #Chitrakoot #Kamtanath #MangalaAarti

Wednesday, May 27, 2009

स्वर्ग से आयी स्वर्ण गंगा है मंदाकिनी

May 27, 02:08 am
चित्रकूट। चित्रकूट की धरती के गौरव राम का परिचय परमात्मा राम के रूप में आम आदमी से परिचय कराने वाले गोस्वामी तुलसीदास ने अपनी अमर कृति श्री राम चरित मानस में जब यह पंक्तियां लिखी थी तभी उनके पास इस बात के पूरे प्रमाण मौजूद थे कि यह मां अनुसुइया के दस हजार सालों के कठोर तप से निकली मंदाकिनी कोई साधारण नदी नही हैं। मां मंदाकिनी की स्तुतियां हर एक वेद में हैं मिलती है। यह तो सीधे स्वर्ग से अवतरित होकर आई स्वर्ण गंगा है।
मंदाकिनी के स्वर्ण गंगा होने की पुष्टि श्री मद् भागवत के पंचम स्कंध में हो जाती है। उनके अनुसार जब राजा बलि तीन पग पृथ्वी नाप रहे थे तो उनका बायां पैर स्वर्ग पहुंच गया और उस पैर की स्वर्ण रज को तरल रूप में सृष्टि के निर्माता प्रजापति ब्रह्मा ने अपने कमंडल में ले लिया। इसकी तीन धारायें बनी। पहली गंगा दूसरी भागीरथी और तीसरी मंदाकिनी। यह तीनों नदियां तीनों भुवनों से प्रकट की गई। स्वर्ग से मंदाकिनी, पृथ्वी से गंगा तो पाताल से प्रभावती प्रकट हुई। राजा भागीरथ ने भागीरथ प्रयास कर गंगा को अपने पूर्वजों को तारने के लिये अवतरित कराया तो प्रभावती भूलोक में भागीरथी के नाम से प्रकट हुई।
चित्रकूटांचल में प्रवाहित मां मंदाकिनी को सीधे स्वर्ग से अत्रिप्रिया मां अनुसुइया ने स्वर्ण गंगा का प्रार्दूभूत किया। इसका प्रमाण वेद भी देते हैं 'मंदाकिनी वियद् गंगा इत्यभरे' अर्थात मंदाकिनी ही स्वर्ण गंगा है। इसलिये तमाम वेदों और पुराणों ने मंदाकिनी की स्तुति गायी है और भगवान श्री राम ने खुद ही इस पर स्नान किया व अपने पिता का पिंड दान किया।
क्षेत्र के पुराने महात्मा राम लोचन दास बताते हैं कि भागीरथी गंगा जहां लोगों के पापों को धोती है वहीं मंदाकिनी गंगा लोगों के पापों का भक्षण करती है। देवलोक से आई इस विशेष स्वर्ण गंगा में स्नान कर देवता भी अपने अहोभाग्य समझते हैं। इसलिये मंदाकिनी गंगा से भी श्रेष्ठ है।

याद किए गए पत्रकार वेद प्रकाश शुक्ल

पत्रकार-शिक्षक स्वर्गीय वेद प्रकाश शुक्ल की 29वीं पुण्यतिथि मनाई गई* चित्रकूट। स्व. पं.वेद प्रकाश शिव प्रताप स्मृति सेवा न्यास के तत्वावधान ...