Saturday, September 26, 2026

बरसात में 84 कोस श्री चित्रकूट धाम का अद्भुत रूप

झरनों की कल-कल, पहाड़ों की हरियाली और बादलों की चादर… प्रकृति ने सजाया चित्रकूट का अनुपम संसार

प्रशासन के वेतनभोगी क्रिएटर आखिर इन प्राकृतिक नजारों को देश-दुनिया तक क्यों नहीं पहुंचाते?

चित्रकूट।
बरसात आते ही 84 कोस श्री चित्रकूट धाम का स्वरूप बदल जाता है। विंध्य की पहाड़ियों पर उतरते बादल, चारों ओर फैली हरियाली, चट्टानों से उतरती जलधाराएं और झरनों की कल-कल—मानो प्रकृति स्वयं श्री चित्रकूट महात्म्य का नया अध्याय लिख रही हो।


गर्मियों में शांत दिखाई देने वाली पहाड़ियां बारिश में जीवंत हो उठती हैं। जंगलों के बीच से निकलती छोटी-बड़ी जलधाराएं झरनों का रूप ले लेती हैं और पूरा 84 कोस क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी खुले हुए प्राकृतिक चित्रशाला जैसा दिखाई देने लगता है।



बरसात में जाग उठते हैं चित्रकूट के झरने

84 कोस श्री चित्रकूट धाम और आसपास के विंध्य अंचल में बरसात के दौरान शबरी_राघव जलप्रपात, गुप्त गोदावरी क्षेत्र की जलधाराएं, हनुमान धारा क्षेत्र, स्फटिक शिला क्षेत्र तथा आसपास की पहाड़ियों के मौसमी झरने अपना अलग रूप दिखाते हैं।

इसी प्राकृतिक पट्टी को आगे बढ़ाएं तो रीवा-पन्ना अंचल के प्रसिद्ध जलप्रपात—बहुती, चचाई, क्योटी, पूर्वा और रनेह,बृहस्पतिकुंड जैसे जलप्रपात भी मानसून में अपनी पूरी भव्यता के साथ सामने आते हैं।

इन सभी प्राकृतिक स्थलों को अलग-अलग देखने के बजाय 84 कोस श्री चित्रकूट धाम और विंध्य प्राकृतिक पर्यटन परिक्षेत्र के व्यापक संदर्भ में प्रचारित किया जाए तो बरसात पर्यटन की एक नई संभावना पैदा हो सकती है।

प्रकृति ने मुफ्त में तैयार कर दिया पर्यटन का कंटेंट

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्रकृति ने इतना शानदार दृश्य बिना किसी खर्च के तैयार कर दिया है, तो इसे दुनिया तक पहुंचाने में कमी क्यों?

आज प्रशासन के पास सोशल मीडिया संभालने वाली टीमें, प्रचार-प्रसार के लिए बजट और वेतनभोगी डिजिटल क्रिएटर मौजूद हैं। फिर क्यों नहीं बरसात के दिनों में 84 कोस श्री चित्रकूट धाम के झरनों, पहाड़ियों, जंगलों और जलधाराओं का नियमित वीडियो डॉक्यूमेंटेशन किया जाता?

क्यों नहीं हर बारिश में एक “Monsoon Chitrakoot” डिजिटल अभियान चलाया जाता?

कैमरा सिर्फ कार्यक्रमों पर नहीं, प्रकृति पर भी जाए

सरकारी सोशल मीडिया पर बैठकों, निरीक्षणों, उद्घाटनों और अधिकारियों के कार्यक्रमों की तस्वीरें तो आसानी से दिखाई देती हैं, लेकिन पर्यटक के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल है—

“आज चित्रकूट में देखने लायक क्या है?”

कौन सा झरना बह रहा है?
कहां तक वाहन जा सकता है?
कहां पैदल जाना होगा?
कहां सुरक्षा व्यवस्था है?
कहां पानी खतरनाक है?
कहां परिवार के साथ जाया जा सकता है?

यदि इन सवालों के जवाब छोटे-छोटे वीडियो और तस्वीरों के साथ रोजाना सोशल मीडिया पर उपलब्ध हों तो यही सामग्री पर्यटन प्रचार का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकती है।

84 कोस की प्राकृतिक परिक्रमा का डिजिटल दस्तावेज बने

84 कोस श्री चित्रकूट धाम केवल धार्मिक आस्था का क्षेत्र नहीं, बल्कि प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का भी विशाल भू-दृश्य है।

बरसात इसके प्राकृतिक सौंदर्य को कुछ सप्ताह के लिए चरम पर पहुंचा देती है। यह वह समय है जब पहाड़, जंगल, झरने, जलधाराएं और मंदाकिनी का परिवेश एक साथ चित्रकूट की अलग तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।

जरूरत है कि इस पूरे क्षेत्र का डिजिटल मैपिंग, ड्रोन डॉक्यूमेंटेशन, झरना सूचीकरण और सुरक्षित मानसून पर्यटन मार्ग तैयार किया जाए।

पर्यटन प्रचार में स्थानीय लोगों की भी भूमिका

स्थानीय युवाओं, फोटोग्राफरों, पत्रकारों और कंटेंट क्रिएटरों को जोड़कर “मेरा 84 कोस—मेरा चित्रकूट” जैसा अभियान चलाया जा सकता है। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर मिलेगा और प्रशासन को लगातार नया स्थानीय कंटेंट भी उपलब्ध होगा।

लेकिन इसके लिए सबसे पहले प्रशासन को यह स्वीकार करना होगा कि चित्रकूट का सबसे बड़ा प्रचारक स्वयं चित्रकूट की प्रकृति है।

सवाल सीधा है…

जब 84 कोस श्री चित्रकूट धाम की पहाड़ियां बारिश में हरी चादर ओढ़ रही हों, झरने कल-कल बह रहे हों, बादल घाटियों में उतर रहे हों और प्रकृति पर्यटकों को बुला रही हो—तो फिर सरकारी कैमरे इन नजारों से दूर क्यों हैं?

वेतनभोगी क्रिएटरों का कैमरा आखिर कब कार्यक्रमों से निकलकर प्रकृति की ओर जाएगा?

चित्रकूट को केवल बताया नहीं जाना चाहिए—
बरसात में उसे दिखाया जाना चाहिए।

क्योंकि इस मौसम में 84 कोस श्री चित्रकूट धाम सिर्फ देखा नहीं जाता… महसूस किया जाता है।


Saturday, August 22, 2026

याद किए गए पत्रकार वेद प्रकाश शुक्ल

पत्रकार-शिक्षक स्वर्गीय वेद प्रकाश शुक्ल की 29वीं पुण्यतिथि मनाई गई*


चित्रकूट। स्व. पं.वेद प्रकाश शिव प्रताप स्मृति सेवा न्यास के तत्वावधान में पत्रकार एवं शिक्षक स्वर्गीय वेद प्रकाश शुक्ल की 29वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आज हाईब्रिड मोड में पुण्यतिथि मनाई गई।
 कार्यक्रम में उपस्थित एवं ऑनलाइन जुड़े लोगों ने स्वर्गीय श्री शुक्ल के व्यक्तित्व, कृतित्व और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान को स्मरण करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का संयोजन उनके सुपुत्र डॉ. जय प्रकाश शुक्ल एवं विजय प्रकाश शुक्ल ने संयुक्त रूप से किया। 
इस अवसर पर डॉ. जय प्रकाश शुक्ल  ने बताया कि स्वर्गीय श्री वेद प्रकाश शुक्ल का निधन 22 अगस्त 1997 को हुआ था। निधन के समय वे प्राथमिक विद्यालय, नई बाजार, कर्वी में पदस्थ थे। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय श्री शुक्ल नवाचारों और वैकल्पिक शिक्षा के प्रबल पक्षधर थे। शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय योगदान देने के साथ उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा दैनिक भारत और दैनिक जागरण जैसे समाचार पत्रों के स्थानीय संवाददाता के रूप में अपनी सेवाएं दीं।
विजय प्रकाश शुक्ल  ने कहा कि स्वर्गीय श्री शुक्ल बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने कृषि, पत्रकारिता, व्यवसाय, उद्यमिता और समाजसेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई तथा सामाजिक सरोकारों के प्रति सदैव सजग रहे।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शुक्ल परिवार के डॉ. अजय प्रकाश, वेदांत, अभिनव सहित अन्य परिजनों ने स्वर्गीय श्री वेद प्रकाश शुक्ल के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया। उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों एवं सामाजिक सरोकारों को स्मरण करते हुए उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से प्रेरणा लेने का संकल्प व्यक्त किया।

Friday, July 31, 2026

🌅🌺 चित्रकूट धाम से श्री कामतानाथ जी की दिव्य प्रातःकालीन मंगला आरती 🌺🌅


🎶 रिमिक्स और शोरगुल वाले भक्ति गीतों को छोड़िए...

🙏 सुनिए श्री कामतानाथ जी की नित्य आरती के साथ गाई जाने वाली प्राचीन एवं दिव्य स्तुति और कीजिए प्रभु की मंगलमयी प्रातःकालीन आरती के पावन दर्शन।

📿 यह केवल एक वीडियो नहीं, बल्कि चित्रकूट की सनातन परंपरा, श्रद्धा और भक्ति का सजीव अनुभव है।

🎥 वीडियो देखें और अधिक से अधिक सनातन प्रेमियों तक पहुँचाएँ।

🔗 "https://youtu.be/h_G-dpWRG6M?si=zYq7WU0-LCJJ4r7H" (https://youtu.be/h_G-dpWRG6M?si=zYq7WU0-LCJJ4r7H)

🚩 जय श्री कामतानाथ जी महाराज
🚩 जय श्री सीताराम
🌿 श्री चित्रकूटं शरणं प्रपद्ये

#चित्रकूट #श्रीकामतानाथ #मंगलाआरती #सनातनसंस्कृति #जयश्रीराम #भक्ति #Chitrakoot #Kamtanath #MangalaAarti

Wednesday, May 27, 2026

🕉️🚩 गंगा दशहरा पर सेवा का अमृत : रामघाट पर त्रिवेणी शरबत महोत्सव बना जनसेवा का उत्सव 🚩🕉️




चित्रकूट धाम के पावन रामघाट में आयोजित त्रिवेणी शरबत महोत्सव 2026 श्रद्धा, सेवा और सनातन संस्कृति का अनुपम संगम बनकर सामने आया। भीषण ग्रीष्म ऋतु में श्रद्धालुओं, साधु-संतों, तीर्थयात्रियों और स्थानीय नागरिकों को शीतलता प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित इस सेवा महोत्सव में बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की।

शाम 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक श्रद्धालुओं ने गुलाब, पना, पुदीना, संतरा, नींबू, जीरा जल एवं विशेष त्रिवेणी शरबत सहित अनेक प्रकार के शीतल पेयों का आनंद लिया। शरबत पीकर लोग प्रसन्नचित्त और आनंदित दिखाई दिए। बाहर से आए सैकड़ों पर्यटकों एवं तीर्थयात्रियों ने भी इस अनूठी सेवा की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

इस अवसर पर पूर्व विधायक आदरणीय श्री दिनेश मिश्र जी ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में प्रेम, सद्भाव, सहयोग और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देते हैं तथा भारतीय संस्कृति के सेवा भाव को सुदृढ़ करते हैं।

सनातन शोध संस्थान के महासचिव श्री संदीप रिछारिया ने आयोजन के संयोजक एवं संस्थान के मंत्री श्री दयाशंकर गंगेले की सराहना करते हुए कहा कि यह सेवा आयोजन पिछले 15 वर्षों से निरंतर आयोजित किया जा रहा है, जो समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

इस दौरान श्री दयाशंकर गंगेले ने बताया कि बुधवार को एकादशी के पावन अवसर पर सायंकाल शरबत वितरण के साथ-साथ सनातन शोध संस्थान के अध्यक्ष प्रो. गोविंद त्रिपाठी जी की ओर से श्रद्धालुओं को फल वितरण भी किया जाएगा।



महोत्सव की संपूर्ण व्यवस्थाओं का संचालन गंगेले विश्राम गृह के संचालक श्री अंशू गंगेले ने अत्यंत सुव्यवस्थित एवं सराहनीय ढंग से किया। उनकी देखरेख में सेवा कार्य सुचारु रूप से संपन्न हुआ, जिसकी उपस्थित जनों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।




कार्यक्रम में दादा पांडे जी (गंगा मंदिर पुजारी), छिवलहा महाराज, बिनोद तिवारी, मनोज तिवारी, अश्वनी यादव, राकेश शर्मा, गणेश केशरवानी, पुरुषोत्तम केशरवानी, गंगाराम गुप्ता, अशोक मिश्रा, राम बहोरी अतरौलिया, किशन लाल गुप्ता सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।

🙏 सेवा, सद्भाव और समर्पण का यह महोत्सव एक बार फिर सिद्ध कर गया कि मानव सेवा ही सनातन संस्कृति का सबसे बड़ा संस्कार है।

Saturday, March 21, 2026

चित्रकूट में दर्शन का महासंगम, विश्व शांति की दिशा में उभरा नया चिंतन




चित्रकूट: जब मंदाकिनी के तट पर विचारों की धारा बहती है, तब चित्रकूट केवल एक तीर्थ नहीं रहता—वह विश्व के बौद्धिक मंथन का केंद्र बन जाता है। तीन दिनों तक चली इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में परंपरा और आधुनिकता का ऐसा संगम देखने को मिला, जहाँ शास्त्रों की गूंज के साथ वैश्विक समस्याओं के समाधान भी खोजे गए।
भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (ICPR) के प्रायोजन में तथा अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ के तत्वावधान में आयोजित दर्शन परिषद का 40वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी तीन दिवसीय सफल आयोजन के साथ संपन्न हो गई। 19 से 21 मार्च तक चले इस आयोजन में देश-विदेश के लगभग 130 विद्वानों ने भाग लेकर अपने विचार प्रस्तुत किए।
अधिवेशन के अंतिम दिन आयोजित तकनीकी सत्र की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के डॉ. प्रशांत शुक्ल ने की, जिसमें कुल 9 शोध पत्रों का वाचन हुआ। इसके पश्चात आयोजित समापन सत्र में मुख्य अतिथि भारतीय विश्वविद्यालय संघ के संयुक्त सचिव डॉ. आलोक कुमार मिश्र तथा विशिष्ट अतिथि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. बृजभूषण ओझा उपस्थित रहे।
विश्व शांति के लिए चित्रकूट मॉडल का प्रस्ताव
मुख्य अतिथि डॉ. आलोक कुमार मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि चित्रकूट में हुए दार्शनिक चिंतन के आधार पर विश्व शांति के समाधान का एक ठोस प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) को भेजा जाना चाहिए। उन्होंने ICPR के सहयोग से चित्रकूट में एक स्थायी दार्शनिक केंद्र स्थापित करने की भी वकालत की, जहाँ प्राकृतिक वातावरण में वैश्विक स्तर पर चिंतन-मंथन हो सके।
विशिष्ट अतिथि प्रो. बृजभूषण ओझा ने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की व्याख्या करते हुए वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पांडेय ने कहा कि गंगा की भांति विभिन्न विचारधाराएँ दर्शन को समृद्ध करती हैं और शास्त्र परंपरा निरंतर नवीनता लाती है।
72 शोध पत्र, 8 तकनीकी सत्र
डॉ. प्रशांत शुक्ल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अधिवेशन में कुल 6 ऑफलाइन और 2 ऑनलाइन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 72 शोध पत्रों का वाचन एवं विमर्श हुआ। प्रथम दिवस पर 5 स्मृति व्याख्यान मालाएँ भी आयोजित की गईं।
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दर्शन परिषद के अध्यक्ष प्रो. एच.एस. उपाध्याय ने आयोजन की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की। महासचिव प्रो. नीतिश दुबे ने सभी प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए इसे ऐतिहासिक आयोजन बताया। उन्होंने बताया कि डॉ. हरिकांत मिश्र के संयोजन और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के सहयोग से यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश सिंह की विशेष उपस्थिति एवं मार्गदर्शन ने आयोजन को और गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान 19 एवं 20 मार्च को उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी दीं।
कार्यक्रम में प्रो. स्नेहलता पाठक, प्रो. स्वाती सक्सेना, प्रो. रमेश चंद्रा, डॉ. महीप, प्रो. राकेश कुमार तिवारी, डॉ. अंबरीष राय सहित अनेक गणमान्य विद्वान एवं विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के संयोजक डॉ. हरिकांत मिश्र ने किया।

आस्था का केंद्र: जहाँ हर पीड़ा का मिलता है समाधान



                🙏 जय श्री लाइनाबाबा सरकार 🙏
                       🙏 जय बजरंगबली 🙏
चित्रकूट धाम की पावन भूमि से एक दिव्य आह्वान…
जहाँ एक ओर भगवान श्रीराम की तपोभूमि है, वहीं दूसरी ओर शिवरामपुर के उत्तरी द्वार पर विराजमान हैं
🌳 अशोक वृक्ष के नीचे बैठे “शोकहरण हनुमान” — श्री लाइनाबाबा सरकार 🌳
यह वही दिव्य स्थान है, जहाँ अंग्रेजों द्वारा झांसी–मानिकपुर रेलवे लाइन की खुदाई के दौरान स्वयं प्रकट हुए थे प्रभु।
तत्कालीन अंग्रेज ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने इस विग्रह को राजा मुरली मनोहर चौबे को सौंपा, और उन्होंने अपने खेत में अशोक वृक्ष के नीचे इनकी स्थापना की।
तब से आज तक…
👉 यहाँ आने वाला हर भक्त अपना “शोक” छोड़कर “आशा” लेकर लौटता है।
✨ अब वही पावन धाम एक बार फिर गूंजेगा भक्ति के स्वर से… ✨
📿 श्री हनुमान जयंती के पावन अवसर पर
🔸 सवा पाँच लाख श्री हनुमान चालीसा पाठ 🔸
🗓️ दिनांक: 02 अप्रैल 2026, गुरुवार
⏰ समय: प्रातः 8 बजे से
📍 स्थान: श्री लाइनाबाबा सरकार धाम, शिवरामपुर, चित्रकूट
💫 इस दिव्य आयोजन में
🔸 श्री हनुमान जी महाराज को सवा पाँच कुंतल बेसन के लड्डू का भोग लगेगा
🔸 श्रद्धालुओं द्वारा 108 पाठ प्रति व्यक्ति का संकल्प लिया गया है
🔸 विशाल पंडाल, प्रसाद, जल, महाप्रसाद एवं बैठने की समुचित व्यवस्था
📜 आप सभी श्रद्धालुओं से विनम्र निवेदन:
👉 अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के कल्याण हेतु इस महायज्ञ में सहभागिता करें
👉 108 बार श्री हनुमान चालीसा पाठ कर पुण्य लाभ प्राप्त करें
🕉️ “जो सतबार पाठ कर कोई, छूटहि बंदि महा सुख होई”
🕉️ “जो यह पढ़े हनुमान चालीसा, होइ सिद्धि साखी गौरीसा”
🙏 आप सभी सपरिवार सादर आमंत्रित हैं 🙏
📞 प्रबंधक: प्रेम नारायण सिंह
📱 9454962358
📞 संपर्क सूत्र:
7007245016, 9793730102, 9198875570, 9795806976, 9450224770
✨ आइए…
भक्ति में डूब जाएं,
संकटों को दूर भगाएं,
और लाइनाबाबा सरकार के चरणों में अपने जीवन को धन्य बनाएं। ✨
🔔 जय श्री राम | जय हनुमान | जय लाइनाबाबा सरकार 🔔

Friday, March 20, 2026

रामनवमी पर जगमगाएगा चित्रकूट: 22 लाख दीपों से सजेगा ‘गौरव दिवस’

यूपी और एमपी की संयुक्त पहल—हर घर जलेगा दीप, रामघाट से कामदगिरि तक दिव्यता का महासागर
डीआरआई की अगुवाई में होगा आयोजन


चित्रकूट। जब तपोभूमि चित्रकूट में श्रीराम जन्मोत्सव का पावन क्षण अवतरित होगा, तब मंदाकिनी के तट से लेकर कामदगिरि परिक्रमा तक दीपों की अनगिनत पंक्तियाँ मानो भक्ति का साक्षात् प्रकाश बनकर झिलमिलाएँगी। रामनवमी (27 मार्च) पर ‘चित्रकूट गौरव दिवस’ के अवसर पर इस बार 22 लाख दीपों से सुसज्जित यह धाम केवल आलोकित ही नहीं होगा, बल्कि आस्था, संस्कृति और जनसमन्वय का अद्वितीय इतिहास भी रचेगा।

श्रीरामनवमी (27 मार्च) पर इस बार चित्रकूट धाम 22 लाख दीपों की रोशनी से आलोकित होगा। ‘चित्रकूट गौरव दिवस’ के रूप में मनाए जाने वाले इस महोत्सव में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश का प्रशासन, संत समाज और आमजन मिलकर भागीदारी करेंगे।
कलेक्ट्रेट सभागार कर्वी में हुई संयुक्त बैठक में आयोजन की विस्तृत रूपरेखा तय की गई। बैठक में जिलाधिकारी पुलकित गर्ग, सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस और दीनदयाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय संगठन सचिव अभय महाजन सहित संत-महात्मा, व्यापारी व सामाजिक संगठन उपस्थित रहे।
🔶 दोनों राज्यों में 11-11 लाख दीप
रामघाट, भरतघाट और कामदगिरि परिक्रमा मार्ग होंगे मुख्य केंद्र
यूपी व एमपी क्षेत्र में 11-11 लाख दीप प्रज्वलित किए जाएंगे
नगर के प्रत्येक घर में कम से कम 5 दीप जलाने की अपील
🔶 दीपदान के साथ सांस्कृतिक महोत्सव
रामघाट पर भव्य दीपदान
बुंदेलखंड का पारंपरिक दीवारी नृत्य
लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां
प्रमुख स्थलों पर रंगोली व आतिशबाजी
🔶 पिछले वर्षों से अधिक भव्य आयोजन
हर वर्ष बढ़ रही दीपों की संख्या, इस बार रिकॉर्ड स्तर
घाटों से निकलकर अब घर-घर तक उत्सव का विस्तार
यूपी-एमपी का साझा आयोजन बना राष्ट्रीय आकर्षण
🔶 सुरक्षा व यातायात की विशेष व्यवस्था
पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार ने बताया कि पर्व के दौरान सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।
🔶 डीएम पुलकित गर्ग बोले—जनभावनाओं का प्रतीक
जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने कहा कि ‘चित्रकूट गौरव दिवस’ जन-आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। सभी विभागों को समन्वय से आयोजन को सफल बनाने के निर्देश दिए गए हैं।

🔶 जन-जन से अपील
डीआरआई के संगठन सचिव अभय महाजन ने लोगों से आह्वान किया कि रामनवमी पर अपने घर, मंदिर और प्रतिष्ठानों में दीप जलाकर इस उत्सव को जनभागीदारी का पर्व बनाएं।”
✨ आस्था का उजास
जब मंदाकिनी तट से लेकर कामदगिरि परिक्रमा तक दीपों की श्रृंखला सजेगी, तब चित्रकूट एक बार फिर त्रेतायुग की दिव्यता का सजीव अनुभव कराएगा।

बरसात में 84 कोस श्री चित्रकूट धाम का अद्भुत रूप

झरनों की कल-कल, पहाड़ों की हरियाली और बादलों की चादर… प्रकृति ने सजाया चित्रकूट का अनुपम संसार प्रशासन के वेतनभोगी क्रिएटर आखिर इन प्राकृति...