Tuesday, May 12, 2020

*🔥सुखदा मोक्षदा देवी चित्रकूट निवासिनी🔥*


*🔱जानिए और समझिये उस स्थान के बारे में जहाँ श्री राम प्रतिदिन आकर करते है देवी की आराधना🚩*
*🔱हम बताएंगे आपको चित्रकूटधाम के 84 कोस के विस्तृत परिक्षेत्र में सतयुग से धर्मध्वजा फहराते अनोखे,अकल्पनीय वैदिक धर्मस्थल/संदीप रिछारिया*
https://youtu.be/2aHcV_3wAmc

Saturday, May 2, 2020

रहस्यमय चित्रकूटधाम के अनोखे रहस्य

*🛕चित्रकूटधाम क्या केवल जमीन का एक टुकड़ा है जी नही वह एक ऐसी संस्कृति का हिस्सा है ,जहाँ से न केवल पहला मानव जन्मा बल्कि आदि काल से आज तक तमाम संस्कृति यहाँ पर फली फूली।🚩*
https://youtu.be/wMPWxcJfo40
*🛕धर्मस्थल चित्रकूटधाम की अधिक जानकारी के लिए सब्सक्राइब करिये हमारा चैनल।संदीप रिछारिया🔥*

Friday, April 10, 2020

क्‍याेें हमारे देश में रहकर कुछ विदेशी फैला रहे हैं नकारात्‍मकताा, आईये जानिए मेरे साथ

तत्यः सत्य और असत्य 

संदीप रिछारिया 

सोचिये, भारत में मानव जनित नकारात्मकता का आगमन कब हुआ कैसे हुआ और क्यों हुआ। आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह कैसा सवाल है, नया शब्द मानव जनित नकारात्मकता। चलिए स्पष्ट किए देते हैं यह मानव से मानव को दूर करने, किसी व्यक्ति को मानसिक रूप से अपमानित करने का प्रतीक है। नही समझ में आया, बताते है। वास्तव में यह उस मानसिकता का प्रतीक है जो  अमीर और गरीब का भेद बताकर मानव को छोटा या बड़ा बताती है। इन मानसिकता के अनुसार हम समर्थ हैं इसलिए कि हमारे पास पैसा है और पैसा से हम ताकत यानि नीति अनीति के लिए श्रम ( अपराध) व वैभव  ( विलासिता) खरीद सकते हैं।

नकारात्मकता का विस्तार है धार्मिक 

मानव जनित नकारात्मकता वास्तव में उस सोच का परिणाम है जो पूर्णतया धार्मिक है। कोलंबस ने जब अमेरिका की खोज की तो उसे नही मालूम था कि वहां का धर्म क्या है। दो हजार साल पहले ईसा मसीह का प्रादुर्भाव हुआ, उसके पहले पूरा यूरोप यहूदी था। एशिया हिंदू था। 1400 साल पूर्व मुहम्मद साहब के जन्म के पहले मुसलमान धर्म का अता पता नही था। अब सवाल खड़ा होता है कि मैं आपको यह इतिहास क्यों बता रहा हूं।

 वैदिक संस्कृति में छिपा उन्नति का बीज मंत्र 

भारत वास्तव में हजारों साल पुरानी उस संस्कृति का परिचायक है। जिसे युगों में बांटा गया है। सतयुग, त्रेता, द्वापर व कलियुग। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है। सिंधु से हिंदू बनने की प्रकिया के पूर्व हम सत्य सनातन धर्म को मानने वाले थे। इसे वैदिक धर्म भी कहते हैं। काल्पनिक देवताओं के उदभव के पूर्व हम पंचतत्वों के साथ ही जीवित देवताओं की पूजा किया करते थे। आज भी इन देवताओं की पूजा न केवल हिंदू धर्म में बल्कि मुसलमान व ईसाई धर्म में की जाती है। हिंदू सूर्य को तो मुस्लिम चंद्र को आधार मानते हैं। जल को पूजना हर धर्म में आज भी आवश्यक है। क्योंकि इसके बिना किसी भी जीवधारी का जीवन चल नही सकता।

 आश्रम व्यवस्था के साथ कर्म के हिसाब से तय थे वर्ण 

विभिन्न नदियों व जलश्रोत के अपार भंडार वाले इस देश में हमेशा सुख, शांति और संपन्नता रही है। अगर हम आर्यावर्त के निवासियों की सुख, शांति व सम्पन्नता के बारे में बात करें तो इसकी जड़ जीवन जीने की कला पर छिपी है। आयु के अनुसार बनाए गए मानव को जीवन जीना होता है। यह जीवन खुद के लिए नही बल्कि समाज व राष्ट्र को समर्पित होता था। बच्चे के पैदा होने के बाद उसे 5 वर्ष तक घर में रखा जाता था। 5 वर्ष का होते ही उसे गुरू को सौंप दिया जाता था। उस जमाने में शिक्षण काल के दौरान गुरू यह जांचता था कि बालक की रूचि किस ओर है। अगर शूद्र का बालक शिक्षा की ओर उन्मुख है तो उसे ब्राहमण करार दिया जाता था। क्योंकि ब्रहृम जानयति इति ब्राहृमणः का घोष वेद करते हैं। इसी प्रकार अन्य वर्ण भी तय किए जाते थे। विश्वमित्र जाति से ठाकुर थे पर उन्हें ऋषि माना गया है। भीलनी शबरी को संत माता जैसे कई उदाहरण पुराणों में भरे पड़े हैं।  25 वर्ष तक गुरूकुल में शिक्षा अध्ययन, 25 से 50 तक श्रम करके जीविकोपार्जन व संतानोत्पत्ति, 50 के बाद अपनी संतान को जीविकोपार्जन के तरीके सिखाकर खुद को सन्यास के लिए तैयार करना और 75 के बाद सन्यास यानि पूरी तरह से एकाकी होकर समाज के लिए काम करना। इस जीवन पद्वति परिवारवाद को पोषित नही करती थी बल्कि यह समाजवाद को पोषित करती थी। शिक्षा गुरूकुलों में हुआ करती थी, जहां पर बिना भेदभाव के सभी को शिक्षा मिला करती थी। राज पुत्र व छोटा काम करने वाले सभी के पुत्र एक साथ अध्ययन करते थे।

नकारात्मकता का उदभव 

नकारात्मकता का सही मायने में उदभव हमारे देश में मुस्लिम काल से माना जा सकता है। जब सूखे व ठंडे देश वालों ने भारत पर आक्रमण करने का काम किया तो उसका जवाब सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने दिया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उस समय आचार्य विष्णुगुप्त चाणक्य ने खंड खंड में बंटे आर्यावर्त को एक सूत्र में बांधा और यूनानी व खुरासानियों को उनकी औकात ताकत के बल पर दिखाई। सेल्यूकस निकेटर व खुरासानियों ने संधि कर अपनी पुत्रियों को उन्हें सौंपा। सम्राट अशोक तक का काल भारतीयों के शौर्य व उत्कर्ष से भरा पड़ा है। महात्मा बुध के सम्राट अशोक के मिलने व अपने धर्म को विस्तार देने की प्रक्रिया के कारण देश में भारतीयता का लोप हो गया। आज जिस दौर में भारत गुजर रहा है उसकी जड़ उसी समय पड़ी। देश में शिक्षा व आयुध निर्माण की जगह शासक ने स्तूप व विहार बनाने का काम प्रारंभ कर दिया। धीरे धीरे भारत की संपत्ति मुसलमान व ईसाईयों ने लूटना प्रारंभ कर दिया। ईसाई शासन के दौरान अंग्रेजों ने बहुत ही चतुराई से कांग्रेस पार्टी की स्थापना की। इसको ऐसा मान सकते हैं कि आज तमाम फैक्ट्रिषें के मालिक यूनियन बनाते हैं और अपने लोगों को उसका नेता। कुछ ऐसा ही हाल हुआ और विदेशियों ने भारत को भूखा और नंगा दिखाना प्रारंभ कर दिया। कुछ विदेशियों के चमचों ने इसको अपने हिसाब से हवा दी। क्योंकि वह खुद को शक्ति सम्पन्न बनाए रखना चाहते थे। सवाल खड़ा होता है जब मुस्लिम लीग ने मुस्लिम राष्ट्र बनाया तो भारत हिंदू राष्ट्र क्यों नही बना। गांधी व अन्य कांगे्रेसी नेता क्यों मुसलमानों को इस देश में रखने के लिए मरे जा रहे थे। क्यों गांधी मुसलमानों के लिए उपवास कर रहे थे। इसके बाद भी यह सिलसिला थमा नहीं। भले ही आज भारतवंशी विश्व के 195 देशों में जाकर अपनी मेघा के बल पर झंडे गाड़ रहे हों पर सच्चाई यह है कि पश्चिमपोषित हिंदुस्तान की मीडिया के कुछ लोग और हिंदुओं के वेश में बैठे जयचंदों को देश में गरीबी, भुखमरी व अन्य समस्याएं दिखाई देती है। इन समस्याओं का निदान हर भारत वासी को सोचना होगा।   

Sunday, March 29, 2020

कोरोना नहीं भूख बनेगी मानव की बड़ी दुश्मन

- शासन व प्रशासन के द्वारा किए गए इंतजामों में आम लोगों के साथ ही एनजीओ को भी मदद करनी होगी
- भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ अन्य पार्टियों के कार्यकर्ता भी जुटने चाहिए 

संदीप रिछारिया 

कोरोना के रूप में आई वैश्विक महामारी की चपेट में लगभग पूरा विश्व आ चुका है। अब ताकतवर अमेरिका के साथ अन्य सभी विकसित देशों का हाल यह है कि वह खुद अपनी मदद के लिए भगवान की तरफ लाचारी से देख रहे हैं। हमारा 130 करोड भारतीयों वाला देश भी कोरोना की चपेट में आ चुका है। भले ही अभी कोरोना पाजिटिव के आंकड़े बहुत कम दिखाई देे रहे हैं, पर शनिवार की रात व उसके पहले के दृश्य जो दिल्ली के आनंद बिहार बसस्टैंड व सड़कों पर दिखाई दिए में दिखाई आंखें खोल देने वाले हैं। अभी तक तमाम सामथ्र्यवान लोग प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री के साथ अन्य तरह से अपनी -अपनी तरफ से मदद करने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन यह मदद कैसे व किस प्रकार की जाएगी, इसका पूरा प्लान अभी तक स्पष्ट नही हो पाया है। विचारणीय बात यह है कि इस वैष्विक महामारी से जंग की तैयारी किसी भी देश ने कभी की ही नहीं, इसका कारण भी साफ है कि अभी जक जंग केवल अपनी सामाजिक शक्ति के प्रदर्शन को लेकर ही की जाती रही है। उसकी के लिए सब इंतजाम किए जाते थे, दूसरी जंग दूसरे गृहों पर जाने को लेकर की जा रही थी। लेकिन अब अगली जंग हमें कोरोना के साथ भूख की महामारी को लेकर करनी होगी।
यहां पर यह बताना जरूरी है कि भारत कृषि प्रधान देश है। आज भी यहां की 85 फीसद आबादी गांवों में रहती है। गांवों में रोजगार की कमी के कारण लोग मौसमी या पूर्ण रूप से पलायन कर शहरों की ओर जाते हैं। ऐसे में जब लाॅक डाउन हुआ और शहरों में काम समाप्त हो गया तो वहां से गांव वापस आने का रास्ता ही लोगों के लिए बचा तो वह लोग क्या करेंगे। आनंद विहार व के साथ ही देश के लगभग हर बडे व छोटे शहर से वापसी के लिए लोग परेशान हैं। दिल्ली के हंगामें को देखकर राज्य सरकारों ने लोगों को उनके घरों में भेजने का ्रपबंध भी किया। लेकिन मामला यहीं पर नही खत्म होता, क्योंकि अभी भी देश के 90 फीसद लोग न तो सरकारी नौकरी करते हैं और न ही वह पूर्ण कालीक प्राइवेट नौकरियों में हैं। अब ऐसे में रोज कमाकर अपना पेट भरेन वालों के हाल यह है कि उन्हें सरकार ने एक हजार रूपये देने का काम किया है, लेकिन उनमें भी कितने लोग रजिस्टर्ड है , इसकी संख्या भी जान लेना जरूरी है। क्योंकि इनमें भी 80 फीसद से ज्यादा का रजिस्ट्रेशन हुआ ही नहीं। रेहडी लगाने वाले, बैठकर अपना छोटा मोटा व्यवसाय कर पेट भरने वाले लोग भी देश में भारी मात्रा में हैं। इन सभी की हालत देखी जाए तो इनके पास दो से तीन दिनों का ही भोजन घरों में होता है। अब लाॅक डाउन और जनता कफर्यू को जाड़ दिया जाए तो एक सप्ताह से उपर का समय बीत चुका है। इस समयांतर में अब इन परिवारों के पास भी राशन खत्म हो गया होगा। आने वाले समय में जब यह लोग घर से नही निकल सकते और न ही इनके पास पैसा है तो इनका परिवार कैसे जीवित रहेगा। इसकी कल्पना करके ही दिल बैठ जाता है। प्रशासन को चाहिए कि सामुदायिक रसोई के जरिए बिना किसी प्रचार के इस तरह के सभी लोगों को चिन्हित कर उनके पास प्रतिदिन दो समय का भोजन उपलब्ध कराएं जिससे कम से कम उनका जीवन भूख से तो सुरक्षित रह पाए। सामथ्र्यवान लोगों को चाहिए कि वह लोग अपनी तरफ से इस तरह के परिवारों को चिन्हित कर उनको भोजन उपलब्ध कराएं। लोगों को चाहिए कि भोजन उपलब्ध कराने वालों की सूची प्रशासन को दें ताकि प्रशासन के वालिंटियर दूसरे जरूरतमंदों को भोजन दे सकें। जिलाधिकारी को चाहिए  िकइस मामले में एक विस्तृत कार्य योजना बनाकर उसको अमल में लाएं ताकि लोगों का जीवन भूख से बच सके।
   

Monday, March 23, 2020

जल्द ही चित्रकूट में भी हो सकता है लॉक डाउन,तैयारियां पूरी


चित्रकूट। जिलाधिकारी शेषमणि पांडे की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में कोरोना वायरस की रोकथाम एवं बचाव के संबंध में डॉक्टर एसोसिएशन के साथ  बैठक हुई।

जिलाधिकारी ने प्राइवेट डॉक्टरों से कहा कि इस कोरोना वायरस को देखते हुए आप लोग जनपद में अधिक से अधिक व्यवस्था रखें। कहां कि हमारी सरकारी टीमें रेलवे स्टेशनों बस स्टॉप आदि जगह -जगह पर तैनात होकर कार्य कर रही हैं और बाहर से आने वाले लोगों की लगातार जांच जारी है सीएमओ से कहा कि गांव में आशा एएनएम को लगाकर जागरूक कराएं तथा जो बाहर से लोग आ रहे हैं उनको गांव में ही वाच करते रहें तथा बाहर से जो लोग आ रहे हैं उनके घरों में एक लिखकर चस्पा करें। इनसे 14 दिन तक कोई नहीं मिलेगा यह अपने घर पर ही रहे। चिकित्सकों ने जिलाधिकारी से जनपद को लाक डाउन घोषित कराए जाने की भी मांग की।
 इस पर डीएम ने अपर जिलाधिकारी से कहा जनपद की सीमा को सील कराने वहां मजिस्ट्रेट व पुलिस की व्यवस्था कराने तथा लाकडाउन आदि की भी तैयारी कर ली जाए। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से कहा कि 200 सैया अस्पताल पर सभी व्यवस्थाओं के लिए शासन को पत्र मेरी ओर से भेजा जाए ताकि वहां पर स्टाफ आदि सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित हो सके। और निजी संस्थानों के चिकित्सकों के साथ एक बैठक करके सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करा ले। एसोसिएशन के चिकित्सकों से कहा कि बाहर के जनपदों सेसर्जन व फिजीशियन से वार्ता कर ले ताकि आवश्यकता पड़ने पर जनपद में उन्हें बुलाया जा सके और उनकी सेवाएं ली जा सके। तथा कोई भी मरीज इस वायरस से ग्रसित पाया जाए तो उसकी सूचना तत्काल मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उपलब्ध कराएं जिससे कि उसकी इलाज की संपूर्ण व्यवस्था कराई जा सके। उन्होंने सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट जानकीकुंड के चिकित्सक से कहा कि वेंटिलेटर वाले कितने बेड हैं उसकी एक लिखित में सूचना दें और टेक्नीशियन आदि की भी व्यवस्था कराएं।
बैठक में अपर जिलाधिकारी  जी पी सिंह उप जिलाधिकारी कर्वी  अश्वनी कुमार पांडे मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ विनोद कुमार निजी संस्थानों के चिकित्सक डॉ सुरेंद्र अग्रवाल डॉक्टर महेंद्र गुप्ता डॉक्टर सुधीर अग्रवाल डॉक्टर प्रबोध अग्रवाल आदि विभिन्न चिकित्सक तथा संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

कोरोना से बचने के लिए डीएम चित्रकूट शेषमणि पांडेय ने की मार्मिक अपीलG


चित्रकूट। डीएम शेषमणि पांडेय ने वीडियो अपील जारी कर कहा कि अमावश्या के पर्व पर चित्रकूट न आये,अपने घर पर ही रहकर भगवान का स्मरण करें। यही काम नवरात्रि की परमा और नवमी को करे।
उन्होंने चित्रकूट जनपदवासियों से कहा कि अत्यंत जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकले।जिससे हम खुद को व दुसरो को कोरोना से बचाए रखे। कोरोना की जंग में हर एक व्यक्ति सैनिक है।उसे राष्ट्रहित में इस लड़ाई से लड़कर जल्द जीत हासिल करना है।

Monday, March 9, 2020

इंद्रदेव का कोरोना पर ‘वार‘ होरियारे मायूस


अजब तेरी माया, अजब तेरे खेल छछूदर के सिर पर चमेली का तेल, कुछ ऐसा हाल चीन से निकले और इटली में सबसे ज्यादा कहर बरपाने वाले कोरोना के यहां पर हो रहे हैं। वैश्विक स्तर पर डर के माहौल के बीच प्रधानमंत्री से लेकर अभिनेता अभिभावदन में हाथ मिलाने की जगह नमस्ते करने की सलाह दे रहे हैं।

होली पर दूर से रंग फेंकने की सलाह भी खूब जारी की गई। खांसने व छीकने तक के लिए एडवाइजरी जरी कर मुंह में मास्क लगाने की अपील लगातार जारी की जा रही है। मीडिया भी लगातार कोरोना का मरीज यहां मिला, वहां मिला। होलिका दहन में कपूर व लौंग का प्रयोग के साथ ही तमाम तरह के निवेदन सोशल मीडिया पर लगातार छाए हुए हैं। 
लेकिन हम जिस देश के वासी हैं। वहां पर तो 33 कोटि के देवता कुछ ऐसा कर देते हैं कि अपील एडवाइजरी कुछ नहीं मायूने नहीं रखती यहां पर सीधे तौर पर एक फरमान आता है तो सब मामला निपट जाता है।
होली की मस्ती करने को आतुर होरियारों को यह होली ताजिंदगी याद रखने की व्यवस्था इंद्र देव ने कर दी। सुबह सात बजे से ही चित्रकूट में रूक रूक कर बारिश हो रही है। जिससे वातावरण में हल्की गर्मी की जगह ठंड बढ गई। स्वेटर व जैकेट के साथ लोग होली की आग को अला समझ कर ताप रहे हैं। बरसात की बूंदे उसको धीमा करने का प्रयास कर रही है। जिससे न केवल होली की आग बुझती नजर आ रही है। लोग होली खेलने की जगह उस आग से अपने आपको तापकर गर्म करने का प्रयास कर रहे हैं। इस तरह से होली का मजा तो किरकिरा हो रहा है, साथ ही लाखों रूपये लगातार होली खेलने के लिए लाए गए रंग, गुलाल , पिचकारी की दुकानें भी ठंडी पड़ी दिखाई दे रही हैं। बच्चों को भी घरों में रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है। मां बाप खुश हैं कि कम से कम अब बच्चों के मुंह में लगा रंग व गुलाल उन्हें साफ करने के लिए श्रम नही करना होगा। एक दूसरे से छीना झपटी के बीच अभिभावकों के बीच कोरोना वायरस का डर भी नही सता रहा है।

Sunday, March 1, 2020

चित्रकूट की धरती पर मौजूद हैं जलश्रोतों के लुटेरे, संतों की हरकत देख व्यापारियों ने भी डाला डाका


- श्री कामदगिरि की परिक्रमा का अतिक्रमण साफ करने का दावा करने वाले प्रशासन की बिरजाकुंड के पास प्राचीन बीहर पर कब्जा करने वाले को क्लीन चिट
- जगद्गुरू रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय के बाहर मौजूद है बेशकीमती बीहर  


संदीप रिछारिया

समय बदलने के साथ ही हम आदिम युग से निकलकर सभ्य युग तक आ गए। प्रकृति को पूजने वाले हम लोग पत्थर के भगवानों में सिमट आए हैं। भले ही प्राकृतिक भगवान हमारी जरूरतों को पूरा करने का काम करें, पर हमे उन्हें अपवित्र करने और उनको जड़मूल से उखाड़ने का कोई भी मौका नही छोड़ते। राममंदिर निर्माण के लिए फैसला आने के बाद खुशी का इजहार एक महीने की आधा दर्जन कथावाचकों के साथ रामकथा के द्वारा

श्रीकामदगिरि परिक्रमा मार्ग के बिरजाकुंड पर किया जाता है, वही राम-राम का जाप करने के साथ ही अनवरत चलने वाली रामायण का पाठ किया जाता है, और वहीं पर राजाओं की बनाई बेशकीमती बीहर ( सप्तदल वाले विशाल कुआं) पर खुले आम कब्जा भी कर लिया जाता है। हैरत की बात यह है कि उनका कद प्रशासन भी इतना उपर हो चुका है कि जिलाधिकारी स्वयं उस स्थान को देखते हैं कि कैसे उनके पर्यटन विभाग द्वारा बनवाए गए विशालकाय दो शेडों व बावली पर एक धर्माधिकारी ने कब्जा कर रखा है और वह कुछ नही बोलते हैं। आम लोग जब सवाल खड़े करते हैं तो योगी की सरकार और उन पर योगी की कत्रपा का हौवा बताकर उन्हें शांत कर दिया जाता है।
वैसे बिरजाकुंड स्थित बीहर की बात करें तो यहां पर राजस्व विभाग व धर्माधिकारियों की जुगलबंदी साफ दिखाई देती है। लगभग 35 साल पहले यहां पर बीहर के साथ आंवले के पेड़ लगे हुआ करते थे। इच्छा नवमी या आंवला नवमी को श्रद्वालु आंवले के नीचे भोजन कर पुण्य अर्पित किया करते थे। वहीं एक छोटे से विशाल बरगद के नीचे एक धर्माधिकारी की नजर पड़ी। अपने चार चेलों को रामधुन के साथ प्रतिस्थापित कर दिया। रामधुन का स्वरूप् बढा तो कमरे बनने लगे। सरकारी जमीन का स्वरूप बदलकर सरकारी अभिलेखों में उसे महंत व अखाड़े के नाम पर दर्ज करने में प्रशासन ने अपनी भूमिका का निर्वहन किया। धीरे-धीरे बेशकीमती बीहर पर धर्माचार्य का कब्जा हो गया। अब यहां पर एक नही दो धर्माचार्य अपना- अपना दावा कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि हाल में एक धर्माचार्य को जलशक्ति मंत्रालय ने दिल्ली में बुलाकर मंदाकिनी को बचाने के लिए पोस्टर, बैनर व भाषण देने के लिए पुरस्कार भी दिया है। वैसे यह आश्रम राजनेताओं व अधिकारियों के साथ बड़े लोगों को नारियल का गोला देकर व शाल उड़ाकर अपने आपको पीठम का दर्जा दे चुका है।

दूसरा कब्जे वाला बीहर सीतापुर - बेडीपुलिया मार्ग पर जगद्गुरू रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय के समीप मेन रोड पर है। मोदी के स्वच्छता दूत जगद्गुरू ने कई बार मंदाकिनी के लिए आवाज उठाई, पर आज तक उनकी नजर इस बीहर पर नहीं पड़ी। सबसे हैरत की बात तो यही है खुद जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह भी इस बीहर पर कब्जे को कई बार आंखों से देख चुके हैं लेकिन उन्होंने भी अपनी प्रतिक्रिया कभी इस मामले में नही दी।
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ते क्या कर सकता है शासन

मोदी जी अपना वादा निभाया, जल शक्ति मंत्रालय बनाया, लेकिन सरकार के साथ ही समाज के जिम्मेदारी भी जलश्रोतों को संरक्षित रखने की है। अगर हमें अपना जीवन चाहिए तो जलश्रोतों नदी, तालाब, बीहर, कुंओं, चोहड़ों को संरक्षित व सुरक्षित करने के लिए बड़े प्रावधान बनाने होंगे। इसके लिए पुलिस की एक अलग विंग स्थापित करनी होगी। जलश्रोतों पर अतिक्रमण या गंदा करने वालों के अंदर कानून का डर पैदा करना होगा। इसकी मानीटरिंग के लिए कई स्तर पर जांच करनी चाहिए।
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सीएम योगीजी के आदेश व श्रद्वालुओं की बढ़ती संख्या को लेकर प्रशासन ने अब श्रीकामदगिरि परिक्रमा पथ पर बसी खोही बस्ती की जमीन को खाली कराकर चैड़ीकरण कराने के लिए काफी हो हल्ले के बाद मामला शांत हो गया है। राजस्व व वन विभाग ने लगभग एक सैकड़ा लोगों को नोटिस देकर दस दिनों में जमीन खाली करने के आदेश दिए थे। जिलाधिकारी की बैठक के बाद कब्जेदार रात-रात भर सोए नहीं, वहीं तमाम अतिक्रमण किए हुए स्थानों पर संत समाज द्वारा अतिक्रमण किए जाने को लेकर स्थानीय लोगों में तीखी नाराजगी भी है। वैसे पर्वत की तरफ अस्थायी व स्थायी निर्माण कर रहने वाले लोगों के भी दो मत हैं। पट्टों की जमीन पर भूमिधरी होने के बाद तमाम लोग अदालतों के आदेश लेकर मुआवजा की मांग कर रहे हैं तो बहुत से लोग इस कार्यवाही को गलत बता रहे हैं।
परिक्रमा मार्ग पर दुकान लगाकर गुजर बसर करने वाली अंशु, दादू, पप्पू जैसे तमाम दुकानदार कहते हैं कि हमारा अतिक्रमण तो सामने प्रशासन को दिखाई दे रहा है, पर संत समाज का अतिक्रमण नहीं दिखाई दे रहा है। बिरजा कुंड के पास निर्मोही अखाड़ा ने कब्जा कर पहले छोटी कुटिया बनाई और धीरे धीरे रामधुन बैठाकर मंदिर का निर्माण किया। चैहद्दी बनाकर पर्यटन विभाग के दो शेडों को अपने सीमा के अंदर कर पूरी तरह से कब्जा कर लिया और राजाओं की बनाई पुरानी बेशकीमती चार मंजिला बीहर को पूरी तरह से गायब करने के लिए बाहर कमरे इत्यादि बना दिए। पट्टे की जमीन को भूमिधरी और फिर उस जमीन पर प्राचीन बनी बीहर का कब्जा प्रशासन को केवल इसलिए नहीं दिखाई दे रहा है क्योंकि वहां से जुड़े एक महंत प्रशासन के बहुत नजदीकी हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह प्रशासन की दोगली नीति नही चल पाएगी। इसको लेकर आंदोलन किया जाएगा व कोर्ट की शरण ली जाएगी। जब प्रशासन कहता है कि हजार साल पुराना पट्टा भी अवैध है तो फिर इस पट्टे को क्यों नही खारिज किया जा रहा है। क्यों प्राचीन बीहर व पर्यटन विभाग द्वारा बनवाए गए शेडों को यात्रियों की सुविधा के लिए खोला जा रहा है।
 उप जिलाधिकारी कर्वी ने बताया कि प्राचीन बीहर होने जानकारी मिली है। इसकी पूरी जांच कराकर विधिक कार्यवाही की जाएगी। 

Saturday, February 22, 2020

चित्रकूट धाम की ओर से वरिष्ठ पत्रकार संदीप रिछारिया की कलम से निकली प्रधानमंत्री जी को खुली पाती

यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी आप पर सत्य सनातन धर्म के सभी देव, देवियों और उन्नायकों के साथ प्रतीकों की कृपा जीवन पर्यन्त बनी रहे।



मैं चित्रकूट, सृष्टि की उत्पत्ति के पूर्व का स्थान हूं। अनोखी छटा देखकर त्रिदेव यहां एक बार नहीं अनेक बार आए। यहां की तपस्वनी माता अनुसुईया के तप के चलते उनकी यह मातृ स्थली बनी। प्रजापिता ब्रहमा जी ने यहीं से सृष्टि का आरंभ किया। सृष्टि के लिए यज्ञ से पूर्व श्री हरि विष्णु का जिस स्थान पर पद प्रक्षालन किया, वहीं से पयस्वनी गंगा प्रकट हुई। मां अनुसुईया ने दस हजार साल का उग्र तप किया तो मां मंदाकिनी प्रकट हुई। श्रीराम जी के आगमन पर सरयू मैया तो स्वयं चित्रकूट में अपना वैभव दिखाने लगीं। वैसे मंदाकिनी को बनाने के लिए दर्जनों नदियां व नदी नाले हैं। 

अगर हर स्थान के बारे में लिखने बैठा तो पूरा एक ग्रंथ बन जाएगा। लेकिन जैसा की मेरे नाम से ही दृष्टिगोचर है कि चित्रों का दर्शन ही चित्रकूट है। पौराणिक, धार्मिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक मान्यताओं, दस्तावेजों व नजरों के सामने मौजूद साक्ष्यों के आधार पर इस स्थान की प्रमाणिकता पर कोई प्रश्नचिंह नही लगा सकता। 
आज चित्रकूट की पहचान केवल श्रीराम के नाम पर की जाती है। यह गलत है, राम के पूर्व तो उनके लगभग सभी पूर्वज चित्रकूट आए। उन्होंने यहां पर ऋषियों से अग्नेयास्त्र प्राप्त किए। राम के पहले महाराज अम्बरीश ने तो 18 साल अमरावती पर उग्र तप किया था। 
वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि हाल के कुछ साहित्यकारों ने चित्रकूट को बुंदेलखंड का हिस्सा बताया जो कि सर्वथा अनुचित है। चित्रकूट की धरती हमेशा से चित्रकूटी रही है। यहां की रामरज लोगों के पापों को दूर करने का काम सदियों से करती रही है। ऋग्वेद की पिप्पलादि शाखा के अनुसार चित्रकूट के पहले राजा कसु थे। वैसे आरकोलोजिकल सर्वे आफ इंडियाजिल्द 10 पृष्ठ 11 में जनरल कनिंघम ने कौशाम्बी की करछना तहसील के गढवा गांव के निकट पाए गए महत्वर्पूण शिलालेख का उल्लेख किया। इसमें साफ तौर पर उल्लेख है कि वर्ष 138 के माघ मास के इक्कीसवें दिन भगवान चित्रकूट स्वामिन के चरणों में भगवान श्री हरि विष्णु की मूर्ति की स्थापना की गई थी। मठ को संचालित करने क ेलिए भूमि दान दी गई थी। कलचुरी शासक कर्ण के बनारस ताम्रपत्र एपिक इंडिया जिल्द 4 पृष्ठ 284 श्लोक 38 में चित्रकूट को मंडल कहा गया। 1688 के यु़द्ध के बार जब राजा छत्रसाल यहा पर आते हैं, इसे बुंदेलखंड का हिस्सा बताते हैं। जबकि चित्रकूट की धरती अलग है। बुंदेलखंड का हिस्सा नही है। यहां की संस्कृति में  धर्म, तप और प्रेम भरा पड़ा है। जबकि बुंदेली संस्कृति ईष्या और बंटवारे की है। वहां का इतिहास गलत कारणों से युद्व का प्रतीक है। खान पान, पहनावा, बोली, रीति रिवाज, भाषा सब कुछ अलग है। ऐसे में वह चित्रकूटी संस्कृति का हिस्सा कैसे हो सकती है


बाबरनामा में स्वयं बाबर ने देश के तीन प्रतापी राजाओं में यहां के राजा रामजू देव की हैसियत अपने से युद्ध करने लायक आंकी है। अब जब औरंगजेब व शिवाजी की सेना के सिपाही महाराज छत्रसाल चित्रकूट आते हंै तो क्या वह महराज हो गए। यह बात दीगर है कि चित्रकूट धर्म स्थली है, यहां पर आकर राजा दान पुण्य के काम करते थे। राजा छत्रसाल भी आए, उन्होनें कामदगिरि परिक्रमा का निर्माण कराया, तमाम मंदिर बनवाए। वैसे विजावर, गौरिहार, चरखारी सहित अन्य स्टेटों के मंदिर, कुंए, बाबली इत्यादि भी यहां पर बने हुए हैं। इतिहासकारों के मुताबिक गुजरात से आए राजाओं ने यहां पर लम्बे समय तक राज किया। राजा बीसलदेव का नाम प्रमुख है। औरंगजेब ने तो यहां पर मंदिर बनवाकर जमीन दान दी


सैकड़ों गुफाओं, वन प्रस्तरों, झरनों, विशाल जल प्रपातों, आदि मानव द्वारा रचित भित्ति चित्रों वाले इस नयनाभिराम दृश्यों से भरे इस अनोखे चित्ताकर्षक चित्रकूट में राम वन पथ गमन के साथ ही अगस्त, अत्रि, मारकंडेय, गौतम, जमदग्नि, सरभंग, सुतीक्षण, सहित अन्य ़ऋषियों की तपोस्थली आज भी समय की मार खाकर वीरान हो रही हैं। इतना ही नहीं जिस राजा भरत के नाम पर हम गौरव करते हैं, उनका जन्म यहीं पर हुआ। उनके पिता महाराजा दुश्यंत व शकुलंता की प्रेम कहानी मडफा के पहाड़ पर सुनाई देती है। 
चित्रकूट रामघाट, कामदगिरि परिक्रमा व राजापुर, वाल्मीकि आश्रम में फैला क्षेत्र नही अपितु 84 कोस में विस्तारित एक विहंगम झांकी प्रस्तुत करता विशाल शोभनीय अरण्य है। 
आदि कवि वाल्मीकि, तुलसीदास, रहीम, मीरा, भूषण, कालीदास सहित कितने ही कवियों साहित्यकारों ने इस अतभुद परिक्षेत्र को अपनी लेखनी से शब्द प्रदान किए। आज विश्व में तुलसीदास की लिखी रामचरित मानस करोड़ों लोगों की पेम की प्यास बुझाने का काम कर रही है। 
आप 2007 में भाजपा के विधायक पद के प्रत्याशी देव त्रिपाठी के लिए वोट मांगने आए। दुर्भाग्य से वह विधानसभा तक नहीं पहुंच सके। यह सुंदर रहा है कि सात साल बाद आपकी राशि में सूर्य पूरे देश में चमका और आप प्रधानमंत्री बने। अब छह साल बाद आपके चित्रकूट आने का सुयोग घटित हो रहा है। आप यहां पर बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे और डिफेंस काॅरीडोर बनाने का शुभारंभ करेंगे। वैसे आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि आप जो काम कर रहे हैं, वह इस धरती पर बहुत पहले हो चुका है। यहां के बनाए अग्नेयास्त्रों से रावण का वध हुआ और प्यास बुझाने के लिए ही महासती अनुसुइया माता ने सहस्त्र हजार धाराओं के साथ मंदाकिनी को प्रकट किया। वैसे अब नए पक्के निर्माण माता की अनेक धाराओं को काल कलवित कर चुके हैं। आम लोगों के साथ ही साधू संतों का मलमूत्र भी मंदाकिनी के पवित्र जल में विसर्जित हो रहा है। 
अब जब हम आपको दो बार सांसद व पूरे चित्रकूट परिक्षेत्र (यूपी) में विधायक दे चुके हैं तो आपसे आशा करते हैं कि आप चित्रकूट के उस भौतिक विकास पर भी विचार करेंगे जिससे विश्व भर से लोग यहां पर आएं और यहां के अनोखे दृश्यों को देखें।
1ः चित्रकूट के 84 कोस परिक्षेत्र को केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाए।
2ः चित्रकूट को बुंदेली हिस्सा न माना जाए, क्योंकि साक्ष्यों के आधार पर चित्रकूट बुंदेलखंड का हिस्सा कभी नहीं रहा।  
3ः चित्रकूट को विश्व विरासत में शामिल कराया जाए। 
4ः चित्रकूट के हर एक स्थल का चिंहाकन कर उसका वैभव सबके सामने लाया जाए। 
5ः पुराने मंदिरों का जीर्णोधार कराने के साथ ही मंदिरों प्रापर्टी के लिए बन रहे महंतों पर रोक लगाई जानी चाहिए। 
6ः चित्रकूट राम की भूमि मानी जाती है। यहां के सभी कार्य भगवान राम यानि तुलसीदास जी द्वारा लिखित शिव स्तुति, राम स्तुति और स्वामी मत्तगयेन्द्रनाथ जी की स्तुति के आधार पर ही होना चाहिए। 
7ः मंदाकिनी की अविरलता, पयस्वनी, सरयू, चंद्रभागा, कौशकी, वाल्मीकि, गुंता आदि नदियों पर लगातार काम कर उन्हें पुर्नजीवित करने व संरक्षण की आवश्यकता है।   
8ः यहां पर हर महीना अमावश्या पर मेला लगता है। जिसमें देश भर से लाखों लोग आते हैं। दीपावली अमावश्या में मेला मे ंपांच दिनों में लगभग दो करोड लोग आते हैं। लेकिन आज तक यूपी के क्षत्र में कहीं पर भी पार्किंग या बड़े सुलभ की व्यवस्था नही है। स्वच्छ भारत अभियान यहां पर अमावस्या के दूसरे दिन मुंह चिढाता नजर आता है।
आशा है कि आप इस आगह पर ध्यान देंगे।
आपकी प्रगति का आकांक्षी 
चित्रकूट धाम 





प्रकृति का संरक्षण करना हर व्यक्ति का दायित्वः साध्वी कात्यायनी गिरि




चित्रकूट। राम के भव्य मंदिर निर्माण में लगे दो विशेष संतों की शिष्या साध्वी कात्यायनी गिरि ने श्री कामदगिरि परिक्रमा मार्ग में स्थित ब्रहमकुंड के शनि मंदिर में सातवें दिन की श्री राम कथा के दौरान मंदाकिनी, पयस्वनी व सरयू को जिंदा रखने के लिए तमाम गुर बताए। उन्होंने कहा कि प्रकृति का संरक्षण करना हर एक व्यक्ति का दायित्व है। उन्होंने कथा के दौरान बताया कि महिर्षि अत्रि का अर्थ है जो इन तीनों गुणों से उपर उठ चुका है। इनका ब्रहम से सीधा संबंध है। चित्रकूट का इसी लिए इतना महत्व है। जब जीव अत्रि जैसा होगा, जब उसकी बुद्वि अनसुइया जैसी होगी। असुइया का अर्थ जलन, ईष्या या द्वेष न हो। जब यह गुण होंगे, तभी त्रिदेव पुत्र होते हैं। राम जी स्वयं दर्शन करने जाते हैं, वह राम के पास नही आए। जिसका संरक्षण स्वयं अत्रि अनुसुइया करते थे। मन से अनुसुइया ने मंदाकिनी को प्रकट किया। उनका संरक्षण किया।

 स्वार्थ में भरकर कभी हम प्रकृति का कुछ नही कर सकते। स्वार्थ में भरकर व्यक्ति अपने भाई बहन का नही हुआ, मां बाप का नही हो रहा तो कैसे इन नदियों का पुनर्जीवन होगा।  

श्री राम वन गमन का मार्मिक चित्र प्रस्तुत करते हुए उपस्थित श्रोताओं की आंखों में आंसू ला दिए। उन्होंने बताया कि राजा दशरथ ने केकेई को बहुत समझाने का प्रयास किया। कहा कि अगर तुम यह वचन लोगी तो मेरा जीवन समाप्त हो जाएगा। स्वार्थ रूपी मंथरा ने दुर्बुद्वि रूपी केकेई के कान भर दिए। सीता जो भूमि सुता है। माता सीता प्रकृति या भक्ति का स्वरूप हैं तो लक्ष्मण वैराग्य का स्वरूप है। सात्विक, राजसिक व तामसिक तीनों गुणों के बारे में तात्विक विवेचना कर बताया कि

कुंभकर्ण तमसीगुणी है। आलस्य प्रमाद खाता और सोता रहता है।

रावण रजोगुणी है। वह जाता है, सोचता भी है। वह शिव भक्त ब्राहमण है। राक्षस क्यों है, इसलिए वह सोचता है कि ज्यादा से ज्यादा संसार के भोगों का भोग कर लूं। रजोगुण में स्वार्थ भाव होता है। विभीषण सत्व गुण का प्रतीक है। वह केवल भजन करना चाहता है। भगवान के दर्शन पाना चाहता है। भगवान के कार्य में लगना चाहता है। इस दौरान कथा की व्यवस्था करने का काम सत्ता बाबा, अखिलेश अवस्थी, संत धर्मदास, गंगा सागर महराज व रामरूप पटेल कर रहे हैं।



तो क्या रामवन पथ गमन मार्ग को हरी झंडी दिखाएंगे मोदी

मोदी इन चित्रकूट 
 नेपथ्य में पहुंची राजकुमार को लंकाविजयी बताने की योजना 




 संदीप रिछारिया 

 चित्रकूट। श्रीराम ने अपने जीवन काल में दो महत्वपूर्ण यात्राएं की थीं। पहली यात्रा महर्षि विश्वामित्र के साथ अयोध्या से श्रीजनकपुर धाम की व दूसरी अयोध्या से श्रीलंका की पत्नी सीता व भाई लक्ष्मण के साथ। पहली यात्रा की उपलब्धि श्रीजनकपुर धाम में जाकर माता सीता का वरण करना व दूसरी यात्रा की उपलब्धि श्रीलंका पहुंचकर रावण वध करना रही। पहली यात्रा में जहां उन्होंने राक्षसी ताड़का व सुबाहु का वध किया, वहीं दूसरी यात्रा में श्रीराम ने न केवल भौतिक तौर पर राक्षसराज लंकाधिपति रावण व महाबली बाली का संहार किया, बल्कि इससे इतर उनकी उपलब्धियां भी बहुत सारी रहीं। सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में उन्हें श्री हनुमान मिले। सुग्रीव व विभीषण को राजा बनाया। श्री राम के द्वारा की गई इन दोनों यात्राओं को कई बार करने के बाद गाजियाबाद निवासी डाॅ0 राम अवतार शर्मा ने ‘रामवन पथ गमन मार्ग‘ की खोजकर प्रभु के चरण पड़ने वाले हर एक स्थल को चिंहिन्त किया। श्रीराम की द्वितीय यात्रा का मुख्य पड़ाव चित्रकूट रहा। उन्होंने अपने दाम्पत्य जीवन का सर्वाधिक समय चित्रकूट में बिताया। दृष्टांतों के आधार पर श्रीराम, माता जानकी व भैया लक्ष्मण के साथ चित्रकूट परिक्षेत्र में 11 साल 6 महीने और 18 दिन रहे। उन्होंने यहां के 84 कोस परिक्षेत्र में कई ऋषियों के दर्शन कर भगवत चर्चा करने के साथ ही अनेक आयुध व अस्त्र प्राप्त किए।


पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई की सरकार ने श्रीराम वन पथ गमन शोध यात्रा को आधार बना राजकुमार राम से तपस्वीराम व फिर लंकाविजयी राम को जोड़ने की विशेष कार्य योजना बनाई थी। योजना के अनुसार अयोध्या से लेकर श्रीलंका यानि तमिलनाडु के धनुषकोटि तक एक ऐसी आल वेदर रोड का निर्माण करना था, जो हर मौसम में लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाए। इसके मुख्य पड़ाव अयोध्या, प्रतापगढ, कौशाम्बी, चित्रकूट, सतना, पन्ना, कटनी, जबलपुर, शहडोल, अमरकंटक के बाद छत्तीसगढ़ व आगे बननी थी। हैरत की बात यह है कि 15 साल तक मप्र में भाजपा का राज होने के बाद भी राम वनपथगमन मार्ग बनाने में कोई रूचि नही दिखाई। यह बात और है कि कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने पिछले दिनों 22 करोड़ की पहली किस्त जारी कर यह बताने का प्रयास किया कि उनकी सरकार श्रीराम के प्रति पूरी तरह से आस्था रखती है। इधर यूपी की बात करें तो इस सड़क को लेकर बातें तो बहुत सारी हो रही हैं। लेकिन अभी तक इसका कार्य रूप दिखाई नहीं दे रहा है। फैजाबाद यानि अयोध्या से प्रतापगढ़ से होकर कौशाम्बी और फिर चित्रकूट आने वाली यह सड़क कागजों पर नहीं लेकिन नेताओं की जुबान पर कभी-कभी सुनाई दे जाती है। पिछले दिनों भाजपा के एक कद्दावर नेता ने इस सड़क का निर्माण जल्द कराने की बात कही थी।
 17 साल बीते पर नहीं बनी 150 किमी सड़क 
प्रतापगढ़ के मोहनगंज से शुरू होकर जेठवारा, कन्हैयापुर, त्रिलोकपुर, श्रंगवेरपुर, कोखराज, कौशाम्बी होते हुए चित्रकूट लाने वाली इस सड़क का निर्माण कब होगा, यह तो भविष्य के गर्त में हैं। लगता है कि इस विशेष सर्किंट का हाल कहीं बौद्व सर्किट और सिख सर्किट जैसा न हो जाए। योजना बनाते समय कहा गया था कि इस रूट पर चित्रकूट से अयोध्या तक सस्ती सरकारी बसें भी चला करेंगी, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी न हो।
चार जिलों को जोड़ने की थी मंशा 
रामवन पथ गमन मार्ग प्रतापगढ़, इलाहाबाद, कौशाम्बी व चित्रकूट को जोड़ने वाला था।
क्या मोदी जी प्रतापगढ से चित्रकूट सड़क बनाने के लिए देंगे हरी झंडी 
 पिछले दिनों प्रधानमंत्री के आगमन की तैयारियों के लिए निर्देश देने आए मुख्यमंत्री योगीजी ने कहा कि राम की शरणस्थली चित्रकूट है। इसे सजाने और संवारने में हम कोई कोर कसर नहीं उठा रखेंगे। अब देखना यह होगा कि जब राम वन पथ गमन मार्ग का नाम लेने वाला कोई नेता नहीं है तो  क्या इसका नाम प्रधानमंत्री के मुंह से निकलेगा। क्या वह अटल जी की इस विशेष योजना पर मुहर लगाकर चित्रकूट से सीधे अयोध्या पहुंचने के मार्ग को जल्द बनवाने का लोगों को भरोसा देगें। क्योंकि अब समय ऐसा आ रहा है कि अयोध्या को संवारने के साथ ही चित्रकूट को भी सुंदर बनाने की जरूरत है। क्योंकि कई सदियों बाद जब अयोध्या के दिन बहुरे हैं तो लोगों का रूख चित्रकूट की ओर भी होगा।

Friday, February 21, 2020

मोदी के आगमन की तैयारियों में ‘झोल‘ कर रहे अधिकारी


 उच्चाधिकारियों को दिक्कत में डालने की मंशा से काम कर रहे विभाग
प्रधानमंत्री की विशेष टीम ने रामघाट से बूढे हनुमान जी घाट तक श्री कामदगिरि परिक्रमा की रेकी की 


मोदी के आगमन का 29 फरवरी को सुयोग होने के बाद जहां एक ओर स्थानीय लोगों में प्रसन्नता है। वहीं दूसरी ओर अधिकारियों में बेचैनी दिखाई दे रही है। यूपीडा के सीईओ अवनीश अवस्थी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगमन के बाद तो  उनकी अगुवानी करने के लिए तेजी लाई जा रही है। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो अभी तक की तैयारी केवल बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे के षिलान्यास स्थल गोंडा गांव के पास ही सीमित दिखाई दे रही है। सूत्रों की मानें तो शुक्रवार को दिन भर चित्रकूट में रहकर मोदेी की स्पेशल इंटेलीजेंस की टीम ने गोंडा के अलावा मंदाकिनी के रामघाट से लेकर बूढे हनुमान जी घाट, कामदगिरि परिक्रमा, आरोग्य धाम व रामदर्शन, सूरजकुंड, रामशैया की रेकी की। इस दौरान उन्होंने यह बिना बताए कि वह लोग कौन है, स्थानीय लोगों से बातचीत भी की। अधिकारियों ने परिक्रमा पथ पर पयस्वनी उद्गम स्थल पर भी देखा। स्थानीय लोगों ने जब उन्हें परिक्रमा पथ पर मौजूद पुराने राजाओं द्वारा बनवाए गए बीहरों की जानकरी दी तो उन्होंने देखा उन्होंने बिरजाकुंड वाले बीहर पर अवैध कब्जे को लेकर चिंता भी व्यक्त की। प्र्यटन विभाग द्वारा सालों से शेडों को लेकर कराए जाने वाले काम को लेकर भी उन्होंने तमाम चिंताएं व्यक्त की। कहा कि एक बार लगे हुए शेड को उखाडकर दोबारा लगाना कहा ंसे उचित है। इसके अलावा बिजली की भी सही फिटिंग न होने के कारण रात में अंधेरा होने की बात भी लोगों ने बताई। अतिक्रमण के नाम पर अधिकारियों के द्वारा दी जाने वाली धमकियों से भी लोगों ने उन्हें परिचित कराया।
इस तरह से हो रहा है काम
प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर हल्का सा जागे प्रशासन ने मंदाकिनी के बूढे हनुमान जी घाट की तरफ दो नावों को लगाकर नदी से जलीय वनस्पति निकलवाने का काम दो दिन से शुरू करवाया है। नाव से हल्के हाथों से उपर की जलीय वनस्पति निकाली जा रही है। जलीय वनस्पति नीचे से जुडी होने क ेकारण रोज बढ भी रही है। जिससे नदी की सफाई नही हो पा रही है। रामघात की तरपफ तो अचानक कउनोमिक्स के कारण नदी साफ दिखाई दे रही है। वैसे सीतापुर से लेकर रामघाट,  शिवरामपुर से लेकर सीतापुर व खोही मार्गों के पूरा न बन पाने के कारण लोक निर्माण विभाग भी प्रशासन के सामने दिक्कत पैदा कर सकता है।