इस मेले की एक अंतर्धारा भारत की प्राचीन तांत्रिक और कबीलाई संस्कृतियों से भी जुड़ी है। कार्तिक अमावस्या की काली रात (महानिशा) को तंत्र शास्त्र में बेहद शक्तिशाली माना गया है, जिसके कारण चित्रकूट के निर्जन जंगलों और घाटों पर कई रहस्यमयी अनुष्ठान संपन्न होंगे। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान से आने वाले सपेरे और कालबेलिया समुदाय के लोग इस रात मंदाकिनी के एकांत तटों या कामदगिरि के घने जंगलों में बैठकर अपने सांप वशीकरण मंत्रों और जहर उतारने की विद्याओं का शुद्धीकरण व नवीनीकरण करेंगे। पुराने गुरु अपने शिष्यों को इसी रात गुप्त दीक्षा देंगे। इसके साथ ही, तंत्र मार्गी और अघोरी चित्रकूट के चक्रतीर्थ, अनुसूया आश्रम के समीपवर्ती जंगलों और गुप्त गोदावरी के पास छिपे स्थानों पर काल भैरव व मां काली की विशेष तांत्रिक पूजा (षटकर्म) करेंगे। लोग अपने ऊपर से नकारात्मक शक्तियों और तंत्र बाधाओं को हटाने के लिए भी यहां तांत्रिकों से झाड़-फूंक करवाएंगे।
चित्रकूट की भौगोलिक स्थिति उत्तर प्रदेश (चित्रकूट जिला) और मध्य प्रदेश (सतना जिला) दोनों सीमाओं में फैली होने के कारण, दोनों राज्यों का प्रशासन इस समय अंतर्राज्यीय समन्वय बैठकें कर सुरक्षा और सुविधाओं के कड़े इंतजामों को अंतिम रूप दे रहा है। पूरे मेला क्षेत्र को कई जोन और सेक्टरों में बांटकर भारी पुलिस बल और सीसीटीवी कैमरे तैनात किए जा रहे हैं। मंदाकिनी नदी के घाटों पर गहरे पानी में बैरिकेडिंग की जा रही है और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए फ्लड पीएसी, प्रशिक्षित नाविक व गोताखोर २४ घंटे मुस्तैद रहेंगे। हाल ही में आई बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए पुलों व रास्तों की जगह अस्थाई पीपा पुल (Pontoon Bridges) तैयार किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए शहर की सीमाओं पर 17 बड़े पार्किंग स्थल और 6 भव्य प्रवेश द्वार बनाए जा रहे हैं। जगह-जगह मोबाइल मेडिकल यूनिट्स, एम्बुलेंस और स्वच्छ पेयजल के लिए वाटर कूलर लगाए जा रहे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें मिलावटी मिठाइयों की जांच के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं। इसके साथ ही, सैकड़ों स्वयंसेवी संगठन (NGOs) श्रद्धालुओं के लिए भंडारे, निःशुल्क प्याऊ, चिकित्सा शिविर और खोया-पाया केंद्र संचालित करने की तैयारी में जुटे हैं।
इतने विशाल आयोजन के जहां स्थानीय व्यापार, कुम्हारों के रोज़गार और बुनियादी ढांचे के विकास के रूप में बड़े आर्थिक फायदे मिलेंगे, वहीं इसके कारण गंभीर चुनौतियां और नुकसान होने की भी पूरी आशंका है। सबसे बड़ा पर्यावरणीय दबाव मंदाकिनी नदी पर पड़ेगा, जहां लाखों लोगों के स्नान और दीपदान के तेल, घी व बत्तियों के कारण पवित्र जल अस्थायी रूप से प्रदूषित होगा। परिक्रमा मार्ग और घाटों पर बड़े पैमाने पर प्लास्टिक की बोतलें, रैपर्स और दोने-पत्तल का कचरा जमा होने की उम्मीद है, जिसे साफ़ करना प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा। इसके अलावा, कड़े सुरक्षा घेरे, बैरिकेडिंग और 72 घंटे पहले से लागू होने वाले रूट डायवर्जन के कारण चित्रकूट के स्थानीय निवासियों का अपने ही घरों से निकलना और रोज़मर्रा के काम करना दूभर हो जाएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर भारी असंतोष और तालाबंदी जैसी स्थिति बनने की आशंका है। अत्यधिक भीड़ के कारण कामदगिरि परिक्रमा मार्ग की संकरी गलियों में भगदड़ मचने या घाटों पर पैर फिसलने से डूबने जैसी दुर्घटनाओं का जोखिम भी हर समय बना रहेगा, जो प्रशासन के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाला है।











