भोर के सुरों में जागा चित्रकूट, नव संवत्सर का अलौकिक अभिनंदन

      





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मंदाकिनी तट स्थित रामघाट पर भोर की पहली किरणों के साथ चित्रकूट में नव संवत्सर का स्वागत भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक उल्लास के बीच संपन्न हुआ। उस पावन चबूतरे की छांव में, जहां मान्यता है कि गोस्वामी तुलसीदास जी को प्रभु श्रीराम के दर्शन हुए थे, पुराने संवत्सर को विदाई और नव संवत्सर का अभिनंदन अनूठे अंदाज में किया गया।
संस्कार भारती इकाई चित्रकूट द्वारा विगत 12 वर्षों से आयोजित ‘भोर के सुर’ कार्यक्रम इस वर्ष भी भव्यता के साथ सम्पन्न हुआ। प्रातः 4 बजे से प्रारंभ हुए इस आयोजन में ग्वालियर घराने के कलाकार रोहन पंडित ने बिलासखानी तोड़ी में विलंबित एकताल एवं द्रुत तीनताल की प्रस्तुति देकर वातावरण को सुरमय बना दिया। हारमोनियम पर अनुज मिश्रा एवं तबले पर डॉ. विवेक फडनीश ने संगत की।
इसके पश्चात योगाचार्य जितेंद्र प्रताप के निर्देशन में योग साधना एवं सूर्य नमस्कार कराया गया। सूर्योदय के समय श्रद्धालुओं ने भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित कर राष्ट्र के कल्याण की कामना की।
संस्कार भारती के कला साधकों द्वारा बनाई गई आकर्षक रंगोलियों ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया।









पूर्व संध्या पर भजन संध्या में झूमे श्रद्धालु

नव संवत्सर की पूर्व संध्या पर संस्कार भारती एवं आनंदेश्वरम् संगीत अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में भजन संध्या का आयोजन किया गया। अकादमी के बाल कलाकारों ने मधुर भजनों एवं संगीतमय प्रस्तुतियों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। देर रात तक चले कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।




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