चित्रकूट महिमा अमित,,,, चित्रकूट की श्री के प्रथम घोषक महर्षि वाल्मीकि
एक तात्विक विवेचन,,,, ‘‘अस्य चित्रकूटस्य्‘‘ {द्वितीय सोपान} उल्टा नाम जपति जग जाना बाल्मीकि भए ब्रहम समाना,, महर्षि वाल्मीकि एक ऐसे देदीप्तमान नक्षत्र के रूप में रामकथा में समाए हैं जिन्होंने रामकथा राम काल में लिखी, उन्होंने श्रीराम के चरित्र को अपनी आंखों से देखा और उसका भाषानुवाद रामायणम् के माध्यम से किया। श्रीराम का चरित्र चित्रण हो या फि चित्रकूट की महिमा का यशोगान वाल्मीकि जी ने पहली बार उसे विश्व के सामने लाने का प्रयास किया। श्रीराम के चित्रकूट आगमन के पूर्व के चित्रकूट को प्रकट करने का क...