May 25, 02:18 am
चित्रकूट। चिलचिलाती धूप भी श्रद्धालुओं की आस्था डिगा न सकी। ज्येष्ठ मास की अमावस्या के मौके पर लाखों श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में डुबकी लगायी और फिर भगवान मत्स्यगजयेंद्र नाथ का जलाभिषेक कर भगवान कामतानाथ की परिक्रमा की। वट सावित्री अमावस्या होने से सुहागिनों ने अपने पति के दीर्घायु की कामना के साथ वट वृक्ष की पूजा अर्चना की।
भीषण गर्मी के बावजूद अमावस्या में पूरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ धर्मनगरी में दिखी। दोपहर में परिक्रमा मार्ग में कुछ कम भीड़ दिखी, परंतु शाम होते ही श्रद्धालुओं का फिर से तांता लग गया। सैकड़ों लोगों ने लेटी परिक्रमा भी की। रामघाट के बाद कामतानाथ प्रमुख द्वार में भीड़ का सर्वाधिक दबाव देखा गया। परिक्रमा करने के बाद श्रद्धालुओं ने हनुमान धारा, स्फटिक शिला, सती अनुसूइया व गुप्त गोदावरी पहुंचकर दर्शन किये। परिक्रमा मार्ग व मेला क्षेत्र में प्रशासन ने पेयजल व्यवस्था की थी। हालांकि मुख्यालय के बस स्टैड व शिवरामपुर रेलवे स्टेशन पर यात्री पानी के लिये भटकते दिखे। कर्वी रेलवे स्टेशन में श्रीनाथ सेवा समिति ने यात्रियों को पेयजल पिलाया। जिसमें डा. प्रकाश दीनानाथ, आनंद राव तैलंग व लल्लूराम शुक्ल आदि मौजूद रहे। तीर्थ यात्रियों के आवागमन के लिये दो मेला स्पेशल ट्रेन व एक दर्जन अतिरिक्त परिवहन निगम की बसें संचालित की गई। जिन्हे ठसाठस भरकर आते जाते देखा गया।
सुहागिनों ने पूजा वट वृक्ष
ज्येष्ठ अमावस्या पर ही सुहागिनें अपने पति की दीर्घायु के लिये बरगद के वृक्ष की पूजा अर्चना की। मुख्यालय में सुबह से ही महिलाओं ने पूजा की थाल सजाकर बरगद वृक्ष के पास पहुंची। पूरे विधिविधान से पूजा करने के बाद महिलाओं ने सावित्री सत्यवान की कथा का श्रवण किया। कई महिलाओं ने परिवार सहित बरगद के नीचे बैठकर खाना बनाकर भी खाया।
टैक्सी वालों ने काटी चांदी
भीषण गर्मी में पैदल चलना मुश्किल था इससे लोग टैपो टैक्सी से आ जा रहे थे। श्रद्धालुओं की मजबूरी का टैक्सी चालकों ने जमकर फायदा उठाया। रामघाट से स्टेशन तक 15 रुपये सवारी तक वसूला गया। कई जगह इन गाड़ियों ने जाम लगाया मगर पुलिस वालों ने इन्हे हटाना गवारा नहीं समझा
एक ऐसा स्थान जो विश्व भर के लोगो के लिये किंवदंतियों कथाओं कथानकों के साथ ही यथार्थ चेतना का पुंज बना हुआ है। प्रजापति ब्रह़मा के तपोबल से उत्पन्न पयस्वनी व मां अनुसुइया के दस हजार सालों के तप का परिणाम मां मंदाकिनी के साथ ही प्रभु श्री राम के ग्यारह वर्ष छह माह और अठारह दिनों के लिये चित्रकूट प्रवास के दौरान उनकी सेवा के लिये अयोध्या से आई मां सरयू की त्रिवेणी आज भी यहां पर लोगों को आनंद देने के साथ ही पापों के भक्षण करने का काम कर रही है।
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