Saturday, March 21, 2026

चित्रकूट में दर्शन का महासंगम, विश्व शांति की दिशा में उभरा नया चिंतन




चित्रकूट: जब मंदाकिनी के तट पर विचारों की धारा बहती है, तब चित्रकूट केवल एक तीर्थ नहीं रहता—वह विश्व के बौद्धिक मंथन का केंद्र बन जाता है। तीन दिनों तक चली इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में परंपरा और आधुनिकता का ऐसा संगम देखने को मिला, जहाँ शास्त्रों की गूंज के साथ वैश्विक समस्याओं के समाधान भी खोजे गए।
भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (ICPR) के प्रायोजन में तथा अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ के तत्वावधान में आयोजित दर्शन परिषद का 40वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी तीन दिवसीय सफल आयोजन के साथ संपन्न हो गई। 19 से 21 मार्च तक चले इस आयोजन में देश-विदेश के लगभग 130 विद्वानों ने भाग लेकर अपने विचार प्रस्तुत किए।
अधिवेशन के अंतिम दिन आयोजित तकनीकी सत्र की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के डॉ. प्रशांत शुक्ल ने की, जिसमें कुल 9 शोध पत्रों का वाचन हुआ। इसके पश्चात आयोजित समापन सत्र में मुख्य अतिथि भारतीय विश्वविद्यालय संघ के संयुक्त सचिव डॉ. आलोक कुमार मिश्र तथा विशिष्ट अतिथि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. बृजभूषण ओझा उपस्थित रहे।
विश्व शांति के लिए चित्रकूट मॉडल का प्रस्ताव
मुख्य अतिथि डॉ. आलोक कुमार मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि चित्रकूट में हुए दार्शनिक चिंतन के आधार पर विश्व शांति के समाधान का एक ठोस प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) को भेजा जाना चाहिए। उन्होंने ICPR के सहयोग से चित्रकूट में एक स्थायी दार्शनिक केंद्र स्थापित करने की भी वकालत की, जहाँ प्राकृतिक वातावरण में वैश्विक स्तर पर चिंतन-मंथन हो सके।
विशिष्ट अतिथि प्रो. बृजभूषण ओझा ने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की व्याख्या करते हुए वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पांडेय ने कहा कि गंगा की भांति विभिन्न विचारधाराएँ दर्शन को समृद्ध करती हैं और शास्त्र परंपरा निरंतर नवीनता लाती है।
72 शोध पत्र, 8 तकनीकी सत्र
डॉ. प्रशांत शुक्ल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अधिवेशन में कुल 6 ऑफलाइन और 2 ऑनलाइन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 72 शोध पत्रों का वाचन एवं विमर्श हुआ। प्रथम दिवस पर 5 स्मृति व्याख्यान मालाएँ भी आयोजित की गईं।
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दर्शन परिषद के अध्यक्ष प्रो. एच.एस. उपाध्याय ने आयोजन की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की। महासचिव प्रो. नीतिश दुबे ने सभी प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए इसे ऐतिहासिक आयोजन बताया। उन्होंने बताया कि डॉ. हरिकांत मिश्र के संयोजन और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के सहयोग से यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
संस्थान के निदेशक डॉ. राकेश सिंह की विशेष उपस्थिति एवं मार्गदर्शन ने आयोजन को और गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम के दौरान 19 एवं 20 मार्च को उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी दीं।
कार्यक्रम में प्रो. स्नेहलता पाठक, प्रो. स्वाती सक्सेना, प्रो. रमेश चंद्रा, डॉ. महीप, प्रो. राकेश कुमार तिवारी, डॉ. अंबरीष राय सहित अनेक गणमान्य विद्वान एवं विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के संयोजक डॉ. हरिकांत मिश्र ने किया।

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