Tuesday, March 30, 2010

अपनों के लिये भी है बेगाना अद्वितीय शिल्प का नमूना गणेश बाग

चित्रकूट। इस परिक्षेत्र का आध्यात्मिक, धार्मिक के साथ ही सांस्कृतिक वैभव अपने आपमें अनूठा है। धर्म नगरी का दर्शन जहां शांति और वैराग्य का संदेश देता है वहीं कर्वी नगर में स्थापत्य कला पर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के स्वरुप दिखाई देते हैं। ऐसा ही एक स्थान जिला मुख्यालय से लगे सोनेपुर गांव के समीप 'गणेश बाग' है। भले ही अभी भी इस विशिष्ट स्थान पर देशी और विदेशी पर्यटकों की आवक उतनी न बन पाई हो जितनी की उम्मीद की जाती है पर इतना तो साफ है कि सांस्कृतिक विरासत का धनी स्थान अपने आपमें काफी विशिष्टतायें समेटे हुये है। भले ही इस स्थान का नाम गणेश बाग हो पर यहां पर श्री गणेश की स्थापित एक भी मूर्ति नही है। मूर्ति चोरों की बुरी नजर का परिणाम श्री गणेश की प्रतिमा ही नही बल्कि अन्य विशेष स्थापत्य कला की मूर्तियां बाहर जा चुकी है।

जिला चिकित्सालय के ठीक पीछे को कोटि तीर्थ जाने के मार्ग पर स्थित गणेश बाग के बनने की कहानी भी कम रोचक नही है। मराठा राजवंश की बहू जय श्री जोग बताती हैं कि उनका खानदान प्लासी के युद्ध के बाद बेसिन की संधि में यह क्षेत्र में मिलने के बाद यहां पर आया था। उनके पुरखे पेशवा अमृत राव को कुआं तालाब बाबड़ी आदि बनवाने का काफी शौक था। वैसे उस समय इस शहर का नाम अमृत नगर हुआ करता था। पानी की विशेष दिक्कत होने के कारण भी पानी की व्यवस्था सुचारु रूप से किये जाने के प्रबंध किये गये थे।
महाराष्ट्र से लाल्लुक रखने के कारण श्री गणेश की आराधना उनके खानदान में होती थी। यहां पर इस मंदिर के साथ ही तालाब व बावड़ी का निर्माण कराने के साथ ही विशाल अस्तबल का भी निर्माण कराया गया था।
महात्मा गांधी चित्रकूट गांधी विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डा. कमलेश थापक कहते हैं कि बेसिन की संधि के बाद मराठों ने बांदा और चित्रकूट में आकर अपना साम्राज्य स्थापित किया। उनके आने से जहां कुछ नई परंपरायें समाप्त हुयी वहीं मंदिरों, कुओं, तालाबों व बाबडियों का भी निर्माण हुआ।
गणेश बाग भी स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। यहां पर स्थापित मूर्तियां खजुराहो शिल्प की तरह ही हैं। पांच मंदिरों के समूह के साथ ही तालाब व अन्य भवन कभी अपने वैभव रहने की की कहानी कहते हैं, पर समय बदलने और आधुनिकता का रंग चढ़ने पर आज यह विशेष स्थान दुर्दशा को प्राप्त हो रहा है। सरकारी स्तर पर किये गये प्रयास नाकाफी है और किसी भी जन प्रतिनिधि को यहां के सांस्कृतिक गौरवों के उत्थान की याद ही नही आती।
सामाजिक चिंतक आलोक द्विवेदी कहते हैं कि सरकार के पास पैसा बेकार के कामों के लिये बहाने को तो है पर गणेश बाग के विकास के लिये शायद नही है।
भारतीय पुरातत्व विभाग का एक बोर्ड और चंद चौकीदार ही इसके संरक्षण और संर्वधन के जिम्मेदार बने हुये हैं। सरकारी योजनायें इसके उत्थान के लिये तो बनी पर उनसे गणेश बाग की दशा और दिशा के साथ ही पर्यटकों की आवक नही बढ़ सकी। अगर वास्तव में सही मंशा से गणेश बाग का विकास किया जाये तो पर्यटक यहां पर भी आकर आनंदित महसूस करेंगे। खजुराहो शिल्प की तरह ही इस मंदिर का इतिहास अपने आपमें स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी चंद्र शेखर आजाद के यहां पर कई बार रहने का भी गवाह है, पर दुर्भाग्य इस बात का है कि कभी भी किसी ने इस तरह का जिक्र गणेश बाग की इमारत के अंदर बोर्ड लगाकर किया ही नही। पेशवाओं के बनवाये तमाम मकान खंडहर होते रहे और पर्यटक विभाग भी मूक दर्शक की भांति अपनी कार्य कुशलता सिद्ध करता रहा।
वैसे फरवरी के महीने में महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के प्रांगण मे आयोजित विश्व यू 3 ए कांफ्रेंस का समापन गणेश बाग में आयोजित कर आयुष्मान ग्रुप ने यहां पर देशी और विदेशी पर्यटकों को लाकर पर्यटकों की आमद बढ़ाने का प्रयास किया था।

Sunday, March 28, 2010

जंगल में मंगल:एक कर्मयोगी की तप साधना

चित्रकूट। अब शायद ही उनका नाम कोई भरत दास के नाम से जानता हो क्योंकि धर्म और आध्यात्म के साथ पर्यावरण संतुलन को सुधारने जो बीड़ा उन्होंने बीस साल पहले उठाया था उसकी वजह से लोग उन्हें अब 'हरियाली वाले बाबा' के नाम से जानते हैं।

मानिक पुर कस्बे से लगभग सात किलोमीटर दूर काली घाटी में बाबा भरत दास ने रहना शुरु किया तो सहसा किसी ने विश्वास ही नही किया कि शायद इस बियावान जंगल में कोई एक रात भी रह पायेगा पर पथरीली जमीन की कोख से जब उन्होंने पौधों की कोंपलें निकलवायी तो जैसे आश्चर्य ही हो गया। लोगों ने समझा कि शायद बाबा मायावी है पर ऐसा कुछ भी नही था। लगभग तीन सौ से ज्यादा पेड़ों को पुष्पित और पल्लवित करने के पीछे बाबा की मेहनत की वह तासीर छिपी है जिसकी बदौलत आम तो क्या अन्य पेड़ अपने फल लोगों को खिला रहे हैं। इतना ही नही जब इलाके के असरदार लोगों की नजर इस जगह पर पड़ी तो फिर सामंतशाही अंदाज में व्यवस्था के लिये पूंछतांछ प्रारंभ हुई। लिहाजा बाबा ने स्थान बदल दिया और काली घाटी से एक किलोमीटर दूर जब पहुंचे तो वहां पर पानी के झरने देखकर प्रफुल्लित हो उठे। दो ही साल के अंतराल में बाबा ने वहां पर भी आंवला पीपल और अन्य पौधों को रोपकर उन्हें तैयार भी कर डाला।
बाबा भरत दास बताते हैं कि वे मूलत: कानपुर के नवाबगंज के गुरु निर्मलदास के शिष्य हैं। उनके गुरु जी कर्वी में बनकट के पास पम्प कैनाल के मंदिर में रहकर तप किया करते थे। लगभग बीस साल पहले वे गुरु की आज्ञा से काली घाटी आये। जब यहां पर आये तो सामने की कोल बस्ती के साथ ही सरैंया में रहने वाले लोगों का काफी साथ मिला। पेड़ पौधे मानव का मन प्रफुल्लित रखते और जीवन जीने में सहायता करते है, अपने गुरु की इस बात को अंगीकार कर पौधों का रोपण करने लगे और देखते ही देखते काली घाटी में हरियाली दिखाई देने लगी। आम के लगभग डेढ़ सौ पेड़ों के साथ ही महुवा, जामुन, नींबू, अमरुद, करौंदा, आंवला, अनार, आंस, सेधा, तेंदू, नीम, सिरसा व बेर जैसे तमाम पेड़ों में हरियाली दिखा दी। इसके साथ ही यहां पर लगे गुलाब, गेंदा आदि के पौधे भी अपना खूबसूरती कहानी स्वयं कहते हैं। वे बताते हैं कि पहले से मां काली, हनुमान जी, शंकर जी, भैरम बाबा की मूर्तियां थी वर्ष 2005 में स्थानीय लोगों के सहयोग से मां अम्बे की विशालकाय प्रतिमा की स्थापना कराई गई। इसके बाद जब इस स्थान पर वैभव दिखाई देने लगा तो कुछ दबंगों ने उन्हें परेशान करना प्रारंभ कर दिया तो वे स्थान को छोड़कर एक किलोमीटर आगे चले गये। वहां पर गुफा के साथ ही पहाड़ों के बीच से रिसता हुआ पानी देखा तो उत्साह चरम पर पहुंचा। यहां पर नर्मदा के किनारे से लाकर शिवलिंग व चित्रकूट से लाकर हनुमान जी की स्थापना की। यहां पर भी पीपल, बेल, आंवला के साथ ही पचासो किस्म के पौधे रोप डाले। फिर जनप्रतिनिधि और सरकारी स्तर पर प्रयास किया तो ब्लाक प्रमुख विनोद द्विवेदी व खंड विकास अधिकारी ने कई बार आकर स्थान को देखा। वे बताते हैं कि श्री द्विवेदी ने आश्वासन दिया है कि यहां पर निकलने वाले सभी जल स्रोतों को एक कर तालाब का रुप देने के साथ ही आगे पहाड़ पर ही बांध का निर्माण किया जायेगा। जिससे इस क्षेत्र में हरियाली की बयार और दिखाई देगी। बाबा भरत दास बताते हैं कि उन्होंने अब संकल्प लिया है कि काली घाटी से लेकर नये आश्रम तक सड़क के किनारे दोनो तरफ पौधों का रोपण कर सरकारी नुमाइंदो को दिखायेगे कि किस तरह से पौधों को तैयार किया जाता है। इसके लिये उन्होंने स्थानीय लोगों से भी बात करने की बात कही है। यह काम बिना किसी सरकारी सहयोग से किये जाने की बात करते हैं।

Saturday, February 6, 2010

यू थ्री ए सम्मेलन: जोर शोर से चल रही हैं तैयारियां

चित्रकूट। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के प्रांगण में इन दिनों यू 3 ए सम्मेलन की तैयारियां जोर शोर से चल रही है। जहां एक तरफ देशी के साथ ही विदेशी मेहमानों के आने को लेकर उत्साह का माहौल है वहीं व्यवस्था समितियों के प्रभारी भी अपने-अपने कामों में जुटे दिखाई दे रहे हैं।

विवि. के कुलपति प्रो. ज्ञानेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के बाद 8 फरवरी से लेकर 10 फरवरी तक आयोजित होने वाले सम्मेलन के सभी कार्यक्रमों की समय वार घोषणा कर दी। सम्मेलन संयोजक डा. आरसी सिंह ने बताया कि 8 फरवरी को प्रात: 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक उद्घाटन सत्र होगा। इसके बाद माइंड एंड मैटर थीम पर तकनीकी सत्र तथा एक्ज्यूकेटिव कमेटी एवं जनरल बाड़ी की बैठक होगी। 9 फरवरी को टेक्नोलाजी थीम और होलिस्टिक हेल्थ थीम पर तकनीकी सत्र होंगे। इसके बाद यू 3 ए बैठक होगी। 8 व 9 की शाम को 6.30 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। 10 फरवरी को यू 3 ए स्टोरीज थीम पर तकनीकी सत्र एवं अपराह्न 12 बजे से समापन सत्र होगा। चित्रकूट के दर्शनीय स्थलों के अवलोकन के साथ ही रुरल यू 3 ए का गठन 10 फरवरी को मिनी खजुराहो 'गणेश बाग' कर्वी में किया जायेगा।
सम्मेलन के सचिव द्वय डा. वीरेन्द्र कुमार व्यास व डा. आशुतोष उपाध्याय ने बताया कि सम्मेलन में आने वाले प्रतिभागियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। न्यूजीलैंड, स्काटलैंड, इंग्लैंड, साउथ अफ्रीका, सिंगापुर, नेपाल व बांग्लादेश आदि देशों से लगभग पचास व देश के तमाम राज्यों से लगभग 450 प्रतिभागियों के सम्मिलित होने की सूचना प्राप्त हो चुकी है। इस दौरान विवि परिसर में ग्राहक सेवा के तत्वावधान में ग्रामीण उत्पादों की प्रदर्शनी विभिन्न विकास एजेन्सियों द्वारा लगाई जायेगी।

अगले साल तक जमीन पर काम कर सकती है चित्रकूट महायोजना

चित्रकूट। भले ही मप्र ने चित्रकूट को धार्मिक नगरी घोषित कर विकास की बड़ी कवायत करनी प्रारंभ कर दी हो पर इस मामले में यहां का प्रशासन भी काफी खामोशी से काम कर रहा है। जहां एक तरफ चीफ टाउन प्लानर को 'चित्रकूट महायोजना' को बनाये जाने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। वहीं मुख्यालय को एक विशेष रुप से शेप देने के साथ ही विशेष तौर पर विकासात्मक कदमों की भरमार करने की योजना भी बताई जा रही है।

अपर जिलाधिकारी राजा राम बताते हैं कि वैसे तो चित्रकूट महायोजना को बनाये जाने का प्रस्ताव काफी पहले भेजा गया था पर अब मालूम चला है कि यह अपने अंतिम दौर में है। लखनऊ के चीफ टाउन प्लानर के द्वारा बनाये जाने वाले चित्रकूट मुख्यालय के नक्शे के बारे में वे कहते हैं कि अभी तक तो उन्होंने यह देखा नही है पर उम्मीद है कि इसके बनने के बाद तो चित्रकूट विकास प्राधिकरण का काम काफी बढ़ जायेगा। जहां यहां पर नई टाउनशिप बनेगी वहीं नये पार्क व धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व के स्थलों को संरक्षित करने के लिये भी विशेष कार्ययोजना का प्रस्ताव भी इसमें किया गया बताया जा रहा है।
इतना ही नही जहां प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों को यह उम्मीद है कि अगले वित्तीय वर्ष में चित्रकूट को भी मथुरा, काशी, इलाहाबाद, वृन्दावन की तर्ज पर महायोजना बनाकर विकसित किया जा रहा है। वैसी ही योजना की शुरुआत यहां पर शासन के स्तर पर अगले वर्ष हो सकती है। वैसे यहां पर भी अधिकारी अपने स्तर पर स्वयंसेवियों के साथ चित्रकूट के विकास की मशक्कत का काम कर रहे हैं।

मेले को यादगार बनाने को हर संभव प्रयास

चित्रकूट। समाजवादी चिंतक डा. राम मनोहर लोहिया द्वारा परिकल्पित राष्ट्रीय रामायण मेले को सैतीसवें वर्ष आयोजित करने के लिये तैयारियों को अंतिम रुप दिया जा रहा है।

तीर्थ नगरी के राष्ट्रीय रामायण मेला भवनम के लोहिया सभागार में मेले के कार्यकारी अध्यक्ष गोपाल कृष्ण करवरिया, मंत्री आचार्य बाबू लाल गर्ग, प्रचार मंत्री डा. करुणा शंकर द्विवेदी,डा.श्याम मोहन त्रिपाठी व देवी दयाल यादव ने पत्रकारों से बात करते हुये बताया कि राष्ट्रीय रामायण मेले का उद्घाटन 12 फरवरी को सूबे के श्रम मंत्री कुंवर बादशाह सिंह करेंगे।
उन्होंने बताया कि देश भर के रामायण के विद्वानों, कथाव्यासों, रंगकर्मियों व राजनेताओं के साथ ही राम लीला मंडलों व रामकथा की विभिन्न तरीकों से प्रस्तुतियां देने वाले दलों व कलाकारों को आमंत्रित किया गया था। अभी तक तमिलनाडु डा. एम शेषन, डा. सुन्दरम, आंध्रप्रदेश से डा. आर एस त्रिपाठी, डा. एन जी देवकी, उप्र से सूर्य प्रकाश दीक्षित, डा. जीतेन्द्र नाथ पांडेय, डा. यतीन्द्र त्रिपाठी, डा. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित, डा. कामता कमलेश, डा. राम अवध शास्त्री हरियाणा से डा. ओम प्रकाश शर्मा आदि विद्वानों के आने की स्वीकृतियां मिल चुकी हैं। बिहार, झारखंड, मप्र, राजस्थान, दिल्ली आदि प्रदेशों से भी तमाम विद्वानों के आने की सूचनायें प्राप्त हो रही हैं। विभिन्न प्रांतों के सांस्कृतिक दलों व वृन्दावन की रास लीला सहित रास लीला, सृजन आर्ट एंड कल्चर नई दिल्ली का बैले ग्रुप, कलाकार डांस इन्टीट्यूट मुंबई, पूर्णिमा और सखियों का नृत्य, रत्नेश का गायन, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के क्षेत्रीय निदेशालय का दल, पवन तिवारी निवाड़ी, रामाधीन आर्य एंड पार्टी मऊरानीपुर, जुगुल किशोर शर्मा लोक नृत्य, रघुवीर सिंह यादव लोकनृत्य झांसी, ललित त्रिपाठी गायन आदि कलाकारों के आने की स्वीकृतियां प्राप्त हो चुकी रहे हैं। इसके अतिरिक्त आकाशवाणी इलाहाबाद, छतरपुर, रींवा, श्री राम कला केंद्र नई दिल्ली, रमा वैद्यनाथन भरतनाट्यम आदि के आने की संभावना है।
आयोजकों ने बताया कि समारोह में जगद्गुरु शंकराचार्य बद्रिकाश्रम स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु स्वामी राम भद्राचार्य, संत फलाहारी दास महाराज अयोध्या व चित्रकूट स्थित सभी अखाड़ों के संत महन्त मौजूद रहेंगे। राम कथा के व्यासों में स्वामी राजेश्वरानंद सरस्वती, गुप्तेश्वरी देवी, मानस मंजरी, रघुराज शरण, पुष्पा गौतम, मीरा दुबे, आदि के आने की स्वीकृतियां आ चुकी हैं। इसके साथ ही परिसर में लगने वाली प्रदर्शनियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। संस्कृति विभाग उप्र, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, केन्द्रीय हथकरघा विभाग, दीन दयाल शोध संस्थान सहित मंडल व जनपद के सभी विभागों की विकासात्मक कार्यो की प्रदर्शनियां लगाई जायेगी।

Wednesday, February 3, 2010

सूखे से जंग जीत मुनव्वर बने धरती के लाल

चित्रकूट। मौसम की मार से परेशान बुंदेलखंड के न जाने कितने किसान पिछले सात सालों में सल्फास खाकर या फांसी लगाकर जान दे चुके हैं। पर इस तस्वीर से उलट एक ऐसा वीर किसान भी है जो भले ही कभी स्कूल न गया हो मगर उसके खेत कभी खाली नहीं रहे। फसलों में वो हमेशा अव्वल रहा।

कभी दूसरों के खेत को किराये पर लेकर खेती करने वाले जनपद के रामपुर तरौंहा गांव के 70 वर्षीय मुनव्वर अली कहते हैं कि उन्होंने जमीन में मेहनत करने को ही अल्लाह की इबारत माना और आज पचास बीघा खेती उसकी ही नियामत है। एक साल में तीन से चार फसलें पैदा करने और खेतों को कभी खाली न रखने वाले मुनव्वर अली उन किसानों के लिए मिसाल बन चुके हैं जो सूखे से परेशान हैं। वे जिले के एक मात्र ऐसे किसान भी हैं जिनके खेतों में पैदा होने वाले आलू इस जिले में बिकते ही नही बल्कि बाहर जाते हैं। इलाहाबाद में कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने के बाद अच्छी कीमत में बेंचने की बात करने वाले श्री अली कहते हैं कि भइया तीस साल हो गये एक भी खेत कभी खाली नही रहा और ऐसी कोई फसल नही जो उन्होंने पैदा ही की। बताते हैं कि वे ही अपने ब्लाक के पहले किसान हैं जिसके खेत में पहली बार रिंग बोर से पानी निकला था। चार-चार ट्यूब बेलों के साथ ही खेती की सभी उन्नतशील तरीके ग्रहण किये। इस दौरान उनका साथ सभी अधिकारियों ने भी खूब दिया।
लगभग बीस बीघा खेत पर आलू की फसल दिखाते हुए उन्होंने कहाकि लगभग 800 क्विंटल आलू हो ही जायेगा। इस समय उनके खेतों में जहां गेंहू, चना, अरहर, सरसों की फसलें लहलहा रही हैं वहीं धनिया, मिर्च, प्याज, आलू, जीरा, बैगन, टमाटर व पालक भी अच्छी मात्रा में लगे दिखे। लगभग पचास लोगों के कुनबे के मुखिया श्री अली ने बताया कि रवी, खरीफ और जायद में तो फसलें वे सभी ले ही लेते हैं। इसके साथ ही जानवरों के लिये बरसीम को भी उगा लेते हैं।
उनकी खेती के तौर तरीके देखने पहुंचे उप निदेशक कृषि मो. आरिफ सिद्दीकी व जिला कृषि अधिकारी एच एन सिंह ने जब सवाल किया कि दवा और खाद का प्रयोग किस तरह और कौन सी कर रहे हैं तो उनका जवाब था कि वो जैविक खेती के हिमायती हैं पर समय की मांग के अनुसार थोड़ा बहुत रासायनिक खाद इस्तेमाल करते हैं। नये-नये प्रयोगों के शौकीन मुनव्वर अली कहते हैं कि एक बार नारियल, छुहारा व बादाम के पेड़ भी लगाये थे पर कामयाबी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि अगर बुंदेली किसान अपनी मेहनत की ताकत को पहचान लें और अपनी मिट्टी में मेहनत करें तो उन्हें कमाने के लिए बाहर जाने की जरुरत नहीं है।

राजेश्वर ने खोजा गिट्टी व मौरम में लोहा

चित्रकूट। बांदा के ग्राम कालींजर स्थित 'श्री पर्वत' के शिलाखंड में एल्यूमिनियम होने की जानकारी देने के बाद अब चित्रकूट के एक रसायन शास्त्री ने मौरम व गिंट्टी में लौह अयस्क होने का दावा किया है। हालांकि चित्रकूट इंटर कालेज के रसायन विज्ञान के प्रवक्ता राजेश्वर प्रसाद फिलहाल यह नहीं बता सके कि मौरम या गिट्टी के एक किलोग्राम अयस्क में कितना लोहा निकलेगा मगर उनका यह कहना कि 'जीर्ण शीर्ण हो चुकी प्रयोगशाला में यह प्रयोग ही कर लेना बड़ी बात है' महत्वपूर्ण है।

श्री प्रसाद ने बताया कि कालींजर पर्वत पर एल्यूमिनियम होने की खबर पढ़कर बांदा के केसीएनआईटी में बी टेक कर रहे उनके पुत्र प्रवीण दत्त नामदेव ने शंका व्यक्त किया कि गिट्टी और मौरम पर प्रयोग किया जाये तो इनमें लौह अयस्क की अच्छी मात्रा हो सकती है। इस बात को सुनकर उन्होंने प्रयोगशाला में मौरम और गिट्टी को लेकर उनका चूरा बनाकर अम्लराज के साथ गर्म किया। फिर उसे पानी के साथ तनुकृत किया। तत्पश्चात उसमें ठोस अमोनियम क्लोराइड डालकर अमोनियम हाइड्राक्साइड मिलाकर उसमें पोटेशियम फेरो साइनाइड मिलाया। इस विलयन के बाद नीले रंग का अवक्षेप प्राप्त हुआ। जिससे मौरम और आरसीसी गिट्टी में आयरन तत्व की उपस्थिति निश्चित तौर पर होना मिला।
उन्होंने कहा कि भले ही पहाड़ों से पत्थर लेकर उसे छोटा कर गिट्टी के रुप में मकानों के उपयोग के लिये बेंचा जा रहा हो पर अगर इसका प्रयोग लौह अयस्क निकालने के लिये किया जाये तो सरकार को ज्यादा मात्रा में राजस्व मिल सकता है। यही बात उन्होंने मौंरम के लिये भी कही।
कालेज के प्रबंधक हरिश्चंद्र गुप्त व कार्यवाहक प्रधानाचार्य चन्द्रिका प्रसाद मिश्र जहां इस शोध से प्रसन्न हैं। वहीं उन्होंने सरकार से अपेक्षा भी किया कि इस क्षेत्र के पर्वतों में अविलम्ब पत्थर निकालने का काम बंद कर इनका शोध व सर्वे का काम किया जाये। इससे और भी स्थानों पर मिलने वाली धातुओं से सरकार के राजस्व की वृद्धि और आम लोगों को रोजगार के रुप लाभ मिल सके।

यूनिवर्सिटी आफ थर्ड एज: चित्रकूट को विश्व पर्यटन मानचित्र में लाये जाने का एक अभिनव प्रयास

चित्रकूट। एक ऐसा सम्मेलन जो वास्तव में चित्रकूट को ऐसा उपहार दे सकने में समर्थ हो सकता था जिसकी कल्पना किसी ने की नही होगी। बात ज्यादा पुरानी नही है जिला बनने के बाद ही इस पावन स्थल को विश्व के पर्यटन मानचित्र में शामिल करने के लिये जिला स्तर पर लिखा पढ़ी की गई थी। वेवसाइट भी बनी, चित्रकूट महोत्सव भी हुआ पर मामला ठाक के तीन पात ही रहा। बीच के वर्षो में कांग्रेस, भाजपा और सपा ने राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठकें कर इसको चर्चा में लाने का काम किया। पिछले साल तो सवा पांच करोड़ शिवलिंग निर्माण ने फिल्मी सितारों के यहां पर आने से लोगों में उत्सुकता जगी कि अब शायद बाहर से आने वाले पर्यटकों में इजाफा हो जाये। ऐसा नही है कि यहां पर पर्यटक विदेशों से आते नही, वे आते तो हैं पर उनकी संख्या खजुराहो और बनारस की तुलना में काफी कम है, पर अब 8 से 10 फरवरी के मध्य विश्व यूनिवर्सिटी आफ थर्ड एज की कांफ्रेस यहां पर आयोजित होने से न सिर्फ महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति और प्राध्यापक बल्कि क्षेत्र की स्वयंसेवी संस्थायें व आम जन इस बात को लेकर काफी आशान्वित हैं कि एक बार पचास देशों के प्रतिनिधियों के एक साथ चित्रकूट आने के बाद जो माहौल बनेगा वह वास्तव में इस स्थान को अनोखी ख्याति दिलायेगा।

ग्रामोदय के कुलपति प्रो. ज्ञानेन्द्र सिंह कहते हैं कि उनका काम तो कर्तव्य का निर्वहन करना है। चित्रकूट अपने आपमें अलौकिक स्थल है। यहां पर बैठकर पचास देशों के साथ ही अपने देश के काफी प्रदेशों के प्रतिनिधि जब दर्शन, आध्यात्मा और धर्म के साथ ही नये-नये विषयों की चर्चा करेंगे तो भला चित्रकूट का ही होगा। योग और आयुर्वेद का धनी यह क्षेत्र बाहर से आने वाले प्रतिभागियों व इंटरनेट के माध्यम से इस विशेष आयोजन को देखने वाले लोगों के लिये चित्रकूट भी विशेष स्थान बनेगा। विवेकानंद सभागार के साथ ही अम‌र्त्यसेन सभागार में कार्यक्रमों को आयोजित करने के लिये तैयारियां प्रारंभ कर दी गई हैं।

Monday, January 18, 2010

लोगों को ही नही मालूम कि कहां पर होना है विकास

चित्रकूट। 'चित्र विचित्रो रुप दर्शनम् समग्रम यस्मिन स कूट: चित्रकूट:' वाल्मीकि रामायणम् में लिखे यह शब्द भले ही यहां पर आने वाले कथावाचकों को यहां पर कथा करने के लिये प्रेरित करते हो पर इस अद्भुद तीर्थ स्थल के विकास के नाम पर किया जाने वाला मजाक लगातार जारी है। रामघाट व परिक्रमा पथ पर तो केंद्रीय सहायता के अन्तर्गत पर्यटन विकास के नाम पर जल निगम के कन्सट्रक्शन एवं डिजायन सर्विसेज द्वारा पिछले तीन महीनों से चल रहे लीपा पोती के खेल को देखकर तो यही लगता है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जो भी कर रहे हैं ठीक काम कर रहे हैं।

गौरतलब है कि पिछले 8 अगस्त केंद्रीय सहायता के अन्तर्गत पर्यटन विभाग से मिले 440.70 लाख रुपयों से प्रारंभ किये गये तीर्थ क्षेत्र के विकास के कामों की झलक तो रामघाट पर विभाग द्वारा लगाये गये बोर्ड को ही देखकर मिल जाती है। सुन्दरीकरण के नाम पर दर्शाये गये मंदिरों का नाम विभाग के अधिकारियों के अलावा कोई नही जानता। स्थानीय स्तर पर लोगों से इन जगहों की जानकारी करने पर कोई भी बता नही पाता।
मसलन राम मंदिर कहां है या फिर राम कुंड मंदिर कहां पर स्थित है सवाल पर विभाग के अधिकारियों के उत्तर साफ नही है। विभाग द्वारा लगाये गये बोर्ड के अनुसार रामघाट की दीवारों पर पत्थर लगाने का काम, शिव जी के मंदिर का सौन्दर्यीकरण, हनुमान जी के मंदिर का सौन्दर्यीकरण, चौपड़ा तालाब का सौन्दर्यीकरण, दीवारों पर रामायण की चौपाइयों लिखा जाना, पंचकोशी परिक्रमा मार्ग पर कैनोपी का निर्माण शामिल हैं। काम प्रारंभ किये जाने की तारीख आठ अगस्त है जबकि काम को खत्म किये जाने की तारीख आठ नवम्बर 10 दिखाई गई है। विभाग के द्वारा जोर जोश से काम को प्रारंभ कराने के बाद एक निजी घर के सामने महिलाओं के कपड़े बदलने का स्थान बना देने के बाद गुलाबी गैंग के दीवार को गिरा देने के बाद काम विवादित हो चुका है। फिलहाल अभी काम के नाम पर खाना पूरी जारी है। जूनियर इंजीनियर सुरेश दुबे ने कहा कि सभी काम मानक के अनुसार ही हो रहे हैं। सभी काम तयशुदा सीमा के अन्तर्गत पूरे करा दिये जायेंगे।

मंदाकिनी के तट पर उमड़ा आस्था का सैलाब

चित्रकूट। माघी आस्थावानों का हुजूम विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर उमड़ पड़ा। यह बात और थी कि सूर्यग्रहण का सूतक काल गुरुवार की रात बारह बजे से प्रारंभ हो चुका था और सभी मंदिरों के पट शुक्रवार की शाम चार बजे के बाद ही खुल पाये। हर एक श्रद्धालु के मुंह पर हाड़कपा देने वाली सर्दी की जगह प्रभु के नाम का स्मरण के साथ ही मां मंदाकिनी में डुबकी मारने का उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। कड़कड़ाती ठंड व पिछले पखवारे से चल रही शीतलहरी की परवाह किये बगैर लाखों श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी में स्नान कर श्री कामदगिरि की परिक्रमा की। श्रद्धालुओं की भीड को देखते हुये प्रशासन ने पर्याप्त व्यवस्थायें की थी।

वैसे गुरुवार देर शाम से ही श्रद्धालुओं का आना इस तीर्थ पर प्रारंभ हो गया था। लोग बसों, ट्रेनों और प्राइवेट वाहनों से यहां पर आ रहे थे। काफी लोग ट्रेनों से उतर कर रामघाट के लिये पैदल ही जा रहे थे तो काफी लोग टैक्सियों से।
मंदाकिनी में स्नान के बाद लाखों श्रद्धालु स्वामी मत्स्यगयेन्द्र नाथ मंदिर पर जलाभिषेक करने के बाद कामदगिरि परिक्रमा की तरफ बढ़े। यहां पर स्वामी कामतानाथ के दर्शनों के बाद 'आस्थावान भज ले पार करइया का' 'भज ले मुरली वाले का' के जयकारे लगाते हुये परिक्रमा कर रहे थे। आस्थावानों में बड़ी संख्या में महिलायें व बच्चे भी शामिल थे। इस बार की अमावस्या की सबसे बड़ी बात यह रही कि लोग ग्रहण काल में भी स्नान व पूजन करते देखे गये। वैसे काफी लोग घाटों के किनारे बैठकर प्रभु के नाम का स्मरण कर रहे थे। रामघाट पर स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा शिविर लगाया था जहां पर लोग जाकर अपना इलाज करा रहे थे। मेला क्षेत्र में अधिकारियों की आमद भी लगातार बनी रही।

सूर्यग्रहण : सूर्यकुंड पर हुई साधना

चित्रकूट। भले ही इस बार सूर्यग्रहण पूरा न रहा हो पर खग्रास सूर्यग्रहण को लेकर लोगों में भारी उत्साह रहा। पुराणों में सूर्य देव द्वारा तप किये जाने वाले स्थान सूर्य कुंड पर जहां आस्थावानों ने ग्रहण के दौरान तप कर सिद्धियों को प्राप्त करने का काम किया। वहीं लोगों ने अपने घरों में केतु द्वारा भगवान सूर्य को ग्रसित करते वक्त प्रभु नाम का स्मरण किया। ग्रहण काल के बाद लोगों का हुजूम मां मंदाकिनी के साथ ही पवित्र सरोवरों की तरफ दौड़ पड़ा। स्नान के बाद शाम चार बजे के आसपास घरों के साथ ही मंदिरों में भी भगवान की पूजा व अर्चना हो सकी।

वैसे सुबह से ही सूर्य ग्रहण को लेकर सभी लोगों में भारी उत्साह था पर बादलों के कारण लोग इस बात को लेकर संशकित भी रहे कि शायद यह दुर्लभ अवसर वे देखने से वंचित न रह जायें पर ठीक साढ़े बारह बजे ही बादलों के छट जाने के साथ लोगों ने स्पष्ट तौर पर इसे देखा। जहां बड़े लोग चश्मों का सहारा ले रहे थे वहीं छोटे-छोटे बच्चे एक्सरे फिल्म के काले भाग पर सूर्य ग्रहण को देखकर उत्साहित हो रहे थे।
सूर्यग्रहण के दौरान लोग घरों में बैठकर भगवान के नाम का स्मरण कर रहे थे। ग्रहण के बाद श्रद्धालुओं का रुख मां मंदाकिनी की तरफ हो गया। इसमें महिलाओं की संख्या काफी ज्यादा थी। स्नान करने के बाद लोगों ने घरों में भगवान की पूजा की और फिर इसके बाद ही खाना खाया।

विकास की मंशा से मप्र के राजनेता भी सामने जुड़े

चित्रकूट। नवीन विचारों की बयार जब बहती है तो लोग खद-ब-खुद ही खिचे चले आते है। चित्रकूट संसद भी एक ऐसी ही ताजी हवा का झोंका है जो अब प्रदेशों की सीमाओं को लाघ रहा है। जिसका उदाहरण है कि चित्रकूट संसद के हमकदम बनने के लिए अब मध्य प्रदेश के सतना जिले के सांसद गणेश सिंह व चित्रकूट विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार के साथ नगर पंचायत नयागांव के अध्यक्ष नीलांशु चतुर्वेदी आतुर हैं। तीनों नेता इस बात पर एकमत हैं कि उप्र और मप्र की सीमाओं में बंटे 'चित्रकूट' का विकास हर दशा में होना चाहिये।

संसद के कार्यक्रम संयोजक अर्चन ने बताया कि शुक्रवार को जब समाजसेवी गोपाल भाई ने इन तीनों नेताओं से बात की तो वे इस कार्यक्रम को समय देने के लिये सहर्ष तैयार हो गये। उन्होंने यह भी कहा कि नेताओं ने आश्वासन दिया कि चित्रकूट के विकास के मुद्दे पर वे साथ हैं। अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान द्वारा बनवाया गया सात पन्नों का 21 सूत्रीय करणीय पत्रक चर्चा का विषय बन चुका है। वहीं चौराहों पर इसके बिंदु बहस का मुद्दा बनते जा रहे हैं। सदर विधायक दिनेश मिश्र का कहना है कि आर्थिक, शैक्षणिक, पर्यटकीय, पर्यावरणीय व धार्मिक विकास के मुददें पर आम लोगों के साथ विशेष लोग भी चिंतन और मनन कर रहे हैं। मानिकपुर ब्लाक प्रमुख विनोद द्विवेदी ने सुझाव पत्रक पढ़ने के बाद इस पहल का स्वागत किया। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के शिक्षाविदों के बीच पत्रक को भरने की होड़ सी लगी दिखाई दे रही है। इसके साथ ही तमाम विद्यालयों में इस पत्रक के सवालों के आधार पर प्रतियोगितायें कराने की तैयारियां भी प्रारंभ हो चुकी हैं।

चित्रकूट को फ्री जोन घोषित करने की जरुरत -प्रदीप

चित्रकूट। गौरव, वैभव व शौर्य का प्रतीक बुंदेलखंड अब सूखा-तबाही और भुखमरी का प्रतीक बन गया है। इस अनोखे तीर्थ क्षेत्र में स्वयंसेवी संगठनों द्वारा समाज के हितों को साधकर चलाई जा रही मुहिम प्रशंसनीय है।

एक दिवसीय दौरे में आये ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन 'आदित्य' ने कहा कि चित्रकूट के विकास के लिए इसे दो राज्यों की सीमाओं में बांधा नहीं जाना चाहिये। यहां पर पर्यटन का विकास तभी हो सकता है जब इसे 'फ्री जोन' घोषित कर दिया जाये। उन्होंने सूचना का अधिकार कानून को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की नसीहत दी। महंगाई के मुद्दे पर अपने ही कृषि मंत्री शरद पवार पर शब्दबाण छोड़ते हुये कहा कि दस दिनों में महंगाई कम करने का पता नही कौन सा फार्मूला उन्होंने ईजाद कर लिया है। बुंदेलखंड की तरक्की के लिये जहां केंद्र सरकार ने राहुल गांधी की विशेष पहल पर एक पैकेज दिया वहीं एक नई योजना पुराने तालाब बावडि़यों और कुंओं की सफाई, कब्जों से मुक्त कराने और उनका सुन्दरीकरण करके विकास के लिये सामने आ चुकी है। इसका नाम आर.आर.आर योजना दिया गया है। अपनी धर्मपत्नी स्नेहलता जैन के साथ चित्रकूट दौरे पर आये केन्द्रीय मंत्री ने जानकी कुंड चिकित्सालय व आरोग्य धाम देखने के साथ ही दृष्टि संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने के साथ ही जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य से आर्शीवाद लिया। यहां पर उन्होंने नगर पंचायत नयांगॉव के नव निर्वाचित अध्यक्ष नीलांशु चतुर्वेदी को शपथ दिलवाने के बाद पद्म श्री नाना जी देशमुख से भेंट करने सियाराम कुटीर पहुंचे। बाद में कामतानाथ मंदिर में पहंचकर मत्था टेका।

संस्था के लिए जमीन दान देना अनुकरणीय पहल

चित्रकूट। आज के इस दौर में जहां मनुष्य जमीन के लिए खून बहा रहा है, वहीं संस्था के लिए जमीन दान कर देना एक अनुकरणीय पहल है।

यह बात आरोग्य धाम परिसर के बगल में नव निर्मित दृष्टि संस्था के ब्रेल उपकरण बैंक व ब्रेल पुस्तकालय के शुभारंभ व नेत्रहीन महिला शिक्षण और प्रशिक्षण केंद्र के शिलान्यास के मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री प्रदीप जैन ने कहीं। उन्होंने दृष्टि संस्था के संरक्षक कृष्ण गोपाल गुप्ता को साधुवाद देते हुए कहा कि उनके द्वारा साढ़े सत्रह बीघा जमीन विकलांगों के कल्याण के लिए दान देना अनुकरणीय कार्य है। उन्होंने कहा कि मरने के बाद जो नाम जाता है वह केवल ऐसे ही धर्मार्थ के कामों के कारण जाता है। दृष्टि के निदेशक विराग गुप्ता ने कहा कि आने वाले समय में संस्था ग्लोबल वार्मिंग की समस्या को देखते हुए चित्रकूट क्षेत्र में पर्यावरण सुधार की एक बड़ी योजना प्रारंभ करेगी। इस योजना में भारी मात्रा में पौधरोपण के साथ ही मंदाकिनी की सफाई का अभियान चलेगा। केंद्रीय मंत्री की पत्नी स्नेहलता जैन, जानकीकुंड चिकित्सालय के सीएमओ डा. बीके जैन, नगर पंचायत अध्यक्ष नीलांशु चतुर्वेदी, ग्रामोदय विवि. के डा.अजय चौरे, डा. नीलम चौरे, सुखदेव शर्मा आदि मौजूद रहे। सभा का संचालन शंकर लाल गुप्ता ने किया।

पृथक राज्य के मुद्दे पर गोलमाल जबाव दे गये मंत्री जी

चित्रकूट। पृथक बुंदेलखंड राज्य के मुद्दे को केंद्रीय मंत्री ने अपना मुद्दा बताते हुए कहा सरकार में रहने के कारण काफी बातें सोच समझकर बोलनी पड़ती है। उन्होंने बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा व बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के साथ ही बुंदेलखंड की मांग करने वालों को उचित ढंग से बात उठाने की नसीहत दी। प्रदीप जैन ने कहा कि पृथक राज्य बनाने के लिए अभी और भी ज्यादा जन जागरुकता की आवश्यकता है। साथ ही बरगढ़ से पावर प्लांट के स्थानांतरण के सवाल पर मंत्री ने कहा कि इस मामले की कोई जानकारी नहीं है। केंद्रिय मंत्री ने चित्रकूट को विलक्षण तीर्थ स्थान बताते हुये कहा कि यह स्थान बुंदेलखंड की नाक है और इसका विकास सभी को साथ मिलकर करना पड़ेगा।

पर्यटन विकास को चित्रकूट हो फ्री जोन

चित्रकूट। ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन 'आदित्य' ने कहा कि कभी गौरव, वैभव व शौर्य का प्रतीक रहा बुंदेलखंड अब सूखा-तबाही और भुखमरी का प्रतीक बन गया है। इस अनोखे तीर्थ क्षेत्र चित्रकूट में स्वयंसेवी संगठनों द्वारा समाज हितों को साधकर चलायी जा रही मुहिम प्रशंसनीय है। चित्रकूट के विकास के लिए उन्होंने कहा कि इसे दो राज्यों की सीमाओं में बांधा नहीं जाना चाहिये। यहां पर पर्यटन का विकास तभी हो सकता है जब इसे 'फ्री जोन' घोषित कर दिया जाये।

एक दिवसीय दौरे पर आये केंद्रीय राज्य मंत्री ने सूचना का अधिकार कानून को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की नसीहत दी। महंगाई के मुद्दे पर अपने ही कृषि मंत्री शरद पवार पर टिप्पणी की कि दस दिनों में महंगाई कम करने का पता नही कौन सा फार्मूला उन्होंने ईजाद कर लिया है। बुंदेलखंड की तरक्की के लिए जहां केंद्र सरकार ने राहुल गांधी की विशेष पहल पर एक पैकेज दिया वहीं एक नई योजना पुराने तालाब बावडि़यों और कुंओं की सफाई, कब्जों से मुक्त कराने और उनका सुन्दरीकरण करके विकास के लिए सामने आ चुकी है। इसका नाम आरआरआर योजना दिया गया है। पत्नी स्नेहलता जैन के साथ चित्रकूट दौरे पर आये केन्द्रीय मंत्री ने जानकी कुंड चिकित्सालय व आरोग्य धाम देखने के साथ ही दृष्टि संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेकर स्वामी रामभद्राचार्य से आशीर्वाद लिया।

स्वावलंबन को चल रहे कार्य से प्रदीप उत्साहित

चित्रकूट। केंद्रिय मंत्री ने सद्गुरु सेवा संघ के सेवा कार्यो को देखा फिर आरोग्यधाम की गौशाला गये। उन्होंने जानकीकुंड चिकित्सालय में लेप्रोकोन कार्यशाला के दौरान मरीजों के आपरेशन के दृश्य देखकर कहा कि उन्होंने अस्पताल के सीएमओ डा. वीके जैन से झांसी में भी यहां की तरह सेवा कार्य के विस्तार करने को कहा। इस काम के लिये उन्हें झांसी आने का न्योता भी दिया।

नई पीढ़ी के हाथ सुरक्षित भविष्य : प्रदीप

चित्रकूट। चित्रकूट नगर पंचायत की नवनिर्वाचित कमेटी को शपथ ग्रहण करवाने पहुंचे केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन 'आदित्य' ने कहा कि जिस माटी पर भगवान राम के साथ ही संतो का आर्शीवाद हमेशा बरसता हो उस भूमि पर जो भी होता है अच्छे के लिये ही होता है। अपने आपको बुंदेली माटी का बेटा बताते हुये कहा कि यहां का इतिहास संघर्ष और समर्पण का रहा है। भले ही यहां की रियासतें छोटी-छोटी रही हो पर रानी लक्ष्मी बाई, आल्हा, उदल और राजा छत्रशाल का नाम तो बच्चों की जुबान पर सुनाई देता है। उन्होंने कहा कि चित्रकूट के विकास के लिये वे अपने स्तर से भी हरसंभव प्रयास करेंगे।

इस दौरान अपर जिलाधिकारी सतना प्रदीप गुप्ता ने नव निर्वाचित नगर पंचायत अध्यक्ष नीलांशु चतुर्वेदी व सभी पन्द्रह सभासदों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके पूर्व कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे कें द्रीय मंत्री व नीलांशु चतुर्वेदी ने परिक्षेत्र से पधारे साधु संतों का आर्शीवाद लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे स्वामी राजगुरु संकषर्णाचार्य प्रपन्नाचार्य महाराज ने चाणक्य और राजनीति का तात्विक विवेचन कर कहा कि धर्म आधारित राजनीति से ही देश सही दिशा में जायेगी। इसकी पुष्टि पुराण करते हैं।
इस अवसर पर द्वारिकेश पटैरिया, चौबे तेज भान सिंह, हेमराज राज चौबे, नंदिता पाठक, डा. वीके जैन, कर्नाटक वाली माता जी, कु. गीता देवी, मु. रसीद उर्फ चीनी, प्यारे भाई व रमादत्त मिश्र सहित भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।

चित्रकूट संसद : अपनी मिंट्टी, अपने लोग और अपना विकास

चित्रकूट। 'अपनी मिट्टी अपने लोग' अपना विकास अब खुद अपने दम पर कुछ ऐसे ही अरमान लेकर जब चित्रकूट संसद की परिकल्पना की गई तो सबके भाव सामने आने लगे। चित्रकूट संसद को लेकर शनिवार को सूचना विभाग के सभागार में कोर ग्रुप की बैठक समाजसेवी गोपाल भाई की अध्यक्षता में हुई।

संवाद के क्रम में तमाम नये विचार आये। उप्र और मप्र के राजनेताओं की सहमति के बाद सभी पार्टियों के जिलाध्यक्षों के साथ स्वयंसेवी संगठनों के साथ आने की सहमति की बात सामने आई। इस दौरान कार्यक्रम संयोजक अर्चन ने बताया कि अभी तक 21 सूत्रीय आठ पत्रक भरकर समिति को प्राप्त हो चुके हैं। जिनमें काफी उपयोगी सुझाव हैं।
बताया कि महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के डा. आर सी सिंह, डा. रघुवंश प्रसाद बाजपेयी, लक्ष्मण प्रसाद गर्ग, गुरु प्रसाद शुक्ल, समाजसेवी आलोक द्विवेदी, भारतीय साहित्यकार परिषद के निदेशक बलबीर सिंह के साथ ही पत्रकार अमर दीप भट्ट ने सुझाव पत्रकों को जमा करने का काम किया है।
बताया कि समिति ने विपक्ष और पक्ष सभी पार्टियों के नेताओं के साथ ही लगभग सौ लोगों के पास पत्रकों को भेजा है। इस अवसर पर केशव शिवहरे,समाजसेवी आलोक द्विवेदी बसपा के जिला उपाध्यक्ष राम सागर चतुर्वेदी व समाजसेवी पंकज अग्रवाल भी मौजूद रहे।

Wednesday, January 13, 2010

अभी बांकी है और भी मानवता के क्रंदक

चित्रकूट। जहां एक तरफ यहां आध्यात्म और धर्म की गंगा इस जिले में बहती हैं वही दूसरी ओर असलहा की संस्कृति भी अपने चरम पर भी यहां पर ही दिखाई देती है। डाकुओं का इतिहास यहां काफी पुराना है। कभी डाकू आत्मसमर्पण करते गये तो कभी भगवे के रंग में अपने आपको रंगते गये। आज के हालातों में भले ही डाकू ददुवा और ठोकिया भगवान को प्यारे हो चुके हो और डाकू खड्गसिंह उर्फ मुन्नी लाल यादव जेल की हवा खा रहे हो पर अभी भी इस जिले स अपराध की इबारत को आगे बढ़ाने में लगे डाकू अपना खूनी खेल खेल रहे हैं।

डाकू संजय यादव, डाकू रागिया उर्फ सुन्दर पटेल, डाकू बलखडिया उर्फ स्वदेश, डाकू राजू कोल जैसे कुछ नाम हैं जो पुलिस के लिये लगातार चुनौतियां पेश कर रहे हैं। डाकू राजा खान भी ऐसा नाम है जो लगातार ठेकेदारों के साथ वन कर्मियों के लिये परेशानियां उत्पन्न रहा है।
बसपा का शासन आने पर जस अंदाज में भयमुक्त समाज की परिकल्पना को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से एसटीएफ ने डाकू ददुवा को गिरोह समेत व डाकू ठोकिया को मारा व उसके बाद डाकू खड्ग सिंह व गौरी यादव को जेल के सीखचों के पीछे डाला, पर अभी भी लगभ आधा दर्जन से ज्यादा डाकुओं के गिरोह मानवता को क्रंदित करने का काम कर रहे हैं।
पिछले महीने डाकू संजय यादव ने तो एक दम से पत्थर की खदानों पर हमला कर अपने मंसूबे स्पष्ट कर पुलिस को खुली चुनौती दी थी। गौर करने लायक बात तो इसमें यह थी कि पुलिस की कांबिंग वहीं पर प्रारंभ थी और एक किलोमीटर के अंतर में गिरोह ने दूसरी वारदात कर दी थी। फिलहाल अभी पुलिस के पास डाकुओं को समाप्त करने की कोई फूल फ्रूफ व्यवस्था नही समझ में आती।
रिटायर्ड पुलिस इंसपेक्टर रंग नाथ शुक्ला कहते हैं कि यहां की गरीबी ही डकैती की जनक है। गरीब को बंदूक के माध्यम से पैसा कमाना ज्यादा आसान लगता है। अगर वास्तव में यहां से डकैती की समस्या का अंत करना है तो उसके लिये सरकारी योजनाओं को क्रियान्वयन गांवों में गरीबों के बीच होना चाहिये।

लोगों की राह तकते ये अनोखे तीर्थ व पर्यटक स्थल

चित्रकूट । जिस स्थान के बारे में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री भगवान राम के चरित्र को सारे विश्व के सामने लाने वाले महर्षि वाल्मीकि ने रामायणम् में लिख दिया हो 'चित्र विचित्रो रुप दर्शनम् समग्रम यस्मिन स कूट: चित्रकूट' और इस बात को सभी स्वीकारते भी हों पर विकास के नाम पर कुछ ही स्थानों पर आने और जाने के साधन बन सके हैं। ज्यादातर जगहों के बारे में ग्रामीणों के अलावा कोई जानता ही नही है।

वैसे अगर पुराने ग्रंथों के पन्नों को पलटा जाये तो इस चौरासी कोस के परिक्षेत्र में काफी ऐसे अद्भुद स्थान हैं जो वक्त के बेरहम हाथों पर पड़़कर अपने अस्तित्व के लिये ही संघर्ष कर रहे हैं। चर गांव का सोमनाथ का मंदिर हो या फिर मडफा पहाड़ पर स्थित पंचमुखी शंकर जी का मंदिर या फिर कलवलिया का शिव मंदिर।
भागवत कथा आचार्य पं. नवलेश दीक्षित कहते हैं कि यह तो चित्रकूट की महिमा है कि जहां शिव, शक्ति और राम को पूजने वाले वैष्णव एक साथ रहते हैं और किसी भी प्रकार का मतान्तर नही है। सुबह का सूरज महाराजाधिराज स्वामी मत्स्यगयेन्द्र नाथ के दर्शन से उगता है तो दोपहर की परिक्रमा कामतानाथ के विग्रह की होती है शाम की आरती लोग वन देवी की करते हैं। द्वैत और अद्वैत वाद से विलग इस अनोखे तीर्थ पर पर आज भी काफी पुराने ऋषि तपस्या रत हैं। इसी प्रकार से यहां के पर्वतों व जंगलों में विशेष आराधना के स्थल है। जिनमें अधिकतर तो लोगों को पता ही नही। यह बात अलग है कि सीतापुर और आसपास के स्थानों के बारे में लोगों को जानकारी है पर शबरी प्रपात, राम प्रपात, गणेश बाग, बांके सिद्ध, कोटितीर्थ, देवांगना, सीता रसोई, पंपासर, वन देवी, हंस तीर्थ, सिरसावन, पंचप्रयाग, फलकी वन, रामशैया, व्यास कुंड, सूर्य कुंड, मडफा, बाल्मीकि आश्रम, सरभंग आश्रम, धारकुंडी, सारंग तीर्थ, ऋषियन, ब्रहस्पति कुंड, विराध कुंड, अमरावती, भरतकूप, पुष्करिणी,माण्डकर्णी आश्रम के साथ ही तमाम ऐसे स्थान हैं जहां पर अभी भी पर्यटक नही जाते हैं।
वे कहते हैं कि अगर इन स्थानों पर लोगों के आवागमन के लिये सड़क, बिजली, पानी और सुरक्षा की व्यवस्था हो जाये तो लोग जाने लगेंगे। इससे इन स्थानों का विकास होने के साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
जिला विद्यालय निरीक्षक मंशा राम कहते हैं कि अभी पिछले दिनों उन्होंने राजकीय इंटर कालेज घुरेटनपुर के निरीक्षण के समय मड़फा के शिव मंदिर का दर्शन किया। उन्होंने बताया कि यही पर एक कोठरी में राम- राम लिखा हुआ भी काफी विशेष था। कहा कि अभी डाकुओं के डर से पर्यटक वहां पर नही जा पाते और इतनी विलक्षण जगहों का प्रचार प्रसार भी नही है। अगर इन स्थानों का प्रचार-प्रसार सही तरीके से हो तो निश्चित तौर पर पर्यटक जायेंगे और आनंदित होगे।

🕉️🚩 गंगा दशहरा पर सेवा का अमृत : रामघाट पर त्रिवेणी शरबत महोत्सव बना जनसेवा का उत्सव 🚩🕉️

चित्रकूट धाम के पावन रामघाट में आयोजित त्रिवेणी शरबत महोत्सव 2026 श्रद्धा, सेवा और सनातन संस्कृति का अनुपम संगम बनकर सामने आया। भीषण ग्रीष्म...