चित्रकूट। बांदा के ग्राम कालींजर स्थित 'श्री पर्वत' के शिलाखंड में एल्यूमिनियम होने की जानकारी देने के बाद अब चित्रकूट के एक रसायन शास्त्री ने मौरम व गिंट्टी में लौह अयस्क होने का दावा किया है। हालांकि चित्रकूट इंटर कालेज के रसायन विज्ञान के प्रवक्ता राजेश्वर प्रसाद फिलहाल यह नहीं बता सके कि मौरम या गिट्टी के एक किलोग्राम अयस्क में कितना लोहा निकलेगा मगर उनका यह कहना कि 'जीर्ण शीर्ण हो चुकी प्रयोगशाला में यह प्रयोग ही कर लेना बड़ी बात है' महत्वपूर्ण है।
श्री प्रसाद ने बताया कि कालींजर पर्वत पर एल्यूमिनियम होने की खबर पढ़कर बांदा के केसीएनआईटी में बी टेक कर रहे उनके पुत्र प्रवीण दत्त नामदेव ने शंका व्यक्त किया कि गिट्टी और मौरम पर प्रयोग किया जाये तो इनमें लौह अयस्क की अच्छी मात्रा हो सकती है। इस बात को सुनकर उन्होंने प्रयोगशाला में मौरम और गिट्टी को लेकर उनका चूरा बनाकर अम्लराज के साथ गर्म किया। फिर उसे पानी के साथ तनुकृत किया। तत्पश्चात उसमें ठोस अमोनियम क्लोराइड डालकर अमोनियम हाइड्राक्साइड मिलाकर उसमें पोटेशियम फेरो साइनाइड मिलाया। इस विलयन के बाद नीले रंग का अवक्षेप प्राप्त हुआ। जिससे मौरम और आरसीसी गिट्टी में आयरन तत्व की उपस्थिति निश्चित तौर पर होना मिला।
उन्होंने कहा कि भले ही पहाड़ों से पत्थर लेकर उसे छोटा कर गिट्टी के रुप में मकानों के उपयोग के लिये बेंचा जा रहा हो पर अगर इसका प्रयोग लौह अयस्क निकालने के लिये किया जाये तो सरकार को ज्यादा मात्रा में राजस्व मिल सकता है। यही बात उन्होंने मौंरम के लिये भी कही।
कालेज के प्रबंधक हरिश्चंद्र गुप्त व कार्यवाहक प्रधानाचार्य चन्द्रिका प्रसाद मिश्र जहां इस शोध से प्रसन्न हैं। वहीं उन्होंने सरकार से अपेक्षा भी किया कि इस क्षेत्र के पर्वतों में अविलम्ब पत्थर निकालने का काम बंद कर इनका शोध व सर्वे का काम किया जाये। इससे और भी स्थानों पर मिलने वाली धातुओं से सरकार के राजस्व की वृद्धि और आम लोगों को रोजगार के रुप लाभ मिल सके।
एक ऐसा स्थान जो विश्व भर के लोगो के लिये किंवदंतियों कथाओं कथानकों के साथ ही यथार्थ चेतना का पुंज बना हुआ है। प्रजापति ब्रह़मा के तपोबल से उत्पन्न पयस्वनी व मां अनुसुइया के दस हजार सालों के तप का परिणाम मां मंदाकिनी के साथ ही प्रभु श्री राम के ग्यारह वर्ष छह माह और अठारह दिनों के लिये चित्रकूट प्रवास के दौरान उनकी सेवा के लिये अयोध्या से आई मां सरयू की त्रिवेणी आज भी यहां पर लोगों को आनंद देने के साथ ही पापों के भक्षण करने का काम कर रही है।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
चित्रकूट में दर्शन का महासंगम, विश्व शांति की दिशा में उभरा नया चिंतन
चित्रकूट: जब मंदाकिनी के तट पर विचारों की धारा बहती है, तब चित्रकूट केवल एक तीर्थ नहीं रहता—वह विश्व के बौद्धिक मंथन का केंद्र बन जाता है। त...
-
धनवंतरी महायज्ञ _डीएम ने परिवार सहित डाली आहुतियां _अमेरिका,कोलकाता के साथ बुंदेलखंड और स्थानीय चिकित्सकों ने डाली आहुतियां _ स्थानीय के सा...
-
_शहर के एक रेस्टोरेंट में आयोजित किया गया कार्यक्रम चित्रकूट। धर्मनगरी में 9 दिनों तक मां दुर्गा की आराधना का क्रम लगातार जारी रहा।इस दौरान ...
-
. संगठन को मजबूत बनाने का दिलाया भरोसा . 31 अगस्त को संत सम्मेलन की जोरदार तैयारियां में जुटे संदीप रिछारिया राष्ट्रव्यापी संगठन नरेन्द्र मो...
No comments:
Post a Comment