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शूटिंग में पदक के लिए होगी मशक्कत

धर्मनगरी की वादियों में शूटिंग रेंज स्थापित करने की पहल चित्रकूट, संवाददाता: जल्द ही धर्मनगरी की वादियों में बंदूकों के गरजने की आवाजें आम हो जाएंगी। चौंकिये मत, यह बंदूक की आवाजें डाकुओं और पुलिस के बीच मुठभेड़ की नही बल्कि ओलंपिक का तमगा अपनी धरती पर लाने के लिये होंगी। नेशनल कैडिट कोर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के उपमहानिदेशक बिग्रेडियर आर विनायक ने चित्रकूट के शांत वातावरण को शूटिंग के अनुरुप पाकर यहां पर शूटिंग रेंज स्थापित किये जाने के प्रस्ताव पर अपनी सैद्धान्तिक मुहर लगाते हुये कहा कि उनका सपना तो अगला ओलंपिक का पदक चित्रकूट के बच्चे के हाथ में देखकर पूरा होगा। दीन दयाल शोध संस्थान के उद्यमिता विद्या पीठ में जागरण से बात करते हुये बिग्रेडियर ने कहा कि नेशनल कैडिट कोर भविष्य बनाता नही बल्कि बच्चों को भविष्य के लिये तैयार करता है। इस समय देश भर में तेरह लाख कैडिट हैं अगले पांच सालों में दो लाख कैडिटों के लिये और भी एनसीसी में आने के अवसर बन रहे हैं। चित्रकूट के आयुर्वेदिक कालेज में भी एनसीसी की यूनिट के लिये जल्द ही सीनियर डिवीजन की एनसीसी की स्वीकृति कर दी जायेगी। उन्होंने गर्व...

एक सोच से बदल गई गांव की तस्वीर

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 'हिम्मते मर्दा तो मदद-ए-खुदा' अगर धर्मस्थली से सटे हुए खुटहा गांव में नजर डाले तो आजादी के बाद काफी सालों तक यह गांव भी बुंदेलखंड के अन्य गांवों की तरह ही बदहाल था पर समय के बदलाव को अंगीकार करने के साथ ही जब खेती के विविधीकरण के प्रयोगों को धरातल पर काम जब स्व. देवी प्रसाद शुक्ला ने किया तो न केवल अपनी किस्मत के दरवाजे खोले बल्कि अपने गांव के साथ ही आसपास के गांवों की किस्मत को भी बदल दिया। आज इस गांव की कुल 200 हेक्टेयर की जमीन में से आधी जमीन सब्जी उत्पादन कर सोना उगलने का काम कर रही है। लगभग तीस साल पहले हुये हुये सब्जी उत्पादन के प्रयोग ने न केवल इस गांव मे क्रांति ला दी बल्कि आसपास के गांवों को भी मेहनत करने की एक नई राह दिखा दी। समाजसेवी व उन्नतशील किसान शिव कुमार शुक्ला कहते हैं कि इस गांव में पहले भी खेती होती थी जो वर्षा के जल पर आधारित थी। सबसे पहले पिता जी ने कुएं पर रहट लगवाया, तो आधे गांव के खेत रहट से सींचे जाते थे उसके पास डीजल पम्प आया और बाद में जिले का पहला टयूब बेल भी उनके यहां पर ही लगा। इसके साथ ही उन्होंने हर खेत की मेड पर पक्की नालियों का निर्माण कराया...

अब कर्वी से चित्रकूट जाना होगा आसान

चित्रकूट, संवाददाता: कर्वी से होकर धर्मनगरी जाने वालों के लिये खुशखबरी। अरसे से बदहाल सड़क के दिन बहुर गये हैं। नयागांव से डिलौरा तक की सड़क निर्माण का कार्य प्रारंभ हो चुका है। इससे अब कर्वी से छोटे वाहनों से बेड़ी होकर चित्रकूट जाने में चार किलोमीटर के फासले की बचत संभव हो जायेगी। सब कुछ ठीक रहा तो आजादी के पहले जिस सड़क से होकर हमारे पुरखे धर्मनगरी जाया करते थे चार माह बाद हम उस पर गाड़ियों पर बैठकर जा सकेंगे। उत्तर प्रदेश के बाद मध्य प्रदेश ने भी अब पहल कर कर्वी से नयागांव की दूरी को कम करने का प्रयास किया है। नगर पंचायत की इस पहल का स्वागत तरौंहा, डिलौरा लोहसरिया आदि गांवों के साथ ही स्थानीय लोग कर रहे हैं। पुरानी बाजार के महिला चिकित्सालय चौराहे से होकर धर्मनगरी कुछ ही समय बाद सीधे जाने लायक हो जायेगी। इससे धर्मनगरी पहुंचने में लोगों को चार किलोमीटर का फासला कम हो जायेगा। उल्लेखनीय है कि बांदा से कर्वी होकर इलाहाबाद जाने वाली सड़क बनने के पहले राजशाही समय में धर्मनगरी की यात्रा पैदल ही हुआ करती थी। उस समय ज्यादातर लोग पैदल ही चित्रकूट जाया करते थे। यह यात्रा कर्वी के पुरानी बाजार से ...

मंदिर निर्माण को संतों ने भरी हुंकार

चित्रकूट, संवाददाता: निर्माेही अखाड़े के गोलोकवासी महंत श्री राम आसरे दास जी महाराज की द्वितीय पुण्य तिथि पर जुटे संतों ने हुंकार भरते हुए कहा कि श्री रामलला का मंदिर तो उसी जमीन पर ही बनेगा। मंदिर के बगल में मस्जिद बनने से विवाद कभी खत्म नहीं हो सकता। केंद्र सरकार को सोमनाथ मंदिर की तरह ही कानून बना भव्य मंदिर बनवाने में सहयोग करना चाहिये। निर्माेही अखाडे़ के महंत ओंकार दास महाराज ने कहा कि यह मामला हिन्दू समाज की अस्मिता का है। अभी तो मामला सौहार्द से निपटाने के प्रयास हो रहे हैं पर अगर बात न बनी तो सुप्रीम कोर्ट का रास्ता ही अपनाया जायेगा। अगर मंदिर के बगल में मस्जिद बनी तो विवाद कभी खत्म नही होगा। जब मुस्लिम भाई यह मानते हैं कि वास्तव में वही स्थान की जन्म भूमि है तो फिर बची जमीन को छोड़कर उससे दूर कहीं भी मस्जिद का निर्माण कर लें। हिंदू समाज उसमें पूरी तरह से सहयोग करेगा। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र सिंह पंकज के विचार भी कुछ इसी तरह के थे। उन्होंने पूज्य संत राम आसरे दास को याद करते हुए उनसे जुड़े संस्मरण सुनाये। कहा कि केंद्र सरकार की मंशा राम जन्म भूमि मामले को नि...

विहिप जल्द जायेगी जनता के द्वार

जनता के सामने श्री रामलला की जमीन के ऐतिहासिक, पुरातात्विक व धार्मिक साक्ष्य रखेगी चित्रकूट, संवाददाता: अभी तो हाईकोर्ट के माध्यम से आधे संघर्ष पर जीत हासिल की है। आगे का संघर्ष और भी ज्यादा कठिन है। लेकिन जब खुद ही राम लला अपनी पैरवी कर रहे हैं तो फिर चिंता किस बात की। लेकिन केंद्र सरकार को चाहिये कि अपना मुख और मुखौटा एक करे और हिंदुओं की जमीन को हिंदुओं को कानून बनाकर सौंप दे। जिससे पूर्व विश्व के सामने पुरुषों में सबसे उत्तम मर्यादा के स्वरूप श्री राम लला सरकार का भव्य मंदिर का निर्माण हो सके। यह विचार गोलोकवासी निर्मोही अखाड़े के श्री महंत स्वामी राम आसरे दास जी महाराज की दूसरी पुण्य तिथि पर आये विश्व हिंदू परिषद के नेताओं ने जागरण से विशेष बातचीत में व्यक्त किये। राष्ट्रीय धर्माचार्य प्रमुख अशोक तिवारी ने सीधे तौर पर कहा कि जब श्री राम लला खुद ही अपने पक्षकार हैं तो फिर मामला गड़बड़ कैसे हो सकता है। परिषद का काम तो निर्मोही अखाड़ा व श्री राम लला की तरफ से पैरवी करने वालों को एक साथ सुप्रीम कोर्ट में खड़ा करने की है। इस दिशा में प्रयास जारी भी है। उन्होंने कहा कि अब जल्द ही जनता की ...

आईआईएम छात्रों ने नानाजी के जीवांत मानव दर्शन को देखा

चित्रकूट, संवाददाता: एकात्म मानव दर्शन की राह पर चलकर जब नानाजी देशमुख ने गांवों के लोगों को स्वावलंबन के सहारे रास्ते पर लाने का काम किया तो हालात बदलने लगे। देखते ही देखते न केवल गांवों में खुशहाली आने लगी और लोगों का मेहनत करने के प्रति समर्पण बढ़ने लगा। इस मॉडल को देखने के लिये मंगलवार को इंदौर के आईआईएम से छात्रों के दल ने दीन दयाल शोध संस्थान के विभिन्न प्रकल्पों को देखा और खुले मन से तारीफ की। प्रो. वैभव भदौरिया के नेतृत्व में आये छात्रों ने कृषि विज्ञान केंद्र मझगंवा, कृष्णा देवी वनवासी बालिका आवासीय विद्यालय, उद्यमिता विद्या पीठ, राम दर्शन, गुरुकुल संकुल, नन्ही दुनिया और आरोग्य धाम द्वारा आयोजित गतिविधियों को देखा। संस्थान के प्रधान सचिव डा. भरत पाठक ने कहा कि आप लोगों की प्रबंधन की यह पढ़ाई सिर्फ पैसा कमाने का साधन न बने बल्कि समाज और राष्ट्र की चिंता करते हुये राष्ट्र के विकास में भागीदारी का माध्यम बने। जेपी फाउंडेशन की निदेशक डा. नंदिता पाठक ने युवा शक्ति को अपने अतीत से प्रेरणा लेते हुये राष्ट्र के हितों को साधकर जुटने की बात कही।

मंदाकिनी की गोद झिलमिलाने लगे तारे

- स्वामी कामतानाथ बने साक्षी चित्रकूट, संवाददाता : आसमान के तारों को देखें या फिर मां मंदाकिनी के जल में दोनों में तैरते झिलमिल दीपकों को, लगता है कि मानों काली अमावस्या की रात को खुद ही तारे जमीन पर उतर कर झिलमिलाने लगे हों। यह नजारा है तीर्थ स्थल चित्रकूट में दीपावली के मौके पर दीपदान का। इस नजारे को देखकर यहां पर इस मौके पर आने वाले लाखों श्रद्धालु इन क्षणों को अपने जीवन की अनमोल यादगार बनाते नजर आये। दीपदान करने के लिये इस पवित्र नगरी में आये श्रद्धालुओं के लिये दीपक ही कम पड़ गये। श्रद्धालुओं ने मां मंदाकिनी और स्वामी कामतानाथ में दीपदान करने का तरीका भी खोज लिया। मिट्टी की दिउलिया की जगह आटे की लोई पर देउलिया बना कर उस पर देशी घी की बाती लगाकर उसे मंदाकिनी के पवित्र जल में प्रवाहित किया। यही काम श्रद्धालुओं ने स्वामी कामतानाथ के पर्वत पर भी किया। मां मंदाकिनी का रामघाट हो या फिर राघव प्रयाग, भरतघाट या फिर आमोदवन, प्रमोदवन या फिर जानकीकुंड सती अनुसुइया के घाट सभी जगह जलराशि में तैरते दीपक अपनी मद्धिम रोशनी से लड़ते दिखाई दे रहे थे। इसी बीच दुल्हन की तरह सजे मठ मंदिरों और राजप्रसाद...