Monday, November 8, 2010

विहिप जल्द जायेगी जनता के द्वार

जनता के सामने श्री रामलला की जमीन के ऐतिहासिक, पुरातात्विक व धार्मिक साक्ष्य रखेगी

चित्रकूट, संवाददाता: अभी तो हाईकोर्ट के माध्यम से आधे संघर्ष पर जीत हासिल की है। आगे का संघर्ष और भी ज्यादा कठिन है। लेकिन जब खुद ही राम लला अपनी पैरवी कर रहे हैं तो फिर चिंता किस बात की। लेकिन केंद्र सरकार को चाहिये कि अपना मुख और मुखौटा एक करे और हिंदुओं की जमीन को हिंदुओं को कानून बनाकर सौंप दे। जिससे पूर्व विश्व के सामने पुरुषों में सबसे उत्तम मर्यादा के स्वरूप श्री राम लला सरकार का भव्य मंदिर का निर्माण हो सके।
यह विचार गोलोकवासी निर्मोही अखाड़े के श्री महंत स्वामी राम आसरे दास जी महाराज की दूसरी पुण्य तिथि पर आये विश्व हिंदू परिषद के नेताओं ने जागरण से विशेष बातचीत में व्यक्त किये। राष्ट्रीय धर्माचार्य प्रमुख अशोक तिवारी ने सीधे तौर पर कहा कि जब श्री राम लला खुद ही अपने पक्षकार हैं तो फिर मामला गड़बड़ कैसे हो सकता है। परिषद का काम तो निर्मोही अखाड़ा व श्री राम लला की तरफ से पैरवी करने वालों को एक साथ सुप्रीम कोर्ट में खड़ा करने की है। इस दिशा में प्रयास जारी भी है। उन्होंने कहा कि अब जल्द ही जनता की अदालत के सामने हाई कोर्ट के द्वारा दिये गये फैसले के समय बताई गई पूरी सच्चाई को लाया जायेगा। जब ऐतिहासिक, धार्मिक और पुरातात्विक सभी तरह के साक्ष्य श्री राम मंदिर के समर्थन में अपनी गवाही दे रहे हैं तो फिर तैंतीस प्रतिशत जमीन को मुस्लिम समाज को देना कहां का उचित है। उन्होंने कहा कि फैसला आने के पहले विहिप और बजरंग दल के नेताओं को जेल में भेजना और नजरबंद कर देना कहां का उचित था। हिंदू की मानसिकता दंगा फैलाने या लड़ाई झगड़े की नही होती।
बजरंग दल के प्रांतीय संयोजक शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी हिंदुओं के पक्ष में ही आयेगा। सुलह समझौते का प्रयास चल रहा है पर मुस्लिम नेताओं का तो अपना ही राग है। जब कोर्ट ने उनके मामले को ही खारिज कर दिया तो अब वे जाने क्यों हल्ला मचा रहे हैं। जबलपुर से आये जुगराजधर द्विवेदी, भोपाल से आये बिहारी लाल, प्रांतीय गौरक्षा प्रमुख अतुल द्विवेदी व अवध बिहारी मिश्र ने भी अपने विचार कुछ इसी अंदाज में दिये।

आईआईएम छात्रों ने नानाजी के जीवांत मानव दर्शन को देखा

चित्रकूट, संवाददाता: एकात्म मानव दर्शन की राह पर चलकर जब नानाजी देशमुख ने गांवों के लोगों को स्वावलंबन के सहारे रास्ते पर लाने का काम किया तो हालात बदलने लगे। देखते ही देखते न केवल गांवों में खुशहाली आने लगी और लोगों का मेहनत करने के प्रति समर्पण बढ़ने लगा। इस मॉडल को देखने के लिये मंगलवार को इंदौर के आईआईएम से छात्रों के दल ने दीन दयाल शोध संस्थान के विभिन्न प्रकल्पों को देखा और खुले मन से तारीफ की।

प्रो. वैभव भदौरिया के नेतृत्व में आये छात्रों ने कृषि विज्ञान केंद्र मझगंवा, कृष्णा देवी वनवासी बालिका आवासीय विद्यालय, उद्यमिता विद्या पीठ, राम दर्शन, गुरुकुल संकुल, नन्ही दुनिया और आरोग्य धाम द्वारा आयोजित गतिविधियों को देखा।
संस्थान के प्रधान सचिव डा. भरत पाठक ने कहा कि आप लोगों की प्रबंधन की यह पढ़ाई सिर्फ पैसा कमाने का साधन न बने बल्कि समाज और राष्ट्र की चिंता करते हुये राष्ट्र के विकास में भागीदारी का माध्यम बने।
जेपी फाउंडेशन की निदेशक डा. नंदिता पाठक ने युवा शक्ति को अपने अतीत से प्रेरणा लेते हुये राष्ट्र के हितों को साधकर जुटने की बात कही।

मंदाकिनी की गोद झिलमिलाने लगे तारे

- स्वामी कामतानाथ बने साक्षी

चित्रकूट, संवाददाता : आसमान के तारों को देखें या फिर मां मंदाकिनी के जल में दोनों में तैरते झिलमिल दीपकों को, लगता है कि मानों काली अमावस्या की रात को खुद ही तारे जमीन पर उतर कर झिलमिलाने लगे हों। यह नजारा है तीर्थ स्थल चित्रकूट में दीपावली के मौके पर दीपदान का। इस नजारे को देखकर यहां पर इस मौके पर आने वाले लाखों श्रद्धालु इन क्षणों को अपने जीवन की अनमोल यादगार बनाते नजर आये। दीपदान करने के लिये इस पवित्र नगरी में आये श्रद्धालुओं के लिये दीपक ही कम पड़ गये। श्रद्धालुओं ने मां मंदाकिनी और स्वामी कामतानाथ में दीपदान करने का तरीका भी खोज लिया। मिट्टी की दिउलिया की जगह आटे की लोई पर देउलिया बना कर उस पर देशी घी की बाती लगाकर उसे मंदाकिनी के पवित्र जल में प्रवाहित किया। यही काम श्रद्धालुओं ने स्वामी कामतानाथ के पर्वत पर भी किया। मां मंदाकिनी का रामघाट हो या फिर राघव प्रयाग, भरतघाट या फिर आमोदवन, प्रमोदवन या फिर जानकीकुंड सती अनुसुइया के घाट सभी जगह जलराशि में तैरते दीपक अपनी मद्धिम रोशनी से लड़ते दिखाई दे रहे थे। इसी बीच दुल्हन की तरह सजे मठ मंदिरों और राजप्रसादों व नैसर्गिक सुषमा से सजे स्वामी कामतानाथ के पर्वत पर जलते दिये मानों अंधकार से प्रकाश की ओर मानव को ले जाने की अगुवाई कर रहे थे। दीवारी नर्तकों की टेर हो या फिर परिक्रमा करते श्रद्धालुओं के मुंह से निकलने वाला भज ले पार करइया का.., भज ले पर्वत वाले का उस आस्था की पराकाष्ठा की कहानी कह रहे हैं। दीपावली से ठीक एक दिन पहले यह मेला सदियों से होता आ रहा है। दीपावली की काली अंधेरी रात में मंदाकिनी के जल के साथ ही भगवान कामतानाथ में उतराते दीपक मानव को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने की प्रेरणा से भर देते हैं।

मन्नतों के दीप जला मांगी खुशहाली

दीपावली अमावस्या मेला


- विदेशी भी वैदिक संस्कृति के सोपानों से परिचित हो रहे
चित्रकूट, संवाददाता: श्री कामदगिरि पर्वत की कोई जगह व मां मंदाकिनी का कोई घाट बांकी न रहा, आस्था में डूबे लोगों ने हर जगह दीये रोशन कर सबकी खुशहाली की मन्नत मांगी। धर्म और आस्था के पांच दिनों तक चलने वाले दीप महोत्सव में जहां देश भर के आस्थावान अपना शीश नवाने भगवान कामतानाथ स्वामी के दरबार में पहुंच रहे हैं वहीं विदेशी भी वैदिक संस्कृति के सोपानों से परिचित होने का काम कर रहे हैं।
पुरानी वैदिक मान्यताओं के हिसाब से श्री कामदगिरि पर्वत के नीचे क्षीर सागर पर भगवान श्री विष्णु शेषशैया पर विश्राम करते हैं और मां लक्ष्मी उनकी सेवा में रहती हैं। दीपावली की रात मां अपने भक्तों को धन और धान्य से पूरित होने का आर्शीवाद देने बाहर निकलती हैं और श्री कामदगिरि के प्रमुख चार द्वारों से उनका आगमन भक्तों के दर्शनों के लिये होता है। इस मान्यता के चलते जहां पिछले तीन दिनों के अंदर उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश क्षेत्र से आने वाले लाखों श्रद्धालु भगवान कामतानाथ के दरबार में दीप प्रज्वलित कर अपनी हाजिरी लगा चुके हैं वहीं भक्तों का रेला और भी तेजी से बढ़ता जा रहा है। यही हाल मां मंदाकिनी के विभिन्न घाटों पर देखा जा रहा है। श्रद्धालुओं के इस पौराणिक तौर स्थल पर आने के लिये उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश में बसों, ट्रेनों की अतिरिक्त व्यवस्था होने के कारण लोगों को सुगमता हो रही है। इसके साथ ही यात्री कर्वी, शिवरामपुर, भरतकूप से लोग पैदल भी चित्रकूट की यात्रा कर रहे हैं। टेंपो व टैक्सी को रामायण मेला परिसर तक जाने व वापस आने के लिये शिवरामपुर का रास्ता देने के कारण यातायात में भी नियंत्रण बना हुआ है। वैसे उत्तर प्रदेश में भीड़-भाड़ वाली मुख्य पांच जगहों पर सीसीटीवी कैमरों के होने व मध्य प्रदेश में भी चार स्थानों पर सीसीटीवी होने के कारण मेले की हर गतिविधि पर अधिकारियों को नजर रखने में सहूलियत हो रही है।
अपर जिलाधिकारी राजाराम, पुलिस अधीक्षक डा. तहसीलदार सिंह, एसडीएम कर्वी गुलाब चंद्र लगातार मेला क्षेत्र में भ्रमण कर स्थिति का जायजा लेने का काम कर रहे हैं। इसके साथ ही सेक्टर मजिस्ट्रेट व नगर पालिका परिषद के अधिशाषी अधिकारी जीतेन्द्र आनंद व मुख्य खाद्य निरीक्षक चंद्रशेखर मिश्र लगातार मेला क्षेत्र में गस्त करते दिखाई दिये।
इनसेट
नहीं दिखी लटकी सवारी
सर्तक प्रशासन ने इस बार पहले से ही चाक चौबंद प्रबंध कर रखे थे। टैक्सी टैंपों वालों को कड़ी हिदायत देने का फायदा यह मिला कि उत्तर प्रदेश क्षेत्र में कहीं पर भी वाहनों से बाहर लटकी सवारियां नही दिखाई दी। रोडवेज व प्राइवेट बसें भी मेला क्षेत्र से काफी दूर पार्क कराने के कारण मेले में न तो जाम लगने की स्थिति दिखाई दी और न ही कहीं भगदड़ जैसी स्थिति मिली। वैसे मेला का क्षेत्रफल अधिक होने व लगातार श्रद्धालुओं के चलते रहने के परिणाम स्वरूप मेले में एक जगह पर भीड़ जमा होने की गुंजाइश कम होने का फायदा भी अधिकारियों व कर्मियों को मिलता है।
भारी मात्रा में पैदल पहुंचे श्रद्धालु
जहां एक तरफ तीर्थ स्थल वाहनों से पहुंचने वालों की भारी संख्या थी वहीं दीपदान का पुण्य लाभ उठाने वालों में काफी संख्या में पैदल यात्री भी शामिल रहे। कर्वी से तरौंहा, डिलौरा, लोहसरिया, नयागांव होकर पैदल यात्रियों के लिये सबसे ज्यादा सुगम और जल्द पहुंचाने वाला रास्ता रहा तो बेड़ी पुलिया क्रासिंग पर ट्रेनों के अमावस्या पर स्टापेज होने का फायदा भी श्रद्धालुओं को मिला। इसके साथ ही कर्वी रेलवे स्टेशन, शिवरामपुर व भरतकूप से भी काफी लोग धर्म नगरी पहुंचे। भरतकूप रेलवे स्टेशन उतरने वालों ने धर्मनगरी पहुंचने के लिये दो रास्ते चुने। पहला रास्ता माडव्य ऋषि की तपस्थली मडफा से गुप्त गोदावरी होते हुए तीर्थ नगरी का रूख किया तो दूसरा रास्ता भरतकूप मंदिर से रामशैया होते हुए पीलीकोठी वाला रास्ता रहा। कर्वी से सोनेपुर, पम्पासर हनुमान धारा वाला रास्ता भी लोगों की पसंद बना।
मौनियों ने तोड़ा मौन वृत
हर साल की तरह इस साल भी बुंदेलखंड व बघेलखंड क्षेत्र के हजारों मौनियों ने अपना मौन वृत श्री कामदगिरि की परिक्रमा के बाद तोड़ा। पौराणिक मान्यता के अनुसार गौ पालन का श्री कृष्ण दिया हुआ मंत्र लेकर साल भर मौन गाय चराने वाले यह मौनिया रोज एक एक मोर का पंख लेकर उसी के सहारे गायों को चराने का काम करते हैं। साल भर मोर पंखों को इकट्ठा करने के बाद उसको गाय की पूंछ की रस्सी से बांधकर उसका पूजन व अर्चन करते हैं। दीपावली के मौके पर मां मंदाकिनी में मोरपंखों को स्नान कराने के साथ ही भगवान कामतानाथ में अपना मौन वृत तोड़ने के बाद मौनिया ढोलक की थापों पर श्री कृष्ण व श्री राम को समर्पित भजनों को गाते व नाचते हैं।
व्यवस्था में डटे रहे कर्मचारी
नगर पालिका परिषद के कर्मचारियों की फौज हर मुख्य मोर्चे पर डटी दिखाई दी तो पुलिस के जवान हर जगह मौजूद दिखाई दिए। गोताखोर पुलिस, घुड़सवार पुलिस, डाग स्क्वायड के साथ ही बिजली विभाग के कर्मचारी व जल संस्थान के कर्मचारी अपने काम में लगे दिखाई दिये।

साढ़े तीस हजार में बिका गधा

चित्रकूट, संवाददाता: एक गधे की कीमत घोड़े से अधिक? चौकिए मत तीर्थनगरी के पावन मंदाकिनी तट पर गधा मेला प्रारंभ होने से पहले ही एक गधे ने सबसे बड़ी कीमत अपने मालिक को दिलवाई है। यह कीमत है तीस हजार पांच सौ रुपए की। काफी दिनों से मेले का काम देख रहे मुन्ना लाल मिश्र बताते हैं कि इस बार तो भइया गजब हो गया। मेला प्रारंभ होने के पहले ही इलाहाबाद के भरवारी से आये नरोत्तम का गधा तीस हजार पांच सौ रुपए कीमत देकर मध्य प्रदेश टीकमगढ़ के पप्पू ने खरीद लिया।

नयागांव नगर पंचायत के द्वारा पिछले पैतीस सालों से मंदाकिनी के किनारे इस गधा मेला का आयोजन दीपावली में रात बारह दीपदान करने के बाद होता है। इस बार शुक्रवार सुबह भरवरी से आये नरोत्तम का गधा टीमकगढ़ के पप्पू को भा गया और इस गधे ने मेले के पिछले सभी रिकार्डो को ध्वस्त कर अपनी सबसे ज्यादा कीमत अपने मालिक को दिलवाई। वैसे अभी तक इस मेले में लगभग साढ़े पांच सौ गधे आ चुके हैं। मेले के आयोजकों ने बताया कि हर साल इस मेले का स्वरूप बढ़ता जा रहा है।

नानाजी के आठवें मासिक श्राद्ध में विदेशी भी जुटे

चित्रकूट, संवाददाता: युगऋषि नाना जी का आठवां मासिक श्राद्ध तीर्थ क्षेत्र के लिए एक नजीर सा बनता दिखाई दिया। मानो पूरा तीर्थ क्षेत्र सियाराम कुटीर में समाया जा रहा था। जिसे जहां पर जगह मिली पंगत में बैठता गया और प्रसाद चखता गया। यहां पर न तो कोई भेदभाव दिखा और ना ही कोई अपने पराये की भावना। दीन दयाल शोध संस्थान के कार्यकर्ता भी खुद को सभी को प्रसाद खिला कर आनंदित हो रहे थे। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खास बात यह रही कि एक ओर जहां विशेष लोग इस कार्यक्रम में आकर नाना जी के चित्र पर पुष्प पर अर्पित कर रहे थे वहीं तमाम विदेशी भी इस मौके पर इस मौके पर आकर अपने आपको धन्य महसूस कर रहे थे।

भंडारे के दौरान सभी का ख्याल रख रही उद्यमिता विद्या पीठ की निदेशक डा. नंदिता पाठक ने कहा कि नाना जी का कार्यक्रम है। सभी की श्रद्धा उनके प्रति है। यहां पर हर आने वाले का ध्यान दिया जा रहा है। प्रधान सचिव डा. भरत पाठक व संस्थान के अन्य कार्यकर्ता सभी का ध्यान रख रहे थे।
वैसे सुबह से ही लोगों के आने का क्रम जारी हो गया था। उत्तर प्रदेश के सपा के पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह के साथ ही अन्य नेताओं ने भंडारे का प्रसाद चखा वहीं मध्य प्रदेश के संघ व भाजपा के तमाम नेताओं ने इस मौके पर आकर भंडारे का प्रसाद चखा।
बंदरों ने भी छका प्रसाद
चित्रकूट : जहां एक ओर भंडारे में लोगों को खिलाने के लिये संस्थान के कार्यकर्ता लगे हुए थे वहीं एक कार्यकर्ता की ड्यूटी चित्रकूट की शान और नाना जी अत्यंत प्रिय वानरराजों को खिलाने का काम एक कार्यकर्ता सियाराकुटीर के पीछे गोयनका घाट पर कर रहा था। उसके पूड़ी डालते ही अचानक बंदरों की संख्या बढ़ती जा रही थी। हजारों बंदर देखते ही देखते आ गये और भंडारे का प्रसाद चखने लगे।

सहानुभूति या समानुभूति

चित्रकूट, संवाददाता: एक दृष्टिहीन अपने रास्ते जा रहा है सामने एक खंभा है। अस्थि विकलांग, मूकबधिर एक साथ दौड़ लगा देते हैं। दृष्टिहीन को संभालते और आगे का सही रास्ता बता देते हैं। ऐसे दृश्य जगदगुरु राम भद्राचार्य विकलांग विश्व विद्यालय में आम हैं। भले ही ये आम लोगों के लिये दया का पात्र हों पर यहां पर की जाने वाली दया को सहानुभूति का नाम नही दिया जा सकता, वास्तव में यह समानुभूति है। क्योंकि एक ही बीमारी के बीमार तो यहां पर सभी हैं। किसी को दिखाई नही देता तो किसी को सुनाई नही देता तो कोई पैरों से लाचार तो कोई हाथों से लाचार।

कहीं रीता गिर न जाये, कहीं गौरव की सायकिल पलट न जाये। ऐसे जुमले यहां पर आम हैं। भले ही जगदगुरु स्वामी राम भद्राचार्य सार्वजनिक रूप से कहते रहे हों कि उनको छात्रों को दया का पात्र न समझा जाये पर हर दिन यहां का नजारा कुछ और होता है। विवि के भोजनालय तुष्टि में तो नजारा कुछ अलग ही होता है यहां पर अधिकतर छात्र गु्रप में ही जाते हैं और इनमें भी अगर दो दृष्टिहीन हैं तो दो अस्थि विकलांग या मूक बधिर।
सचिव डा. गीता देवी कहती हैं कि वास्तव में इनको दूसरों की मदद के लिये किसी ने कहा नहीं है। अंत:प्रेरणा से ही यह एक दूसरे की खूब मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे के पैरों का कांटा निकालकर देखो तो तुम्हें अपने पैरों में कांटे की चुभन महसूस होगी। कुछ इसी प्रकार से यह एक दूसरे की मदद करते हैं।

चित्रकूट में दर्शन का महासंगम, विश्व शांति की दिशा में उभरा नया चिंतन

चित्रकूट: जब मंदाकिनी के तट पर विचारों की धारा बहती है, तब चित्रकूट केवल एक तीर्थ नहीं रहता—वह विश्व के बौद्धिक मंथन का केंद्र बन जाता है। त...