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Showing posts from January, 2020

श्री राम ने ही नहीं सीता ने भी की थी चित्रकूट में शक्ति की आराधना

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कामदगिरि पर मौजूद  हैं माता के पीठ संदीप रिछारिया वेद कहते हैं कि राम के आगमन से पूर्व सतयुग के प्रारंभ से चित्रकूट एक बहुत सुंदर देवी पीठ था। श्रीराम व मां जानकी ने यहां पर देवी की आराधना की और शक्तियां अर्जित कीं। तंत्र चूडामणि, ज्ञानार्णव दाक्षायणी तंत्र, योगिनी हृदय तंत्र व शिव चरित्र सहित अनेक ग्रंथ यहां पर शक्तिपीठ होने की पूर्ण पुष्टि करते हैं। ग्रंथ इसे पीठों में सर्वोत्त्म पीठ होने की संज्ञा देते हैं। तंत्र चूडामणि रामगिरौ स्तेनान्यं च परिभाषित करता है तो देवी भागवत व मत्‍स्‍य पुराण में चित्रकूटे तथा सीता विन्‍ध्‍यै  विंध्यैवासिनी की पुष्टि‍ करता है । तांत्रिक लक्ष्मी कवच तो सीधे तौर पर सुखदा मोक्षदा देवी चित्रकूट निवासिनी। भयं हरते् सदा पायाद् भव बंधनात् विमुच्यदते।। घोषित करता है।   चित्रकूट का नाम सामने आते ही लोगों को याद आते हैं राम । याद आती हैं चित्रकूट की वो शिलाएं जो भाईयों के प्रेम को देखकर पिघल गईं थी। लेकिन उससे बडा एक सच यह भी है कि आखिर भारद्धाज मुनि ने श्रीराम को चित्रकूट ही क्यों भेजा। वह चाहते तो एक बार फिर श्रीराम को महर्षि ...

पाक साफ संतों की ‘नापाक‘ हरकत

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श्री कामदगिरि की परिक्रमा का अतिक्रमण साफ करने का दावा करने वाले प्रशासन की बिरजाकुंड के पास प्राचीन बीहर पर कब्जा करने वाले को क्लीन चिट  संदीप रिछारिया सीएम योगीजी के आदेश व श्रद्वालुओं की बढ़ती संख्या को लेकर प्रशासन ने अब श्रीकामदगिरि परिक्रमा पथ पर बसी खोही बस्ती की जमीन को खाली कराकर चौड़ीकरण कराने के लिए पूरी तरह से कमर कस ली है। राजस्व व वन विभाग ने लगभग एक सैकड़ा लोगों को नोटिस देकर दस दिनों में जमीन खाली करने के आदेश दिए हैं। जिलाधिकारी की बैठक के बाद जहां एक ओर जमीनों पर रह रहे लोग परेशान हैं, वहीं तमाम अतिक्रमण किए हुए स्थानों पर संत समाज द्वारा अतिक्रमण किए जाने को लेकर स्थानीय लोगों में तीखी नाराजगी भी है। वैसे पर्वत की तरफ अस्थायी व स्थायी निर्माण कर रहने वाले लोगों के भी दो मत हैं। पट्टों की जमीन पर भूमिधरी होने के बाद तमाम लोग अदालतों के आदेश लेकर मुआवजा की मांग कर रहे हैं तो बहुत से लोग इस कार्यवाही को गलत बता रहे हैं। परिक्रमा मार्ग पर दुकान लगाकर गुजर बसर करने वाली अंशु, दादू, पप्पू जैसे तमाम दुकानदार कहते हैं कि हमारा अतिक्रमण तो सामने प्रशासन को दिखाई दे...

ब्रह्मपुरी,,,,,मानव जन्म का पहला स्थल चित्रकूट,,,,,भाग दो

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पुराणों में स्वर्ग से भी ज्यादा सुंदर स्थान बताया गया है संदीप रिछारिया चित्रकूट के स्थानों में ब्रह्मपुरी का प्रधान स्थान है । सैकड़ों चित्रकूट वासी श्रद्धालु ब्रह्मपुरी की प्रतिदिन प्रदक्षिणा करते है । वृहद् रामायण तो यहाँ तक कहती है - नार्यावर्त समादेशो न बह्म सदृशी पुरी । न राघव समोदेवः क्वापि ब्रह्माण्डगोलके ।। अर्थात- इस ब्रह्माण्ड में न तो आर्यावर्त जैसा देश है, न ब्रह्मपुरी जैसी पुरी है, न श्री राम जैसा देवता ही है । स्वर्गलोकादधिकं रम्यं नास्ति ब्रह्माण्ड गोलोके स्वर्गलोक से रम्य कोई भी स्थान नहीं होता पर यह ब्रह्मपुरी स्वर्ग से भी अधिक रम्य है । वर्णन है - स्वर्गलोकाद्रमणीय च पुरी ब्रह्म प्रतिष्ठिता अधिक क्या  जब प्रभु श्री राम ने पर्णशाला का निर्माण इसी पुरी के मध्य किया तब उससे रमणीय होगा ही क्या......   निर्वाणी अखाड़े के महंत स्वामी सत्यप्रकाश दास जी स्पस्ट रूप से इस तथ्य को कहते है कि चित्रकूट में यज्ञ वेदी मन्दिर में स्थित ब्रह्मा जी द्वारा बनाया गया हवनकुंड सतयुग से लेकर आज भी जाग्रत अवस्था में है। यहाँ पर आकर दर्शन करने वालो के पापो का नाश होता है ...

चित्रकूट में मौजूद है सृष्टि के आरंभ का स्‍थान ब्रह़मपुरी -- भाग एक

आइये हम आपको परिचित कराते हैं आपके डीएनए से  - चित्रकूट में बना था मानव का पहला डीएनए - सप्तऋषियों के साथ वेद, पुराण, निगम, आगम व देवी सरस्वती को उत्पन्न किया था प्रजापति ब्रहमा जी ने - मनु व सतरूपा थे पहले पुरूष व स्त्री  संदीप रिछारिया  डीएनए यानि डी-आक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल, यह अब ऐसा शब्द है जिससे लगभग सभी लोग परिचित हो चुके हैं। वास्तव में यह हमारे उन गुणसूत्रों का पता देता है कि हमारी जड़े कहां से जुड़ी हैं और हमारी मूल आदतें क्या हैं। आधुनिक विज्ञान की यह खोज 1953 में अंग्रेजी वैज्ञानिक जेम्स वाॅटसन और फ्रान्सिस क्रिक ने की। लेकिन हम आपको यह बताते हैं कि आपकी जड़े मूलरूप कैसे और कहां से जुड़ी हैं। कहां है आपकी पितृधरती और कौन है आपके गुणसूत्रों के प्रथम संवाहक। अगर आप हिंदू धर्म को मानने वाले हैं तो आपको थोड़ा सजगता के साथ याद करना होगा। किसी भी पूजा या अनुष्ठान में संकल्प करते समय जब पुरोहित आपसे आपका नाम लेने के लिए बोलते हैं तो साथ में गोत्र का उच्चारण करने के लिए भी आदेश देते हैं। वास्तव में यह गोत्र रूपी शब्द ही आपके डीएनए का पहला श्रोत है। गोत्र का मतलब आप...

प्लान, बैठक और निर्देशों में सिमट रहा चित्रकूट का विकास

 फिर जिलाधिकारी ने दिए तीन दिन में अतिक्रमण हटाने के निर्देश  - पहली बार 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने परिक्रमा पथ का अतिक्रमण हटाने के दिए थे निर्देश  - दिन भर दो पहिया व चार पहिया वाहनों के परिक्रमा पथ पर दौड़ने से श्रद्वालुओं को होती है परेशानी  संदीप रिछारिया  भविष्य के विकसित पर्यटन क्षेत्र के विकास का ताना बाना अब तेजी से बुना जा रहा है। प्रधानमंत्री का कार्यक्रम बार-बार चित्रकूट आने का बनता और कैंसिल हो रहा है। भाजपा के मंत्रियों और नेताओं के मुंह से लगातार मोदी और योगी की यह तारीफ निकल रही है कि चित्रकूट का उन्हें ध्यान है, इसका विकास सर्वोपरि है। पिछले तीन सालों से डिफकेंस काम्रीडोर व एक्सप्रेस वे का हल्ला है। भारत माला प्रोजेक्ट, रामवन पथ गमन का भी शोर बहुत किया गया, पर अभी तक किसी भी प्रोजेक्ट का प्रारंभ जमीन पर नही हो सका। अलबत्ता अधिकारियों व नेताओं के मुंह से जमीन खरीदने की बात जरूर सुनी और सुनाई जाती है। चित्रकूट के वास्तविकता में विकास की बात की जाए तो यह काम सबसे पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने किया था। ...

चमत्कार: बिना पार्किंग के खड़ी होती है हजारों गाड़ियां

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विश्व प्रसिद्व धार्मिक स्थल चित्रकूट का तेजी से गौरव बढ़ाने का काम अब सरकार कर रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा घोषित व बिड कराई गई फोर लेन सड़कें लगभग तैयार हो चुकी हैं। हैरत की बात यह है कि चित्रकूट महायोजना 2020 में जहां बेडीपुलिया से लेकर सीतापुर पर्यटक तिराहे तक के क्षेत्र को होटलों व लाॅजों के लिए घोषित किया गया था, वहीं होटल व लाॅजों के चलाने के लिए कुछ नियमन भी तय किए गए थे। इनमें सबसे प्रमुख नियम पार्किंग का था।    लेकिन सदियों से चित्रकूट में आने वाले यात्रियों के वाहन खड़े करने के लिए प्रशासन ने कभी भी वाहन पार्किंग स्टैंड के लिए विचार नही किया। पिछले दस सालों में चित्रकूट में होटलों व लाॅजों की संख्या में तो तेजी से वृद्वि हुई है, पर किसी भी होटल या लाॅज वाले ने पार्किंग का निर्माण सही रूप में नही करवाया है। चित्रकूट में प्रतिदिन आने वाले सैकड़ों चार पहिया व छह पहिया वाहन सडक के किनारे और सड़कों पर ही पार्क होते दिखाई देते हैं। हैरत की बात यह है कि 6 मई 1997 को चित्रकूट के जिला बनने के बाद अभी तक दर्जनों जिलाधिकारी आकर चले गए और किसी ने भी उप्र...

राहू के प्रकोप से ग्रसित है धर्मनगरी की कुंडली

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 !  - प्रधानमंत्री बनने के बाद एक बार भी मोदी नहीं आए चित्रकूट - पिछले साल दो बार कैंसिल हो चुके हैं केंद्रीय मंत्रियों के कार्यक्रम  संदीप रिछारिया  गौरतलब है कि पिछली एनडीए सरकार में चित्रकूट को विकसित बनाने के लिए रक्षा कोॅरीडोर व बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे की सौगात दी गई थी। घोषणा की गई थी कि यहां पर गोली से लेकर गोला तक का निर्माण करने के लिए रक्षा की इकाइयां लगेगीं। पहाडी के पास 3000 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण भी कर लिया गया। इसी प्रकार बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे को चित्रकूट जनपद के भरतकूप से प्रारंभ होकर बांदा, महोबा, हमीरपुर, उरई होते हुए औरैया जनपद में लखनउ- दिल्ली एक्सप्रेस वे से मिलना था। इसके लिए भी जमीन का अधिग्रहण होने के बाद 4 कंपनियों को बिड भी हो चुकी है। वैसे तो प्रधानमंत्री का कार्यक्रम चित्रकूट की धरती पर आने का पिछले लगभग एक साल से बन रहा है, लेकिन शायद यह धर्मनगरी का दुर्भाग्य है कि उनका आना यहां पर अभी तक नहीं हो पाया है।                                 ...