एक ऐसा स्थान जो विश्व भर के लोगो के लिये किंवदंतियों कथाओं कथानकों के साथ ही यथार्थ चेतना का पुंज बना हुआ है। प्रजापति ब्रह़मा के तपोबल से उत्पन्न पयस्वनी व मां अनुसुइया के दस हजार सालों के तप का परिणाम मां मंदाकिनी के साथ ही प्रभु श्री राम के ग्यारह वर्ष छह माह और अठारह दिनों के लिये चित्रकूट प्रवास के दौरान उनकी सेवा के लिये अयोध्या से आई मां सरयू की त्रिवेणी आज भी यहां पर लोगों को आनंद देने के साथ ही पापों के भक्षण करने का काम कर रही है।
Sunday, October 25, 2020
Wednesday, September 30, 2020
विकास का लाकडाउन और समाज शिल्पियों का क्रंदन
चित्रकूट का संदर्भ अक्सर आम लोगों के साथ विद्वान भी - "चित्रकूट के घाट में भई संतन की भीर। तुलसीदास चंदन घिसैं तिलक देत रघुवीर॥" देकर सिध्द करने का प्रयास करते है। वास्तव में रामघाट मन्दाकिनी नदी के किनारे है,और मन्दाकिनी को एक दर्जन छोटी नदियां, नाले व प्रपात 80 किमी बहने लायक बनाते है। राजापुर के पास मोहना घाट पर यह नदी सतयुग से लेकर अब तक की संस्कृति व सभ्यता यमुना को सौप देती है। यही यमुना आगे बढ़कर प्रयागराज में खुद को गंगा को समर्पित कर देती है।
अब अगर इस अजब गठजोड़ को कुछ इस अंदाज में देखे कि समय एक बार फिर अपने आपको दोहराता है यानी सतयुग की वो पयस्वनी जिसे परमपिता ब्रह्मा ने श्री हरि विष्णु के पाद प्रक्षालन से प्रकट की,सरयू वो जो श्री राम के नेत्रों से निकली, गोदावरी यहाँ गुप्त रूप में आई तो नर्मदा ने अपने आपको स्वयं मन्दाकिनी को झूरी के रूप में समर्पित कर दिया और सबसे प्रमुख मन्दाकिनी जो महासती अनुसुईया के तपबल के कारण स्वर्ग से आकर खुद यहां पर हमेशा रहने का निश्चय किया। लेकिन
कहीं यह कहानी बनकर न रह जाये,क्योकि पिछले कुछ सालों से चित्रकूट में न केवल पयस्वनी और सरयू को मार दिया गया बल्कि मन्दाकिनी को मारने का काम सरकारी अधिकारियों,धनलोलुप व्यापारियों और धर्म की आड़ लेकर व्यापारी बने संत महंत लगातार मन्दाकिनी को मारने का काम किया जा रहा है। अब धर्मावलम्बियो के साथ पर्यटन और प्रकृति प्रेमियों की चिंता लगातार इस बात को लेकर बढती जा रही है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन तपभूमि चित्रकूट का अस्तित्व जीवनदायिनी नदियों के समाप्त होने की कगार पर पहुँचने के कारण पूर्णतः खतरे में दिखलाई देने लग गया है और यहां का कण-कण अपना अस्तित्व बचाने के लिए किसी दूसरे भगीरथ की राह देखने लग गया है। चित्रकूट की पावन मंदाकिनी जहां विलुप्त होने के कगार पर है वहीं इस गंगा में संगम होने वाली पयस्वनी एवं सरयू नदी का गंदे नाले में तब्दील हो जाना एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। चित्रकूट के सर्वांगीण विकास व प्रकृति संवर्धन के लिये केन्द्र सरकार एवं उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश सरकारों द्वारा तहे दिल से दिये जाने प्रति वर्ष करोड़ों रुपये की अनुदान राशि अब बहुरूपियों और बेइमानों के बीच बंदरबांट होने से चित्रकूट के अस्तित्व और अस्मिता बचाने के नाम पर सवालिया निशान पैदा करा रही है। मंदाकिनी एवं पयस्वनी गंगा की संगमस्थली राघव प्रयागघाट का दृश्य देखकर चित्रकूट आने वाला हर धर्मप्रेमी केवल अपना सिर पकड़कर रोते दिखाई देता है। आज चित्रकूट का कण-कण अपना वजूद खोता जा रहा है और चित्रकूट के विकास के नाम पर काम करने वाले सामाजिक एवं राजनैतिक संस्थानों के साथ शासकीय कार्यालयों में पिछले अनेक वर्षों से बैठे भ्रष्ट अधिकारियों के बीच चित्रकूट का बंटवारा सा दिखने लग गया है। क्योंकि कागजों में तैयार होती चित्रकूट की विकास योजनायें और देश के बड़े सेठो द्वारा यहां के विकास के लिये दिया जाने वाला करोड़ों रुपया का दान अब महज कागजी खानापूर्ति सा महसूस करा रहा है। जिसके चलते यहां मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के चित्रकूट में विकास के नाम पर अमर्यादित लूट-खसोट, डकैतों का ताण्डव, नशा तस्करों के विकसित जाल को चित्रकूट की बर्बादी के प्रमुख कारणों में जाना जाने लगा है। वहीं अधिकारियों की मिलीभगत से चित्रकूट की प्राकृतिक हरियाली को नेस्तनाबूद करने में अमादा खदान माफियाओं द्वारा चित्रकूट के कण-कण को इतिहास के पन्नों में बोझिल किये जाने का नापाक सिलसिला कायम किया जा चुका है *चित्रकूट में रम रहे रहिमन अवध नरेश,जा पर विपदा पड़त है सो आवत यहि देश।
रहीमदास द्वारा लिखे इस काव्य में चित्रकूट में विपदा से पीडित होकर आने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलने और उसका दुख दूर होने का उल्लेख किया गया है। परन्तु अब शायद ऐसा महसूस नहीं होगा। क़्योंकि इस चित्रकूट का आज रोम-रोम जल रहा है- और कण-कण घायल हो रहा है। चित्रकूट में विपत्ति के बादल मंडरा रहे हैं और इस बगिया के माली अपने ही चमन को उजाड़ने में लगे हैं ऐसे में भला विपत्ति से घिरे चित्रकूट में आने वाले विपत्तिधारियों की विपत्ति कैसे दूर होगी? यह अपने आप में अंकनसवाल बन गया है। क्योंकि सदियों पहले ऋषि अत्रि मुनि की पत्नी सती अनुसुइया के तपोबल से उदगमित होकर अपना 35 किलोमीटर का रमणीक सफर तय करने वाली मंदाकिनी गंगा का वैसे तो यमुना नदी में संगम होने के प्रमाण हैं। परन्तु ऐसा नहीं लगता कि इस पावन गंगा का यह सफर अब आगे भी जारी रहेगा, क्योंकि इस गंगा का दिनों दिन गिरता जलस्तर जहां इसकी विलुप्तता का कारण माना जाने लगा है, वहीं इस गंगा में संगम होने वाली दो प्रमुख नदियों समेत असंख्य जलस्त्रोतों का विलुप्त होकर गंद नालियों में तब्दील होना एक चुनौती भरा प्रश्न आ खड़ा है ? धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार चित्रकूट का पौराणिक इतिहास बनाने वाली इस गंगा के पावन तट में स्थापित स्फटिक शिला के बारे में श्रीरामचरित मानस में संत तुलसीदास लिखते हैं कि- एक बार चुनि कुसुम सुहाय, निजि कर भूषण राम बनाये। सीतहिं पहिराये प्रभु सादर, बैठे स्फटिक शिला पर सुन्दर॥ मतलब इस मंदाकिनी गंगा के पावन तट पर भगवान श्रीराम द्वारा अपनी भार्या सीता का फूलों से श्रृंगार करके इस स्थान की शोभा बढ़ाई गयी है। वहीं इसी स्थान पर देवेन्द्र इन्द्र के पुत्र जयन्त द्वारा कौये का भेष बनाकर सीता माता को अपनी चोंच से घायल किये जाने का भी उल्लेख है। जबकि इस गंगा के पावन तट में स्थित राघव प्रयागघाट जिसकी पुण्यता के बारे में आदि कवि महर्षि वाल्मीक द्वारा रामायण में यह उल्लेख किया गया है कि- हनिष्यामि न सन्देहो रावणं लोक कष्टकम। पयस्वनी ब्रहमकुंडाद भविष्यति नदी परा॥15॥सम रूपा महामाया परम निर्वाणदायनी। पुरा मध्ये समुत्पन्ना गायत्री नाम सा सरित्॥ 1 6॥सीतांशात्सा समुत्पन्ना マभविष्यति न संशयः।पयस्वनी देव गंगा गायत्रीति सरिद्रयम्॥17॥तासां सुसंगमं पुण्य तीर्थवृन्द सुसेवितम्।प्रयागं राघवं नाम भविष्यति न संशयः॥18॥सभी धार्मिकबग्रन्थों में उल्लेखित राघवप्रयाग घाट जहां भगवान श्रीराम ने अपने पिता को तर्पण दिया है।महर्षि बाल्मीक के अनुसार इस पुनीत घाट में महाराज दशरथ के स्वर्णवास होने की उनके भ्राता भरत एवं शत्रुघ्र द्वारा जानकारी दिये जाने पर भगवान श्रीराम द्वारा अपने स्वर्गवासी पिता को तर्पण एवं कर्मकाण्ड किये जाने का प्रमाण है। और इस पावन घाट पर कामदगिरि के पूर्वी तट में स्थित ब्रह्म कुंड से पयस्वनी (दूध) गंगा के उदगमित होने के साथ कामदगिरि के उत्तरी तट में स्थित सरयू धारा से सरयू गंगा के प्रवाहित होकर राघव प्रयागघाट में संगम होने के धार्मिक ग्रन्थों में प्रमण झलकाने वाला चित्रकूट का यह ऐतिहासिक स्थल राघव प्रयागघाट वर्तमान परिपेक्ष्य में उत्तर प्रदेश एवं मध्यप्रदेश की सीमा का प्रमुख प्रमाणित केन्द्र भी है। आज इसी घाट के समीप रामघाट में संत तुलसीदास द्वारा चंदन घिसने और भगवान श्रीराम का अपने भाई लखन के साथ चंदन लगाने का प्रमाण पूरी दुनिया में हर आदमी के जुबान पर आने के बाद चित्रकूट के चित्रण का अहसास कराती है। वहीं इस घाट के समीप ब्रह्म पुराण में उल्लेखित यज्ञवेदी घाट, शिव महापुराण में उल्लेखित मत्यगजेन्द्रनाथ घाट के साथ रानी अहिल्याबाई द्वारा बनवाया गया नौमठा घाट और समय-समय पर मंदाकिनी एवं पयस्वनी की इस संगमस्थली से निकलने वाली दुग्धधाराओं की तमाम घटनायें आज भी इस गंगा की पुण्यता को स्पर्श कराती हैं। हर माह यहां लगने वाले अमावस्या,पूर्णामासी के साथ दीपावली, कुम्भ, सोमवती एवं अनेक धार्मिक त्यौहारों में इस गंगा में डुबकी लगाने वाले असंख्य श्रद्घालुओं का सैलाब इस गंगा की पावनता को दूर-दूर तक महिमा मंडित कराता है। परन्तु आज इस गंगा के बिगड़ते जा रहे स्वरूप से यह अहसास होने लग गया है कि अब वह दिन दूर नहीं होगा जब इस गंगा अस्तित्व समाप्त हो जायेगा। क्योंकि इस गंगा के बारे में संत तुलसीदास द्वारा लिखा गया यह भाव-नदी पुनीत पुरान बखानी, अत्रि प्रिया निज तप बल आनी। सुरसरि धार नाम मंदाकिनी, जो सब पातक-कोतक डाकिनी॥ पूर्णतः विपरीत महसूस होने लग जायेगी- क्योंकि धार्मिक ग्रन्थों में पापियों का पाप डाकने वाली इस मंदाकिनी गंगा में अब इतना साहस नहीं रह गया है? कि वह नगर पंचायत व नगर पालिका द्वारा डलवाई जाने वाली ऊपर गंदगी, गंदे नाले, सैप्टिक टैंकों के स्त्रोतों के साथ अपने ही पंडे, पुजारियों, महन्त,मठाधीशों, व्यापारियों-चित्रकूट के सामाजिक, राजनैतिक हस्तियों की गंदगियों को अब अपने आप में स्वीकारें। आज इस पावन गंगा का कण-कण चिप-चिपाते पानी एवं गंदे संक्रामक कीटाणुओं से ओतप्रोत होने के कारण इस कदर दयनीय हो चुका है। कि इस गंगा का चित्रकूट के बाहर गुणगान करने वाले कथित धर्मपुरोहितों द्वारा भी इसमें स्नान करके पुण्य अर्जन करने से कतराया जाया जाने लगा है? जो धर्म भीरूओं के लिये किसी गंभीर चिंता के विषय से कम तो नहीं है। भगवान श्रीराम के बारह वर्षों की साक्षी इस गंगा कोसमय रहते न बचाया गया तो निश्चित ही इस गंगा के साथ चित्रकूट का भी अस्तित्व समाप्त हो जायेगा और रामचरित मानस की यह चौपाई- चित्रकूट जहां सब दिन बसत, प्रभु सियलखन समेत। एक पहेली बन जायेगी। क्योंकि इस गंगा के विलुप्त होने के बाद न यहां रामघाट होगा- और न ही यहां राघव प्रयागघाट ? अतः सरकार के साथ धर्म क्षेत्रों में तरह-तरह के तरीकों से शंखनाद करके अपना यशवर्धन करने वाले कथित समाज सेवियों को चाहिये कि इस विश्र्व प्रसिद्घ धार्मिक नगरी को बचाने के लिये एकनिश्चित मार्गदर्शिका तैयार कर उसके अनुरूप यहां का विकास कार्य करायें। साथ ही यहां के विकास के नाम पर काम करने वाले संस्थानों को उचित दिशा निर्देश दें ताकि चित्रकूट के प्राकृतिक और धार्मिक सौन्दर्य एवं धरोहरों के संवर्धन एवं संरक्षण के हित में कार्य कराया जा सके। क्योंकि एक तरफ जहां आज चित्रकूट के सुदूर अंचलों में सदियों से अपनी रमणीकता और धार्मिकता को संजोये अनेक स्थलों का भी समुचित विकास अवरूद्घ है। वहीं आज धार्मिकग्रन्थों में उल्लेखित मोरजध्वज आश्रम, मड़फा आश्रम, देवांगना, कोटितीर्थ, सरभंग आश्रम, सुतिक्षण आश्रम, चन्द्रलोक आश्रम, रामसैया जैसे अनेक ऐतिहासिक एवं पौराणिक स्थल अनेक समस्याओं के चलते चित्रकूट आने वाले करोड़ों धार्मिक एवं पर्यटनीय यात्रियों से दूर है। जिसके लिये आज भगवान श्रीराम द्वारा बनवाये गये त्रेतायुग में पत्थरों के रामसेतु को बचाने के लिये एक तरफ एकजुट होकर श्रीराम के प्रति अपना प्रेम और कर्तव्य दर्शाने का अभिनय करने वाले धर्म भीरुओं के जेहन में श्रीराम की आस्था का प्रतीक उनका अपना चित्रकूट को चारों तरफ से टूटने के बावजूद कुम्भकरणी निंद्रा में सोना उनकी वास्तविक आस्था पर चिंतन का विषय महसूस कराता है। भगवान श्रीराम की इस प्रियस्थली चित्रकूट जहां उन्हें भ्राता लखन और उनकी पत्नी सीता की असंख्य लीलायें कण-कण में चित्रित हैं और ऐसे चित्रणों को अपने आंचल में समेटे यह चित्रकूट आज कथित इंसानों की चंद मेहरबानियों के लिये मोहताज सा होना निश्चित ही देशवासियों के लिये किसी गौरव का विषय नहीं है। सीमा विवाद- सम्मान विवाद जैसी अनेक संक्रञमक बीमारियों से ओतप्रोत सृष्टिकाल का यह चित्रकूट आज त्रेता के रामसेतु की तुलना में भी पीछे हो गया है। परन्तु चित्रकूट की जनमानस आज भी इस अपेक्षा में काल्पनिक है कि भगवान श्रीराम के भक्तों द्वारा अपने भगवान की अस्तित्व स्थली चित्रकूट को बचाने की दिशा में कभी न कभी कोई न कोई पहल अवश्य की जायेगी। और संत तुलसीदास का चित्रकूट के प्रति यह भाव सदियों तक अमर रहे- चित्रकूट गिरि करहु निवासू तहं तुम्हार सब भातिं सुभाषू। चित्रकूट चिंता हरण आये सुख के चैन, पाप कटत युग चार के देख कामता नैन।
मेरा आशय समाज के उन ठेकेदारो से है जो धर्म की दुकानें पर मंदाकिनी को मां का दर्जा देकर सुबह शाम आरती और भजन पूजन करते हैं, पर अभी भी अपने मठ और मंदिरों का सीवर उसी में डालते हैं। अब तो आपके द्वारा जिताए गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छ भारत का मिशन छेड दिया तो जागिए हमारे धर्म के गौरव और मंदाकिनी को साफ रखने और जिंदा रखने में अपने आपको आगे लाकर गुरुतर भार को उठाने का संकल्प लीजिए।
Saturday, September 19, 2020
श्री राम को रोता देख चित्रकूट आई थी मा सरयू
*🚩श्री कामदगिरि का महाभिषेक*
*🚩महंत राजकुमारदास जी महाराज का पुरुषोत्तम मासीय अनुष्ठान*
*📍जानिए सरयूधारा के वह रहस्य जिनसे आप शायद ही परिचित हो*🚩
https://youtu.be/UeDftbCULG8
*💧चित्रकूट धाम के रहस्यों को जानने के लिए देखते रहिए इनक्रेडिबल चित्रकूट धाम*
Sunday, July 26, 2020
मौलाना मुलायम का कर्मदण्ड भोग रहे लाला हरदौल
बुन्देलखण्ड के वीर लाला हरदौल पिछले कई दशकों से अपने मन्दिर के लिए तरस रहे है। 2005 में सपा कार्यकाल में सरकारी जमीन व मन्दिर की जमीन पर कब्जाकर कब्रिस्तान के रूप में दर्ज कर दी थी। इस जमीन को मुक्त कराने के लिए हिन्दू युवावाहनी के जिलाध्यक्ष वसभासड बुध्दप्रकाश ने कमर कसी है।
बुंदेलखंड की परंपरा अनुसार प्रतिवर्ष की भांति आज नागपंचमी के अवसर पर हिन्दू युवा वाहिनी के जिलाध्यक्ष बुद्धप्रकाश (सभासद) ने शाम 6 बजे कार्यकर्त्ताओं के साथ पूजा अर्चना की। इस मौके पर बुद्धप्रकाश ने बताया कि वह निरन्तर 25 वर्षों से नागपंचमी को लाला हरदौल की पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं तथा इस स्थान पर हरदौल मन्दिर पार्क निर्माण को लेकर संघर्ष करते रहे हैं बता दें कि उक्त स्थान जयपुरिया भवन के सामने है जो कि सीतापुर ग्रामीण अन्तर्गत गाटा संख्या 1142/3 में रकबा0•088 बंजर भूमि दर्ज है तथा1142/3 में ही ०193नं० का एक रकबा 0105 मुस्लिम कब्रिस्तान के नाम दर्ज है जो कि निरन्तर बंजर भूमि पर अधिग्रहण जारी है। इस विषय को लेकर कई बार जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया किन्तु कोई कार्यवाही नहीं हुई यहां तक कि आज तक हरदौल स्थान खसरें में भी दर्ज नहीं है।
आज के अवसर पर हम सभी नें यह संकल्प लिया है कि आगामी विजया दशमी को हरदौल मन्दिर निर्माण का शिलान्यास पूजन हिन्दू युवा वाहिनी के नेतृत्व में करेंगे तब तक स्थानीय हिन्दू वादी नेता व जन प्रतिनिधियों को भी हिन्दू समाज देख ले वो क्या करते है अन्यथा हमारा संघर्ष जारी है जिसके लिये हमने तीन तीन मुकदमे झेले हैं हरदौल मन्दिर निर्माण होकर रहेगा।
Wednesday, July 15, 2020
अब कैसे गुजरेगी शनिवार व रविवार को आपकी जिंदगी
कहर कोरोना का
नए अंदाज का लाकलाउन
क्या रहेगा बंद –
बाजार व सडक पर अनावश्यक परिवहन
कौन निकलेगा बाहर –
आवश्यक सेवाओं से जुडे लोग, स्वास्थ्य सेवाएं व कोरोना वारियर्स
क्या खुलेगा- बैंक
व सरकारी कार्यालय, पेट्रोल पंप व ढाबे, सब्जी व फल मंडी
संदीप रिछारिया
Saturday, July 11, 2020
रिवर्स लाकडाउन के कुछ अनमोल पल,,
*🔊प्रीमियर डे*
*📌खुले आम सब्जी मंडी में बिक रही सब्जी*
*📌सीमा विवाद के कारण गंदगी और बदबू का दंश झेल रहे मोहल्ले के लोग*
*📌चौराहों व हॉट पर नही दिखे खाकी कोरोना वारियर्स*
https://youtu.be/i19NOkV6S2A
*🩸हमारा एजेंडा आम आदमी की खबरें,, अगर आप पाकिस्तान,चीन की दुश्मनी या फिर सत्ता पक्ष की लंतरानी और विपक्ष की बुराई देखना चाहते है,तो हमारा चेनल मत देखिए,,,न हम भक्त, न हम चमचे,हम तो है सीधे चित्रकूटी*
Friday, July 10, 2020
आखिर प्रशासन को लेनी पड़ी सफाई की सुध
- खबर का असर
गुरुवार को सीतापुर में भी नरकलोक खबर को संज्ञान में लेते हुए डीएम ने खुद सम्पूर्ण तीर्थ क्षेत्र की सफाई के लिए निर्देश दिए। शुक्रवार को स्वयं ही डीएम व एसपी ने खुद पहुँचकर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया।
चित्रकूट। जिलाधिकारी शेषमणि पांडेय तथा पुलिस अधीक्षक अंकित मित्तल ने आज संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत नगर पालिका परिषद कर्वी के वार्ड नंबर 10 तीर्थराज पुरी में चलाये जा रहे सफाई अभियान तथा स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा घर-घर जाकर स्वास्थ्य परीक्षण कार्य का निरीक्षण किया।
जिलाधिकारी ने अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद कर्वी को निर्देश दिए कि प्रत्येक दिन दो वार्डों पर साफ सफाई अभियान चलाया जाए जिसमें सभी नाला, नाली आदि को अच्छी तरह से साफ सफाई कराकर कूड़ा गाड़ी के साथ तत्काल कूड़ा भरवा कर फेंकने की भी व्यवस्था कराई जाएऔर दवाओं आदि का भी नियमित रूप से छिड़काव कराया जाए। उन्होंने कहा कि नगर में कहीं पर मुझे कूड़ा करकट नहीं मिलना चाहिए। अच्छी तरह से साफ सफाई व्यवस्था सुनिश्चित कराएं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की टीम को निर्देश दिए कि जो घर-घर जाकर स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है उसमें कोई भी घर छूटने न पाए इसका आप लोग विशेष ध्यान दें। कहां की परीक्षण के दौरान खांसी, सर्दी, जुकाम, बुखार के जो मरीज पाए जाए उन्हें रजिस्टर में अंकित करते हुए तत्काल सैंपलिंग कराए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए।
निरीक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ विनोद कुमार, पर्यटन अधिकारी शक्ति सिंह, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद कर्वी नरेंद्र मोहन मिश्रा सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
चित्रकूट में दर्शन का महासंगम, विश्व शांति की दिशा में उभरा नया चिंतन
चित्रकूट: जब मंदाकिनी के तट पर विचारों की धारा बहती है, तब चित्रकूट केवल एक तीर्थ नहीं रहता—वह विश्व के बौद्धिक मंथन का केंद्र बन जाता है। त...
-
धनवंतरी महायज्ञ _डीएम ने परिवार सहित डाली आहुतियां _अमेरिका,कोलकाता के साथ बुंदेलखंड और स्थानीय चिकित्सकों ने डाली आहुतियां _ स्थानीय के सा...
-
_शहर के एक रेस्टोरेंट में आयोजित किया गया कार्यक्रम चित्रकूट। धर्मनगरी में 9 दिनों तक मां दुर्गा की आराधना का क्रम लगातार जारी रहा।इस दौरान ...
-
. संगठन को मजबूत बनाने का दिलाया भरोसा . 31 अगस्त को संत सम्मेलन की जोरदार तैयारियां में जुटे संदीप रिछारिया राष्ट्रव्यापी संगठन नरेन्द्र मो...





