Wednesday, May 13, 2020

*🔥सुखदा मोक्षदा देवी चित्रकूट निवासिनी🔥*


*🔱जानिए और समझिये उस स्थान के बारे में जहाँ श्री राम प्रतिदिन आकर करते है देवी की आराधना🚩*
*🔱हम बताएंगे आपको चित्रकूटधाम के 84 कोस के विस्तृत परिक्षेत्र में सतयुग से धर्मध्वजा फहराते अनोखे,अकल्पनीय वैदिक धर्मस्थल/संदीप रिछारिया*
https://youtu.be/2aHcV_3wAmc

Saturday, May 2, 2020

रहस्यमय चित्रकूटधाम के अनोखे रहस्य

*🛕चित्रकूटधाम क्या केवल जमीन का एक टुकड़ा है जी नही वह एक ऐसी संस्कृति का हिस्सा है ,जहाँ से न केवल पहला मानव जन्मा बल्कि आदि काल से आज तक तमाम संस्कृति यहाँ पर फली फूली।🚩*
https://youtu.be/wMPWxcJfo40
*🛕धर्मस्थल चित्रकूटधाम की अधिक जानकारी के लिए सब्सक्राइब करिये हमारा चैनल।संदीप रिछारिया🔥*

Friday, April 10, 2020

क्‍याेें हमारे देश में रहकर कुछ विदेशी फैला रहे हैं नकारात्‍मकताा, आईये जानिए मेरे साथ

तत्यः सत्य और असत्य 

संदीप रिछारिया 

सोचिये, भारत में मानव जनित नकारात्मकता का आगमन कब हुआ कैसे हुआ और क्यों हुआ। आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह कैसा सवाल है, नया शब्द मानव जनित नकारात्मकता। चलिए स्पष्ट किए देते हैं यह मानव से मानव को दूर करने, किसी व्यक्ति को मानसिक रूप से अपमानित करने का प्रतीक है। नही समझ में आया, बताते है। वास्तव में यह उस मानसिकता का प्रतीक है जो  अमीर और गरीब का भेद बताकर मानव को छोटा या बड़ा बताती है। इन मानसिकता के अनुसार हम समर्थ हैं इसलिए कि हमारे पास पैसा है और पैसा से हम ताकत यानि नीति अनीति के लिए श्रम ( अपराध) व वैभव  ( विलासिता) खरीद सकते हैं।

नकारात्मकता का विस्तार है धार्मिक 

मानव जनित नकारात्मकता वास्तव में उस सोच का परिणाम है जो पूर्णतया धार्मिक है। कोलंबस ने जब अमेरिका की खोज की तो उसे नही मालूम था कि वहां का धर्म क्या है। दो हजार साल पहले ईसा मसीह का प्रादुर्भाव हुआ, उसके पहले पूरा यूरोप यहूदी था। एशिया हिंदू था। 1400 साल पूर्व मुहम्मद साहब के जन्म के पहले मुसलमान धर्म का अता पता नही था। अब सवाल खड़ा होता है कि मैं आपको यह इतिहास क्यों बता रहा हूं।

 वैदिक संस्कृति में छिपा उन्नति का बीज मंत्र 

भारत वास्तव में हजारों साल पुरानी उस संस्कृति का परिचायक है। जिसे युगों में बांटा गया है। सतयुग, त्रेता, द्वापर व कलियुग। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है। सिंधु से हिंदू बनने की प्रकिया के पूर्व हम सत्य सनातन धर्म को मानने वाले थे। इसे वैदिक धर्म भी कहते हैं। काल्पनिक देवताओं के उदभव के पूर्व हम पंचतत्वों के साथ ही जीवित देवताओं की पूजा किया करते थे। आज भी इन देवताओं की पूजा न केवल हिंदू धर्म में बल्कि मुसलमान व ईसाई धर्म में की जाती है। हिंदू सूर्य को तो मुस्लिम चंद्र को आधार मानते हैं। जल को पूजना हर धर्म में आज भी आवश्यक है। क्योंकि इसके बिना किसी भी जीवधारी का जीवन चल नही सकता।

 आश्रम व्यवस्था के साथ कर्म के हिसाब से तय थे वर्ण 

विभिन्न नदियों व जलश्रोत के अपार भंडार वाले इस देश में हमेशा सुख, शांति और संपन्नता रही है। अगर हम आर्यावर्त के निवासियों की सुख, शांति व सम्पन्नता के बारे में बात करें तो इसकी जड़ जीवन जीने की कला पर छिपी है। आयु के अनुसार बनाए गए मानव को जीवन जीना होता है। यह जीवन खुद के लिए नही बल्कि समाज व राष्ट्र को समर्पित होता था। बच्चे के पैदा होने के बाद उसे 5 वर्ष तक घर में रखा जाता था। 5 वर्ष का होते ही उसे गुरू को सौंप दिया जाता था। उस जमाने में शिक्षण काल के दौरान गुरू यह जांचता था कि बालक की रूचि किस ओर है। अगर शूद्र का बालक शिक्षा की ओर उन्मुख है तो उसे ब्राहमण करार दिया जाता था। क्योंकि ब्रहृम जानयति इति ब्राहृमणः का घोष वेद करते हैं। इसी प्रकार अन्य वर्ण भी तय किए जाते थे। विश्वमित्र जाति से ठाकुर थे पर उन्हें ऋषि माना गया है। भीलनी शबरी को संत माता जैसे कई उदाहरण पुराणों में भरे पड़े हैं।  25 वर्ष तक गुरूकुल में शिक्षा अध्ययन, 25 से 50 तक श्रम करके जीविकोपार्जन व संतानोत्पत्ति, 50 के बाद अपनी संतान को जीविकोपार्जन के तरीके सिखाकर खुद को सन्यास के लिए तैयार करना और 75 के बाद सन्यास यानि पूरी तरह से एकाकी होकर समाज के लिए काम करना। इस जीवन पद्वति परिवारवाद को पोषित नही करती थी बल्कि यह समाजवाद को पोषित करती थी। शिक्षा गुरूकुलों में हुआ करती थी, जहां पर बिना भेदभाव के सभी को शिक्षा मिला करती थी। राज पुत्र व छोटा काम करने वाले सभी के पुत्र एक साथ अध्ययन करते थे।

नकारात्मकता का उदभव 

नकारात्मकता का सही मायने में उदभव हमारे देश में मुस्लिम काल से माना जा सकता है। जब सूखे व ठंडे देश वालों ने भारत पर आक्रमण करने का काम किया तो उसका जवाब सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने दिया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उस समय आचार्य विष्णुगुप्त चाणक्य ने खंड खंड में बंटे आर्यावर्त को एक सूत्र में बांधा और यूनानी व खुरासानियों को उनकी औकात ताकत के बल पर दिखाई। सेल्यूकस निकेटर व खुरासानियों ने संधि कर अपनी पुत्रियों को उन्हें सौंपा। सम्राट अशोक तक का काल भारतीयों के शौर्य व उत्कर्ष से भरा पड़ा है। महात्मा बुध के सम्राट अशोक के मिलने व अपने धर्म को विस्तार देने की प्रक्रिया के कारण देश में भारतीयता का लोप हो गया। आज जिस दौर में भारत गुजर रहा है उसकी जड़ उसी समय पड़ी। देश में शिक्षा व आयुध निर्माण की जगह शासक ने स्तूप व विहार बनाने का काम प्रारंभ कर दिया। धीरे धीरे भारत की संपत्ति मुसलमान व ईसाईयों ने लूटना प्रारंभ कर दिया। ईसाई शासन के दौरान अंग्रेजों ने बहुत ही चतुराई से कांग्रेस पार्टी की स्थापना की। इसको ऐसा मान सकते हैं कि आज तमाम फैक्ट्रिषें के मालिक यूनियन बनाते हैं और अपने लोगों को उसका नेता। कुछ ऐसा ही हाल हुआ और विदेशियों ने भारत को भूखा और नंगा दिखाना प्रारंभ कर दिया। कुछ विदेशियों के चमचों ने इसको अपने हिसाब से हवा दी। क्योंकि वह खुद को शक्ति सम्पन्न बनाए रखना चाहते थे। सवाल खड़ा होता है जब मुस्लिम लीग ने मुस्लिम राष्ट्र बनाया तो भारत हिंदू राष्ट्र क्यों नही बना। गांधी व अन्य कांगे्रेसी नेता क्यों मुसलमानों को इस देश में रखने के लिए मरे जा रहे थे। क्यों गांधी मुसलमानों के लिए उपवास कर रहे थे। इसके बाद भी यह सिलसिला थमा नहीं। भले ही आज भारतवंशी विश्व के 195 देशों में जाकर अपनी मेघा के बल पर झंडे गाड़ रहे हों पर सच्चाई यह है कि पश्चिमपोषित हिंदुस्तान की मीडिया के कुछ लोग और हिंदुओं के वेश में बैठे जयचंदों को देश में गरीबी, भुखमरी व अन्य समस्याएं दिखाई देती है। इन समस्याओं का निदान हर भारत वासी को सोचना होगा।   

Monday, March 30, 2020

कोरोना नहीं भूख बनेगी मानव की बड़ी दुश्मन

- शासन व प्रशासन के द्वारा किए गए इंतजामों में आम लोगों के साथ ही एनजीओ को भी मदद करनी होगी
- भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ अन्य पार्टियों के कार्यकर्ता भी जुटने चाहिए 

संदीप रिछारिया 

कोरोना के रूप में आई वैश्विक महामारी की चपेट में लगभग पूरा विश्व आ चुका है। अब ताकतवर अमेरिका के साथ अन्य सभी विकसित देशों का हाल यह है कि वह खुद अपनी मदद के लिए भगवान की तरफ लाचारी से देख रहे हैं। हमारा 130 करोड भारतीयों वाला देश भी कोरोना की चपेट में आ चुका है। भले ही अभी कोरोना पाजिटिव के आंकड़े बहुत कम दिखाई देे रहे हैं, पर शनिवार की रात व उसके पहले के दृश्य जो दिल्ली के आनंद बिहार बसस्टैंड व सड़कों पर दिखाई दिए में दिखाई आंखें खोल देने वाले हैं। अभी तक तमाम सामथ्र्यवान लोग प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री के साथ अन्य तरह से अपनी -अपनी तरफ से मदद करने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन यह मदद कैसे व किस प्रकार की जाएगी, इसका पूरा प्लान अभी तक स्पष्ट नही हो पाया है। विचारणीय बात यह है कि इस वैष्विक महामारी से जंग की तैयारी किसी भी देश ने कभी की ही नहीं, इसका कारण भी साफ है कि अभी जक जंग केवल अपनी सामाजिक शक्ति के प्रदर्शन को लेकर ही की जाती रही है। उसकी के लिए सब इंतजाम किए जाते थे, दूसरी जंग दूसरे गृहों पर जाने को लेकर की जा रही थी। लेकिन अब अगली जंग हमें कोरोना के साथ भूख की महामारी को लेकर करनी होगी।
यहां पर यह बताना जरूरी है कि भारत कृषि प्रधान देश है। आज भी यहां की 85 फीसद आबादी गांवों में रहती है। गांवों में रोजगार की कमी के कारण लोग मौसमी या पूर्ण रूप से पलायन कर शहरों की ओर जाते हैं। ऐसे में जब लाॅक डाउन हुआ और शहरों में काम समाप्त हो गया तो वहां से गांव वापस आने का रास्ता ही लोगों के लिए बचा तो वह लोग क्या करेंगे। आनंद विहार व के साथ ही देश के लगभग हर बडे व छोटे शहर से वापसी के लिए लोग परेशान हैं। दिल्ली के हंगामें को देखकर राज्य सरकारों ने लोगों को उनके घरों में भेजने का ्रपबंध भी किया। लेकिन मामला यहीं पर नही खत्म होता, क्योंकि अभी भी देश के 90 फीसद लोग न तो सरकारी नौकरी करते हैं और न ही वह पूर्ण कालीक प्राइवेट नौकरियों में हैं। अब ऐसे में रोज कमाकर अपना पेट भरेन वालों के हाल यह है कि उन्हें सरकार ने एक हजार रूपये देने का काम किया है, लेकिन उनमें भी कितने लोग रजिस्टर्ड है , इसकी संख्या भी जान लेना जरूरी है। क्योंकि इनमें भी 80 फीसद से ज्यादा का रजिस्ट्रेशन हुआ ही नहीं। रेहडी लगाने वाले, बैठकर अपना छोटा मोटा व्यवसाय कर पेट भरने वाले लोग भी देश में भारी मात्रा में हैं। इन सभी की हालत देखी जाए तो इनके पास दो से तीन दिनों का ही भोजन घरों में होता है। अब लाॅक डाउन और जनता कफर्यू को जाड़ दिया जाए तो एक सप्ताह से उपर का समय बीत चुका है। इस समयांतर में अब इन परिवारों के पास भी राशन खत्म हो गया होगा। आने वाले समय में जब यह लोग घर से नही निकल सकते और न ही इनके पास पैसा है तो इनका परिवार कैसे जीवित रहेगा। इसकी कल्पना करके ही दिल बैठ जाता है। प्रशासन को चाहिए कि सामुदायिक रसोई के जरिए बिना किसी प्रचार के इस तरह के सभी लोगों को चिन्हित कर उनके पास प्रतिदिन दो समय का भोजन उपलब्ध कराएं जिससे कम से कम उनका जीवन भूख से तो सुरक्षित रह पाए। सामथ्र्यवान लोगों को चाहिए कि वह लोग अपनी तरफ से इस तरह के परिवारों को चिन्हित कर उनको भोजन उपलब्ध कराएं। लोगों को चाहिए कि भोजन उपलब्ध कराने वालों की सूची प्रशासन को दें ताकि प्रशासन के वालिंटियर दूसरे जरूरतमंदों को भोजन दे सकें। जिलाधिकारी को चाहिए  िकइस मामले में एक विस्तृत कार्य योजना बनाकर उसको अमल में लाएं ताकि लोगों का जीवन भूख से बच सके।
   

Monday, March 23, 2020

जल्द ही चित्रकूट में भी हो सकता है लॉक डाउन,तैयारियां पूरी


चित्रकूट। जिलाधिकारी शेषमणि पांडे की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में कोरोना वायरस की रोकथाम एवं बचाव के संबंध में डॉक्टर एसोसिएशन के साथ  बैठक हुई।

जिलाधिकारी ने प्राइवेट डॉक्टरों से कहा कि इस कोरोना वायरस को देखते हुए आप लोग जनपद में अधिक से अधिक व्यवस्था रखें। कहां कि हमारी सरकारी टीमें रेलवे स्टेशनों बस स्टॉप आदि जगह -जगह पर तैनात होकर कार्य कर रही हैं और बाहर से आने वाले लोगों की लगातार जांच जारी है सीएमओ से कहा कि गांव में आशा एएनएम को लगाकर जागरूक कराएं तथा जो बाहर से लोग आ रहे हैं उनको गांव में ही वाच करते रहें तथा बाहर से जो लोग आ रहे हैं उनके घरों में एक लिखकर चस्पा करें। इनसे 14 दिन तक कोई नहीं मिलेगा यह अपने घर पर ही रहे। चिकित्सकों ने जिलाधिकारी से जनपद को लाक डाउन घोषित कराए जाने की भी मांग की।
 इस पर डीएम ने अपर जिलाधिकारी से कहा जनपद की सीमा को सील कराने वहां मजिस्ट्रेट व पुलिस की व्यवस्था कराने तथा लाकडाउन आदि की भी तैयारी कर ली जाए। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से कहा कि 200 सैया अस्पताल पर सभी व्यवस्थाओं के लिए शासन को पत्र मेरी ओर से भेजा जाए ताकि वहां पर स्टाफ आदि सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित हो सके। और निजी संस्थानों के चिकित्सकों के साथ एक बैठक करके सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करा ले। एसोसिएशन के चिकित्सकों से कहा कि बाहर के जनपदों सेसर्जन व फिजीशियन से वार्ता कर ले ताकि आवश्यकता पड़ने पर जनपद में उन्हें बुलाया जा सके और उनकी सेवाएं ली जा सके। तथा कोई भी मरीज इस वायरस से ग्रसित पाया जाए तो उसकी सूचना तत्काल मुख्य चिकित्सा अधिकारी को उपलब्ध कराएं जिससे कि उसकी इलाज की संपूर्ण व्यवस्था कराई जा सके। उन्होंने सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट जानकीकुंड के चिकित्सक से कहा कि वेंटिलेटर वाले कितने बेड हैं उसकी एक लिखित में सूचना दें और टेक्नीशियन आदि की भी व्यवस्था कराएं।
बैठक में अपर जिलाधिकारी  जी पी सिंह उप जिलाधिकारी कर्वी  अश्वनी कुमार पांडे मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ विनोद कुमार निजी संस्थानों के चिकित्सक डॉ सुरेंद्र अग्रवाल डॉक्टर महेंद्र गुप्ता डॉक्टर सुधीर अग्रवाल डॉक्टर प्रबोध अग्रवाल आदि विभिन्न चिकित्सक तथा संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

कोरोना से बचने के लिए डीएम चित्रकूट शेषमणि पांडेय ने की मार्मिक अपीलG


चित्रकूट। डीएम शेषमणि पांडेय ने वीडियो अपील जारी कर कहा कि अमावश्या के पर्व पर चित्रकूट न आये,अपने घर पर ही रहकर भगवान का स्मरण करें। यही काम नवरात्रि की परमा और नवमी को करे।
उन्होंने चित्रकूट जनपदवासियों से कहा कि अत्यंत जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकले।जिससे हम खुद को व दुसरो को कोरोना से बचाए रखे। कोरोना की जंग में हर एक व्यक्ति सैनिक है।उसे राष्ट्रहित में इस लड़ाई से लड़कर जल्द जीत हासिल करना है।

चित्रकूट में दर्शन का महासंगम, विश्व शांति की दिशा में उभरा नया चिंतन

चित्रकूट: जब मंदाकिनी के तट पर विचारों की धारा बहती है, तब चित्रकूट केवल एक तीर्थ नहीं रहता—वह विश्व के बौद्धिक मंथन का केंद्र बन जाता है। त...