Tuesday, November 11, 2025

🌺 श्री भरत यात्रा का भव्य समापन चित्रकूट धाम में



पावन मंदाकिनी तट पर संतों की ओजस्वी वाणी से गुंजायमान हुआ श्री भरत मंदिर परिसर


अयोध्या से पधारे संतों और भक्तों का हुआ भव्य स्वागत, विशाल भंडारे में हजारों ने पाया प्रसाद

डॉक्टर संदीप रिछारिया 

चित्रकूट धाम।
पावन मंदाकिनी के पवित्र तट पर, श्रीवयोदय धाम से प्रारंभ होकर छोटी छावनी तक पहुँची श्री भरत यात्रा का अंतिम पड़ाव मंगलवार को श्री भरत मंदिर के नीचे स्थित श्री मंदाकिनी आरती स्थल (तुलसी चबूतरा) पर अत्यंत श्रद्धा, भव्यता और भक्तिभाव के साथ संपन्न हुआ।

इस धार्मिक यात्रा का नेतृत्व छोटी छावनी के महंत श्री कमल नयन दास जी महाराज ने किया।

यात्रा के इस अंतिम पड़ाव पर हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे और संतों की ओजस्वी वाणी व दिव्य प्रवचनों का श्रवण कर स्वयं को धन्य किया।


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🕉️ भव्य स्वागत और विशाल भंडारे से गूंजा भरत मंदिर परिसर

श्री दिगंबर अखाड़े के महंत दिव्य जीवन दास जी महाराज व नगर पालिकाध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता ने किया स्वागत

श्री दिगंबर अखाड़े के श्री महंत पूज्य दिव्य जीवन दास जी महाराज तथा नगर पालिकाध्यक्ष श्री नरेंद्र गुप्ता ने यात्रा का भव्य स्वागत किया।
समापन अवसर पर श्री भरत मंदिर परिसर में महंत दिव्य जीवन दास जी द्वारा एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें अयोध्या धाम से पधारे संतों व भक्तों ने प्रेमपूर्वक प्रसाद ग्रहण किया।


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🙏 राज्य के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति से बढ़ा आयोजन का गौरव

पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा और पूर्व मंत्री जय भान सिंह पवैया रहे विशेष अतिथि

इस वार्षिक धार्मिक आयोजन में उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, तथा मध्य प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री जय भान सिंह पवैया विशेष रूप से उपस्थित रहे।
दोनों ही अतिथियों ने संतजनों के चरणों में नमन कर चित्रकूट धाम की इस परंपरा की सराहना की।


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🪔 संत सभा में गूंजे धर्म, एकता और सेवा के संदेश

मंदाकिनी गंगा आरती समिति के डॉ. अश्विनी अवस्थी ने किया कुशल संयोजन

कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित संत सभा का संयोजन मंदाकिनी गंगा आरती समिति के कर्ताधर्ता डॉ. अश्विनी अवस्थी ने किया।
सभा में देश के प्रतिष्ठित संतों ने धर्म, एकता, सेवा और भक्ति के संदेश दिए।

संत सभा में प्रमुख वक्ता रहे:

श्री महंत कमल नयन दास जी महाराज

वृंदावन के जगद्गुरु द्वाराचार्य भैय्या जू महाराज

कामदगिरि पीठ के महंत मदन गोपाल दास जी महाराज

भागवताचार्य बृजेंद्र शास्त्री जी


इन संतों ने धर्म की शाश्वत महत्ता, समाज में प्रेम और सद्भाव की आवश्यकता, तथा भरत चरित्र की प्रेरणाओं पर अपने विचार रखे।


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🌿 चित्रकूट के संत और समाजसेवी भी रहे उपस्थित

इस पावन अवसर पर चित्रकूट धाम के प्रमुख संत व समाजसेवी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे —
महंत रामजी दास, निर्वाणी अखाड़े के महंत सत्यप्रकाश दास, निर्मोही अखाड़े के दीन दयाल दास,
पूर्व सांसद भैरो प्रसाद मिश्र,
पूर्व मंत्री चंद्रिका उपाध्याय,
भाजपा जिलाध्यक्ष महेश कोरी,
पूर्व जिलाध्यक्ष चंद्र प्रकाश खरे,
दिनेश तिवारी,
कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष पंकज अग्रवाल,
उपाध्यक्ष आलोक पांडेय,
युवा मोर्चा अध्यक्ष हीरो मिश्र आदि की उपस्थिति से समारोह का गौरव और भी बढ़ गया।


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✨ धर्म, संस्कृति और भक्ति का अद्भुत संगम बना चित्रकूट धाम

मंदाकिनी तट पर भक्ति, अध्यात्म और सेवा का यह अद्भुत संगम देखने योग्य रहा।
हजारों श्रद्धालुओं ने आरती में भाग लिया, संतों से आशीर्वाद प्राप्त किया और भरतजी के आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।

चित्रकूट धाम एक बार फिर राम-भरत मिलन की भावना, भक्ति और भारतीय संस्कृति के गौरव से ओत-प्रोत हो उठा।

Sunday, March 2, 2025

चिकित्सकों को मिला भगवान धनवंतरी का आशीर्वाद

धनवंतरी महायज्ञ 





_डीएम ने परिवार सहित डाली आहुतियां
_अमेरिका,कोलकाता के साथ बुंदेलखंड और स्थानीय चिकित्सकों ने डाली आहुतियां
_ स्थानीय के साथ महाराष्ट्र से आए स्वयंसेवकों ने किया सहयोग
_पालिकाध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता ने भी डाली आहुतियां

@ संदीप रिछारिया


चित्रकूट। सृष्टि को आरंभ करने के लिए महादेव के आदेश पर चित्रकूट धाम में परमपिता ब्रह्मा ने रामार्चा यज्ञ किया था,आज उसी भूमि पर महादेव के भक्तों (नाथ संप्रदाय) ने “धरती के भगवान (डाक्टर)” का थैंक्स करने के लिए उनके भगवान धनवंतरी जी का यज्ञ करवाया। रविवार भोर से ही पुरानी बाजार के रामलीला भवन के प्रांगण में मंत्रों की ध्वनियां गूंजने लगी। अमेरिका,कोलकाता,मुंबई के साथ बुंदेलखंड के तमाम ख्यातिलब्ध चिकित्सकों का मेला लगता दिखाई देने लगा। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन सपत्नीक यज्ञ स्थल में पहुंचे और आहुतियां डालने के साथ प्रसाद ग्रहण किया।इस दौरान पालिकाध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता भी मौजूद रहे।


*मुंबई से आए यज्ञाचार्य ने कराया यज्ञ*


मुंबई से आए यज्ञाचार्य जोशी गुरु जी अपनी टीम के साथ मंडप पर वेदोच्चरण करते दिखाई दिए।इस दौरान उनकी टीम के सदस्यों के साथ नागपुर से आई डॉक्टर नीलिमा जाधव औषधियों को यजमानों को देकर उनकी विशेषताएं बताकर आहुतियां डालने को प्रेरित करते दिखाई दे रही थी। डॉक्टर जाधव की बाते सुनकर एलोपैथी के बड़े बड़े चिकित्सक आश्चर्य के साथ आहुतियां डालते दिखाई दे रहे थे।

*वेदांत रत्नपारिख की कल्पनाशीलता की सभी ने की प्रशंसा*


यज्ञ में भाग लेने वाले सभी लोगों के साथ मुख्य आयोजकों ने फोटो खींचने के बाद तुरंत फोटो बनाकर उन्हें भेट करने की व्यवस्था की थी।जैसे ही कोई मेहमान पहुंचता,उनका स्वागत किया जाता।इसके तुरंत बाद पोलराइज्ड कैमरे से खींची गई फोटो मेहमान को भेट की जाती तो वह प्रफुल्लित हो जाता।

*इन डाक्टरों ने डाली आहुतियां*

अमेरिका से डॉक्टरशशांक हेडा,कोलकाता से डॉक्टर मिलिंद,जबलपुर से डॉक्टर महेश तैलंग,डॉक्टर वीके अग्रवाल,डॉक्टर निर्मला गेहानी,डॉक्टर पूनम आडवाणी, आशुतोष तिवारी जी, अखिलेश,डॉ उमेश
डॉक्टर नीलमा,डा. अनिल कुमार ,डॉक्टर सुरेश त्रिपाठी ,डॉक्टर सीताराम गुप्ता,
डॉक्टर हर्षिता श्रीवास्तव,डॉक्टर सचिंद्र उपाध्याय सहित लगभग 250 चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ ने यज्ञ में आहुतियां डाली।

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स्वयंसेवकों की टीम ने निष्ठा से निभाए दायित्व*





महाराष्ट्र और स्थानीय नाथ संप्रदाय के स्वयं सेवकों ने अपने सेवाभाव से इस आयोजन को सफल बनाया। डॉक्टर मनोज द्विवेदी, महेश जी,दीपक तिवारी,संतोष तैलंग, शिल्पा ताई,मधु काका,नरेंद्र जायसवाल,विलग,नीरज, मिलिंद आवड़े,सचिन,श्रीराम पांडेय,महेश सिंह पटेल,वैशाली ठाकरे,नीलम पारसपटकी,धनीराम,राहुल निषाद आदि अपने दायित्व निभाते दिखाई दिए।
 





Wednesday, October 16, 2024

मां भवानी की याद कर दशहरा मिलन


_शहर के एक रेस्टोरेंट में आयोजित किया गया कार्यक्रम

चित्रकूट। धर्मनगरी में 9 दिनों तक मां दुर्गा की आराधना का क्रम लगातार जारी रहा।इस दौरान जिले भर में सैकड़ों प्रतिमाएं विभिन्न स्थानों पर रखकर विधि विधान से पूजन अर्चन का क्रम चला। विभिन्न भक्तों ने अपने अपने घरों में भी देवी की आराधना की।देवी आराधना की परिणिती विजयादशमी के रूप में हुई।



 विजयादशमी के बाद मां अम्बे की प्रतिमाओं की विदाई के बाद एसडीएम कालोनी की रहने वाली समाजसेवी वैदेही खरे की अगुवाई में मिशन तिराहे स्थित एक रेस्टोरेंट में लगभग आधा सैकड़ा महिलाओं ने दशहरा मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया।इस कार्यक्रम को बंगाली ड्रेस थीम पर आयोजित किया गया। 



यह कार्यक्रम वास्तव में बंगाली और गुजराती दुर्गा पूजा का फ्यूजन दिखाई दिया। एक और महिलाओं ने जहा बंगाली परिधान धारण किए,वही दूसरी ओर उन्होंने गुजराती स्टाइल में मनमोहक ध्वनियों के साथ मां को समर्पित गरबा की प्रस्तुति दी।
इस दौरान टीम लीडर वैदेही खरे के साथ अंजू श्रीवास्तव,मंजूषा वर्मा, साक्षी, अर्चना सिंह, सरिता वर्मा, ममता, रेशू जायसवाल, लवली पांडेय, शिल्पी श्रीवास्तव, संजना श्रीवास्तव आदि शामिल रही। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने तमाम छोटे छोटे कार्यक्रम प्रस्तुत किए।

Friday, August 23, 2024

मोदी विचार मंच के मंडलीय अध्यक्ष बने संदीप तिवारी





. संगठन को मजबूत बनाने का दिलाया भरोसा
. 31 अगस्त को संत सम्मेलन की जोरदार तैयारियां में जुटे

संदीप रिछारिया

राष्ट्रव्यापी संगठन नरेन्द्र मोदी विचार मंच के रींवा मंडल के प्रमुख के रूप में धर्मनगरी के युवा समाजसेवी संदीप तिवारी हेमू के हाथों में कमान सौंपी गई है। नरेन्द्र मोदी विचार मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि चाणक्य की सहमति से मध्यप्रदेश के अध्यक्ष सुनिल सांखला राष्ट्रीय बौद्धिक मंच मध्यप्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष श्री श्री 1008 श्री लल्ली महराज ; अनुसुइया आश्रम चित्रकूट   उत्तरप्रदेश राष्ट्रीय बौद्धिक मंच के प्रदेश अध्यक्ष श्री श्री 1008 श्री दिव्य जीवन दास महाराज सतना जिले के जिलाध्यक्ष दीप भटनागर चित्रकूट जिला अध्यक्ष संदीप दिवेदी की अनुशंसा पर नरेन्द्र मोदी विचार मंच के मुख्य राष्ट्रीय महासचिव सूरज ब्रम्हे ने चित्रकूट के समाज सेवी संदीप कुमार तिवारी को नरेंद्र मोदी विचार मंच मुख्य शाखा रीवा सम्भाग का  संभागीय अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया है। संगठन के मुख्य राष्ट्रीय महासचिव ने बताया कि वर्तमान समय तीन करोड़ से भी अधिक कार्यकर्ता बड़े शहरों से लेकर देश के अन्तिम गांव तक संगठन को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। हम लोग भारत वर्ष को विश्वगुरू के रूप् में प्रतिस्थापित करने के लिए जी जान से प्रयास कर रहे हैं।  
नव नियुक्त मंडलीय अध्यक्ष संदीप तिवारी ने कहा कि इतने बड़े सगठन से जुडना हर्ष के साथ गौरव का विषय है। जो जिम्मेदारी मुझे दी गई है उसका मैं भलीभांति निर्वहन करते हुवे संगठन को मजबूत बनाकर मोदी जी के हाथों को मजबूत करुंगा। उन्होंने वरिष्ठ पदाधिकारियों का आभार व्यक्त कर उन्हे धन्यवाद दिया। संदीप कुमार तिवारी की नियुक्ति पर हर्ष व्यक्त करते हुवे संगठन के पदाधिकारियों ने बधाई दी है। बधाई देने वालों में श्रीमति कविता साहू राष्ट्रीय महामंत्री महिला शाखाए श्रीमती चंद्रकला सोनी राष्ट्रीय सचिव महिला शाखाए पुरुषोत्तम सोनकर जी प्रांतिय अध्यक्ष महाकौशल प्रान्तएराजकूमार सोनी प्रदेश महामंत्री राष्ट्रीय बौद्धिक मंच के प्रदेश संगठन महामंत्री रंजन महाराज भागवाधारी केशव महाराज शंकर भोले बाबा महाराज अशोक वीर विक्रम सिंह
 योगेश पटेल आकाश महाराज रामश्रय महाराज गजेन्द्र महराज विष्णु पटेल श्रीमती एकता तिवारी जिला अध्यक्ष महिला शाखा जबलपुर श्रीमती मनीषा अवस्थी जिलाध्यक्ष महिला शाखा सतना श्रीमती मीना सैनी जिला संगठन महामंत्री महिला शाखा जबलपुर आदि है।     


                                       
संदीप तिवारी ने बताया कि धर्मनगरी के केशवगढ प्रांगण में 31 अगस्त  दिन शनिवार को नरेंद्र मोदी विचार मंच के तत्वावधान में साधु . संत समागम सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में चित्रकूट के साथ ही बाहर से आने वाले तमाम साधूगण भाग ले रहे हैं। कहा कि  . जब भी देश में संकट आया है  तब . तब साधु . संतों ने देश की सुरक्षा के लिए अपने त्रिशूल को हथियार बनाकर देश की रक्षा की है समय आ गया है कि हम सब जातियों और पंथों का भेद मिटाकर एक हो जाएं । अपने पूर्वजों को याद कर उनके बताये हुवे रास्ते में चलकर जब भी हम एक दूसरे से मिलें तो राम.राम कहें। आइये हम सब मिलकर देश और सनातन की सुरक्षा करें ।

Sunday, March 10, 2024

डीएम जगन्नाथ सिंह ने देखा था चित्रकूट में जहाज उतारने का सपना




साकार हो रहा है पूर्व डीएम का स्वप्न 

- भारत रत्न नाना जी देशमुख ने योजना को खुद पूरा करने के लिए बढाये थे कदम

-24 साल लगे देवांगना पहाड़ के उपर हवाई जहाज उतरने में
- बसपा ने कैंसिल किया था तो अखिलेश यादव ने लगाये थे पंख
- पूर्व डीएम जगन्नाथ सिंह के साथ भरत पाठक, बसंत पंडित ने की थी मशक्कत  

संदीप रिछारिया

चित्रकूट। साल 2010 की सर्दियों का समय था, भारत रत्न नानाजी देशमुख के पास चित्रकूट डीएम जगन्नाथ सिंह पहुचते है। नानाजी बहुत मधुर स्वर में कहते हैं कलेक्टर साहब,,,,,,क्या हाल है, क्या समस्या है, मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं। डीएम कहते हैं कि मेरा स्वप्न चित्रकूट की ख्याति को विश्व व्यापी स्वरूप में देखने का है। आप इस आईडिये को सुनिये और निर्णय लीजिये। चित्रकूट में शिक्षा,स्वास्थ्य सेवाओं व स्वावलंबन का काम करने के लिए आप आयेें हैं, यह आपकी पूर्ण कर्म भूमि है। पीड़ित मानवता की सेवा के लिए धन की बड़ी जरूरत है, इसलिए देश के बड़े उद्योगपतियों को उनके मिलाना बहुत जरूरी होता है। जब वह वनवासियों को देखेंगे तो निश्चित तौर पर मदद करेंगे। अब चित्रकूट में रतन टाटा, महेंद्र महेंन्द्रा, नुरूली वाडिया, वेणु श्री निवासन, विवेक गोयनका, डालमियां परिवार, बजाज परिवार सहित अन्य लोग आने लगे हैं। इनको प्रयागराज या खजुराहो से हेलीकाप्टर के जरिए चित्रकूट लाया जा रहा है, इसमें धन, श्रम और समय लगाता है। अगर चित्रकूट में हवाई पट्टी का निर्माण हो जाए तो यहां पर सीधे विमान उतरेगा और धन, श्रम और समय बचेगा। यह भारत रत्न नाना जी देशमुख के साथ पूर्व जिलाधिकारी जगन्नाथ सिंह द्वारा चित्रकूट में हवाई अड्डा बनाने के लिए किया गया पहला संवाद था।

जिसको पंख लगाने का काम डीएम जगन्नाथ सिंह ने चार पांच जमीन दिखाने के बाद देवांगना के उपर की जमीन को मूर्त रूप देने के लिए प्रस्तावित किया। इस जमीन में वन विभाग की जमीन का कुछ हिस्सा आने के कारण उसे भौरी गांव के पास जंगल की ड्योढी राजस्व की जमीन देकर मामले को निपटाया गया और शासन पक्ष से बात कर सरकार ने पहली बार प्रयास पूरे रूप में शुरू किया। इसमें सबसे बड़ी बात यह थी कि नाना जी इस काम में डीआरआई को किसी भी तरह का फायदा नही चाहते थे। नानाजी की मित्र मंडली के कई उद्योगपतियों ने मिट्टी, गिट्टी और सीमेंट लेबर जैसी अन्य व्यवस्थाओं के लिए धन दिया तो इस काम को देखने की पूरी जिम्मेदारी डीआरआई के पूर्व प्रधान महासचिव डा0भरत पाठक व बसंत पंडित को मिली। राइट्स कपंनी को सरकार ने काम पर लगाया तो धन जुटाने की व्यवस्था डीआरआई के पास रही। काम शुरू हुआ और कुछ दिनों बाद डकैत छोटा पटेल द्वारा अडंगा डालने के बाद उसे बंद करना पड़ा। सीआरपीएफ लगाई गई, फिर काम शुरू हुआ, लेकिन कुछ दिनों बाद फिर काम बंद हुआ, यह सिलसिला कई बार चला। एक बार प्रोजेक्ट मैनेजर बिटृटू का अपहरण होने के बाद ज बवह छूटा तो समान छोड़कर भाग गया। इसके बाद हवाई पटृटी सपना बनकर रह गई। वक्त गुजरता रहा, मुलायम सिंह यादव की सरकार बनी। सितम्बर 2005 में चित्रकूट में उन्होंने पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक की। नानाजी से मिलने के बाद उन्होंने मंच से चित्रकूट में हवाई अड्डा को सरकार द्वारा बनाने की घोषणा की। कुछ काम आगे बढा। लेकिन मामला पूरी तरह से बन नही पाया। इसके बाद बहन मायावती की सरकार आई। बांदा चित्रकूट से तीन कैबिनेट मंत्री बने। नसीमुद्दीन सिद्वीकी व बाबू सिंह कुशवाहा ने चित्रकूट में हवाई अड्डा कैंसिल कराने का पूरा प्रयास कर अतर्रा के पास हवाई अड्डा ले जाने का प्रयास किया। लेकिन मामला जम नही पाया। इसके बाद प्रदेश में सपा की सरकार फिर से आई और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बने, उन्होंन चित्रकूट के विकास के लिए काफी काम किया। उन्होंने सीधे सैधांतिक तौर पर चित्रकूट में बनने वाले यात्री हवाई अड्डे के निर्माण की स्वीकृति के लिए दिल्ली से पूरा प्रस्ताव तैयार कर पास कराया। बस स्टाप की स्थापना, चारो ओर सीमेंटेड फोन लेन रोड़, परिक्रमा पथ निर्माण व टीन शेड, रामघाट का सौंदर्यीकरण के साथ अन्य बड़े काम रहे। लेकिन देखा जाए तो उन्होंने घोषणाएं और प्रस्ताव तो बहुत किये, पर धन आंवटन की स्थिति बहुत कम रही। लिहाजा काम कुछ हुआ ही नहीं। योगी सरकार के आने के बाद चित्रकूट में विकास के पंख लगे और धीरे धीरे लगभग सभी बड़े काम पूरे हो गये। आज जब चित्रकूट में हवाई अड्े पर पहला विमान उतरेगा तो नाना जीे देशमुख की आत्मा को काफी प्रसन्नता का अनुभव होगा।
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नाना जी अपना सबकुछ दोड़कर चित्रकूट आये, लेकिन उनकी तपस्या का माध्यम पीड़ित वंचितों की सेवा था, वह श्री राम को पहला समाजसेवी कहा करते थे। नानाजी के साथ हम इस काम में सहभागी बने यह हमारा सौभाग्य है। हवाई पटृटी के लिए पहली बार जब जमीन देखने गये थे और आज 24 साल बाद इस स्थिति में इसे देख रहे हैं कि जमीन पर यात्री जहाज उतर रहा है तो असीम खुशी का अनुभव हो रहा है।


डा0 भरत पाठक, राष्ट्रीय संयोजक, गंगा विचार मंच
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जब चित्रकूट गया तो वह नया जिला था। चित्रकूट के दर्शन दो स्वरूपों में हुये। पहला स्वरूप पूर्ण रूप से धार्मिक था, तो दूसरा स्वरूप पूर्ण रूप से वनवासियों की करूण स्थिति वाला था। गावों व जंगलों में प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर प्रपात, पहाड़ जगल और अन्य स्थान थे, पूरा प्लान बनाकर काम किया गया। इस दौरान नाना जी का सहयोग लगभग हर काम में मिला। वह युगदृष्टा थे। हर अच्छे काम में पूरा समर्थन देते थे। हवाई पटटी का आइडिया सुनते ही उत्साहित होकर खुद जिम्मेदारी ले ली थी। आज वास्तव में चित्रकूट का नाम जब विश्व के इवाई मानचित्र में देखकर मन को सुकून मिल रहा है।



जगन्नाथ सिंह
रिटायर्ड आईएएस

             
 

Saturday, March 9, 2024

वेद पाठियों ने की राम कथा रसिक बजरंगी की दिव्य स्तुति




राष्ट्रीय रामायण मेला दूसरा दिन 


  -विविध आयोजनों के जरिए बह रही है रामभक्ति की बयार
- सांस्कृतिक कार्यक्रम देखनेे को उमड़ रही है भीड़  

संदीप रिछारिया 


चित्रकूट। महादेव व मां गौरा के विवाह के साथ राष्ट्रीय रामायण मेला का प्रारंभ ऐसा आभास दे रहा है कि राम भक्ति की बयार सम्पूर्ण चित्रकूट धाम परिक्षेत्र में बह रही है। आयोजन के दूसरे दिन की दोपहर एक नई प्रस्तुति मंच से दिखाई दी। स्वामी जयेन्द्र सरस्वती वेद पाठशाला के सैकड़ा भर छा़त्रों ने मंच से एक साथ जब सुंदर कांड का पाठ किया तो भक्तों के अंदर का उत्साह देखते ही बन रहा था। जय बजरंग सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन उपाध्याय व राष्ट्रीय प्रभारी अर्चना उपाध्याय के द्वारा प्र्रायोजित इस कार्यक्रम का संचालन डा0 रामलाल द्विवेेदी प्र्राणेश ने किया। कार्यक्रम के उपरांत मिष्ठान वितरण के साथ ही सभी को मंच से गमलोें में लगे पौधे देकर पर्यावरण की सुरक्षा व संरक्षा पाठ भी पढ़ाया गया। श्री उपाध्याय व उनकी पत्नी राष्ट्रीय प्रभारी अर्चना उपाध्याय इन दिनो रामचरित मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित कराने की मुहिम में जुटे हुए हैं।   


विद्वत गोष्ठी का संचालन करते हुए डा. चन्द्रिका प्रसाद दीक्षित ललित ने श्रीराम की लंका विजय पर विशेष प्र्रकाश डालते हुए कहा कि चित्रकूट की धरती पर ही माता सीता ने लक्ष्मण जी को व्यूह रचना और उसको तोड़ने की शिक्षा दी थी। यह तथ्य अरण्य प्रिया काव्य में है। मप्र भिडं के प्रवक्ता देवेन्द्र चैहान रामायणी ने भरत जी की महिमा का वर्णन करते हुए प्रश्न किया कि सीप से सागर को खाली किया जा सकता है। उन्होंने मानस के अनुसार प्रमाण देते हुए कहा कि भरत के अंदर आठ महासागर है। जिनमें भरत शील गुण विनय बड़ाई, भाईप भगति भरोस भलाई। कहत शारदहु कर मत हीचे, सागर सीप जाएं उलीचें। प्रत्येक महासागर का वर्णन अलग-अलग प्रकार से किया गया है। भरत जी का शील उनकी विनम्रता, गुण, बड़ाई, भ्रातृत्व प्रेम और भगति, भरोसा, भलाई हैं। 



पश्चिम बंगाल दार्जलिंग सिलीगुडी के महाकवि मोहन दुकुन ने प्रभु श्रीराम और भगवान शिव के बारे में बताया कि जब पृथ्वी, आकाश, जीव नहीं था तब नांद व बिन्दु रूप में शिव जी रहे। पहली बार शिव हंसे तो अपना रूप ले लिया। इसके बाद ब्रह्मांड को तैयार किया। दाहिने हाथ से ब्रह्मा जी को तैयार किया। बांए हाथ से हरि की उत्पत्ति की। धीरे-धीरे जीवात्मा की रचना की। इसके बाद ब्राह्मा, विष्णु और शिव ने सिर्फ बेटा को पैदा, लेकिन बेटी नहीं बनाया। जब तीनो देवो को यह महसूस हुआ कि नारी की जरूरत है तो ओंकार शब्द बोलकर शिव जी ने अर्द्धनारेश्वर का रूप लिया। इसके बाद अपने ही शरीर को दो भागों में विभाजित कर नर और नारी की उत्पत्ति की जो शिव और जगदम्बा बने। तब जाकर संसार का स्रजन हुआ। मानव कल्याण के लिए देवी व देवताओं को जिम्मेदारी दी गई। जैसे सरस्वती को ज्ञान, शारदा को विद्या, लक्ष्मी को धन, जीवो के स्रजन के लिए ब्रह्मा, पालन पोषण में विष्णु, रक्षा के लिए शिव को दायित्व दिए गए। इसी प्रकार अन्य देवो-देवीयो को अलग-अलग कार्य सौपे। उन्होंने बताया कि समस्त ब्रह्मांड शिवमय है। श्री दुकुन ने शिवाधीन नाम से महाकाव्य लिखा, जिसमें संपूर्ण वर्णन किया। 
बबेरू बांदा से पधारे पं लक्ष्मी प्रसाद शर्मा मानस मर्मज्ञ ने भगवान श्रीराम के नाम के प्रभाव पर चर्चा करते हुए कहा कि राम नाम कर अमित प्रभावा, राम नाम अभिमत कलदाता, हित परलोक लोक पितु माता। भगवान श्रीराम का नाम इस लोक में माता-पिता की तरह रक्षा करता है और उस लोक में भी हितकारी है। भगवान शिव का वाहन बैल, माता पार्वती का वाहन सिंह, गणेश जी का वाहन चूहा, भगवान शिव के गले में सर्प तथा मयूर कार्तिकेय जी का वाहन है जो जन्मजात एक दूसरे के दुश्मन है, परन्तु राम नाम के प्रभाव से सभी एक जगह बड़े प्रेम के साथ रहते हैं। हमें भी मानव शरीर पाने के पश्चात भगवान के पावन नाम का जाप करके अपने जीवन को कृतार्थ करना चाहिए। राष्ट्रीय रामायण मेला चित्रकूट की पावन धरा से यह संकल्प लेकर जाएं कि 24 घंटे में से कुछ समय निकाल कर भगवान के नाम का स्मरण अवश्य करें। यही हमारे जीवन का अंतिम लक्ष्य है। भक्त प्रहलाद ने केवल राम नाम के प्रभाव, जप से सभी विषम परिस्थितियों में कमल की भांति खिले रहे। उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सका है। अस्तु भगवान के भजन के द्वारा ही जीवन का कल्याण होता है।
मुम्बई से पधारे वीरेन्द्र प्रसाद शास्त्री ने मानस के अंतर्गत जनक जी के प्रसंग में विषयानन्द, ब्रह्मानन्द, परमानन्द के बारे में विवेचन करते हुए बताया कि परमानन्द का जो आनन्द है वह सर्वोपरि है। यह आनन्द निराकार ब्रह्म सगुण रूप में भक्त के सामने प्रकट होता है। उससे जो आनन्द उत्पन्न होता है वही परमानन्द है जो आनन्द सभी से परे है। उन्होंने श्रोताओं को समझाते हुए बताया कि आप सभी को परमानन्द की स्थिति में रहना चाहिए। 
छिंदवाड़ा के सीताराम शरण रामायणी ने कहा कि असु स्वभाव कहु सुनहु न देखेउ, केहि खगेश रघुपति सम लेखउ। उमा राम सुभाउ जेहि जाना, ताहि भजन तज भाव न आना। प्रभु राम का भक्तो से अति प्रेम करने का स्वभाव ही है। खंडवा के रमेश तिवारी ने कहा कि भगवान राम अति दयालु हैं। जयंत द्वारा घनघोर अपराध करने के बाद भी उसके शरण में आने पर उसे एक नैन कर तजा भवानी की ही सजा दी थी। इसी क्रम में ही वृंदावन के कृष्णानन्द शास्त्री, वसधुंरा रामायणी छिंदवाडा ने रामकथा पर अपने प्रवचन किए। कार्यकारी अध्यक्ष प्रशांत करवरिया, महामंत्री करुणा शंकर द्विवेदी, शिवमंगल शास्त्री, विनोद मिश्रा, राजाबाबू पांडेय, डा घनश्याम अवस्थी, मो यूसुफ, ज्ञानचन्द्र गुप्ता, राम प्रकाश श्रीवास्तव, इम्त्यिाज उर्फ लाला, सत्येन्द्र पांडेय, हेमंत मिश्रा, विकास आदि मौजूद रहे।

उल्लास और उमंग से सराबोर रही शाम की प्रस्तुतियां 
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में की श्रंखला में स्वरात्मिका इंस्टीट्यूट आफ डांस एण्ड म्यूजिक के कलाकारों ने एक से बढ़कर एक मनोहारी प्रस्तुतियां दी। मंजू देवी, पिंकी सरोज और अर्चना ने गणेश वंदना, शिव स्तुति और देवी गीत पर नृत्य कर दर्शकों का मन मोह लिया। इन कलाकारों ने मिर्जापुर की मशहूर कजरी विधा पर भी मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। जब से पीएम नरेन्द्र मोदी ने 22 जनवरी को अयोध्या में श्री राम के नए नवेले भव्य मंदिर में भगवान श्रीराम के प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की है तब से पूरे देश में राम भक्तों का उल्लास आसमान छू रहा है। जब पूरा देश राममय हो तब भला रामायण मेला के मंच से रामोत्सव की धूम नजर न आए यह कैसे हो सकता है। लखनऊ से आए कलाकारों के दल ने मंच से भगवान राम के जन्म की लीलाओं को लेकर नृत्य प्रस्तुत किया तो पूरा पांडाल दर्शकों की तालियों से गूंज उठा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अगली कड़ी में प्रयागराज से आई पूजा अग्रवाल ने कथक नृत्य के माध्यम से अपनी कला का बेजोड नमूना प्रस्तुत किया। कथक नृत्य की विधा का बखूबी प्रदर्शन करते हुए पूजा अग्रवाल दर्शको को बांधे रखने में सफल रहीं। एक के बाद एक कभी एकल तो कभी सामूहिक कथक नृत्य का लोगों को भावविभोर कर दिया। पूजा अग्रवाल भारतीय प्रयाग संगीत समिति में प्रोफेसर हैं और देश-विदेश में इन्होंने अपनी नृत्य की प्रस्तुतियां दी है।
शनिवार को सुबह मेले के कार्यकारी अध्यक्ष प्रशांत करवरिया व राजाबाबू पांडेय ने आरती कर रामलीला का शुभारंभ कराया। प्रभु श्रीराम का माल्र्यापण किया गया। इसके पूर्व शुक्रवार की रात श्री बृज कृष्णलीला रामलीला संस्था के द्वारा रामायण मेला के मंच पर प्रभु श्रीराम के जन्म की लीला का सजीव मंचन किया गया। पूरे तीन घंटे तक पांडाल भगवान राम के जन्म के उल्लास में डूबा रहा। वृंदावन से आए साधक कलाकारों के सजीव अभिनय ने लोगों का मन मोह लिया। भगवान राम की बाल लीलाओं की प्रस्तुति इतनी सुंदर और मनमोहक थी कि लोग सांस थामे श्रीराम लीलाओं का रसस्वादन करते रहे। रामलीला के बीच-बीच में प्रभु श्रीराम के भजन दर्शकों को रामभक्ति में गोते लगाने पर विवश करते रहे। इस दौरान कार्यकारी अध्यक्ष को गमला भेंटकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर महामंत्री करुणा शंकर द्विवेदी, शिवमंगल शास्त्री, जितेन्द्र करवरिया, सुधीर अग्रवाल, अभिमन्यु सिंह आदि मौजूद रहे। 


Friday, March 8, 2024

राष्ट्रीय रामायण मेला के शुभारंभ में गूंजी मंत्रों की ध्वनियां

धर्मो रक्षति रक्षतः,,,,,,,,


- गोवर्धन पीठाधीश्वर जगदगुरू अधोक्षजानन्द देवतीर्थ पुरी महाराज ने किया शुभारंभ
- हनुमान गढी के महंत राजूदास ने कहा, श्री रामचरितममानस को फाडने की बात करने वाले को जीने का अधिकार नहीं
- चित्रकूट के सभी अखाड़ों ने निकाली विशाल शोभायात्रा
- जय बजरंग सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन उपाध्याय व राष्ट्रीय प्रभारी अर्चना उपाध्याय रहे विशिष्ट अतिथि


चित्रकूट। धर्मो रक्षति रक्षतः, जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। जल्द ही अखंड भारत का सपना पूरा होने वाला है, भारत की संसद ने इसको करके दिखा दिया है। यह सदी सनातन की है। क्योंकि कुशल नेतृत्व के कारण सनातन को वैश्विक मान्यता मिलती दिखाई दे रही है। यह बातें गोर्वधन पीठ के जगद्गुरू अधोक्षानंद देवतीर्थ पुरी जी महराज ने राष्ट्रीय रामायण मेला के 51 वें सस्करण का शुभारंभ करते हुये कहीं।
उन्होंने कहा कि वह पिछले तीन साल से अखंड भारत के वृत को लेकर अखंड भारत के सभी धर्मस्थलों में जाकर धर्म का प्रचार कर रहे हैं। बांग्लादेश, म्यामार, सहित एक दर्जन देशों की यात्रा की जा चुकी है, जबकि जल्द ही पाकिस्तान जाकर माता हिंगलाज की पूजा करना है।
भगवान श्री राम की तपस्थली आज देश के विशिष्ट संतो ंके चरणों को पाकर धन्य हो गई। राष्ट्रीय रामायण मेला के 51 वें संस्करण का शुभारंभ गोवर्धन पीठ के जगदगुरू स्वामी अधोक्षानंद देवतीर्थ पुरी जी महराज व अयोध्या की हनुमान गढी के महंत राजूदास ने वेद की ऋचाओं के बीच दीप प्रज्जवलित कर किया।  
डदृघाटन के पूर्व निर्माेही तिराहे से चित्रकूट धाम के सभी सात अखाड़ों के निशानों के साथ विशिष्ट संतों की उपस्थित में हाथी घोड़ों के साथ विशाल शोभायात्रा निकाली गई। जिसका स्वागत कई स्थानों पर होने के साथ ही रामायण मेला सभागार के बाहर कार्यकारी अध्यक्ष प्रशांत करवरिया, महामंत्री डा0 करूणाशंकर द्विवेदी ने किया। उनका सहयोग मनोज गर्ग, राजा बाबू पांडेय, पप्पू श्रीवास्तव आदि ने किया। रामायण मेला की औपचारिक शुरूआत के पूर्व स्वामी जयेन्द्र सरस्वती वेद पाठशाला व श्री राम संस्कृत महाविद्यालय के छात्रों ने स्वस्ति वाचन मंगलाचरण किया। इसके बाद मेले के कार्यकारी अध्यक्ष व महामंत्री व अन्य पदाधिकारियों ने विशिष्ट अतिथियों का स्वागत माल्यापर्ण, मानस व श्री फल भेंट कर किया।  कार्यक्रम के प्रारंभ में जगद्गुरू रामभद्राचार्य दिव्यंाग विश्वविद्यालय के संगीत विभाग के प्रमुख डा0 विशेष नारायण मिश्र व महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के राजा पांडेय ने गणेश वंदना प्रस्तुत की। अयोध्या हनुमान गढी से आये महंत राजू दास ने कहा कि जिस व्यक्ति ने मानस का अपमान कर उसे जलाने व फेंकने की बात कही है, उसे जीने का कोई अधिकार नहीं हैं। हिंदू सहिषुण्य है तभी वह जिंदा है, नही तो एक देश में छोटा सा कार्टून बनाने पर 8 पत्रकारों को मौत के घाट उतार दिया गया था। उन्होंने राम जन्म भूमि आंदोलन के तमाम वृतांत प्रस्तुत किये। पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्र ने सभी आमंत्रित लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि हमारा अगला लक्ष्य रामायण मेले को विश्व रामायण मेला बनाना है। हम इस दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। इस दौरान महामंत्री डा0 करूणाशंकर द्विवेदी ने डा0 लोहिया द्वारा रामायण मेले की परिकल्पना के समय कहे गये उद्गारों को बताया। उन्होंने कहा कि मेले को मूर्त रूप प्राप्त करने में 13 वर्ष का समय लगा, लेकिन वास्तव में यह ऐसा आयोजन है जिसका मूल उद्देश्य विशिष्टिता से भरा है। आनंद, दृष्टि, रससंचार और हिंदुस्तानी को बढ़ावा देने के का सपना डा0 लोहिया ने देखा था। इसकी पूर्ति लगातार मेला का आयोजन कर रहा है। दिगंबर अखाडे के महंत दिव्य जीवन दास जी ने कहा कि वास्तव में रामायण मेला के आयोजन ने चित्रकूट के विकास के लिए मील का पत्थर स्थापित किया है। 50 आयोजन का मतलब यहां पर पांच दिनों तक लगातार देश व विदेश के गणमान्यों का मेला लगा रहना और उनके यहां से जाने के बाद चित्रकूट का प्रचार यहां के विकास का एक बड़ा कारक रहा है।
डा0 चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ने कहा कि चित्रकूट राम की वह भूमि हैं, जहां पर राम नाम हमेशा गुंजायमान रहता है। भले ही तुलसी व वाल्मीकि के राम का अवतरण त्रेता में हुआ हो, पर यहां पर तो सतयुग में स्वयं परम पिता ब्रहमा ने रामार्चा कर राम की भक्ति की शुरूअंात की थी। इस दौरान जय बजरंग सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन उपाध्याय, राष्ट्रीय प्रभारी अर्चना उपाध्याय, पूर्व मंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, निर्वाणी अखाड़े के महंत सत्य प्रकाशदास जी, कामदगिरि पीठम के महंत मदन गोपाल दास, निर्माेही अखाड़े के अधिकारी दीन दयाल दास महराज सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

चित्रकूट में दर्शन का महासंगम, विश्व शांति की दिशा में उभरा नया चिंतन

चित्रकूट: जब मंदाकिनी के तट पर विचारों की धारा बहती है, तब चित्रकूट केवल एक तीर्थ नहीं रहता—वह विश्व के बौद्धिक मंथन का केंद्र बन जाता है। त...