Thursday, July 8, 2010

अलौकिक रहस्यों की भूमि चित्रकूट

चित्रकूट। 'चित्रकूट एक औषधि सचवत करत सचेत' वैसे तो तमाम पुराणों के साथ ही महर्षि वाल्मीकि और संत शिरोमणि तुलसीदास जी महाराज ने जब श्री राम चरित मानस के माध्यम से अलौकिक तीर्थ चित्रकूट के महत्व को सामने लाने का काम किया तो विश्व भर के लोग यहां के पहाड़ों कंदराओं और जंगलों में छिपे रहस्यों को समझने का प्रयास करने लगे।

संत इब्राहिम अली 'गोविंद बाबा' ने चित्रकूट के महत्व को अपने शब्दों में परिभाषित करते हुये कहा कि इस तीर्थ का निर्माण ही सत्य को लेकर हुआ है। इसलिये यह विश्व भर में देदीप्तमान नक्षत्र की तरह चमक रहा है। यह बात और है कि यहां पर आने वाले भक्त केवल अभी बाहरी चमक दमक देख रहे हैं पर वास्तव में जल्द ही यहां के वे रहस्य भी सामने आने वाले हैं जिनके बारे में केवल पुराने ऋषियों को ही मालूम था।
उन्होंने बाबा तुलसीदास जी की लिखी चौपाई चित्रकूट एक औषधि, सचवत करत सचेत को विस्तार पूर्वक समझाते हुये कहा कि जब आडंबर का सांप लोगों को डसने के लिये खड़ा होता है तो चित्रकूट एक औषधि के समान खड़ा होकर व्यक्ति का साथ देता है और उसके अंदर के इंसान को जगाकर पुरुषार्थी के रुप में सामने लाता है। भगवान राम को जब जंगल में आना पड़ा तो चित्रकूट ने ही उन्हें इतना बलवान बनाया कि उन्होंने राक्षस राज रावण को मारकर सत्य व न्याय की रक्षा की।
उन्होंने कहा कि चित्रकूट के कण-कण में परमपिता का निवास है यहां की भूमि प्रार्थनाओं की भूमि है जहां आदिकाल से संत ऋषि प्रार्थनाओं में लीन हैं।
समाजसेवी गुलाब सिंह के आवास में उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि सत्य को न तो मारा जा सकता है न काटा जा सकता है। वह तो सूर्य के समान हमेशा चमकता ही रहेगा।

भरत मिलाप में हैं सर्वाधिक प्रमाणित चरण चिंह

चित्रकूट। 'जहं जहं चरण पड़े रघुराई' कुछ ऐसी ही इच्छा लेकर जब डा. राम अवतार शर्मा आगे बढ़े तो एक सत्संकल्प था 'राम काज कीन्हें बिना मोहीं कहां विश्राम'। लेकिन जब चित्रकूट के प्रसंगों को अयोध्या कांड में डा. शर्मा ने पढ़ा तो वे चौंक पड़े , इससे भी ज्यादा तो वे भावविभोर तब हुये जब वे खुद चित्रकूट पहुंचे।

श्री राम चरित को विश्व से परिचित कराने वाले महर्षि वाल्मीकि हों या फिर जन-जन को श्री राम के चरित्र को मर्यादा पुरुषोत्तम का स्वरुप दिलाने वाले गोस्वामी तुलसी दास दोनो ने ही प्राकृतिक सुषमा से भरी इस तीर्थ शिरोमणि स्थली के तप वैभव के बारे में काफी कुछ लिखा। बस इस बात को देखकर और भगवान श्री राम के दूसरे दौर के वन गमन पर चित्रकूट में सर्वाधिक समय व्यतीत करने को लेकर जब वे यहां पर आये तो भरत मिलाप पर भगवान के चरण-चिंह देखकर तो निश्चित ही कर बैठे कि अगर कहीं पर भगवान के वन पथ गमन का संग्रहालय बनेगा तो वह यही भूमि होगी।
डा. शर्मा बताते हैं कि विश्व भर में एक जगह पर इतने सारे विभिन्न प्रकार के चरण चिंह कहीं और नही मिलते और न ही कहीं पर प्रभु की करुणा व भाइयों का प्रेम देखकर शिलाओं के पिघल जाने का प्रमाण मिलता है। भगवान राम, मां सीता और भ्राता लक्ष्मण के चरण चिंहों से पवित्र इस भूमि के कण-कण में भगवान स्वयं विराजते हैं। आज भी उनकी ऊर्जा की स्वीकारोक्ति मिलती है। वे बताते हैं कि प्रभु के पद इस जिले में सबसे पहले मुरका पर पड़े थे आज यहां पर हनुमान मंदिर है। इसके बाद ऋषियों की तपस्थली ऋषियन गांव में जिस पहाड़ी पर वे रुके थे उसका नाम अब सीता पहाड़ी के नाम से है। इसके बाद गरौली घाट से यमुना नदी को पार किया था। यहां पर 'तेहि अवसर एक तापस आवा' वाला प्रसंग हुआ था। अगला पड़ाव रामनगर का कुमार द्वय तालाब था। भगवान ने अपनी वन यात्रा की पांचवीं रात्रि का विश्राम रैपुरा तत्कालीन नाम रैनपुरा में किया था और यहां से प्रात: चार बजे वाल्मीकी नदी में स्नान कर चैत्र शुक्ल पूर्णिमा चित्रा नक्षत्र में आठ बजे दिन श्री कामदगिरि पहुंचे थे। प्रभु श्री राम ने चित्रकूट परिक्षेत्र के अनुसुइया आश्रम, गुप्त गोदावरी, स्फटिक शिला, राघव प्रयाग में तो अपने चरण चिंह धरे ही साथ ही मडफा, भरतकूप, अमरावती, विराध कुंड, पुष्करिणी सरोवर, मांडकर्णी आश्रम, श्रद्धा पहाड़ जैसे तमाम और स्थानों पर जाकर वहां पर तप में लगे ऋषियों से मिले। मांड़कर्णी आश्रम के पास ही उन्होंने भीलनी शबरी के जूठे बेर भी चखे थे।
उन्होंने कहा कि श्री राम बन पथ गमन का उद्देश्य अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाना है। जिससे लोग यह जाने कि वास्तव में श्री राम का चरित्र क्या था और हमारे लिये उसमें से ग्रहण करने योग्य क्या है।

यूं नष्ट हो रहा है चित्रकूट का पुरातात्विक वैभव

चित्रकूट। 'तत: परिप्लवं गच्छेज्तीर्थ त्रलोक्य पूजितं। अग्निष्टों मत्रि रात्रि फलं प्राप्नोति मानव:।' कुछ इस तरह से पुराने अनाम ऋषि द्वारा लिखे गये 'वृहद चित्रकूट महात्म' में प्राकृतिक सुषमा से आच्छादित मंदाकिनी की धारा से सिंचित प्रमोद वन के महत्व को दर्शाया गया है। प्रमोदवन को पारिपल्लव नाम से संबोधित करते हुये कहा गया है कि जो व्यक्ति यहां पर तीन रात्रि निवास करता है उसे अग्निहोम यज्ञ के समान फल मिलता है। यह स्थान तीनों लोकों में पूजित है।

लगभग साढ़े तीन सौ साल पहले रींवा नरेश रघुराज सिंह ने प्रमोदवन में लक्ष्मी नारायण मंदिर का निर्माण कराने के साथ ही विशाल यज्ञ करवाया था। बताया जाता है कि इस यज्ञ को करने में 300 पंडि़तों ने लगातार दो साल से त्रिकाल संध्या के माध्यम से पाठ किया था।
स्वामी राम सखेन्द्र जी महाराज बताते हैं कि वास्तव में यह कोठरियां राजा रघुराज सिंह ने पुत्र कामेष्ठि यज्ञ को पूरा करने के लिये बनवाई थी। लक्ष्मी नारायण मंदिर के प्रांगण में पुत्र कामेष्ठि वृक्ष भी हिमालय से लाकर लाया गया था।
यहां पर रहने वाले अर्चन पंडि़त कहते हैं कि पुरातात्विक महत्व के इस विशाल मंदिर के बीस कमरों पर पहले तो वृद्ध सेवा सदन ने ही अतिक्रमण कर रखा था। वैसे बेसहारा वृद्धों के रहने के कारण इसमें कोई गलत नही था पर प्रशासन ने जिस अंदाज में इस प्राचीन इमारत के बीस कमरों को गिराया है। यह गलत है। उन्होंने कहा कि पुरातात्विक महत्व की इस इमारत का जहां सरकार को संरक्षण कर इसके जीर्णोधार की बात सोचनी चाहिये वहीं इसे गिराया जाना गलत है।
महंत कौशलेन्द्र दास ब्रह्मचारी कहते हैं कि जिस प्रकार अतिक्रमण विरोधी अभियान के अन्तर्गत मंदिरों, मठों, धर्मशालाओं और पुरातात्विक महत्व की इमारतों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है लगता ही नही कि उसी पार्टी भाजपा का यहां पर राज है जिसके मुखिया ने इसे पवित्र नगरी घोषित कर मेगा डिस्टेनेशन प्लान बनाकर विकास कार्यो की झड़ी लगा रखी है। मंदाकिनी की जमीन पर जिन भूमाफियाओं ने कब्जा कर बेंचने का काम जारी कर रखा है उसको खाली कराने का काम कोई नही करता। कहा कि चित्रकूट के पुराने नक्शे को गायब करने का कुचक्र भी उन्हीं भूमाफियाओं ने रचा है।

Tuesday, March 30, 2010

चित्रकूट विकास में धन की कमी आडे़ नहीं आयेगी : शिवराज सिंह चौहान

चित्रकूट। धर्मनगरी के विकास के लिए म.प्र. के मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के प्रांगण से चित्रकूट मेगा डेस्टीनेशन परियोजना का शुभारंभ किया। इस मौके पर बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि चित्रकूट के विकास में धन की कमी आडे़ नहीं आयेगी। इस दौरान उन्होंने भरत घाट से कामदगिरि मार्ग, मंदाकिनी में एक अतिरिक्त पुल के निर्माण के साथ ही सूर्यकुंड, गुप्त गोदावरी, हनुमान धारा की ग्यारह परियोजनाओं का शिलान्यास किया। म.प्र के मुख्यमंत्री ने राघव प्रयाग घाट के निर्माण की आधार शिलाएं रखते हुये भरत घाट व राघव प्रयाग घाट का लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं के अलावा भी उन्होंने सतना जिले की अन्य परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया।

इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिना तालियां बटोरी साथ ही महिलाओं, कन्याओं व हाल ही में पैदा हुये बच्चों को चेक भी बांटीं। इस दौरान उन्होंने समाजसेवी नाना जी देशमुख को याद करते हुये कहा कि दीन दयाल शोध संस्थान का बोध वाक्य 'हम अपने लिये नही अपनों के लिये हैं अपने वे हैं जो उपेक्षित हैं' वास्तव में कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि तीन साल बाद इस बार गेंहू का उत्पादन अच्छा हुआ है। मध्य प्रदेश शासन ने गेंहू का समर्थन मूल्य केंद्र सरकार द्वारा तय मूल्य से अधिक रखा है। प्रदेश में बारह सौ रुपये प्रति कुंटल गेंहू खरीदा जायेगा। किसानों को कर्जा भी केवल तीन प्रतिशत ब्याज पर दिया जा रहा है। नगरीय समग्र स्वच्छता अभियान में चित्रकूट को शामिल करने के साथ ही सभी योजनाओं के अलावा पच्चीस लाख रूपये देने की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सभी लोग अपना कर्तव्य पूरा करें, जनप्रतिनिधि हवाला घोटाला न करें और जनता की सेवा करें। बच्चों को स्कूल भेजें, साल में एक पेड़ लगाकर उसे जिंदा रखें, गांव का पानी गांव में रोकें, नशा मुक्त गांव बनायें व सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन में सरकार को सहयोग करें।
खेलकूद, पर्यटन एवं युवा कल्याण मंत्री तुको जी राव ने कहा कि पहले चित्रकूट के विकास के लिये 6 करोड़ प्रदेश सरकार ने दिये थे जिसमें पांच करोड़ खर्च कर दिये गये हैं। एक करोड़ के काम एक महीने में पूरे हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि धर्मनगरी चित्रकूट का विकास करना सरकार की न केवल मंशा है बल्कि प्रमुख लक्ष्य है। प्रभारी मंत्री ऊर्जा, खनिज राजेन्द्र शुक्ल, सांसद गणेश सिंह व विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार ने भी संबोधित किया। ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ज्ञानेन्द्र सिंह ने शाल व प्रमुख द्वार कामतानाथ मंदिर के प्रतिनिधि ने उन्हें श्री फल भेंट किया।
इसके पूर्व आरोग्य धाम परिसर में आने के बाद मुख्यमंत्री का काफिला सियाराम कुटीर पर पहुंचा। शनिवार को पहले नाना जी के मासिक श्राद्ध होने के चलते यहां पर पहुंचे मुख्यमंत्री ने उनके कमरे में जाकर अपने श्रद्धासुमन अर्पित किये। यहां पर अप्रवासी भारतीय डा. नरेश शर्मा ने उनसे नाना जी की यादें बांटी। इसके बाद मुख्यमंत्री स्फटिक शिला परिसर में पहुंचे। यहां पर काफी दिनों से रुक-रुक चल रहे मंदाकिनी सफाई अभियान में हाथ बंटाने के साथ ही मंदाकिनी का पूजन-अर्चन किया। इस दौरान गायत्री परिवार के व्यवस्थापक डा. राम नारायण त्रिपाठी व भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।

सभी ने याद किया नानाजी को

चित्रकूट। चित्रकूट के विकास के लिये मील का पत्थर रहे समाजसेवी नाना जी देशमुख का प्रथम मासिक श्राद्ध मनाने महाराष्ट्र से एक विशेष ट्रेन के जरिये लगभग आठ सौ लोग शुक्रवार की देर शाम चित्रकूट पहुंचे।

उद्यमिता विद्यापीठ के परिसर में ही शनिवार की शाम को एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। जिसमें बाहर से आये सभी लोगों ने अपने विचार व्यक्त करने के बाद नाना जी को भाव भीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान नाना जी के कामों को आगे बढ़ाने की शपथ काफी लोगों ने ली।
उद्यमिता की निदेशक डा. नंदिता पाठक ने कहा कि वास्तव में नाना जी ने यहां माडल विकसित कर यह बताने का प्रयास किया है कि गांव में रहने वाले हों या फिर शहर में रहने वाले अगर सहजीवन जियें तो कभी कोई दिक्कत नही आ सकती। अगर अपना जीवन दूसरों की भलाई के लिये समर्पित करना है तो नाना जी से बड़ा कोई दूसरा उदाहरण नही हो सकता।
शनिवार को बाहर से आये सभी लोगों ने दीनदयाल शोध संस्थान के प्रकल्पों आरोग्य धाम, बनवासी आश्रम, गुरुकुल, राम दर्शन, कृषि विज्ञान केंद्र गनीवां व मझगंवा व अन्य स्थलों का अवलोकन किया।

अमावस्या पर भी जारी रही पुलिस की कमाई

चित्रकूट। इस बार की सोमवती अमावस्या के मौक पर एलआईयू काफी सक्रिय रही। जगह-जगह लोगों को रोक-रोक कर उनके सामान की जांच की गई। जिलाधिकारी विशाल राय की कड़ाई काम आ ही गई। ऐन सोमवती अमावस्या के दस दिन पहले ली गई सभी विभागों की बैठक में अमावस्या के मौके पर मेला परिक्षेत्र में व्यवस्थाओं को चौकस रखने के निर्देशों का असर यहां देखने को मिला। रोडवेज वाहनों की कमी के चलते डग्गामार वाहनों की चांदी रही। कर्वी से चित्रकूट तक चलने वाले टैंपो व टैक्सी वालों ने हद कर दी। सवारियों को बेरोकटोक बाहर लटकाकर चलते रहे।

रामघाट में यात्रियों को डूबने से बचाने के लिये गोताखोर पुलिस की टीम डटी रही। अग्निशमन विभाग अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद रहा वहीं कुछ पुलिस कर्मियों ने अमावस्या के मौके पर भी अपनी वाहन चेकिंग का काम जारी रखा। दो पहिया वाहन चालक तो परेशान किये ही गये साथ ही कुछ टैक्सी टैम्पों वालों का भी चालान कर कोतवाली पहुंचा दिया गया।

सोमवती अमावस्या : पवित्र डुबकी लग कमाया पुण्य

चित्रकूट। 'भज ले पार करइया का, भज ले पर्वत वाले का' ये कुछ ऐसे उद्धोष हैं जो रविवार की दोपहर से ही धर्म नगरी के परिक्रमा मार्ग पर लगातार सुने जा रहे हैं। ऐसे लोगों की संख्या सोमवार की शाम तक लाखों लोगों की पार कर चुकी है। लोगों का आना और जाना लगातार जारी है। सोमवती अमावस्या पर्व पर पुण्य लूटने की आस्था और समस्त कामनाओं की पूर्ति के लिये परिक्रमा पूरी करने की होड़ बुंदेलखंड के इसी अलौकिक तीर्थ में देखने को मिलती है। महिला हो या पुरुष, वृद्ध हो या जवान सभी के चेहरे की चमक लाखों लोगों की रेलम पेल में भी विश्वास की ज्योति कम नही होती। परिक्रमा पथ हो या फिर परिक्षेत्र के अन्य स्थान सभी जगहों पर कामतानाथ की जय के नारे तो जोरदारी से सुनाई ही देते हैं वहीं तेल बेचने वालों के अलावा तमाम गृह उपयोगी उत्पाद बेंचने वालों के भी प्रचारों की स्वर लहरियां उनमें मिलकर अलग ही वातावरण प्रस्तुत करती हैं।

सबसे ज्यादा आनंददायक क्षण मंदाकिनी गंगा के किनारे पर दिखाई देता है। जहां पर कड़ी चौकसी के बीच लाखों लोग रामघाट, राघव प्रयाग घाट के अलावा अन्य घाटों पर स्नान करते दिखाई देते हैं। इसके बाद लोगों में चित्रकूट के अधिष्ठाता देव स्वामी मत्स्यगयेन्द्र नाथ को जलाभिषेक करने की होड़ होती है। यहां के बाद लोग पैदल ही लगभग तीन किलोमीटर दूर स्वामी कामतानाथ के पर्वत की परिक्रमा करने के लिये निकलते हैं। तमाम श्रद्धालु तो ऐसे हैं जो लगभग चालीस-चालीस सालों से हर एक अमावस्या पर यहां पर आकर परिक्रमा लगाते हैं।
महोबा जिले के चरखारी से आये लेखपाल संतोष कुमार चौबे बताते हैं कि पिछले पैंतीस सालों से ज्यादा से वे हर अमावस्या पर वे आकर यहां परिक्रमा लगा रहे हैं।
ऐसे ही तमाम और लोग हैं जो यहां हर अमावस्या को आकर परिक्रमा करते हैं तमाम लोग तो अपने निवास स्थान से चित्रकूट तक पैदल आते हैं। कुछ की मनौती होती है तो कुछ जिंदगी को खुशहाल बनाने के लिये ऐसा करते हैं।
ग्वालियर से आये कैलाश, मीना, राजकुमार व चंद्र मोहन ने कहा कि भले ही वे लोग अपने घरों से पैदल न आ पाते हो पर वे चित्रकूट धाम कर्वी के रेलवे स्टेशन से तो पैदल ही स्वामी कामतानाथ के दरबार में जाते हैं।

चित्रकूट में दर्शन का महासंगम, विश्व शांति की दिशा में उभरा नया चिंतन

चित्रकूट: जब मंदाकिनी के तट पर विचारों की धारा बहती है, तब चित्रकूट केवल एक तीर्थ नहीं रहता—वह विश्व के बौद्धिक मंथन का केंद्र बन जाता है। त...