Monday, November 8, 2010

बुद्धिप्रदाता और धन-धान्यदायिनी को गढ़ने वाले बदहाल

चित्रकूट, संवाददाता : बेसिन की संधि के बाद तीर्थ नगरी में आये मराठा पेशवाओं ने जहां इस धरती को सजाने और संवारने के लिये अठारह बागों के साथ गणेश बाग और तमाम कुओं और बावड़ियों का निर्माण कराया वहीं कुछ हुनरमंद जातियों को लाकर यहां पर बसाया और उन जातियों के लोगों ने अपने हुनर का ऐसा जलवा दिखाया कि चित्रकूट की बनी हुई वस्तुयें इस समय तीन प्रदेशों में बिक रही हैं। इनमें से एक है दीपावली के मौके पर बिकने वाली श्री गणेश लक्ष्मी और खिलौने वाली मूर्तियां। राजप्रश्रय में जहां इन कारीगरों को भरपूर सम्मान मिला वहीं आज यह मेहनतकश कौम सरकारी उपेक्षा के कारण बदहाल जिंदगी जीती नशे की गिरफ्त में है। इनका कुछ हाल इस तरह है साल के महीने का काम और फिर छह महीने तक उस कमाई को खाना, बाद के दिनों में फांकाकशी के साथ मौसमी मजदूरी से अपनी जिंदगी काटना है। भले ही यह शहर के निवासी हो पर शिक्षा के नाम पर अधिकतर बच्चे कक्षा पांच और आठ के बाद शायद ही स्कूल का मुंह देख पाते हों और जुआं, स्मैक व शराब की लत इन्हें जवान होने से पहले ही बूढ़ा बना रही है।

जहां एक ओर कुम्हार जाति के यह लोग देश के चार त्योहारों में सबसे बड़े माने जाने वाले त्योहार दीपावली पर दूसरों के घरों में उजाला करने के लिये दियों के साथ धन और धान्य के साथ बुद्धि के प्रदाता श्री लक्ष्मी व श्री गणेश की बेहतरीन मूर्तियों को अपने हाथों से बनाने का काम करके लोगों से तारीफ पाते हैं, वहीें दूसरी ओर शिक्षा, स्वास्थ्य की दिक्कतों के साथ ही स्थानीय प्रशासन से भी इन्हें उपेक्षा ही मिलती है। लाल फीताशाही और कमीशनखोरी के कारण न तो इन्हें अनुदान या त्रृण मिलता है और न ही कभी इनको किसी महोत्सव या मेले में अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने की अनुमति अधिकारी देते हैं।
गौर करने लायक बात यह है कि जहां महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के ललित कला संकाय से कई लोग कर्वी के मिट्टी की मूर्तियों के उद्योग को लेकर पीएचडी कर चुके हैं वहीं आज तक किसी भी समाजसेवा की संस्था के द्वारा न तो इनके मुहल्ले में कोई जागरुकता का कार्यक्रम चलाया गया और न ही किसी मंच के माध्यम से इनके हुनर की तारीफ कर इनको आगे बढ़ाने का काम किया गया। मूर्तियों को बनाने में सिद्ध हस्त सुखलाल प्रजापति कहते हैं कि साल में तीन महीने मूर्तियां बनाने के साथ ही वे बाकी दिनों में पौधों को ढेले पर ले जाकर बेंचने का व्यवसाय करते हैं तभी गृहस्थी की गाड़ी चल पाती है। नशे की लत के कारण बदहाल होती जिंदगियों के बारे में कहते हैं कि जब ज्ञान नही है तो आसान है नशे की गिरफ्त में आना। अगर हाथों को लगातार काम मिले तो कौन नशा करेगा और कौन अपने बच्चों को सही ढंग से न पढ़ायेगा।
ताराचंद्र प्रजापति साल में एक महीने मूर्तियां बनाने के अलावा मौसमी मजदूरी करते हैं वे कहते हैं कि नेता तो यहां पर हमें अपना वोट बैंक मानकर अधिकार पूर्वक वोट मांगने आ जाते हैं पर आज तक हमारी भलाई की सोचने का किसी के पास समय नही है।

नानाजी की याद के साथ गूंजा रामधुन

चित्रकूट, संवाददाता: शरदोत्सव के ठीक बाद नाना जी का निवास स्थान सियाराम कुटीर एक बार फिर श्री राम जय राम जय जय राम की धुन से गूंज उठा। मौका था युगऋषि नाना जी देशमुख के आठवें मासिक श्राद्ध का। दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव डा. भरत पाठक ने पूजा पाठ के साथ ही नाना जी के आठवें मासिक श्राद्ध कार्यक्रम का प्रारंभ किया। मंगलवार की सुबह से ही सियाराम कुटीर प्रांगण में वटवृक्ष के नीचे श्री राम दरबार के साथ नाना जी को याद करने का माध्यम श्री राम जय राम जय जय राम की मधुर धुन को प्रारंभ करने से पहले वेद मंत्रों के साथ पूजा पाठ करने के बाद यह चौबीस घंटों के लिये धुन छेड़ दी गई। संस्थान परिवार के कार्यकर्ताओं के अलावा, क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, संत महंत भी संगीतमयी रामधुन में साथ देने के लिये लगातार आ रहे हैं। डा. पाठक ने बताया कि बुधवार को दोपहर बारह बजे से पूजा पाठ के बाद भंडारे का आयोजन होगा। संस्थान के सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिये मप्र शासन के कुछ मंत्री व संघ के बड़े ओहदों वाले लोग आ सकते हैं।

खूब याद आये नानाजी

चित्रकूट, संवाददाता: शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी रात और आसमान से बरसते अमृत के बीच रामनाथ गोयनका घाट पर बैठकर हजारों श्रोता यह तय नहीं कर पा रहे थे वे सितारों को मंच पर देख रहे हैं या फिर मंदाकिनी के जल में। युगऋर्षि नानाजी देशमुख की जयंती सियारामकुटीर के प्रागण में उसी पुराने अंदाज में हजारों लोगों को खीर खिलाकर मनायी गयी। बस एक कमी थी तो वह कि हर बार कि तरह यहां पर कुशल क्षेम पूंछने वाले प्यारे नानाजी नहीं थे।

वैसे दीन दयाल शोध संस्थान, जिला प्रशासन और संस्कृति संचालनालय मध्य प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित शरद पूर्णिमा की रात को मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा, संस्कृति एवं सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मी कांत शर्मा ने जब शरदोत्सव का शुभारंभ किया तो उनकी आंखे नम थी। उन्होंने कहा कि वैसे तो शरदोत्सव हर साल होता रहा है पर आज नानाजी के न होने पर उनकी कमी खल रही है। संस्थान के प्रधान सचिव डा. भरत पाठक हों या फिर संगठन सचिव अभय महाजन या फिर उद्यमिता विद्यापीठ की निदेशक डा. नंदिता पाठक सभी के चेहरों पर मुस्कुराहट के बीच एक अलग किस्म की वेदना दिखाई दे रही थी। ऐसा लग रहा था कि जैसे इनकी आंखों के आंसू अब नानाजी की याद में बह चलेंगे।
सांसद गणेश सिंह, विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार, नगर पंचायत अध्यक्ष नीलांशु चतुर्वेदी, अखिलेख शर्मा, डा. अनिल कुमार मिश्र, हरे श्याम, कौशल, अशोक मिश्र, राजू बाबा, सतीश मालवीय सभी ने स्वीकार किया कि आज यहां पर सबसे बड़ी कमी अगर है तो वह है अपने नानाजी जो हम सब के बीच नहीं हैं।

नाना जी का जाना सूर्यास्त के समान

चित्रकूट, संवाददाता: मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा, संस्कृति व जनसंपर्कमंत्री ने कहा कि आज नाना जी भले ही स्थूल रूप में न हो पर उनका चिंतन, प्रेरणा और विचार सदैव मानवता का मार्गदर्शन करते रहेंगे। वे राष्ट्रऋषि नाना जी देशमुख के जन्म दिन शरदपूर्णिमा के मौके पर महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के अर्मत्यसेन सभागार में पद्मविभूषण नाना जी देशमुख स्मृति व्याख्यान माला के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जो बीत चुका उसे भूलना ही बेहतर है अब आगे की ओर देखकर सबको मिलकर नाना जी के सपनों को साकार करना चाहिये। आने वाले समय में नाना जी और दीन दयाल शोध संस्थान के कार्यो से प्रेरणा लेकर राष्ट्र को परम वैभव शिखर ही ओर ले जा सकते हैं।

डा. भरत पाठक ने कहा कि सांस्कृतिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा को चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत बरसाता है। नाना जी हमें शरद पूर्णिमा के दिन अमृत बूंदों के रूप में मिले। वे जीवन की सोलह कलाओं से विभूषित थे। उन्होंने उनके जीवन की आरंभिक कठिनाइयों का उल्लेख करते हुये कहा कि जमींदार परिवार में जन्म लेने के बाद भी उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत साधारण थी। स्वयं के साधनों से अर्जित धन से उन्होंने मैट्रिक तक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने जीवन के विविध क्षेत्रों में सफलता अर्जित की। वे स्वयं कला के पारखी और बेहतरीन कलाकार थे। पिलानी ग्राम में दसवीं कक्षा में पुरस्कार प्राप्त किया गया उनका चित्र आज भी धरोहर के रूप में विद्यमान है। दूसरी कला प्रकाशक, संपादक और पत्रकार के रूप में थी। उन्होंने राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और स्वदेश के प्रकाशन में भरपूर सहयोग दिया। तीसरी कला के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया। चौथी कला मूल्य परक बेसिक शिक्षा के लिये सरस्वती शिशु मंदिरों का प्रारंभ किया इसकी आज बीस हजार शाखायें देश भर में हैं। पांचवी कला के रूप में कुशल राजनीति के रूप में जय प्रकाश नारायण की अगुवाई में समग्र क्रांति के आंदोलन में अपनी सहभागिता दिखाई। इसके साथ ही उन्होंने राजनीति के चरम शिखर को छूने के साथ ही साठ साल की आयु में स्वैछिक रूप से विरत हो जाने के बाद दीन दयाल शोध संस्थान की स्थापना कर गोंडा व चित्रकूट में विभिन्न प्रकल्पों को जीवंत रूप देकर मानव निर्माण करने का काम किया।
ग्रामोदय के कुलपति प्रो. कृष्ण बिहारी पांडेय ने कहा कि नाना जी विश्वविद्यालय के शास्वत प्रेरणास्रोत हैं। नाना जी के आदर्शो पर चलकर ही विश्वविद्यालय परिवार समाज में अपने योगदान को प्रस्तुत करना चाहता है। कहा कि नाना जी का जाना सूर्यास्त के जैसा है। क्षेत्रीय विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार, तुलसी शोध संस्थान के निदेशक अवधेश पांडेय, अनुसुइया आश्रम के प्रमुख चोला बाबा, कुलसचिव डा. बीएल बुनकर, डा. शिवराज ंिसह सेंगर, केपी मिश्र, डा. आरसी सिंह, डा. कमलेश थापक मौजूद रहे। संचालन डा. वीरेन्द्र कुमार व्यास ने किया।

धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य लाभ

- शरद पूर्णिमा को जुटते हैं लाखों दमा और श्वांस के रोगी
चित्रकूट, संवाददाता: पारस पीपल की जड़ी के सहारे शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी रात में दमा और श्वांस की बीमारी से ग्रसित होने वाले लोगों का मेला आज की रात चित्रकूट के कामदगिरि परिक्रमा के प्रमुख द्वार के साथ ही अन्य स्थानों पर लगेगा। पिछले दस सालों से लगभग एक दर्जन से ज्यादा लोग दमा और श्वांस की बीमारी से निजात पाने का रास्ता शरद पूर्णिमा पर चित्रकूट में आकर देखते हैं। लगभग हर जगह नि:शुल्क रूप से बांटी जाने वाली आयुर्वेदिक दवा का वितरण रात बारह बजे के बाद होता है। हर जगह पर स्वयंसेवक अपने हाथों में दवा का प्रसाद लेकर निकलते हैं और रोगी का बिना चेहरा देखे खुले में बनाई गई खीर में दवा डालते चले जाते हैं। मान्यता है कि अगर यह दवा साधारण तौर पर ही चख ली जाये तो आगे दमा और श्वांस की बीमारी होने की संभावना काफी कम हो जाती है।



गौरतलब है कि पिछले सैकड़ों सालों से श्री कामदगिरि के राम मोहल्ला में बाबा उधौ प्रसाद के पारिवारिक जन शरद पूर्णिमा की रात को यह दवा रोगियों को निशुल्क रूप से देते हैं। राम की नगरी में जिझौतिया ब्राहमण परिवार द्वारा स्थापित गोपाल जी मंदिर का यह प्रसाद अभी तक लाखों लोगों को दवा का प्रभाव दिखा चुका है।



दवा बांटने का काम करने वाले नंदू भइया कहते हैं कि यह तो उनके पुरखों द्वारा बताई गई दवा है। कुछ लोग इसे पारस पीपल का नाम देते हैं और कुछ लोग अन्य चीजें बताते हैं। लेकिन वास्तव में यह स्वामी कामतानाथ का प्रसाद है। दवा शरद पूर्णिमा की रात निशुल्क रूप से वितरित की जाती है।



प्रमुख द्वार के बाहर प्रसाद की दुकान करने वाले चंद्र भान गुप्ता, बड़ा भइया कहते हैं कि इस प्रसाद को पाने के लिये लोग शाम से ही यहां पर आना प्रारंभ हो जाते हैं। सामने के मैदान के साथ ही पूरे परिक्रमा पथ पर लोग खुले आसमान के नीचे अमृत की बूदों को अपनी पत्तल में समेटने के लिये रात भर इंतजार करते हैं। सुबह चार बजे प्रसाद को चखने के बाद स्वामी कामतानाथ की परिक्रमा करने के बाद रोग से मुक्त होने की कामना के साथ वापस घर चले जाते हैं।

आज से रामनाथ गोयनका घाट पर होगी विशेष प्रस्तुतियां

- विनोद राठौर, सुधा चंद्रन का नृत्य होगा आकर्षण का केंद्र

चित्रकूट, संवाददाता: पहली बार धर्मनगरी के लोग युगऋषि नाना जी देशमुख का जन्म उनके बिना सियाराम कुटीर में मनायेंगे। धवल चांदनी रात में हर बार की तरह चावल की खीर का प्रसाद होगा पर अपने नाना नही होगें।
शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी रात में धर्मनगरी के सियाराम कुटीर के राम नाथ गोयनका घाट की सीढि़यों व नावों के द्वारा नदी में बनाये गये रज्जू मार्ग व घाट के दूसरी तरफ मंच पर अपनी कला बिखेरते देशी कलाकारों को देखने का आनंद एक बार फिर मिलेगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस विशेष आयोजन के लिये तीन अलग-अलग विशेष हस्तियों को कार्यक्रम का शुभारंभ करने को आमंत्रित किया गया है।
जिला प्रशासन सतना, दीनदयाल शोध संस्थान व संस्कृति संचालनालय मध्य प्रदेश द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार 22 अक्टूबर को शाम साढे सात बजे मध्य प्रदेश के संस्कृति, जनसंपर्क, उच्च शिक्षा, तकनीकि शिक्षा एवं प्रशिक्षण धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग शुभारंभ करेंगे। शुक्रवार की शाम के कार्यक्रमों की शुरुआत सुप्रसिद्ध भजन गायक गोबिंद भार्गव करेगे। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध लोक नृत्य बैगा, अहिराई व मटकी के साथ ही गोवा के घोड़ा मोड़नी, जम्मू कश्मीर के सैफ व डोगरी व आसाम के बिहू, सत्रिया व बोड़ो का प्रर्दशन भी होगा। इस दिन कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मध्य क्षेत्र संचालक श्री कृष्ण माहेश्वरी करेंगे। जबकि विशिष्ठ अतिथि के रूप मे सांसद सतना गणेश सिंह व विधायक चित्रकूट सुरेन्द्र सिंह बघेल होगे।
23 अक्टूबर को सुप्रसिद्ध फिल्मी पाश्‌र्र्व गायक विनोद राठौर गायन प्रस्तुत करेंगे जबकि इस दिन के कार्यक्रमों का शुभारंभ करने के लिये मध्य प्रदेश के राज्य मंत्री किसान कल्याण एवं कृषि विकास बृजेन्द्र प्रताप सिंह आयेंगे। इस दिन के कार्यक्रम की अध्यक्षता दीन दयाल शोध संस्थान के उपाध्यक्ष शंकर प्रसाद ताम्रकार करेंगे। इसी रात को शास्त्रीय समूह नृत्य गंगा अवतरण की प्रस्तुति देवलीना पाल लखनऊ के साथ ही कोलकाता की डोना गांगुली ओडसी नृत्य प्रस्तुत करेंगी।
शरदोत्सव की तीसरी रात का आकर्षण दुर्गा समूह नृत्य की प्रस्तुति मुम्बई से आ रही सुप्रसिद्ध नृत्यांगना सुधा चंद्रन की होगी। इस रात के कार्यक्रम की शुरूआत राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार ऊर्जा, खनिज साधन, राजेन्द्र शुक्ला होगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता दीन दयाल शोध संस्थान के अध्यक्ष वीरेन जीत सिंह करेंगे। रात में मांगणियार गायन भंगूर खां और साथी प्रस्तुत करेंगे।

Sunday, September 12, 2010

सूर्य का उपहार

चित्रकूट के पास एक जगह है सूरज कुंड, जहां लोग साधना करने जाते हैं।
एक समय की बात है। महर्षि भगुनंदनजमदग्निधनुष-बाण से खेल रहे थे। वे किसी खाली स्थान पर बार-बार बाण चला रहे थे। उनकी पत्नी रेणुका बार-बार बाण लाकर दे रही थीं, लेकिन जेठ माह के तपते सूर्य ने उन्हें परेशान कर दिया। इस वजह से उन्हें बाण लाने में देरी भी हो जाती। महर्षि ने उनसे इसकी वजह पूछी। उन्होंने जवाब दिया कि सूर्य की तेज रोशनी न केवल हमारे सिर को तपा रही है, बल्कि पैर भी जला रही है। इतना सुनते ही महर्षि क्रोधित हो गए और कहा-देवी जिस सूर्य ने तुम्हें कष्ट पहुंचाया, उसे मैं अपने अग्निअस्त्र से गिरा दूंगा। जैसे ही उन्होंने धनुष पर बाण चढाया, भयभीत होकर भगवान सूर्य ने ब्राह्मण का वेश धारण कर लिया और उनके सामने प्रकट हो गए। उन्होंने उनसे विनती की कि मुझे अपनी गलती का अहसास हो गया है।
साथ ही, उन्होंने एक जोडी पादुका और एक छत्र महर्षि को उपहार स्वरूप प्रदान कर दिए। उन्होंने कहा कि यह छत्र सिर पर पडने वाली किरणों से आपका बचाव करेगा और पादुकाएं तपती जमीन पर पैर रखने में सहायता करेंगे। मान्यता है कि यह घटना चित्रकूट से दस किलोमीटर की दूरी पर सूरजकुंड में हुई थी। महाभारत में भी इस घटना का उल्लेख मिलता है। भक्त मानते हैं कि यह स्थान प्रकृति का अनमोल वरदान है। इसलिए यह कई ऋषि-मुनियों की तपस्थलीभी है। आज भी लोग साधना और ध्यान के लिए सूरजकुंड जाते हैं।
मान्यता है कि वहां जाने के बाद न केवल हमारे सभी बुरे संस्कार समाप्त हो जाते हैं, बल्कि हमारा अंतस भी पवित्र हो जाता है। संभवत:यही संस्कार परमात्मा के नजदीक जाने के लिए आवश्यक कारक बनते हैं।
-[संदीप रिछारिया]  धर्ममार्ग जागरण से साभार

 

Thursday, July 8, 2010

हितकारी चिंतन

अपने चारो ओर मंगल का फैलाव करो ताकि तुम्‍हें मंगलित करने के लिये पूरा विश्‍व तैयार हो सके।

बुंदेलखंड में रोजगार का जरिया बना सकता पलाश

चित्रकूट। योगेश्वर श्री कृष्ण की लीलाओं से सीधे सरोकार रखने वाले पलाश के पेड़ को लेकर अब शासन गंभीर हो चला है। अगर विकास विभाग की मंशा के अनुरुप काम हुआ तो आने वाले समय पलाश का पौधा भी पूरे बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए आय का एक अच्छा जरिया बन सकता है। प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी प्रमोद कुमार श्रीवास्तव भी इन दिनों लैक कल्चर को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए पलाश के पौधों का संरक्षण करने को प्रयासरत हैं। मालूम रहे आयुर्वेद के जानकार भी इसके विभिन्न अवयवों से जटिल रोगों की औषधियों को बना रहे हैं। गौरतलब है कि होली की मस्ती बिना रंगों के अधूरी है और रंगों को पहले फूलों व पत्तियों से ही प्राप्त किया जाता था। इनमें सबसे ऊपर नाम पलाश का ही आता है। फागुन के महीने में पलाश के पौधे पर लगे सुर्ख लाल रंग के फूल लोगों को न केवल अपनी ओर आकर्षित करने का काम करते हैं बल्कि इनसे अच्छी क्वालिटी का रंग भी तैयार होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि इसका फूल तोड़े जाने के काफी दिनों बाद भी उपयोग में लाने लायक बना रहता है। प्रभारी सीडीओ कहते हैं कि महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में पलाश के पौधे से निकलने वाली गोंद से लाख का निर्माण होता है। जिसका प्रयोग महिलाओं के लिये चूडि़यां व कड़े बनाने में होता है। इसके साथ ही वहां पर फूलों से रंग और पत्तियों से पत्तल बनाने का काम भी होता है। यहां के साथ ही समूचे बुंदेलखंड में तो बहुतायत में पलाश का पौधा पाया जाता है। स्थानीय भाषा में इसे छिउल कहा जाता है और इसके नाम पर तो पूरा गांव छिउलहा ही बसा हुआ है।
उन्होंने कहा कि गोंदिया में तो लैक कल्चर का करोड़ों का व्यापार किया जाता है। जिससे काफी मात्रा में विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होती है। जल्द ही यहां से किसानों व समाजसेवियों के दल को गोंदिया भेजा जायेगा। जिससे वे इसका उपयोग करना सीखें और पलाश के पौधों का उपयोग करें। उधर, आरोग्यधाम की रसशाला के प्रबंधक डा. विजय प्रताप सिंह का कहना है कि पलाश के पौधे का औषधीय प्रयोग काफी समय से हो रहा है पर यहां प्रमुख रुप से कृमि रोगों की दवा इससे बनती है। साथ ही बालों में लगाये जाने वाली डाई में भी इसे इस्तेमाल किया जा रहा है।

जल्द चित्रकूट धाम कर्वी होगा आदर्श स्टेशन

चित्रकूट। धर्मनगरी के रेलवे स्टेशन को अब आदर्श स्टेशनों की तरह विकसित करने की जद्दोजहद करने में अधिकारी लगे हुये हैं। जहां एक तरफ प्लेटफार्म एक को ऊंचा बनाने के साथ ही पुराने पत्थर निकालकर कोटा स्टोन लगाये जाने का काम इन दिनों तेजी से चल रहा है वहीं प्लेटफार्म नम्बर दो को भी पूरा पक्का कराने का काम किया जा रहा है।

सहायक अभियंता निर्माण पी के श्रीवास्तव कहते हैं कि आदर्श स्टेशन बनाने के जितने मानक हैं उन सभी बिंदुओं पर यहां पर काम किया जा रहा है। जल्द ही प्लेटफार्म का नया स्वरुप सभी के सामने होगा।
उन्होंने बताया कि प्लेटफार्मो को और चौड़ा व बड़ा बनाया जा रहा है। प्लेटफार्म नम्बर एक को ऊंचा किया जा रहा है साथ ही पूरे में कोटा स्टोन लगाने का काम किया जा रहा है। एरिया का विस्तार किया जा रहा है और नये शेड़ के नीचे पूरे में कोटा स्टोन लगाया जायेगा। दो नम्बर प्लेटफार्म में भी कोटा स्टोन लगाने के साथ ही छोटे-छोटे और काम करवाये जायेंगे।

गंगा दशहरा : डुबकी लगा कमाया पुण्य

चित्रकूट। पतित पावनी मां गंगा के अवतरण दिवस पर धर्म नगरी से होकर गुजरने वाली पापभक्षणी मां मंदाकिनी में डुबकी लगाने वालों की संख्या लाखों में रही। लोगों ने महादेव की जटाओं से होकर मृत्यु लोक में आने वाली मां गंगा की आरती पूजा भी की। इस मौके पर निर्माेही अखाड़े के संतों के संयोजकतत्व में मां गंगा की स्तुति पूजन के साथ ही नावों पर बैठकर चौबीस घंटे का श्री राम नाम संकीर्तन प्रारंभ कर दिया गया।

जानकारी के मुताबिक सोमवार की सुबह से ही धर्म नगरी की मंदाकिनी नदी के रामघाट, राघव प्रयाग घाट, प्रमोद वन, जानकीकुंड, आरोग्यधाम, सिरसावन, स्फटिक शिला, अनुसुइया आश्रम, सूर्य कुंड के साथ ही मऊ व राजापुर के यमुना नदी के घाटों के साथ ही वाल्मीकि नदी पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता उमड़ पड़ा। लोग हर हर गंगे का उद्घोष करके पवित्र नदियों में डुबकियां लगा रहे थे। चित्रकूट में घाट किनारे के पुरोहित मां मंदाकिनी के महत्व को लोगों को बता रहे थे।
इसके साथ ही निर्माेही अखाड़े के संयोजकतत्व में विश्व हिंदू परिषद ने गंगा दशहरे पर हवन पूजन व मां मंदाकिनी का अभिषेक कराया। इसके साथ नावों पर बैठकर चौबीस घंटों के प्रभु नाम संकीर्तन का भी शुभारंभ कराया गया। इस मौके पर निर्मोही अखाड़े के महन्त ओंकार दास, भरत मंदिर के दिव्य जीवन दास, अनूप दास, विहिप के प्रचारक भोले जी, दयाशंकर गंगेले, भाजपा जिलाध्यक्ष दिनेश तिवारी, मनोज तिवारी ,मुन्ना पुजारी सहित भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।

राजमाता को पूर्व जन्म का भावात्मक लगाव ले आया चित्रकूट

चित्रकूट। श्री राम सांस्कृतिक शोध संस्थान न्यास के अन्तर्गत श्री राम वन पथ गमन पथ संग्रहालय का लोकार्पण करने आयी कर्नाटक प्रांत के किष्िकधा की राजमाता महारानी चंद्रकांता ने मीडिया से बात करते हुये चित्रकूट को भगवान राम की मुख्य कर्मस्थली करार देते हुये कहा कि भले ही वे यहां पहली बार आयीं हों पर हर नवरात्रि पर श्री राम चरित मानस के पाठ करने के कारण वे इस तपोभूमि से प्रत्यक्ष रुप से बचपन से जुड़ी हैं।

उन्होंने कहा कि वैसे तो श्री हनुमान का जन्म सुमेरु पर्वत पर हुआ था पर उनका यौवन और बचपन ऋषमूक पर्वत किष्किंधा पर ही बीता। यहीं पर भगवान राम और हनुमान का मिलन हुआ था। उसी स्थान पर संत व्यास राम को भगवान हनुमान ने स्वप्न देकर अपनी मूर्ति की स्थापना करवाई थी। पम्पा सरोवर पहले विषैला था पर वह श्री राम के आर्शीवाद के कारण माता शबरी के चरणों से ही स्वच्छ और निर्मल हो गया।
उन्होंने कहा कि बचपन से ही वे भगवान राम मां सीता के प्रति अगाध प्रेम व आस्था रखती आई हैं पर चित्रकूट को देखने का पहली बार सौभाग्य मिला है। यहां की सीमा में प्रवेश करते ही ऐसा लगा कि मेरा पूर्व जन्म में यहां से भावात्मक लगाव रहा है जिसके कारण वे काफी रोमांचित हैं। बताया कि वे मप्र के नरसिंहगढ़ जिले के राजा विक्रमादित्य के पवार वंश की बेटी हैं।
श्री राम सांस्कृतिक शोध संस्थान के निदेशक डा. राम अवतार शर्मा ने चित्रकूट के अपने प्रवास को अलौकिक करार देते हुये कहा कि यहां तो प्रभु राम कण-कण में विराजते हैं। इसलिये ही यहां पर संग्रहालय का संकल्प लिया। चित्रकूट से पिछले 25 सालों से किसी न किसी रुप में संबंध रहा और अब ज्यादा प्रगाढ़ हो जायेगा। उन्होंने राजमाता के बारे में बताते हुये कहा कि भले ही वे राजवंश की बहू हैं पर वे किष्किंधा में होने वाले छोटे-छोटे से छोटे भगवत आयोजन में पहुंचने के साथ ही बिना किसी संस्था के माध्यम से हर वर्ष गरीब बालिकाओं की शादी कराती हैं। कार्यक्रम संयोजक गायत्री शक्ति पीठ के व्यवस्थापक डा. राम नारायण त्रिपाठी ने जब बाहर से आये सभी अतिथियों को विराध कुंड, अमरावती, वाल्मीकी आश्रम, भरतकूप के साथ ही अन्य विलक्षण स्थानों के दर्शन करवाये तो सभी काफी भावविभोर हो गये।

अलौकिक रहस्यों की भूमि चित्रकूट

चित्रकूट। 'चित्रकूट एक औषधि सचवत करत सचेत' वैसे तो तमाम पुराणों के साथ ही महर्षि वाल्मीकि और संत शिरोमणि तुलसीदास जी महाराज ने जब श्री राम चरित मानस के माध्यम से अलौकिक तीर्थ चित्रकूट के महत्व को सामने लाने का काम किया तो विश्व भर के लोग यहां के पहाड़ों कंदराओं और जंगलों में छिपे रहस्यों को समझने का प्रयास करने लगे।

संत इब्राहिम अली 'गोविंद बाबा' ने चित्रकूट के महत्व को अपने शब्दों में परिभाषित करते हुये कहा कि इस तीर्थ का निर्माण ही सत्य को लेकर हुआ है। इसलिये यह विश्व भर में देदीप्तमान नक्षत्र की तरह चमक रहा है। यह बात और है कि यहां पर आने वाले भक्त केवल अभी बाहरी चमक दमक देख रहे हैं पर वास्तव में जल्द ही यहां के वे रहस्य भी सामने आने वाले हैं जिनके बारे में केवल पुराने ऋषियों को ही मालूम था।
उन्होंने बाबा तुलसीदास जी की लिखी चौपाई चित्रकूट एक औषधि, सचवत करत सचेत को विस्तार पूर्वक समझाते हुये कहा कि जब आडंबर का सांप लोगों को डसने के लिये खड़ा होता है तो चित्रकूट एक औषधि के समान खड़ा होकर व्यक्ति का साथ देता है और उसके अंदर के इंसान को जगाकर पुरुषार्थी के रुप में सामने लाता है। भगवान राम को जब जंगल में आना पड़ा तो चित्रकूट ने ही उन्हें इतना बलवान बनाया कि उन्होंने राक्षस राज रावण को मारकर सत्य व न्याय की रक्षा की।
उन्होंने कहा कि चित्रकूट के कण-कण में परमपिता का निवास है यहां की भूमि प्रार्थनाओं की भूमि है जहां आदिकाल से संत ऋषि प्रार्थनाओं में लीन हैं।
समाजसेवी गुलाब सिंह के आवास में उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि सत्य को न तो मारा जा सकता है न काटा जा सकता है। वह तो सूर्य के समान हमेशा चमकता ही रहेगा।

भरत मिलाप में हैं सर्वाधिक प्रमाणित चरण चिंह

चित्रकूट। 'जहं जहं चरण पड़े रघुराई' कुछ ऐसी ही इच्छा लेकर जब डा. राम अवतार शर्मा आगे बढ़े तो एक सत्संकल्प था 'राम काज कीन्हें बिना मोहीं कहां विश्राम'। लेकिन जब चित्रकूट के प्रसंगों को अयोध्या कांड में डा. शर्मा ने पढ़ा तो वे चौंक पड़े , इससे भी ज्यादा तो वे भावविभोर तब हुये जब वे खुद चित्रकूट पहुंचे।

श्री राम चरित को विश्व से परिचित कराने वाले महर्षि वाल्मीकि हों या फिर जन-जन को श्री राम के चरित्र को मर्यादा पुरुषोत्तम का स्वरुप दिलाने वाले गोस्वामी तुलसी दास दोनो ने ही प्राकृतिक सुषमा से भरी इस तीर्थ शिरोमणि स्थली के तप वैभव के बारे में काफी कुछ लिखा। बस इस बात को देखकर और भगवान श्री राम के दूसरे दौर के वन गमन पर चित्रकूट में सर्वाधिक समय व्यतीत करने को लेकर जब वे यहां पर आये तो भरत मिलाप पर भगवान के चरण-चिंह देखकर तो निश्चित ही कर बैठे कि अगर कहीं पर भगवान के वन पथ गमन का संग्रहालय बनेगा तो वह यही भूमि होगी।
डा. शर्मा बताते हैं कि विश्व भर में एक जगह पर इतने सारे विभिन्न प्रकार के चरण चिंह कहीं और नही मिलते और न ही कहीं पर प्रभु की करुणा व भाइयों का प्रेम देखकर शिलाओं के पिघल जाने का प्रमाण मिलता है। भगवान राम, मां सीता और भ्राता लक्ष्मण के चरण चिंहों से पवित्र इस भूमि के कण-कण में भगवान स्वयं विराजते हैं। आज भी उनकी ऊर्जा की स्वीकारोक्ति मिलती है। वे बताते हैं कि प्रभु के पद इस जिले में सबसे पहले मुरका पर पड़े थे आज यहां पर हनुमान मंदिर है। इसके बाद ऋषियों की तपस्थली ऋषियन गांव में जिस पहाड़ी पर वे रुके थे उसका नाम अब सीता पहाड़ी के नाम से है। इसके बाद गरौली घाट से यमुना नदी को पार किया था। यहां पर 'तेहि अवसर एक तापस आवा' वाला प्रसंग हुआ था। अगला पड़ाव रामनगर का कुमार द्वय तालाब था। भगवान ने अपनी वन यात्रा की पांचवीं रात्रि का विश्राम रैपुरा तत्कालीन नाम रैनपुरा में किया था और यहां से प्रात: चार बजे वाल्मीकी नदी में स्नान कर चैत्र शुक्ल पूर्णिमा चित्रा नक्षत्र में आठ बजे दिन श्री कामदगिरि पहुंचे थे। प्रभु श्री राम ने चित्रकूट परिक्षेत्र के अनुसुइया आश्रम, गुप्त गोदावरी, स्फटिक शिला, राघव प्रयाग में तो अपने चरण चिंह धरे ही साथ ही मडफा, भरतकूप, अमरावती, विराध कुंड, पुष्करिणी सरोवर, मांडकर्णी आश्रम, श्रद्धा पहाड़ जैसे तमाम और स्थानों पर जाकर वहां पर तप में लगे ऋषियों से मिले। मांड़कर्णी आश्रम के पास ही उन्होंने भीलनी शबरी के जूठे बेर भी चखे थे।
उन्होंने कहा कि श्री राम बन पथ गमन का उद्देश्य अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाना है। जिससे लोग यह जाने कि वास्तव में श्री राम का चरित्र क्या था और हमारे लिये उसमें से ग्रहण करने योग्य क्या है।

यूं नष्ट हो रहा है चित्रकूट का पुरातात्विक वैभव

चित्रकूट। 'तत: परिप्लवं गच्छेज्तीर्थ त्रलोक्य पूजितं। अग्निष्टों मत्रि रात्रि फलं प्राप्नोति मानव:।' कुछ इस तरह से पुराने अनाम ऋषि द्वारा लिखे गये 'वृहद चित्रकूट महात्म' में प्राकृतिक सुषमा से आच्छादित मंदाकिनी की धारा से सिंचित प्रमोद वन के महत्व को दर्शाया गया है। प्रमोदवन को पारिपल्लव नाम से संबोधित करते हुये कहा गया है कि जो व्यक्ति यहां पर तीन रात्रि निवास करता है उसे अग्निहोम यज्ञ के समान फल मिलता है। यह स्थान तीनों लोकों में पूजित है।

लगभग साढ़े तीन सौ साल पहले रींवा नरेश रघुराज सिंह ने प्रमोदवन में लक्ष्मी नारायण मंदिर का निर्माण कराने के साथ ही विशाल यज्ञ करवाया था। बताया जाता है कि इस यज्ञ को करने में 300 पंडि़तों ने लगातार दो साल से त्रिकाल संध्या के माध्यम से पाठ किया था।
स्वामी राम सखेन्द्र जी महाराज बताते हैं कि वास्तव में यह कोठरियां राजा रघुराज सिंह ने पुत्र कामेष्ठि यज्ञ को पूरा करने के लिये बनवाई थी। लक्ष्मी नारायण मंदिर के प्रांगण में पुत्र कामेष्ठि वृक्ष भी हिमालय से लाकर लाया गया था।
यहां पर रहने वाले अर्चन पंडि़त कहते हैं कि पुरातात्विक महत्व के इस विशाल मंदिर के बीस कमरों पर पहले तो वृद्ध सेवा सदन ने ही अतिक्रमण कर रखा था। वैसे बेसहारा वृद्धों के रहने के कारण इसमें कोई गलत नही था पर प्रशासन ने जिस अंदाज में इस प्राचीन इमारत के बीस कमरों को गिराया है। यह गलत है। उन्होंने कहा कि पुरातात्विक महत्व की इस इमारत का जहां सरकार को संरक्षण कर इसके जीर्णोधार की बात सोचनी चाहिये वहीं इसे गिराया जाना गलत है।
महंत कौशलेन्द्र दास ब्रह्मचारी कहते हैं कि जिस प्रकार अतिक्रमण विरोधी अभियान के अन्तर्गत मंदिरों, मठों, धर्मशालाओं और पुरातात्विक महत्व की इमारतों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है लगता ही नही कि उसी पार्टी भाजपा का यहां पर राज है जिसके मुखिया ने इसे पवित्र नगरी घोषित कर मेगा डिस्टेनेशन प्लान बनाकर विकास कार्यो की झड़ी लगा रखी है। मंदाकिनी की जमीन पर जिन भूमाफियाओं ने कब्जा कर बेंचने का काम जारी कर रखा है उसको खाली कराने का काम कोई नही करता। कहा कि चित्रकूट के पुराने नक्शे को गायब करने का कुचक्र भी उन्हीं भूमाफियाओं ने रचा है।

Tuesday, March 30, 2010

चित्रकूट विकास में धन की कमी आडे़ नहीं आयेगी : शिवराज सिंह चौहान

चित्रकूट। धर्मनगरी के विकास के लिए म.प्र. के मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के प्रांगण से चित्रकूट मेगा डेस्टीनेशन परियोजना का शुभारंभ किया। इस मौके पर बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि चित्रकूट के विकास में धन की कमी आडे़ नहीं आयेगी। इस दौरान उन्होंने भरत घाट से कामदगिरि मार्ग, मंदाकिनी में एक अतिरिक्त पुल के निर्माण के साथ ही सूर्यकुंड, गुप्त गोदावरी, हनुमान धारा की ग्यारह परियोजनाओं का शिलान्यास किया। म.प्र के मुख्यमंत्री ने राघव प्रयाग घाट के निर्माण की आधार शिलाएं रखते हुये भरत घाट व राघव प्रयाग घाट का लोकार्पण किया। इन परियोजनाओं के अलावा भी उन्होंने सतना जिले की अन्य परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया।

इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने अपनी सरकार की उपलब्धियां गिना तालियां बटोरी साथ ही महिलाओं, कन्याओं व हाल ही में पैदा हुये बच्चों को चेक भी बांटीं। इस दौरान उन्होंने समाजसेवी नाना जी देशमुख को याद करते हुये कहा कि दीन दयाल शोध संस्थान का बोध वाक्य 'हम अपने लिये नही अपनों के लिये हैं अपने वे हैं जो उपेक्षित हैं' वास्तव में कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि तीन साल बाद इस बार गेंहू का उत्पादन अच्छा हुआ है। मध्य प्रदेश शासन ने गेंहू का समर्थन मूल्य केंद्र सरकार द्वारा तय मूल्य से अधिक रखा है। प्रदेश में बारह सौ रुपये प्रति कुंटल गेंहू खरीदा जायेगा। किसानों को कर्जा भी केवल तीन प्रतिशत ब्याज पर दिया जा रहा है। नगरीय समग्र स्वच्छता अभियान में चित्रकूट को शामिल करने के साथ ही सभी योजनाओं के अलावा पच्चीस लाख रूपये देने की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सभी लोग अपना कर्तव्य पूरा करें, जनप्रतिनिधि हवाला घोटाला न करें और जनता की सेवा करें। बच्चों को स्कूल भेजें, साल में एक पेड़ लगाकर उसे जिंदा रखें, गांव का पानी गांव में रोकें, नशा मुक्त गांव बनायें व सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन में सरकार को सहयोग करें।
खेलकूद, पर्यटन एवं युवा कल्याण मंत्री तुको जी राव ने कहा कि पहले चित्रकूट के विकास के लिये 6 करोड़ प्रदेश सरकार ने दिये थे जिसमें पांच करोड़ खर्च कर दिये गये हैं। एक करोड़ के काम एक महीने में पूरे हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि धर्मनगरी चित्रकूट का विकास करना सरकार की न केवल मंशा है बल्कि प्रमुख लक्ष्य है। प्रभारी मंत्री ऊर्जा, खनिज राजेन्द्र शुक्ल, सांसद गणेश सिंह व विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार ने भी संबोधित किया। ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ज्ञानेन्द्र सिंह ने शाल व प्रमुख द्वार कामतानाथ मंदिर के प्रतिनिधि ने उन्हें श्री फल भेंट किया।
इसके पूर्व आरोग्य धाम परिसर में आने के बाद मुख्यमंत्री का काफिला सियाराम कुटीर पर पहुंचा। शनिवार को पहले नाना जी के मासिक श्राद्ध होने के चलते यहां पर पहुंचे मुख्यमंत्री ने उनके कमरे में जाकर अपने श्रद्धासुमन अर्पित किये। यहां पर अप्रवासी भारतीय डा. नरेश शर्मा ने उनसे नाना जी की यादें बांटी। इसके बाद मुख्यमंत्री स्फटिक शिला परिसर में पहुंचे। यहां पर काफी दिनों से रुक-रुक चल रहे मंदाकिनी सफाई अभियान में हाथ बंटाने के साथ ही मंदाकिनी का पूजन-अर्चन किया। इस दौरान गायत्री परिवार के व्यवस्थापक डा. राम नारायण त्रिपाठी व भारी संख्या में लोग मौजूद रहे।

सभी ने याद किया नानाजी को

चित्रकूट। चित्रकूट के विकास के लिये मील का पत्थर रहे समाजसेवी नाना जी देशमुख का प्रथम मासिक श्राद्ध मनाने महाराष्ट्र से एक विशेष ट्रेन के जरिये लगभग आठ सौ लोग शुक्रवार की देर शाम चित्रकूट पहुंचे।

उद्यमिता विद्यापीठ के परिसर में ही शनिवार की शाम को एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। जिसमें बाहर से आये सभी लोगों ने अपने विचार व्यक्त करने के बाद नाना जी को भाव भीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान नाना जी के कामों को आगे बढ़ाने की शपथ काफी लोगों ने ली।
उद्यमिता की निदेशक डा. नंदिता पाठक ने कहा कि वास्तव में नाना जी ने यहां माडल विकसित कर यह बताने का प्रयास किया है कि गांव में रहने वाले हों या फिर शहर में रहने वाले अगर सहजीवन जियें तो कभी कोई दिक्कत नही आ सकती। अगर अपना जीवन दूसरों की भलाई के लिये समर्पित करना है तो नाना जी से बड़ा कोई दूसरा उदाहरण नही हो सकता।
शनिवार को बाहर से आये सभी लोगों ने दीनदयाल शोध संस्थान के प्रकल्पों आरोग्य धाम, बनवासी आश्रम, गुरुकुल, राम दर्शन, कृषि विज्ञान केंद्र गनीवां व मझगंवा व अन्य स्थलों का अवलोकन किया।

अमावस्या पर भी जारी रही पुलिस की कमाई

चित्रकूट। इस बार की सोमवती अमावस्या के मौक पर एलआईयू काफी सक्रिय रही। जगह-जगह लोगों को रोक-रोक कर उनके सामान की जांच की गई। जिलाधिकारी विशाल राय की कड़ाई काम आ ही गई। ऐन सोमवती अमावस्या के दस दिन पहले ली गई सभी विभागों की बैठक में अमावस्या के मौके पर मेला परिक्षेत्र में व्यवस्थाओं को चौकस रखने के निर्देशों का असर यहां देखने को मिला। रोडवेज वाहनों की कमी के चलते डग्गामार वाहनों की चांदी रही। कर्वी से चित्रकूट तक चलने वाले टैंपो व टैक्सी वालों ने हद कर दी। सवारियों को बेरोकटोक बाहर लटकाकर चलते रहे।

रामघाट में यात्रियों को डूबने से बचाने के लिये गोताखोर पुलिस की टीम डटी रही। अग्निशमन विभाग अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद रहा वहीं कुछ पुलिस कर्मियों ने अमावस्या के मौके पर भी अपनी वाहन चेकिंग का काम जारी रखा। दो पहिया वाहन चालक तो परेशान किये ही गये साथ ही कुछ टैक्सी टैम्पों वालों का भी चालान कर कोतवाली पहुंचा दिया गया।

सोमवती अमावस्या : पवित्र डुबकी लग कमाया पुण्य

चित्रकूट। 'भज ले पार करइया का, भज ले पर्वत वाले का' ये कुछ ऐसे उद्धोष हैं जो रविवार की दोपहर से ही धर्म नगरी के परिक्रमा मार्ग पर लगातार सुने जा रहे हैं। ऐसे लोगों की संख्या सोमवार की शाम तक लाखों लोगों की पार कर चुकी है। लोगों का आना और जाना लगातार जारी है। सोमवती अमावस्या पर्व पर पुण्य लूटने की आस्था और समस्त कामनाओं की पूर्ति के लिये परिक्रमा पूरी करने की होड़ बुंदेलखंड के इसी अलौकिक तीर्थ में देखने को मिलती है। महिला हो या पुरुष, वृद्ध हो या जवान सभी के चेहरे की चमक लाखों लोगों की रेलम पेल में भी विश्वास की ज्योति कम नही होती। परिक्रमा पथ हो या फिर परिक्षेत्र के अन्य स्थान सभी जगहों पर कामतानाथ की जय के नारे तो जोरदारी से सुनाई ही देते हैं वहीं तेल बेचने वालों के अलावा तमाम गृह उपयोगी उत्पाद बेंचने वालों के भी प्रचारों की स्वर लहरियां उनमें मिलकर अलग ही वातावरण प्रस्तुत करती हैं।

सबसे ज्यादा आनंददायक क्षण मंदाकिनी गंगा के किनारे पर दिखाई देता है। जहां पर कड़ी चौकसी के बीच लाखों लोग रामघाट, राघव प्रयाग घाट के अलावा अन्य घाटों पर स्नान करते दिखाई देते हैं। इसके बाद लोगों में चित्रकूट के अधिष्ठाता देव स्वामी मत्स्यगयेन्द्र नाथ को जलाभिषेक करने की होड़ होती है। यहां के बाद लोग पैदल ही लगभग तीन किलोमीटर दूर स्वामी कामतानाथ के पर्वत की परिक्रमा करने के लिये निकलते हैं। तमाम श्रद्धालु तो ऐसे हैं जो लगभग चालीस-चालीस सालों से हर एक अमावस्या पर यहां पर आकर परिक्रमा लगाते हैं।
महोबा जिले के चरखारी से आये लेखपाल संतोष कुमार चौबे बताते हैं कि पिछले पैंतीस सालों से ज्यादा से वे हर अमावस्या पर वे आकर यहां परिक्रमा लगा रहे हैं।
ऐसे ही तमाम और लोग हैं जो यहां हर अमावस्या को आकर परिक्रमा करते हैं तमाम लोग तो अपने निवास स्थान से चित्रकूट तक पैदल आते हैं। कुछ की मनौती होती है तो कुछ जिंदगी को खुशहाल बनाने के लिये ऐसा करते हैं।
ग्वालियर से आये कैलाश, मीना, राजकुमार व चंद्र मोहन ने कहा कि भले ही वे लोग अपने घरों से पैदल न आ पाते हो पर वे चित्रकूट धाम कर्वी के रेलवे स्टेशन से तो पैदल ही स्वामी कामतानाथ के दरबार में जाते हैं।

सोमवती अमावस्या : तपती धूप पर भारी पड़ी आस्था

चित्रकूट। तपती धूप पर एक बार फिर आस्था भारी पड़ गयी। विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल चित्रकूट की पवित्र मंदाकिनी में लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी मारने के साथ ही स्वामी कामतानाथ की परिक्रमा लगाई। स्वामी कामतानाथ की परिक्रमा के साथ ही हनुमानधारा, जानकीकुंड, स्फटिक शिला, राम शैया के साथ ही आसपास के अन्य तीथरें पर भी लोगों का काफी जमावड़ा रहा। मंगलवार से नवरात्रि के प्रारंभ होने के कारण काफी बड़ी संख्या में लोगों का रुख मैहर के मां शारदा मंदिर का भी रहा।

सोमवती अमावस्या के चलते यहां वैसे तो रविवार की दोपहर से ही भक्तों का आना जारी हो चुका था। लोगों ने यहां पर आकर अमावस्या पर्व का इंतजार न करके मंदाकिनी में स्नान करने के साथ ही स्वामी कामतानाथ की परिक्रमा करना प्रारंभ कर दिया था। पैदल परिक्रमा करने वालों के साथ ही भारी मात्रा में महिलायें और बच्चे भी दंडवती साढ़े पांच किलोमीटर की परिक्रमा लगा रहे थे। उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के प्रशासन ने बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिये व्यवस्थायें कर रखी थी। दोनो ही तरफ खोया पाया केंद्रों पर लगातार उद्धोषणायें की जा रही थी। बिछड़े लोग उनके परिजनों से लगातार मिलाये जा रहे थे। कई स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें मोबाइल एम्बुलेंस के साथ खड़ी लोगों को दवायें देने का काम कर रही थी। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. आरडी राम ने बताया कि रात के समय तो अधिकतर लोग पेट दर्द की शिकायतें लेकर आये जबकि दिन के समय तेज धूप में परिक्रमा लगाने की वजह से चक्कर आने की शिकायत करने वालों की तादाद ज्यादा रही।
मुख्यालय के रेलवे स्टेशन के साथ ही खोह, शिवरामपुर, भरतकूप के अलावा सभी बस स्टैंडों पर जहां प्रशासनिक अधिकारियों को सेक्टर मजिस्ट्रेट के रुप लगाया गया था। वहीं बाहर से आयी व स्थानीय पुलिस फोर्स के सहारे कड़ी चौकसी होती दिखाई दे रही थी। बेड़ीपुलिया से पर्यटक तिराहे तक मार्ग को वन वे रविवार की रात से ही कर दिया गया था। मेला क्षेत्र पर कई जगहों पर कई सामाजिक और धार्मिक संस्थायें यात्रियों को भोजन व चाय नास्ते का मुफ्त वितरण करती दिखाई दी। जिलाधिकारी विशाल राय, पुलिस अधीक्षक वीर बहादुर सिंह, अपर जिलाधिकरी राजाराम, एसडीएम गुलाब चंद्र, तहसीलदार अश्विनी कुमार श्रीवास्तव के अलावा अपर पुलिस अधीक्षक विपिन कुमार मिश्र व सीओ सदर उदय शंकर लगातार मेला क्षेत्र पर भ्रमण करते दिखाई दिये।

नाना जी को याद कर नम होती रहीं आंखें

चित्रकूट। पहली बार नाना जी के बिना हुई संस्थान की बैठक में मौजूद सभी सदस्यों की आंखें एक दो बार नहीं बल्कि कई बार भरीं। कुछ तो इतने भावुक हुये कि उनकी आंखों से जल की धारा रुकने का नाम ही नही ले रही थी।

पद्म विभूषण नाना जी देशमुख के त्रयोदशाह के बाद शनिवार को सिया राम कुटीर के बंद कमरे हुई दीनदयाल शोध संस्थान के प्रबंध मंडल की बैठक में सभी ने नाना जी से संबंधित जब अपने संस्मरण सुनाये तो धीरे-धीरे करके सभी की आंखें भर आयी।
नाना जी के साथ सर्वाधिक 64 साल का समय व्यतीत करने वाले देवेन्द्र स्वरुप अपने संस्मरण सुनाते कई बार भावुक हुये पर बाद में उन्होंने कहा कि नाना जी के प्राण चित्रकूट में ही बसते हैं। वे कहीं गये नही बल्कि अब वे समाज की पुनर्रचना के कामों को और भी तेजी से आगे बढ़ाने का काम करेगें।
प्रबंध मंडल की बैठक तो बंद कमरे में हुई और कार्यवाही पूरी तरह गोपनीय रही पर युगानुकूल सामाजिक पुनर्रचना सहयोगी कार्यकर्ता सम्मेलन में जब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सर कार्यवाह सुरेश सोनी ने अपना संबोधन शुरु किया तो उन्होंने सुबह हुई प्रबंध मंडल की बैठक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संस्थान की बैठक में नाना जी के एकात्म मानव दर्शन के आधार पर उनके द्वारा चयनित किये गये पांच सौ गांवों में और भी बेहतर तरीकों से समाज के अंतिम व्यक्ति की खुशहाली के लिये काम किया जायेगा।
संस्थान के प्रबंध मंडल की बैठक में संरक्षक मदन सिंह देवी, अध्यक्ष वीरेन्द्र जीत सिंह, संगठन सचिव अभय महाजन, प्रधान सचिव डा. भरत पाठक, उपाध्यक्ष प्रभाकर राव मुंडले, उपाध्यक्ष नितिन सांवले, शंकर प्रसाद ताम्रकार सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।

नाना जी की समाजसेवा को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प

चित्रकूट। उद्यमिता विद्या पीठ में जुटे समाजसेवियों ने युगानुकूल सामाजिक पुनर्रचना सहयोगी कार्यकर्ता सम्मेलन के समापन पर दीन दयाल शोध संस्थान के संरक्षक व राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मदन दास देवी ने कहा कि नाना जी तो अब हमारे बीच नहीं रहे पर उनके विचार हमेशा जागृत रहेंगे और उनको लेकर हम सब आगे बढ़ने का काम करेंगे।

उन्होंने कहा कि भौतिक उन्नति से ज्यादा जरूरी लोगों में परस्पर सहभागिता की भावना को जागृत करना है जिससे लोग सहजीवी होकर जी सकें। दीन दयाल शोध संस्थान सबसे निचली पंक्ति के व्यक्ति की शैक्षणिक, आर्थिक, स्वास्थ्य और उन्नति के लिए जो कार्य कर रहा है, उसे सीख कर अपने क्षेत्रों में फैलाने में जुट जायें यही नाना जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
संस्थान के प्रधान सचिव डा. भरत पाठक ने कहा कि वैसे तो नाना जी से प्रेरणा लेकर काम करने वालों की सूची काफी बड़ी है पर सुरभि शोध संस्थान वाराणसी के भानु भाई जालान, ज्ञान प्रबोधनी महाराष्ट्र के सुभाष पांडे, गोवमुखी सेवा धाम के बनवारी लाल, जबलपुर के दीप शंकर बनर्जी, मोक्षदायिनी सेवा समिति के प्रदीप पांडे, ग्रामीण स्वाभिमान संस्था नागौर, मैत्री फाउंडेशन ट्रस्ट के साथ ही अनेकों लोगों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी प्रबंध, गो प्रबंधन, कृषि व ग्रामीण विकास के विभिन्न ग्रामों में नाना जी से प्रेरणा लेकर आज काफी अच्छा कार्य कर रहे हैं।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सुरेश सोनी ,अध्यक्ष वीरेन्द्र जीत सिंह, संगठन सचिव अभय महाजन , संस्थान के उपाध्यक्ष प्रभाकर राव मुंडले, नितिन सांवले, उद्यमिता विद्या पीठ की निदेशक डा. नंदिता पाठक, क्षेत्रीय संघ चालक श्री कृष्ण माहेश्वरी, मप्र के कैबिनेट मंत्री विजय शाह, कृषि राज्य मंत्री ब्रजेन्द्र सिंह, राज्य सभा सांसद प्रभात झा तथा कर्नाटक से आये विधायक नागेश के साथ ही देश के हर प्रांत से आये सामाजिक क्षेत्र के कार्यकर्ता मौजूद रहे।

🕉️🚩 गंगा दशहरा पर सेवा का अमृत : रामघाट पर त्रिवेणी शरबत महोत्सव बना जनसेवा का उत्सव 🚩🕉️

चित्रकूट धाम के पावन रामघाट में आयोजित त्रिवेणी शरबत महोत्सव 2026 श्रद्धा, सेवा और सनातन संस्कृति का अनुपम संगम बनकर सामने आया। भीषण ग्रीष्म...