सूर्य का उपहार
चित्रकूट के पास एक जगह है सूरज कुंड, जहां लोग साधना करने जाते हैं। एक समय की बात है। महर्षि भगुनंदनजमदग्निधनुष-बाण से खेल रहे थे। वे किसी खाली स्थान पर बार-बार बाण चला रहे थे। उनकी पत्नी रेणुका बार-बार बाण लाकर दे रही थीं, लेकिन जेठ माह के तपते सूर्य ने उन्हें परेशान कर दिया। इस वजह से उन्हें बाण लाने में देरी भी हो जाती। महर्षि ने उनसे इसकी वजह पूछी। उन्होंने जवाब दिया कि सूर्य की तेज रोशनी न केवल हमारे सिर को तपा रही है, बल्कि पैर भी जला रही है। इतना सुनते ही महर्षि क्रोधित हो गए और कहा-देवी जिस सूर्य ने तुम्हें कष्ट पहुंचाया, उसे मैं अपने अग्निअस्त्र से गिरा दूंगा। जैसे ही उन्होंने धनुष पर बाण चढाया, भयभीत होकर भगवान सूर्य ने ब्राह्मण का वेश धारण कर लिया और उनके सामने प्रकट हो गए। उन्होंने उनसे विनती की कि मुझे अपनी गलती का अहसास हो गया है। साथ ही, उन्होंने एक जोडी पादुका और एक छत्र महर्षि को उपहार स्वरूप प्रदान कर दिए। उन्होंने कहा कि यह छत्र सिर पर पडने वाली किरणों से आपका बचाव करेगा और पादुकाएं तपती जमीन पर पैर रखने में सहायता करेंगे। मान्यता है कि यह घटना चित्रकूट से दस किलोम...