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सूर्य का उपहार

चित्रकूट के पास एक जगह है सूरज कुंड, जहां लोग साधना करने जाते हैं। एक समय की बात है। महर्षि भगुनंदनजमदग्निधनुष-बाण से खेल रहे थे। वे किसी खाली स्थान पर बार-बार बाण चला रहे थे। उनकी पत्नी रेणुका बार-बार बाण लाकर दे रही थीं, लेकिन जेठ माह के तपते सूर्य ने उन्हें परेशान कर दिया। इस वजह से उन्हें बाण लाने में देरी भी हो जाती। महर्षि ने उनसे इसकी वजह पूछी। उन्होंने जवाब दिया कि सूर्य की तेज रोशनी न केवल हमारे सिर को तपा रही है, बल्कि पैर भी जला रही है। इतना सुनते ही महर्षि क्रोधित हो गए और कहा-देवी जिस सूर्य ने तुम्हें कष्ट पहुंचाया, उसे मैं अपने अग्निअस्त्र से गिरा दूंगा। जैसे ही उन्होंने धनुष पर बाण चढाया, भयभीत होकर भगवान सूर्य ने ब्राह्मण का वेश धारण कर लिया और उनके सामने प्रकट हो गए। उन्होंने उनसे विनती की कि मुझे अपनी गलती का अहसास हो गया है। साथ ही, उन्होंने एक जोडी पादुका और एक छत्र महर्षि को उपहार स्वरूप प्रदान कर दिए। उन्होंने कहा कि यह छत्र सिर पर पडने वाली किरणों से आपका बचाव करेगा और पादुकाएं तपती जमीन पर पैर रखने में सहायता करेंगे। मान्यता है कि यह घटना चित्रकूट से दस किलोम...

हितकारी चिंतन

अपने चारो ओर मंगल का फैलाव करो ताकि तुम्‍हें मंगलित करने के लिये पूरा विश्‍व तैयार हो सके।

बुंदेलखंड में रोजगार का जरिया बना सकता पलाश

चित्रकूट। योगेश्वर श्री कृष्ण की लीलाओं से सीधे सरोकार रखने वाले पलाश के पेड़ को लेकर अब शासन गंभीर हो चला है। अगर विकास विभाग की मंशा के अनुरुप काम हुआ तो आने वाले समय पलाश का पौधा भी पूरे बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए आय का एक अच्छा जरिया बन सकता है। प्रभारी मुख्य विकास अधिकारी प्रमोद कुमार श्रीवास्तव भी इन दिनों लैक कल्चर को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए पलाश के पौधों का संरक्षण करने को प्रयासरत हैं। मालूम रहे आयुर्वेद के जानकार भी इसके विभिन्न अवयवों से जटिल रोगों की औषधियों को बना रहे हैं। गौरतलब है कि होली की मस्ती बिना रंगों के अधूरी है और रंगों को पहले फूलों व पत्तियों से ही प्राप्त किया जाता था। इनमें सबसे ऊपर नाम पलाश का ही आता है। फागुन के महीने में पलाश के पौधे पर लगे सुर्ख लाल रंग के फूल लोगों को न केवल अपनी ओर आकर्षित करने का काम करते हैं बल्कि इनसे अच्छी क्वालिटी का रंग भी तैयार होता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि इसका फूल तोड़े जाने के काफी दिनों बाद भी उपयोग में लाने लायक बना रहता है। प्रभारी सीडीओ कहते हैं कि महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में पलाश के पौधे से न...

जल्द चित्रकूट धाम कर्वी होगा आदर्श स्टेशन

चित्रकूट। धर्मनगरी के रेलवे स्टेशन को अब आदर्श स्टेशनों की तरह विकसित करने की जद्दोजहद करने में अधिकारी लगे हुये हैं। जहां एक तरफ प्लेटफार्म एक को ऊंचा बनाने के साथ ही पुराने पत्थर निकालकर कोटा स्टोन लगाये जाने का काम इन दिनों तेजी से चल रहा है वहीं प्लेटफार्म नम्बर दो को भी पूरा पक्का कराने का काम किया जा रहा है। सहायक अभियंता निर्माण पी के श्रीवास्तव कहते हैं कि आदर्श स्टेशन बनाने के जितने मानक हैं उन सभी बिंदुओं पर यहां पर काम किया जा रहा है। जल्द ही प्लेटफार्म का नया स्वरुप सभी के सामने होगा। उन्होंने बताया कि प्लेटफार्मो को और चौड़ा व बड़ा बनाया जा रहा है। प्लेटफार्म नम्बर एक को ऊंचा किया जा रहा है साथ ही पूरे में कोटा स्टोन लगाने का काम किया जा रहा है। एरिया का विस्तार किया जा रहा है और नये शेड़ के नीचे पूरे में कोटा स्टोन लगाया जायेगा। दो नम्बर प्लेटफार्म में भी कोटा स्टोन लगाने के साथ ही छोटे-छोटे और काम करवाये जायेंगे।

गंगा दशहरा : डुबकी लगा कमाया पुण्य

चित्रकूट। पतित पावनी मां गंगा के अवतरण दिवस पर धर्म नगरी से होकर गुजरने वाली पापभक्षणी मां मंदाकिनी में डुबकी लगाने वालों की संख्या लाखों में रही। लोगों ने महादेव की जटाओं से होकर मृत्यु लोक में आने वाली मां गंगा की आरती पूजा भी की। इस मौके पर निर्माेही अखाड़े के संतों के संयोजकतत्व में मां गंगा की स्तुति पूजन के साथ ही नावों पर बैठकर चौबीस घंटे का श्री राम नाम संकीर्तन प्रारंभ कर दिया गया। जानकारी के मुताबिक सोमवार की सुबह से ही धर्म नगरी की मंदाकिनी नदी के रामघाट, राघव प्रयाग घाट, प्रमोद वन, जानकीकुंड, आरोग्यधाम, सिरसावन, स्फटिक शिला, अनुसुइया आश्रम, सूर्य कुंड के साथ ही मऊ व राजापुर के यमुना नदी के घाटों के साथ ही वाल्मीकि नदी पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता उमड़ पड़ा। लोग हर हर गंगे का उद्घोष करके पवित्र नदियों में डुबकियां लगा रहे थे। चित्रकूट में घाट किनारे के पुरोहित मां मंदाकिनी के महत्व को लोगों को बता रहे थे। इसके साथ ही निर्माेही अखाड़े के संयोजकतत्व में विश्व हिंदू परिषद ने गंगा दशहरे पर हवन पूजन व मां मंदाकिनी का अभिषेक कराया। इसके साथ नावों पर बैठकर चौबीस घंटों...

राजमाता को पूर्व जन्म का भावात्मक लगाव ले आया चित्रकूट

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चित्रकूट। श्री राम सांस्कृतिक शोध संस्थान न्यास के अन्तर्गत श्री राम वन पथ गमन पथ संग्रहालय का लोकार्पण करने आयी कर्नाटक प्रांत के किष्िकधा की राजमाता महारानी चंद्रकांता ने मीडिया से बात करते हुये चित्रकूट को भगवान राम की मुख्य कर्मस्थली करार देते हुये कहा कि भले ही वे यहां पहली बार आयीं हों पर हर नवरात्रि पर श्री राम चरित मानस के पाठ करने के कारण वे इस तपोभूमि से प्रत्यक्ष रुप से बचपन से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि वैसे तो श्री हनुमान का जन्म सुमेरु पर्वत पर हुआ था पर उनका यौवन और बचपन ऋषमूक पर्वत किष्किंधा पर ही बीता। यहीं पर भगवान राम और हनुमान का मिलन हुआ था। उसी स्थान पर संत व्यास राम को भगवान हनुमान ने स्वप्न देकर अपनी मूर्ति की स्थापना करवाई थी। पम्पा सरोवर पहले विषैला था पर वह श्री राम के आर्शीवाद के कारण माता शबरी के चरणों से ही स्वच्छ और निर्मल हो गया। उन्होंने कहा कि बचपन से ही वे भगवान राम मां सीता के प्रति अगाध प्रेम व आस्था रखती आई हैं पर चित्रकूट को देखने का पहली बार सौभाग्य मिला है। यहां की सीमा में प्रवेश करते ही ऐसा लगा कि मेरा पूर्व जन्म में यहां से भावात्मक लगाव र...

अलौकिक रहस्यों की भूमि चित्रकूट

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चित्रकूट। 'चित्रकूट एक औषधि सचवत करत सचेत' वैसे तो तमाम पुराणों के साथ ही महर्षि वाल्मीकि और संत शिरोमणि तुलसीदास जी महाराज ने जब श्री राम चरित मानस के माध्यम से अलौकिक तीर्थ चित्रकूट के महत्व को सामने लाने का काम किया तो विश्व भर के लोग यहां के पहाड़ों कंदराओं और जंगलों में छिपे रहस्यों को समझने का प्रयास करने लगे। संत इब्राहिम अली 'गोविंद बाबा' ने चित्रकूट के महत्व को अपने शब्दों में परिभाषित करते हुये कहा कि इस तीर्थ का निर्माण ही सत्य को लेकर हुआ है। इसलिये यह विश्व भर में देदीप्तमान नक्षत्र की तरह चमक रहा है। यह बात और है कि यहां पर आने वाले भक्त केवल अभी बाहरी चमक दमक देख रहे हैं पर वास्तव में जल्द ही यहां के वे रहस्य भी सामने आने वाले हैं जिनके बारे में केवल पुराने ऋषियों को ही मालूम था। उन्होंने बाबा तुलसीदास जी की लिखी चौपाई चित्रकूट एक औषधि, सचवत करत सचेत को विस्तार पूर्वक समझाते हुये कहा कि जब आडंबर का सांप लोगों को डसने के लिये खड़ा होता है तो चित्रकूट एक औषधि के समान खड़ा होकर व्यक्ति का साथ देता है और उसके अंदर के इंसान को जगाकर पुरुषार्थी के रुप में सा...