Thursday, April 4, 2013

अपने नकारा, अब 'हरिहर' सहारा

हमीरपुर, निज प्रतिनिधि : 'दाता एक राम भिखारी सारी दुनिया..' से प्रेरणा लेकर भरुआ सुमेरपुर के कैथी गांव के लोगों ने अपनी समस्याओं का पुलिंदा अब 'भोले बाबा' के मंदिर में विधिवत हवन पूजन कर 'राम' को सौंप दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब इस राम नाम उद्घोष यज्ञ की पूर्णाहुति तभी होगी, जब सूबे के मुखिया अखिलेश सिंह यादव आकर मंदिर के ओसारे पर उनके साथ बैठकर राम-राम करेंगे।

छह हजार की आबादी वाले बड़े गांव कैथी में अब तक बिजली लापता है तो सड़कें भी नदारद हैं। गांव के रहने वाले अरिमर्दन सिंह कहते हैं कि भइया आजादी के बाद से गांव से समस्याओं को खत्म कर शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, सड़क और अन्य सुविधाओं को दिए जाने की गुहार छह हजार की आबादी वाले ग्राम सभा के हर ग्रामीण में हर एक अधिकारी की चौखट पर लगाई है, पर किसी का दिल नहीं पसीजा। नेताओं से चुनाव के समय आश्वासनों की चासनी मिली तो अधिकारी भी उसी अंदाज के मिले। कभी किसी अधिकारी से गांव आकर समस्याएं देखने का आश्वासन मिला तो उसका स्थानांतरण हो गया। अब गांव की दूसरी व तीसरी पीढ़ी इस आजाद भारत में अंधेरे में पैदा हो रही है। तो क्या करें, अब तो उसी दाता का आसरा है इसलिए अब सभी गांव वालों ने मिलकर यह निर्णय लिया है कि हमें किसी से भी गिला शिकवा या शिकायत नही है। मंदिर में राम बहादुर यादव, विकास शिवहरे, अवधेश, राम विलास सिंह, जितेन्द्र सिंह चौहान, उम्मेद सिंह, वासुदेव निषाद, रामदास कुटार, खुशी राम, शिव चरन ने कहा कि हमें अब अपने भगवान से मतलब है। हमारी पूरी शिकायत अब उस पैदा करने वाले से हैं कि क्या हमारा गांव दूसरे गांवों जैसा नहीं है। जब अन्न यहां पर उपजता है और हैंडपम्प पानी देते हैं तो सड़क पर चलने का अधिकार हमारा नहीं है या फिर हमारे बच्चों को सही ढंग से पढ़ने इलाज कराने और बिजली से गांव रोशन होने से वंचित क्यों किया है।

अब नीचे वाले नहीं, ऊपर वाले भगवान से करेंगे फरियाद

हमीरपुर, निज प्रतिनिधि : अकल्पनीय पर बिलकुल सच. छह हजार की आबादी वाले भरूआ सुमेरपुर ब्लाक के गांव कैथी व उसके छह मजरों ने आजादी के बाद से अब तक घरों में बिजली के बल्ब एक बार 28 साल पहले जलते देखा है। इतना ही नहीं बच्चे भी यहां अस्पताल में कम जर्जर सड़क पर ज्यादा पैदा होते हैं। गांव के हालात ऐसे कि लगता नहीं कि यहां के निवासी आजाद देश के नागरिक हों। गांव के लिए लेखपाल, सचिव ही सबसे बड़े अधिकारी बने हैं। स्कूल में एक अध्यापक के ऊपर पांच सौ बच्चों की जिम्मेदारी है तो विद्यालय की इमारत में ही पुलिस ने चौकी खोल डाली है। छह साल पहले गांव में जाने के लिए चंद्रावल नदी पर पुल का निर्माण प्रारंभ हुआ तो ग्रामीणों को लगा कि चलो अब सड़क बन जाने से मुश्किलें आसान होंगी पर ऐसा हो न सका। विकास की किरण के इस गांव तक पहुंचने से पहले ही समय रथ में फंसकर वह दम तोड़ देती है। इसलिए अब ग्रामीणों ने अपनी राह खुद चुन ली है। उन्होंने स्थानीय स्तर के अधिकारियों से गुहार लगाने से तौबा करने के बाद कहा कि अब वे सीधे ऊपर वाले से बात करेंगे। गांव के अरिमर्दन सिंह कहते हैं कि जब कहावत है कि 'हारे को हरिनाम' तो अब हम सिस्टम से लड़कर हार चुके हैं। अब हमारे सामने भगवान का नाम लेने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं है। भगवान का नाम लेने के पीछे की मंशा स्पष्ट करते हुए वह कहते हैं कि संघर्ष पिछले दो दशक से ज्यादा समय से सुविधाओं को पाने के लिए जिलास्तरीय अधिकारियों के साथ चल रहा है। अब गांव के पुराने मंदिर में सभी स्त्री पुरुष मिलकर राम धुन गाएंगे और यह मंगल कामना करते हैं कि जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हमारे यज्ञ की पूर्णाहुति करेंगे तभी हम उठेंगे। कहा कि मुख्यमंत्री से भी उनकी कोई मांग नहीं है। वह तो मुख्यमंत्री को केवल अपना गांव दिखाना चाहते हैं।

रविवार को गांव के मंदिर में सैकड़ों लोगों ने हाथ उठाकर शपथ ली कि जब तक मुख्यमंत्री यहां पर आकर रामधुन में साथ नहीं देंगे वह लोग नहीं उठेंगे। मंदिर में राम बहादुर यादव, विकास शिवहरे, अवधेश, राम विलास सिंह, जितेन्द्र सिंह चौहान, उम्मेद सिंह, वासुदेव निषाद, रामदास कुटार, खुशी राम, शिव चरन आदि लोग मौजूद रहे।

गांव की प्रमुख समस्याएं

खंभे व तार खिंचे होने के बाद बिजली 28 साल से नहीं

अधूरा बना पुल

गांव के लिए सड़क ही नहीं

विद्यालय में 500 बच्चों पर केवल एक अध्यापक

अस्पताल में ताला बंद

पग पग चले बन गया कारवां..

हमीरपुर : कभी भी हमीरपुर जिला मुख्यालय हिन्दुस्तान के नक्शे से गायब हो सकता है। यह आशंका विधायक साध्वी निरंजन ज्योति ने दैनिक जागरण द्वारा आयोजित मिनी फोरम के दौरान महिला महाविद्यालय के ऑडीटोरियम में व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि मौरंग माफिया बेतवा की मौरंग को इतनी गहराई से जाकर खोद रहे हैं कि यहां कभी भी भूकंप आ सकता है। सुझाव देते हुए कहा कि सरकार को जिला मुख्यालय से 15 किमी. दूरी तक के स्थान पर खनन से रोक लगा देनी चाहिए। सड़कों की बदहाली पर प्रहार करते हुए कहा कि सड़कें ऐसी हैं कि बच्चे अस्पताल पहुंचने के पहले पैदा हो रहे हैं।

लोग जिम्मेदारी बखूबी निभाएं

जिलाधिकारी बी चंद्रकला ने कहा कि समाज के हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह सामाजिक जीवन में हर काम संजीदगी से करें। सामूहिक बातचीत के द्वारा विकास के रास्ते खोजे जा सकते हैं, इससे 80 प्रतिशत समस्याओं का समाधान अपने आप हो जाएगा।

पुलिस अधीक्षक रतन कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि मूलभूत आवश्यकताओं का चिन्हांकन जरूरी है। विश्लेषण करें और उसके बाद अपनी योजना बनाएं तो परिवार, गांव, समाज, देश प्रगति के रास्ते पर अग्रसर होगा।

अपर जिलाधिकारी रमेश चन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण है, गांवों में जागरूकता का अभाव है वहां समस्याएं भी हैं, पीड़ित लोग जानकारी व जागरूकता के अभाव में चक्कर लगाकर थक जाता है और हताश होकर घर बैठ जाता है पर मीडिया के लोग गांव में घुसकर सटीक सूचनाएं लाते हैं और उनके प्रकाशित होने के बाद उन तक सही सूचनाएं पहुंच पाती हैं जिससे उन समस्याओं के समाधान में प्रशासन निराकरण में सहयोगी बनता है।

महिला महाविद्यालय के प्राचार्य राज कुमार ने कहा कि एक तरफ तो अध्यापकों की कमी है तो दूसरी तरफ शिक्षकों को शिक्षण के अलावा दूसरे काम में डयूटी लगाई जा रही है। जिसके कारण शिक्षा का स्तर गिर रहा है। छात्रा स्वातिका परिहार ने भी अपने विचार रखे।

भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ब्रज किशोर गुप्त ने संकल्प ले आने वाले कल को बेहतर बनाने में जनसमस्याओं में सहयोग की बात दोहरायी। आभार प्रदर्शन व स्वागत करने का काम दैनिक जागरण के ब्यूरो प्रमुख संदीप रिछारिया ने किया। संचालन समर्थ फाउंडेशन के देवेन्द्र गांधी ने किया।

विकास की चाह में गुम हुए बेरी और कैथी

संदीप रिछारिया,हमीरपुर: समस्याओं को लेकर इस साल जिले के दो विकास खंडों के गांवों में हुए आंदोलनों ने प्रशासन को हिला कर रख दिया।

कुरारा ब्लाक में कुरारा से लेकर बेरी तक की लगभग 14 किलोमीटर सड़क का हाल पिछले दस सालों से खराब है। इस सड़क को लेकर चुनाव में भाग्य अजमाने वाले हर प्रत्याशी ने बनवाने का वादा किया, जो चुनावी जीत तक सीमित रहा। इस बार के विधानसभा चुनाव के दौरान सड़क नहीं तो वोट नहीं का नारा दे ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार की घोषणा कर दी, तो प्रशासन के हाथ पैर फूल गए। प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और आश्वासन दे किसी तरह ग्रामीणों को मनाया। अफसोस रहा कि विधायक साध्वी निरंजन ज्योति ने विधानसभा में समस्या को लेकर प्रश्न उठाया व सपा जिलाध्यक्ष ज्ञान सिंह ने सरकार से गुजारिश की तो सड़क की स्वीकृति होने के साथ रकम भी मिल गई, लेकिन अभी तक टेंडर नहीं निकाले जा सके हैं।

इधर कैथी गांव का हाल तो और बुरा था। केन और चंद्रावल नदी के दोआबा में बसा 6 हजार आबादी का गांव प्रशासनिक लापरवाही का नमूना है। ग्रामीण पिछले पांच दशकों से हर नेता के वादे सुनते और वोट देकर यह सोचते कि शायद अबकी कुछ उद्धार हो जाए, पर बात बनी नही। हार थक कर वह गांव के शिव मंदिर में राम का नाम लेने बैठ गए। अधिकारी पहुंचे, भाजपा व कांग्रेस के नेता पहुंचे। आधे गांव को बिजली मिली, भैंस बांधे जाने वाले अस्पताल को नर्स मिली पर नही मिल सकी ,चंद्रावल नदी में नंगे खड़े पुल को सड़क, हां इस आंदोलन की एक प्रमुख बात भोला दर्जी की कुर्बानी भी रही। जिसे पूरा गांव श्री राम नाम संकीर्तन आंदोलन का शहीद पूरा गांव मानता है।

क्या कहते हैं जन नेता

कैथी व बेरी की समस्या को विधानसभा में उठाने के साथ ही लगातार इन समस्याओं को सुलझाने की लड़ाई लड़ती रहूंगी।

विधायक साध्वी निरंजन ज्योति।

बेरी की सड़क के लिए तमाम लिखा पढ़ी कर सड़क निर्माण की रकम मंगवाई है। कैथी गांव अभी तक व्यस्तता के कारण नहीं जा सका। अब कैथी में प्रभारी मंत्री को लेकर जाउंगा और गांव वालों की समस्या का निदान करुंगा।

ज्ञान सिंह यादव, सपा जिलाध्यक्ष।

दोनों स्थानों की समस्याओं को सुलझाने का प्रयास लगातार जारी है। जल्द ही बेरी गांव की सड़क के टेंडर आ जाएंगे, व कैथी के मार्ग के लिए भी शासन से स्वीकृति आ जाएगी।

रमेश चंद्र श्रीवास्तव, अपर जिलाधिकारी।

Wednesday, April 3, 2013

दिन ललित बसंती आनै लगे.

संदीप रिछारिया,महोबा: अज्ञानता से हमें तार दे मां . से बढ़ती हुई बात जब देश के हृदय स्थल बुंदेलखंड में आती है तो फिर कवि का हृदय यहां की भाषा को भी सर्वोपरि कुछ इस प्रकार बना देता है 'हिंदी के माथे की बिंदी बुंदेली की धर गए.ईसुरी जग में जो जस कर गए, फागुन में जस भर गए'। ज्ञान की देवी की आराधना करने के लिए तो सभी आतुर रहते हैं, पर झांसी जिले के मऊरानीपुर कस्बे के समीप मेंढ़की गांव में जन्में पं. ईसुरी प्रसाद की आराधना अलग ही तरह की थी। ज्ञान की देवी की आराधना का मुख्य आधार प्रेम की उपासना करने को मानने वाले इस सुकवि ने बुंदेली धरा पर स्थानीय भाषा में जिन चौकड़ियों को इजाद किया वह आज आम जन मानस के लिए उपासना का माध्यम बनी हुई हैं। फागुन मास का आरंभ बसंत पंचमी से होने के कारण इस जनकवि आशुकवि की अभिव्यक्ति मां सरस्वती के प्रति कुछ इस तरह से सामने आती है 'मईया लाज राख ले मेरी, सुमिरत होय न देरी, बल बुद्धि विद्या मोहै दीजे, शरण पड़ा मैं तेरी, भूले बरन मिला दे दुर्गा, सुनो दीन की टेरी, ईसुर पड़ो चरनन में तेरे, जिन पे हाथ धरैं री '। आशुकवि के उल्लास भरे गीतों की उपासना करने वाले स्थानीय गायक छेदा लाल यादव बताते हैं कि उनकी रचित लगभग पचास हजार चौकड़ियों का संग्रह उनके पास है। यह सभी रचनाएं जीवन की हर विधा को समर्पित हैं। वैसे ईसुरी फागों (होली गीत) के सर्वमान्य कवि हैं। बुंदेलखंड के उप्र व मध्य प्रदेश के इलाके में बसंत हो या फिर होली बिना ईसुरी की फाग के त्यौहार पूरा ही नही होता। बताया कि उनका जन्म मेंढ़की, जिला झांसी में दुर्गा प्रसाद अड़जरिया के घर हुआ था। उनका विवाह सीगोंन जिला महोबा में हुआ था, पर उनकी मुख्य कर्मभूमि रही इसी जिले का गांव बधौरा। यहां पर वह जमींदार के पास कारिंदा के रूप में रहे। उन्होंने अधिकतर रचनाएं यहीं पर की थीं।

वह बताते हैं कि 'अब रिपु आई बसंत बहारन, पान फूल फल डारन, हारन हद्द पहारन पारन,धावल धाम जल ढारन'। वह नई पीढ़ी द्वारा अब अपने ईसुरी को बिसरा देने के कारण वह चिंतित हैं। कहते हैं कि जहां लाखों रूपए प्रतिवर्ष विकास के तमाम कामों के लिए सरकार खर्च कर रही है। वहीं बुंदेली फागों के इस अमिट हस्ताक्षर का नाम कोई नही लेता। कहा कि उन्हें इस बात का सुकूं हमेशा रहेगा कि उन्होंने राष्ट्रपति भवन में केवल ईसुरी की फाग गाने के कारण जाने का मौका मिला और वह नए बच्चों को इससे परिचित कराने का काम भी कर रहे हैं। लेकिन अब नई पीढ़ी को हमारे पुराने इस कवि के जानने और समझने के लिए जिला प्रशासन के साथ ही अन्य समाजसेवियों को पहल करनी चाहिए।

Monday, March 28, 2011

खुद अपने हाथों लिख रहे मेहनतकश अपनी तकदीर

क्रासर- सूखी सिंघन नदी में निकला पानी


चित्रकूट, संवाददाता: भय, भूख और भ्रष्टाचार को सहने की बेबसी से जब ग्रामाणों ने आगे निकलकर सोचा तो एक नई इबारत लिख डाली। मानव और पशुओं की सूखती काया को जीवनदान देने का काम खुद अपने ही हाथों कर डाला। बरगढ़ के पास गांव सत्यनारायण नगर के भौंटी कैमहाई के पास सूखी पड़ी सिंघन नदी को एक बार फिर जिंदा कर दिया गया। लगभग साठ मीटर दूरी पर तीन फिट गहरी व सोलह फिट दूरी की नदी को बहते देख जितनी प्रसन्नता गांव वालों को हो रही है उससे ज्यादा प्रसन्नता वहां पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक डा. तहसीलदार सिंह को हुई। वे अपने आपको रोक न पाये और खुद ही फावड़ा लेकर श्रमदान करने के लिये जुट गये। इस दौरान काम कर रहे ग्रामीणों में भी काफी उत्साह आ गया और वे भी प्रेरणा गीत गाकर उमंग के साथ काम में जुट गये। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने वहीं पर चौपाल लगाकर ग्रामीणों के साथ बातचीत की। ग्रामीणों ने उन्हें जानकारी दिया कि विकास खंड के छितैनी गांव में पिछले तीन माह से फ्रांस के अलेक्सिस व अमेरिका के जैफ फ्री मैन बरसात के पानी की एक-एकबूंद को बचाने के लिये ग्रामीणों को समझाने का काम कर रहे हैं। वे यहां पर सर्वोदय सेवा आश्रम द्वारा लाये गये हैं। पिछले दिनों जब पानी की कमी के कारण दिक्कतें बढ़ी और पलायन होने लगा तो आश्रम के अभिमन्यु सिंह ने जलपुरूष राजेन्द्र सिंह द्वारा पानी की कमी वाले राजस्थान में सूखी नदी को जिंदा करने की कथा सुनाई। ग्रामीणों में उत्साह भरा कि अगर वे चाहे तो यहां पर भी ऐसा हो सकता है। पानी की कमी के कारण बेबसी का सामना करने वाले मेहनतकशों ने कमर कसी और फावड़ा लेकर नदी में खुदाई प्रारंभ कर दी। देखते ही देखते नदी की सिल्ट हटी और जलस्रोत फूटने लगे। ग्रामीणों के साथ ही सर्वोदय सेवा आश्रम के संतोष, अखिलेश, कमलेश, रीतू, बबलू व भीमसेन आदि तो खुशी के मारे नाचने लगे। ग्रामीणों ने बताया कि पांच गांवों के लोग इस नदी से कभी पानी पीने आया करते थे अब फिर से पशुओं व सिंचाई के लिये पानी मिल सकेगा।
सर्वोदय सेवा आश्रम के मंत्री अभिमन्यु सिंह ने बताया कि अभी तो यह शुरुआत है अब जनसहयोग से बरगढ़ क्षेत्र की नेवादा, कितहाई, मेडना, मौना व मादा नदी को पुर्नजीवित करने का काम किया जायेगा। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी ने सभी नदियों में खुदाई के काम को मनरेगा से करवाने के आदेश दिये है। इससे तो सभी ग्रामीणों में बड़ी आशा का संचार हुआ है पर यहां पर तो पिछले पन्द्रह दिनों में ग्रामीणों ने लगभग साठ मीटर नदी खोद डाली है पर बीडीओ के आने के बाद भी ग्राम प्रधान ने इसे प्रस्ताव में शामिल नही किया है। बल्कि रविवार को ही ग्राम प्रधान काम कर रहे मजदूरों को लालच देकर सड़क बनाने के काम के लिये ले गये हैं।

जल्द ही जिले की हर नदी में होगा पानी

चित्रकूट, संवाददाता: बरदहा, ओहन, गेडुवा व बाल्मीकि के साथ ही जिले की अन्य सभी नदियों पर एक बार फिर सिंघन नदी की तरह ही पानी आने की प्रबल संभावना का जन्म हो चुका है। जहां बरगढ़ इलाके में नेबादा, कितहाई, मेडना, मौना आदि नदियों पर तो लोग खुद ही पहल कर अपने मेहनतकश हाथों से पानी निकालने का काम प्रारंभ करने वाले हैं वहीं जिलाधिकारी ने भी अपनी ओर से सभी नदियों और नालों को पुर्नजीवन देने के लिये मनरेगा से उन्हें मजदूरी दिये जाने के आदेश जारी कर दिये हैं।

हो सकता है कि आने वाली गर्मी में बंधोईन के आगे दम तोड़ चुकी मंदाकिनी को पुर्नजीवन मिल जाये। जिलाधिकारी दलीप कुमार गुप्ता द्वारा मंदाकिनी सहित जिले कीअन्य सभी नदियों और नालों को मनरेगा के द्वारा खुदाई व सफाई कराने के सभी खंड विकास अधिकारियों को दिये गये आदेश के बाद तो लोगों में खुशी का संचार हुआ है।
वैसे एक नहीं लगभग आधा दर्जन नदियों और दर्जनों नालों वाले इस जिले में इधर गर्मी ने दस्तक दी तो उधर गंभीर जल संकट ने अपने पैर फैलाने प्रारंभ कर दिये हैं। लेकिन पेयजल को लेकर हाहाकार मचे इसके पहले ही जिलाधिकारी ने खुद बढ़कर ऐसी पहल कर डाली है जिससे आने वाले में जल संकट को न केवल दूर किया जायेगा बल्कि पेयजल की उपलब्धता को लेकर जिले की दशा और दिशा दोनो बदल सकती है।
मामला जिले के प्रमुख नदी मंदाकिनी के साथ ही अन्य नदियों और नालों की जल धाराओं के टूटने का है। जिलाधिकारी दलीप कुमार गुप्ता ने इसका उपाय सरकारी और
गैरसरकारी दोनो स्तरों पर खोज लिया है। उन्होंने जिले के समस्त खंड विकास अधिकारियों को बैठक कर आने वाले दिनों में पाठा के साथ ही पूरे जिले में आने वाले जल संकट की भयावहता से परिचित कराते हुये कहा कि वे लोग अपने -अपने इलाकों की नदियों और नालों पर मजदूरों से खुदाई करवाना प्रारंभ करवा दें जिससे नदी की सिल्ट के साफ होने के साथ ही दबे पड़े जल स्रोत भी सामने आ सकें।
जिलाधिकारी ने जागरण से बातचीत में कहा कि नदियां जीवनदायिनी हैं। इसलिये ही इन्हें भारतीय संस्कृति में मां का दर्जा दिया गया है। अगर समय रहते इन पर ध्यान नही दिया गया तो ये गंदगी की आगोश में आकर विलुप्त हो सकती हैं। जिलाधिकारी कहते हैं कि मंदाकिनी सहित सभी नदियों और नालों पर खुदाई का काम करवाया जायेगा। सिल्ट साफ होने पर लगभग हर नदी में जलस्रोत अपने आप खुल जायेगे और इलाके से पानी की कमी दूर होगी।







चित्रकूट में दर्शन का महासंगम, विश्व शांति की दिशा में उभरा नया चिंतन

चित्रकूट: जब मंदाकिनी के तट पर विचारों की धारा बहती है, तब चित्रकूट केवल एक तीर्थ नहीं रहता—वह विश्व के बौद्धिक मंथन का केंद्र बन जाता है। त...