Monday, November 8, 2010

नानाजी की याद के साथ गूंजा रामधुन

चित्रकूट, संवाददाता: शरदोत्सव के ठीक बाद नाना जी का निवास स्थान सियाराम कुटीर एक बार फिर श्री राम जय राम जय जय राम की धुन से गूंज उठा। मौका था युगऋषि नाना जी देशमुख के आठवें मासिक श्राद्ध का। दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव डा. भरत पाठक ने पूजा पाठ के साथ ही नाना जी के आठवें मासिक श्राद्ध कार्यक्रम का प्रारंभ किया। मंगलवार की सुबह से ही सियाराम कुटीर प्रांगण में वटवृक्ष के नीचे श्री राम दरबार के साथ नाना जी को याद करने का माध्यम श्री राम जय राम जय जय राम की मधुर धुन को प्रारंभ करने से पहले वेद मंत्रों के साथ पूजा पाठ करने के बाद यह चौबीस घंटों के लिये धुन छेड़ दी गई। संस्थान परिवार के कार्यकर्ताओं के अलावा, क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, संत महंत भी संगीतमयी रामधुन में साथ देने के लिये लगातार आ रहे हैं। डा. पाठक ने बताया कि बुधवार को दोपहर बारह बजे से पूजा पाठ के बाद भंडारे का आयोजन होगा। संस्थान के सूत्रों के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिये मप्र शासन के कुछ मंत्री व संघ के बड़े ओहदों वाले लोग आ सकते हैं।

खूब याद आये नानाजी

चित्रकूट, संवाददाता: शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी रात और आसमान से बरसते अमृत के बीच रामनाथ गोयनका घाट पर बैठकर हजारों श्रोता यह तय नहीं कर पा रहे थे वे सितारों को मंच पर देख रहे हैं या फिर मंदाकिनी के जल में। युगऋर्षि नानाजी देशमुख की जयंती सियारामकुटीर के प्रागण में उसी पुराने अंदाज में हजारों लोगों को खीर खिलाकर मनायी गयी। बस एक कमी थी तो वह कि हर बार कि तरह यहां पर कुशल क्षेम पूंछने वाले प्यारे नानाजी नहीं थे।

वैसे दीन दयाल शोध संस्थान, जिला प्रशासन और संस्कृति संचालनालय मध्य प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित शरद पूर्णिमा की रात को मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा, संस्कृति एवं सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मी कांत शर्मा ने जब शरदोत्सव का शुभारंभ किया तो उनकी आंखे नम थी। उन्होंने कहा कि वैसे तो शरदोत्सव हर साल होता रहा है पर आज नानाजी के न होने पर उनकी कमी खल रही है। संस्थान के प्रधान सचिव डा. भरत पाठक हों या फिर संगठन सचिव अभय महाजन या फिर उद्यमिता विद्यापीठ की निदेशक डा. नंदिता पाठक सभी के चेहरों पर मुस्कुराहट के बीच एक अलग किस्म की वेदना दिखाई दे रही थी। ऐसा लग रहा था कि जैसे इनकी आंखों के आंसू अब नानाजी की याद में बह चलेंगे।
सांसद गणेश सिंह, विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार, नगर पंचायत अध्यक्ष नीलांशु चतुर्वेदी, अखिलेख शर्मा, डा. अनिल कुमार मिश्र, हरे श्याम, कौशल, अशोक मिश्र, राजू बाबा, सतीश मालवीय सभी ने स्वीकार किया कि आज यहां पर सबसे बड़ी कमी अगर है तो वह है अपने नानाजी जो हम सब के बीच नहीं हैं।

नाना जी का जाना सूर्यास्त के समान

चित्रकूट, संवाददाता: मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा, संस्कृति व जनसंपर्कमंत्री ने कहा कि आज नाना जी भले ही स्थूल रूप में न हो पर उनका चिंतन, प्रेरणा और विचार सदैव मानवता का मार्गदर्शन करते रहेंगे। वे राष्ट्रऋषि नाना जी देशमुख के जन्म दिन शरदपूर्णिमा के मौके पर महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के अर्मत्यसेन सभागार में पद्मविभूषण नाना जी देशमुख स्मृति व्याख्यान माला के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जो बीत चुका उसे भूलना ही बेहतर है अब आगे की ओर देखकर सबको मिलकर नाना जी के सपनों को साकार करना चाहिये। आने वाले समय में नाना जी और दीन दयाल शोध संस्थान के कार्यो से प्रेरणा लेकर राष्ट्र को परम वैभव शिखर ही ओर ले जा सकते हैं।

डा. भरत पाठक ने कहा कि सांस्कृतिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा को चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृत बरसाता है। नाना जी हमें शरद पूर्णिमा के दिन अमृत बूंदों के रूप में मिले। वे जीवन की सोलह कलाओं से विभूषित थे। उन्होंने उनके जीवन की आरंभिक कठिनाइयों का उल्लेख करते हुये कहा कि जमींदार परिवार में जन्म लेने के बाद भी उनकी आर्थिक स्थिति अत्यंत साधारण थी। स्वयं के साधनों से अर्जित धन से उन्होंने मैट्रिक तक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने जीवन के विविध क्षेत्रों में सफलता अर्जित की। वे स्वयं कला के पारखी और बेहतरीन कलाकार थे। पिलानी ग्राम में दसवीं कक्षा में पुरस्कार प्राप्त किया गया उनका चित्र आज भी धरोहर के रूप में विद्यमान है। दूसरी कला प्रकाशक, संपादक और पत्रकार के रूप में थी। उन्होंने राष्ट्रधर्म, पांचजन्य और स्वदेश के प्रकाशन में भरपूर सहयोग दिया। तीसरी कला के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया। चौथी कला मूल्य परक बेसिक शिक्षा के लिये सरस्वती शिशु मंदिरों का प्रारंभ किया इसकी आज बीस हजार शाखायें देश भर में हैं। पांचवी कला के रूप में कुशल राजनीति के रूप में जय प्रकाश नारायण की अगुवाई में समग्र क्रांति के आंदोलन में अपनी सहभागिता दिखाई। इसके साथ ही उन्होंने राजनीति के चरम शिखर को छूने के साथ ही साठ साल की आयु में स्वैछिक रूप से विरत हो जाने के बाद दीन दयाल शोध संस्थान की स्थापना कर गोंडा व चित्रकूट में विभिन्न प्रकल्पों को जीवंत रूप देकर मानव निर्माण करने का काम किया।
ग्रामोदय के कुलपति प्रो. कृष्ण बिहारी पांडेय ने कहा कि नाना जी विश्वविद्यालय के शास्वत प्रेरणास्रोत हैं। नाना जी के आदर्शो पर चलकर ही विश्वविद्यालय परिवार समाज में अपने योगदान को प्रस्तुत करना चाहता है। कहा कि नाना जी का जाना सूर्यास्त के जैसा है। क्षेत्रीय विधायक सुरेन्द्र सिंह गहरवार, तुलसी शोध संस्थान के निदेशक अवधेश पांडेय, अनुसुइया आश्रम के प्रमुख चोला बाबा, कुलसचिव डा. बीएल बुनकर, डा. शिवराज ंिसह सेंगर, केपी मिश्र, डा. आरसी सिंह, डा. कमलेश थापक मौजूद रहे। संचालन डा. वीरेन्द्र कुमार व्यास ने किया।

धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य लाभ

- शरद पूर्णिमा को जुटते हैं लाखों दमा और श्वांस के रोगी
चित्रकूट, संवाददाता: पारस पीपल की जड़ी के सहारे शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी रात में दमा और श्वांस की बीमारी से ग्रसित होने वाले लोगों का मेला आज की रात चित्रकूट के कामदगिरि परिक्रमा के प्रमुख द्वार के साथ ही अन्य स्थानों पर लगेगा। पिछले दस सालों से लगभग एक दर्जन से ज्यादा लोग दमा और श्वांस की बीमारी से निजात पाने का रास्ता शरद पूर्णिमा पर चित्रकूट में आकर देखते हैं। लगभग हर जगह नि:शुल्क रूप से बांटी जाने वाली आयुर्वेदिक दवा का वितरण रात बारह बजे के बाद होता है। हर जगह पर स्वयंसेवक अपने हाथों में दवा का प्रसाद लेकर निकलते हैं और रोगी का बिना चेहरा देखे खुले में बनाई गई खीर में दवा डालते चले जाते हैं। मान्यता है कि अगर यह दवा साधारण तौर पर ही चख ली जाये तो आगे दमा और श्वांस की बीमारी होने की संभावना काफी कम हो जाती है।



गौरतलब है कि पिछले सैकड़ों सालों से श्री कामदगिरि के राम मोहल्ला में बाबा उधौ प्रसाद के पारिवारिक जन शरद पूर्णिमा की रात को यह दवा रोगियों को निशुल्क रूप से देते हैं। राम की नगरी में जिझौतिया ब्राहमण परिवार द्वारा स्थापित गोपाल जी मंदिर का यह प्रसाद अभी तक लाखों लोगों को दवा का प्रभाव दिखा चुका है।



दवा बांटने का काम करने वाले नंदू भइया कहते हैं कि यह तो उनके पुरखों द्वारा बताई गई दवा है। कुछ लोग इसे पारस पीपल का नाम देते हैं और कुछ लोग अन्य चीजें बताते हैं। लेकिन वास्तव में यह स्वामी कामतानाथ का प्रसाद है। दवा शरद पूर्णिमा की रात निशुल्क रूप से वितरित की जाती है।



प्रमुख द्वार के बाहर प्रसाद की दुकान करने वाले चंद्र भान गुप्ता, बड़ा भइया कहते हैं कि इस प्रसाद को पाने के लिये लोग शाम से ही यहां पर आना प्रारंभ हो जाते हैं। सामने के मैदान के साथ ही पूरे परिक्रमा पथ पर लोग खुले आसमान के नीचे अमृत की बूदों को अपनी पत्तल में समेटने के लिये रात भर इंतजार करते हैं। सुबह चार बजे प्रसाद को चखने के बाद स्वामी कामतानाथ की परिक्रमा करने के बाद रोग से मुक्त होने की कामना के साथ वापस घर चले जाते हैं।

आज से रामनाथ गोयनका घाट पर होगी विशेष प्रस्तुतियां

- विनोद राठौर, सुधा चंद्रन का नृत्य होगा आकर्षण का केंद्र

चित्रकूट, संवाददाता: पहली बार धर्मनगरी के लोग युगऋषि नाना जी देशमुख का जन्म उनके बिना सियाराम कुटीर में मनायेंगे। धवल चांदनी रात में हर बार की तरह चावल की खीर का प्रसाद होगा पर अपने नाना नही होगें।
शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी रात में धर्मनगरी के सियाराम कुटीर के राम नाथ गोयनका घाट की सीढि़यों व नावों के द्वारा नदी में बनाये गये रज्जू मार्ग व घाट के दूसरी तरफ मंच पर अपनी कला बिखेरते देशी कलाकारों को देखने का आनंद एक बार फिर मिलेगा। तीन दिनों तक चलने वाले इस विशेष आयोजन के लिये तीन अलग-अलग विशेष हस्तियों को कार्यक्रम का शुभारंभ करने को आमंत्रित किया गया है।
जिला प्रशासन सतना, दीनदयाल शोध संस्थान व संस्कृति संचालनालय मध्य प्रदेश द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार 22 अक्टूबर को शाम साढे सात बजे मध्य प्रदेश के संस्कृति, जनसंपर्क, उच्च शिक्षा, तकनीकि शिक्षा एवं प्रशिक्षण धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग शुभारंभ करेंगे। शुक्रवार की शाम के कार्यक्रमों की शुरुआत सुप्रसिद्ध भजन गायक गोबिंद भार्गव करेगे। इसके साथ ही मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध लोक नृत्य बैगा, अहिराई व मटकी के साथ ही गोवा के घोड़ा मोड़नी, जम्मू कश्मीर के सैफ व डोगरी व आसाम के बिहू, सत्रिया व बोड़ो का प्रर्दशन भी होगा। इस दिन कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मध्य क्षेत्र संचालक श्री कृष्ण माहेश्वरी करेंगे। जबकि विशिष्ठ अतिथि के रूप मे सांसद सतना गणेश सिंह व विधायक चित्रकूट सुरेन्द्र सिंह बघेल होगे।
23 अक्टूबर को सुप्रसिद्ध फिल्मी पाश्‌र्र्व गायक विनोद राठौर गायन प्रस्तुत करेंगे जबकि इस दिन के कार्यक्रमों का शुभारंभ करने के लिये मध्य प्रदेश के राज्य मंत्री किसान कल्याण एवं कृषि विकास बृजेन्द्र प्रताप सिंह आयेंगे। इस दिन के कार्यक्रम की अध्यक्षता दीन दयाल शोध संस्थान के उपाध्यक्ष शंकर प्रसाद ताम्रकार करेंगे। इसी रात को शास्त्रीय समूह नृत्य गंगा अवतरण की प्रस्तुति देवलीना पाल लखनऊ के साथ ही कोलकाता की डोना गांगुली ओडसी नृत्य प्रस्तुत करेंगी।
शरदोत्सव की तीसरी रात का आकर्षण दुर्गा समूह नृत्य की प्रस्तुति मुम्बई से आ रही सुप्रसिद्ध नृत्यांगना सुधा चंद्रन की होगी। इस रात के कार्यक्रम की शुरूआत राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार ऊर्जा, खनिज साधन, राजेन्द्र शुक्ला होगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता दीन दयाल शोध संस्थान के अध्यक्ष वीरेन जीत सिंह करेंगे। रात में मांगणियार गायन भंगूर खां और साथी प्रस्तुत करेंगे।

Sunday, September 12, 2010

सूर्य का उपहार

चित्रकूट के पास एक जगह है सूरज कुंड, जहां लोग साधना करने जाते हैं।
एक समय की बात है। महर्षि भगुनंदनजमदग्निधनुष-बाण से खेल रहे थे। वे किसी खाली स्थान पर बार-बार बाण चला रहे थे। उनकी पत्नी रेणुका बार-बार बाण लाकर दे रही थीं, लेकिन जेठ माह के तपते सूर्य ने उन्हें परेशान कर दिया। इस वजह से उन्हें बाण लाने में देरी भी हो जाती। महर्षि ने उनसे इसकी वजह पूछी। उन्होंने जवाब दिया कि सूर्य की तेज रोशनी न केवल हमारे सिर को तपा रही है, बल्कि पैर भी जला रही है। इतना सुनते ही महर्षि क्रोधित हो गए और कहा-देवी जिस सूर्य ने तुम्हें कष्ट पहुंचाया, उसे मैं अपने अग्निअस्त्र से गिरा दूंगा। जैसे ही उन्होंने धनुष पर बाण चढाया, भयभीत होकर भगवान सूर्य ने ब्राह्मण का वेश धारण कर लिया और उनके सामने प्रकट हो गए। उन्होंने उनसे विनती की कि मुझे अपनी गलती का अहसास हो गया है।
साथ ही, उन्होंने एक जोडी पादुका और एक छत्र महर्षि को उपहार स्वरूप प्रदान कर दिए। उन्होंने कहा कि यह छत्र सिर पर पडने वाली किरणों से आपका बचाव करेगा और पादुकाएं तपती जमीन पर पैर रखने में सहायता करेंगे। मान्यता है कि यह घटना चित्रकूट से दस किलोमीटर की दूरी पर सूरजकुंड में हुई थी। महाभारत में भी इस घटना का उल्लेख मिलता है। भक्त मानते हैं कि यह स्थान प्रकृति का अनमोल वरदान है। इसलिए यह कई ऋषि-मुनियों की तपस्थलीभी है। आज भी लोग साधना और ध्यान के लिए सूरजकुंड जाते हैं।
मान्यता है कि वहां जाने के बाद न केवल हमारे सभी बुरे संस्कार समाप्त हो जाते हैं, बल्कि हमारा अंतस भी पवित्र हो जाता है। संभवत:यही संस्कार परमात्मा के नजदीक जाने के लिए आवश्यक कारक बनते हैं।
-[संदीप रिछारिया]  धर्ममार्ग जागरण से साभार

 

Thursday, July 8, 2010

हितकारी चिंतन

अपने चारो ओर मंगल का फैलाव करो ताकि तुम्‍हें मंगलित करने के लिये पूरा विश्‍व तैयार हो सके।

चित्रकूट में दर्शन का महासंगम, विश्व शांति की दिशा में उभरा नया चिंतन

चित्रकूट: जब मंदाकिनी के तट पर विचारों की धारा बहती है, तब चित्रकूट केवल एक तीर्थ नहीं रहता—वह विश्व के बौद्धिक मंथन का केंद्र बन जाता है। त...