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https://youtu.be/IJR6upiPZsA

क्‍याेें हमारे देश में रहकर कुछ विदेशी फैला रहे हैं नकारात्‍मकताा, आईये जानिए मेरे साथ

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तत्यः सत्य और असत्य  संदीप रिछारिया  सोचिये, भारत में मानव जनित नकारात्मकता का आगमन कब हुआ कैसे हुआ और क्यों हुआ। आप सोच रहे होंगे कि आखिर यह कैसा सवाल है, नया शब्द मानव जनित नकारात्मकता। चलिए स्पष्ट किए देते हैं यह मानव से मानव को दूर करने, किसी व्यक्ति को मानसिक रूप से अपमानित करने का प्रतीक है। नही समझ में आया, बताते है। वास्तव में यह उस मानसिकता का प्रतीक है जो  अमीर और गरीब का भेद बताकर मानव को छोटा या बड़ा बताती है। इन मानसिकता के अनुसार हम समर्थ हैं इसलिए कि हमारे पास पैसा है और पैसा से हम ताकत यानि नीति अनीति के लिए श्रम ( अपराध) व वैभव  ( विलासिता) खरीद सकते हैं। नकारात्मकता का विस्तार है धार्मिक  मानव जनित नकारात्मकता वास्तव में उस सोच का परिणाम है जो पूर्णतया धार्मिक है। कोलंबस ने जब अमेरिका की खोज की तो उसे नही मालूम था कि वहां का धर्म क्या है। दो हजार साल पहले ईसा मसीह का प्रादुर्भाव हुआ, उसके पहले पूरा यूरोप यहूदी था। एशिया हिंदू था। 1400 साल पूर्व मुहम्मद साहब के जन्म के पहले मुसलमान धर्म का अता पता नही था। अब सवाल खड़ा होता है कि मैं आपको य...