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राष्ट्रीय रामायण मेला के शुभारंभ में गूंजी मंत्रों की ध्वनियां

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धर्मो रक्षति रक्षतः,,,,,,,, - गोवर्धन पीठाधीश्वर जगदगुरू अधोक्षजानन्द देवतीर्थ पुरी महाराज ने किया शुभारंभ - हनुमान गढी के महंत राजूदास ने कहा, श्री रामचरितममानस को फाडने की बात करने वाले को जीने का अधिकार नहीं - चित्रकूट के सभी अखाड़ों ने निकाली विशाल शोभायात्रा - जय बजरंग सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन उपाध्याय व राष्ट्रीय प्रभारी अर्चना उपाध्याय रहे विशिष्ट अतिथि चित्रकूट। धर्मो रक्षति रक्षतः, जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। जल्द ही अखंड भारत का सपना पूरा होने वाला है, भारत की संसद ने इसको करके दिखा दिया है। यह सदी सनातन की है। क्योंकि कुशल नेतृत्व के कारण सनातन को वैश्विक मान्यता मिलती दिखाई दे रही है। यह बातें गोर्वधन पीठ के जगद्गुरू अधोक्षानंद देवतीर्थ पुरी जी महराज ने राष्ट्रीय रामायण मेला के 51 वें सस्करण का शुभारंभ करते हुये कहीं। उन्होंने कहा कि वह पिछले तीन साल से अखंड भारत के वृत को लेकर अखंड भारत के सभी धर्मस्थलों में जाकर धर्म का प्रचार कर रहे हैं। बांग्लादेश, म्यामार, सहित एक दर्जन देशों की यात्रा की जा चुकी है, जबकि जल्द ही पाकिस्तान जाकर माता हिंगलाज...

त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय थाई महोत्सव हुआ समापन

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बुद्धम शरणम गच्छामि पाठ से गुंजायमान हुआ कुशीनगर  कुशीनगर। थाई बुद्धिस्ट मोनेस्ट्री द्वारा माघी पूर्णिमा के पावन अवसर आयोजित 15 वें तीन दिवसीय महोत्सव का समापन विश्व कल्याण की कामना के साथ हुआ। मुख्य महापरिनिर्वाण मन्दिर में थाई मोनेस्ट्री में  मुख्य भन्ते फ्रॉ खुरोननार्थ चेत्यापिराक, भन्ते पोंगरिथ सृस्मिथ, थोंग पे, भदंत ज्ञानेश्वर सहित भिक्षुओं ने बुद्ध की लेटी प्रतिमा के समक्ष पूजन अर्चन कर चीवर चढ़ाया और विश्व शांति की कामना की। बुद्ध के निर्वाण व अंत्येष्टि स्थल पर सूत्र पाठ के साथ पूजन अर्चन कर भारत - थाई सम्बन्धों की मजबूती की प्रार्थना की गई। इससे पूर्व प्रथम दिन बुद्ध का आह्वान पूजन हुआ। दूसरे दिन थाई मन्दिर में थाई भिक्षु सोम देत द्वितीय ने बुद्ध धातु अवषेश का पूजन किया।  *स्तूप पूजन के साथ संपन्न हुई थाई बुद्ध धातु शोभायात्रा* थाई बुद्धिस्ट मोनास्ट्री कुशीनगर के तत्वावधान में तीन दिनों से चल रही पवित्र बुद्ध धातु शोभायात्रा शनिवार को रामाभार स्तूप के विशेष पूजन-वंदन व स्तूप पर शंख ध्वनि के बीच रॉयल पैलेस बैंकॉक से आए पवित्र जल चढ़ाने के साथ समाप्त हो गई। इसकी अध्य...

रामनगरी के राजा से मिलने आए राम के दूत

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- यूनाइडेड नेशनं के वर्ड पीस एबेंसडर डा0 परविंदर सिंह की अगुवाई में आया थाईदल - थाईलैंड की सरकार ने सांस्कृतिक केंद्र के लिए राजा से मांगी जमीन संदीप रिछारिया अयोध्या। श्रीहरी विष्णु के वाहन गरूण के पुजारी और श्रीराम के नाम के राज करने वाले थाईलैंड ने एक बार फिर अपने पुराने रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया है। यूनाइडेड नेशंश से वर्ड पीस अंबेस्डर डा0 परविंदर सिंह की अगुवाई में आये थाई भिक्षुओं ने अयोध्या के राज परिवार के सदस्य एवं श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य विमलेंद्र मोहन प्रताप सिंह ने मुलाकात कर सांस्कृतिक केंद्र खोलने के लिए जमीन की मांग का प्रस्ताव दिया। श्री सिंह ने उनके प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार कर कहा कि जल्द ही इसके लिए अगली कार्यवाही की जाएगी। शुक्रवार की दोपहर गया से सारनाथ होते हुए थाई प्रतिनिधियों का दल अयोध्या पहुंचा। यहां पर सर्वप्रथम उन्होंने श्री राम लला के दर्शन किये। इस दौरान हिस हाईनेस डा0 परविंदर सिंह ने बताया कि भगवान राम एक ऐसे आदर्श पुरूष थे जिनके आर्दशो को थाई लैंड सदियों पहले आत्मसात कर चुका है। थाईलैंड में श्री राम के नाम पर ह...

चित्रकूट अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को लेकर उत्साह चरम पर,,बहने बाट रही पीले चावल

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                    बहने घर घर जाकर बांट रही पीले चावल          त्रिदेवों की जन्मस्थली चित्रकूट को अंतरराष्ट्रीय फलक पर  लाने के लिए खास लोगों के साथ आमजन भी अपनी कमर कर चुके हैं। आयोजन समिति से जुड़े हुए लोग जहां घर-घर जाकर लोगों को आमंत्रण पत्र बाटकर  कार्यक्रम की विशेषताएं बता रहे हैं ।वही, कार्यक्रम में सहभाग कर रही महिलाएं भी उत्साहित होकर घर-घर आमंत्रण पत्रक बांटने कम कर रही है।         विशेष महानुभाव हो रहे आनंदित शनिवार की दोपहर शनिवार की दोपहर डी आर आई के संगठन सचिव महाजन जी ने आकर केंद्रीय कार्यालय में कार्यक्रम के संबंध में पूरी जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि हमारे संस्थान का पूरा सहयोग और सहभाग इस कार्यक्रम में रहेगा। इस दौरान मुख्य संयोजक प्रोफेसर गोविंद नगर त्रिपाठी ने बताया कि अभी तक लगभग डेढ़ सौ मेहमानों के आने की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है 20 नवंबर से मेहमानों का आना शुरू हो जाएगा। 20 नवंबर को लगभग 30 मेहमान आएंगे, जिसमें  फिल्म उद्योग से जुड़े हुए लोग और ...

चित्रकूट महिमा अमित,,,, चित्रकूट की श्री के प्रथम घोषक महर्षि वाल्मीकि

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            एक तात्विक विवेचन,,,,                                                         ‘‘अस्य चित्रकूटस्य्‘‘                                                        {द्वितीय सोपान}                 उल्टा नाम जपति जग जाना बाल्मीकि भए ब्रहम समाना,, महर्षि वाल्मीकि एक ऐसे देदीप्तमान नक्षत्र के रूप में रामकथा में समाए हैं जिन्होंने रामकथा राम काल में लिखी, उन्होंने श्रीराम के चरित्र को अपनी आंखों से देखा और उसका भाषानुवाद रामायणम् के माध्यम से किया। श्रीराम का चरित्र चित्रण हो या फि चित्रकूट की महिमा का यशोगान वाल्मीकि जी ने पहली बार उसे विश्व के सामने लाने का प्रयास किया। श्रीराम के चित्रकूट आगमन के पूर्व के चित्रकूट को प्रकट करने का क...

एक समग्र दृष्टिः क्या है चित्रकूट का अर्थ

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                                         अस्य चित्रकूटस्य्                              चित्रकूट का नाम उच्चारण करते ही मस्तिष्क में सर्वप्रथम आता है कि आखिर इस भूमि का नाम चित्रकूट क्यों है, इसका वास्तविक अर्थ क्या है, क्या यह केवल प्रभु श्री राम की 11 साल 6 महीने 18 दिनों की वह लीला भूमि है, जहां पर आकर प्रभु श्रीराम ने समाज के सबसे निम्न तबके से माने जाने वाले कोल किरातों से मित्रता की और देवराज इंद्र से पूजित ऋषियों के आश्रमों में जाकर उनके दर्शन किए। जानते हैं कि वास्तव में चित्रकूट शब्द के क्या अर्थ हैं और इसकी सीमा कहां तक है।   वर्तमान चित्रकूट एक ओर किसी स्थान विशेष का नाम न होकर श्रीराम की वनवासकालीन दो प्रान्तों में विभक्त वन लीला भूमि का नाम माना जाता है। इसका केंद्र बिंदु भगवान श्रीराम के निवास करने वाले स्थान श्रीकामदगिरि पर्वत को मानते हुए, इसके चारो ओर चैरासी कोस के परिक्षेत्र को चित्...

हमारे महान ऋषि! त्रिकालदशी महर्षि देवल

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                                                     घर वापसी के नियम बनाने वाले महर्षि देवल                                                             एक ऐसा ऋषि जिसे यह पता था कि आने वाला कलियुग बहुत भयंकर होगा। ईसाई व मुस्लिम आक्रमणकारी तलवार के जोर पर या फिर लालच देकर सनातन धर्म के लोगों का धर्म परिवर्तन करवाएंगे। इसी दौरान सनातन में भी कुछ तेजस्वी निकलेंगे जो भटके हुए लोगों को फिर से घर वापसी कराकर उन्हें सनातन धर्मी बनाएंगे। सतयुग में ही महर्षि देवल ने देवल स्मृति नामक ग्रंथ लिख सनातन लोगों की घर वापसी के लिए नियम बनाकर यह बता दिया था कि चारों वर्णों के लोग कैसे तप करके अपने धर्म में प्रत्यावर्तित हो सकते हैं।             मनुस्मृति और याज्ञवल्क्य स्मृति में धर्...