yahi hai chitrakoot

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चित्रकूट की एक सुहानी शाम

चित्रकूट की एक सुहानी शाम

चित्रकूट की एक सुहानी शाम

चित्रकूट की एक सुहानी शाम

हे मंगलमय दीपमालिके आपका सुस्‍वागतम

हे मंगलमय दीपमालिके आपका सुस्‍वागतम

चित्रकूट की एक शाम

चित्रकूट की एक शाम

Thursday, April 4, 2013

यहां बेटियों के नसीब में केवल चूल्हे का धुआ


आजादी के 6 दशक बीत गए, लेकिन जिले का एक गांव ऐसा भी है, जहां पर छह हजार की आबादी होने के बाद भी शिक्षा विभाग ने इंटर कॉलेज की बात छोड़िए, हाई सकूल भी खोलने की सोची नही है। लिहाजा बेटियां कक्षा आठ के बाद घर बैठने को मजबूर हैं। इन्हीं कारणों के चलते यहां पर बेटियां उच्च प्राथमिक शिक्षा से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं, जिससे कन्या विद्या धन व लैपटॉप योजना जैसी सुविधाओं से वंचित हो रही है।

सुमेरपुर विकासखंड का कैथी गांव जिसकी आबादी 6 हजार से ऊपर है। लेकिन यहां पर मात्र एक उच्च प्राथमिक स्कूल शिक्षा विभाग के बड़े-बड़े दावों की पोल खोल रहा है। सैकड़ों की संख्या में छात्राएं प्राथमिक शिक्षा के बाद चूल्हे चौके तक ही सिमट कर रह जाती हैं। उनकी आगे पढ़ने की ललक दब की दबी रह जाती है। क्योंकि बीहड़ क्षेत्र होने के कारण अभिभावक उन्हें बाहर शिक्षा के लिए भेजने से कतराते हैं। ग्रामीणों ने कई बार अधिकारियों व नेताओं ने गुहार लगाई, मगर उन्हें हमेशा निराशा ही हाथ लगी।

आठवीं के बाद न पढ़ पायी

गांव की लड़कियों में पढ़ाई की ललक तो बढ़-चढ़कर है, लेकिन यहां आस-पास भी हाईस्कूल न होने के चलते आठवीं कक्षा के बाद अनेक लड़कियों को आगे पढ़ने की अपनी इच्छा दबानी पड़ी। पूजा ने बताया कि कक्षा आठ के बाद उसने आगे की शिक्षा नहीं ली, क्योंकि गांव से स्कूल दूर था। वहीं मां सावित्री का कहना था कि रास्ते में लड़की के साथ कोई घटना न हो जाए। कल्पना ने बताया कि अकेले घर वाले 15 किलो मीटर दूर जाने नहीं देते है। इस कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी।

ममता वर्मा व अनीता शर्मा ने कहा कि 2008 में कक्षा आठ पास की थी। इसके बाद छह माह सुमेरपुर स्थित सरकारी स्कूल भी गई लेकिन बाकी लड़कियों के ना जाने के वजह से अकेले होने के चलते उसे भी पढ़ाई छोड़नी पड़ी।

सुनीता का कहना था कि गांव में स्कूल नहीं है। रास्ता सुनसान होने के कारण अकेले जाने में डर लगता है। उसका पढ़ाने का बहुत मन था, लेकिन उसे अपनी यह तमन्ना मन में कचोट के रह गई। शशि व राजेश्वरी ने बताया कि विकास न होने का खामियाजा हमें अपनी पढ़ाई को छोड़कर चुकाना पड़ा है। अगर सरकार यहां पर पांच के आगे विद्यालय का निमार्ण कर दे तो हमें भी पढ़ाने का मौका मिल जायेगा। शिल्पी तिवारी ने बताया कि 2009 में आठवीं पास करने के बाद उन्हें पढ़ाने के लिए नहीं जाने दिया गया।

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''अगले शिक्षा सत्र में कैथी गांव को प्राथमिकता पर लेंगे और वहां हाईस्कूल खुलवाने का प्रयास करेंगे।''

- योगराज सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक, हमीरपुर

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