yahi hai chitrakoot

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चित्रकूट की एक सुहानी शाम

चित्रकूट की एक सुहानी शाम

चित्रकूट की एक सुहानी शाम

चित्रकूट की एक सुहानी शाम

हे मंगलमय दीपमालिके आपका सुस्‍वागतम

हे मंगलमय दीपमालिके आपका सुस्‍वागतम

चित्रकूट की एक शाम

चित्रकूट की एक शाम

Wednesday, April 3, 2013

राम के आसरे राम के सहारे

हाकिम नकारा, हरि हर सहारा..

- शिव मंदिर में 21वें दिन भी जारी रही राम धुन

- मउहर से कैथी तक गूंज रहा है राम का नाम

- आसपास के ग्रामीण भी ले रहे उत्साह से भाग

हमीरपुर, निज प्रतिनिधि : मंगल भवन अमंगलहारी. जय सियाराम. श्री राम जय राम जय जय राम और जय श्री राम. यह केवल भगवान का नाम नहीं बल्कि उस इबारत का नाम है जो अब पूरे बुंदेलखंड में रामधुन के कारण मशहूर हो चुके कैथी गांव के हर घर पर लिखी दिखाई देती है। राम के नाम का प्रभाव अब कैथी के निवासियों को केवल इक्कीस दिनों में ही साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। न तो गांव में किसी का किसी से विवाद हो रहा है और न ही कोई ऊँची आवाज में बात करता दिखाई देता है।

गांव के बुजुर्ग कहते हैं कि सकारात्मक तरीके से प्रारंभ किए गए प्रभु के नाम जप आंदोलन के प्रभाव से गांव में लोगों के अंदर की वैमस्यता समाप्त होती दिखाई दे रही है। नशेबाजी भी लगभग गायब हो चुकी है। बच्चों के अंदर संस्कारों का उदय हो चुका है।

वैसे इस समय बोवाई का समय चल रहा है और दिन के समय गांव के तमाम स्त्री व पुरूष खेतों पर होते हैं। लेकिन उनके भी सुर बदल चुके हैं पहले जहां उनके मुंह से फिल्मी गीतों के सुर निकलते थे, वहीं अब वह रघुपति राघव राजा राम गाते दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही आपस के अभिवादन का स्वर भी राम राम ही सुने जा रहे हैं। राम के नाम का प्रभाव कुछ ऐसा है कि बच्चे भी स्कूल में नमस्ते व उपस्थित की जगह राम राम करते दिखाई देते हैं।

उधर जहां गांव के शिव मंदिर पर राम नाम संकीर्तन सोमवार को 21वें दिन भी जारी रहा। लगातार यहां बांदा जिले के कुछ गांवों व इस जनपद के तमाम गांवों के लोग आकर राम राम महायज्ञ में भाग लेकर अपने जीवन को कृतार्थ करने का काम कर रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री के आगमन की आहट पर हवन वेदिका व कुटिया के निर्माण का काम भी अंतिम चरण में हैं। मैदान पर बल्लियां गाड़कर उसमें कांसे की कुटिया बनाए जाने की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

गांव के लोग कहते हैं कि अब वह लोग कैथी से लेकर मउहर तक राम के नाम का विस्तार करेंगे और मउहर से भरूआ तक लोगों को उनकी दीवालों में राम राम लिखने के लिए प्रेरित भी करने का काम करेंगे।

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