Showing posts with label वापस. Show all posts
Showing posts with label वापस. Show all posts

Monday, November 8, 2010

धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य लाभ

- शरद पूर्णिमा को जुटते हैं लाखों दमा और श्वांस के रोगी
चित्रकूट, संवाददाता: पारस पीपल की जड़ी के सहारे शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी रात में दमा और श्वांस की बीमारी से ग्रसित होने वाले लोगों का मेला आज की रात चित्रकूट के कामदगिरि परिक्रमा के प्रमुख द्वार के साथ ही अन्य स्थानों पर लगेगा। पिछले दस सालों से लगभग एक दर्जन से ज्यादा लोग दमा और श्वांस की बीमारी से निजात पाने का रास्ता शरद पूर्णिमा पर चित्रकूट में आकर देखते हैं। लगभग हर जगह नि:शुल्क रूप से बांटी जाने वाली आयुर्वेदिक दवा का वितरण रात बारह बजे के बाद होता है। हर जगह पर स्वयंसेवक अपने हाथों में दवा का प्रसाद लेकर निकलते हैं और रोगी का बिना चेहरा देखे खुले में बनाई गई खीर में दवा डालते चले जाते हैं। मान्यता है कि अगर यह दवा साधारण तौर पर ही चख ली जाये तो आगे दमा और श्वांस की बीमारी होने की संभावना काफी कम हो जाती है।



गौरतलब है कि पिछले सैकड़ों सालों से श्री कामदगिरि के राम मोहल्ला में बाबा उधौ प्रसाद के पारिवारिक जन शरद पूर्णिमा की रात को यह दवा रोगियों को निशुल्क रूप से देते हैं। राम की नगरी में जिझौतिया ब्राहमण परिवार द्वारा स्थापित गोपाल जी मंदिर का यह प्रसाद अभी तक लाखों लोगों को दवा का प्रभाव दिखा चुका है।



दवा बांटने का काम करने वाले नंदू भइया कहते हैं कि यह तो उनके पुरखों द्वारा बताई गई दवा है। कुछ लोग इसे पारस पीपल का नाम देते हैं और कुछ लोग अन्य चीजें बताते हैं। लेकिन वास्तव में यह स्वामी कामतानाथ का प्रसाद है। दवा शरद पूर्णिमा की रात निशुल्क रूप से वितरित की जाती है।



प्रमुख द्वार के बाहर प्रसाद की दुकान करने वाले चंद्र भान गुप्ता, बड़ा भइया कहते हैं कि इस प्रसाद को पाने के लिये लोग शाम से ही यहां पर आना प्रारंभ हो जाते हैं। सामने के मैदान के साथ ही पूरे परिक्रमा पथ पर लोग खुले आसमान के नीचे अमृत की बूदों को अपनी पत्तल में समेटने के लिये रात भर इंतजार करते हैं। सुबह चार बजे प्रसाद को चखने के बाद स्वामी कामतानाथ की परिक्रमा करने के बाद रोग से मुक्त होने की कामना के साथ वापस घर चले जाते हैं।